Basti: बिजली की रोशनी का इंतजार कर रहा तुलसीपुर, कई घर आज भी अंधेरे में
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, बोले— सिर्फ तीन-चार पोल लग जाएं तो गांव तक पहुंच जाएगी बिजली
कुदरहा, बस्ती। एक ओर सरकार हर गांव तक बिजली पहुंचाने और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के दावे कर रही है, वहीं विकास क्षेत्र कुदरहा की ग्राम पंचायत जगरनाथपुर के छोटे पुरवा तुलसीपुर के लोग आज भी बिजली की रोशनी का इंतजार कर रहे हैं। हाईटेक दौर में भी इस पुरवे के कई परिवार अब तक विद्युत आपूर्ति से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार विद्युत उपकेंद्र बहादुरपुर एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों से गांव तक बिजली पहुंचाने की मांग की, लेकिन आज तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। उनका आरोप है कि गांव तक बिजली पहुंचाने के लिए महज तीन-चार विद्युत पोल लगाने की आवश्यकता है, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण यह कार्य वर्षों से अधूरा पड़ा है।
ग्रामीणों के अनुसार, विभाग ने गांव तक लाइन पहुंचाए बिना ही कई लोगों के नाम पर विद्युत कनेक्शन जारी कर दिए। जब उन्होंने विद्युत उपकेंद्र बहादुरपुर के अधिकारियों से पोल लगाकर नियमित विद्युत आपूर्ति की मांग की तो कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरी में ग्रामीणों ने कुछ समय तक बांस-बल्ली के सहारे अस्थायी रूप से बिजली पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन तेज हवा में वह व्यवस्था भी ध्वस्त हो गई। इसके बाद सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कुछ ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया कि अब बिना विद्युत पोल लगाए किसी भी प्रकार की अस्थायी लाइन नहीं जोड़ी जाएगी।
भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली न होने से ग्रामीणों का जीवन बेहद कठिन हो गया है। जहां आसपास के गांवों में लोग पंखे, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं, वहीं तुलसीपुर के परिवार आज भी अंधेरे और गर्मी के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की दिनचर्या और आम जनजीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
ग्रामीण जितेंद्र, सुमन, बलिराम, कृष्णा कन्नौजिया, राकेश सहित अन्य लोगों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से मांग की है कि विद्युत उपकेंद्र बहादुरपुर के माध्यम से शीघ्र विद्युत पोल लगवाकर गांव में नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए, ताकि वर्षों से उपेक्षा का शिकार यह पुरवा भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके।
ग्रामीणों का कहना है कि वे प्रशासन और विद्युत विभाग के बीच लगातार चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं। अब उन्हें उम्मीद है कि शासन स्तर से हस्तक्षेप होगा और वर्षों पुरानी यह समस्या जल्द समाप्त होगी।
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