मुख्य सामग्री पर जाएँ
25 अगस्त 2026

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने RSS से मांगी फंडिंग और मान्यता की डिटेल: RSS खुद को कानून से ऊपर क्यों रखता है?

बेंगलुरु, 15 जून 2026: कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS के प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, रजिस्ट्रेशन, फंडिंग, खर्च, टैक्स अनुपालन और स…

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने RSS से मांगी फंडिंग और मान्यता की डिटेल: RSS खुद को कानून से ऊपर क्यों रखता है?
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने RSS से मांगी फंडिंग और मान्यता की डिटेल: RSS खुद को कानून से ऊपर क्यों रखता है? | फ़ोटो: TVL News

बेंगलुरु, 15 जून 2026: कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS के प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, रजिस्ट्रेशन, फंडिंग, खर्च, टैक्स अनुपालन और सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमतियों से जुड़ी जानकारी मांगी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पत्र में खरगे ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर काम करने वाले संगठन को अपनी जवाबदेही और पारदर्शिता स्पष्ट करनी चाहिए।

इस मुद्दे पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस मांग को राजनीतिक बताया और कहा कि RSS कोई गुप्त संगठन नहीं है, उसकी गतिविधियां खुले मैदानों और समाज के बीच होती हैं।

पत्र में RSS की कानूनी स्थिति और रजिस्ट्रेशन पर सवाल

प्रियांक खरगे ने अपने पत्र में RSS से पूछा है कि संगठन किस कानूनी ढांचे के तहत काम करता है और अगर उसका औपचारिक पंजीकरण नहीं है तो इसके पीछे कानूनी आधार क्या है। The News Minute की रिपोर्ट के मुताबिक, पत्र 13 जून 2026 की तारीख वाला है और इसमें RSS से कानूनी स्थिति, संगठनात्मक ढांचा, पदाधिकारियों, फंडिंग और वैधानिक अनुपालन की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा गया है।

खरगे ने तर्क दिया कि जब ट्रस्ट, NGO, कंपनियां, धार्मिक संस्थाएं और अन्य सार्वजनिक संगठन अपने कामकाज और वित्तीय जानकारी को लेकर जवाबदेह होते हैं, तो RSS जैसे प्रभावशाली संगठन को भी उसी मानक का पालन करना चाहिए।

फंडिंग, खर्च और टैक्स अनुपालन पर क्या पूछा गया?

पत्र में RSS से दान, योगदान, आय के स्रोत, खर्च, संपत्ति और लागू टैक्स के भुगतान से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। Times of India की रिपोर्ट के अनुसार, खरगे ने संगठन से यह भी पूछा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों, रूट मार्च, जनसभाओं और अन्य संगठित गतिविधियों के लिए किस तरह की अनुमति या प्राधिकरण लिया जाता है।

खरगे का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी संगठन—चाहे वह कितना भी पुराना, बड़ा या प्रभावशाली हो—सार्वजनिक जांच से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने इसे RSS के शताब्दी वर्ष में “संवैधानिक आत्ममंथन” का अवसर बताया।

कर्नाटक में RSS की गतिविधियों के आंकड़े बने बहस का आधार

प्रियांक खरगे ने अपने पत्र में RSS की 2025–26 की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा यानी ABPS रिपोर्ट का हवाला दिया है। RSS की आधिकारिक वेबसाइट पर ABPS Annual Report 2025-26 को 13 मार्च 2026 को प्रकाशित दिखाया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, खरगे ने कर्नाटक से जुड़े जिन आंकड़ों का उल्लेख किया, उनमें 4,127 दैनिक शाखाएं, 1,389 साप्ताहिक मिलन, 60 मासिक मंडलियां, 2,194 समाजोत्सव, करीब 19.61 लाख प्रतिभागी और 562 रूट मार्च शामिल हैं। The News Minute ने भी इन आंकड़ों को RSS की 2025-26 रिपोर्ट से संबंधित बताया है।

खरगे का कहना है कि जब किसी संगठन की इतनी बड़ी सार्वजनिक उपस्थिति हो, तो उसके फंड, अनुमति, पदाधिकारियों और कानूनी ढांचे को लेकर पारदर्शिता जरूरी है।

मोहन भागवत ने मांग को बताया राजनीतिक

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कर्नाटक सरकार और कांग्रेस नेताओं की इस मांग को राजनीतिक बताया है। India Today और Navbharat Times की रिपोर्ट्स के मुताबिक, भागवत ने कहा कि RSS को रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है क्योंकि वह सरकारी फंड नहीं लेता। उन्होंने यह भी कहा कि देश में कई संस्थाएं रजिस्टर्ड नहीं हैं और “हिंदू धर्म भी रजिस्टर्ड नहीं है।”

भागवत ने दावा किया कि RSS की गतिविधियां खुले तौर पर होती हैं और सरकार RSS के अस्तित्व से परिचित है। उन्होंने यह भी कहा कि RSS पर पहले प्रतिबंध लग चुके हैं और बाद में हटाए भी गए, इसलिए सरकार संगठन को जानती है।

कर्नाटक की राजनीति में क्यों बढ़ा विवाद?

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार RSS से जुड़े कार्यक्रमों और सार्वजनिक संस्थानों में संगठन की भूमिका को लेकर पहले भी सवाल उठा चुकी है। 3 जून 2026 को D.K. शिवकुमार ने कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, जिसकी पुष्टि कर्नाटक CM कार्यालय और आकाशवाणी की रिपोर्ट से होती है।

प्रियांक खरगे अब कर्नाटक सरकार में गृह मंत्री के रूप में RSS की सार्वजनिक गतिविधियों और कानूनी जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं। इससे कांग्रेस और RSS/BJP के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।

RSS की तरफ से कानूनी स्थिति पर पुराना तर्क

The News Minute की रिपोर्ट के अनुसार, मोहन भागवत पहले भी कह चुके हैं कि RSS “body of individuals” के रूप में काम करता है और इसे society, trust या company के रूप में रजिस्टर करना जरूरी नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, RSS पक्ष का तर्क है कि संगठन 1925 में बना था और उसके बाद किसी प्राधिकरण ने उसे अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराने को नहीं कहा।

हालांकि, आलोचकों का कहना है कि RSS का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव बहुत व्यापक है, इसलिए उसके केंद्रीय ढांचे, वित्तीय स्रोतों और सार्वजनिक कार्यक्रमों को लेकर अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि RSS प्रियांक खरगे के पत्र का औपचारिक लिखित जवाब देगा या नहीं। उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार, मोहन भागवत ने इस मांग को राजनीतिक बताते हुए खारिज किया है। दूसरी ओर, खरगे ने अपनी ओर से इसे संवैधानिक जवाबदेही और सार्वजनिक पारदर्शिता का मुद्दा बताया है।

कर्नाटक सरकार इस मामले में आगे कोई प्रशासनिक या कानूनी कदम उठाती है या इसे राजनीतिक बहस के स्तर पर ही रखा जाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। अभी तक किसी आधिकारिक जांच, नोटिस या कार्रवाई की पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में सामने नहीं आई है।



Powered by Froala Editor

tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

मुफ़्त अलर्ट

ऐसी हर खबर सबसे पहले पाएँ

बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अपडेट सीधे आपके WhatsApp पर।

इन्हें भी पढ़ें

टॉप न्यूज़ की सभी खबरें

इस खबर से जुड़े सवाल

यह खबर कब प्रकाशित हुई और आखिरी बार कब अपडेट की गई?

यह रिपोर्ट 15 जून 2026 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 15 जून 2026 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

इस क्षेत्र की और खबरें कहाँ पढ़ें?

इस क्षेत्र की ताज़ा खबरें TVL News के ज़िला सेक्शन में पढ़ी जा सकती हैं। thevirallines.net पर बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अलग-अलग पेज हर दिन अपडेट होते हैं।

इस खबर में कोई तथ्य ग़लत लगे तो क्या करें?

TVL News हर सुधार को गंभीरता से लेता है। +91 99996 56869 पर WhatsApp करें या thevirallines@gmail.com पर लिखें — पुष्टि के बाद खबर तुरंत सुधारी जाती है।