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गिरो : हूबनाथ पांडेय | गिरो अभी और गिरने की संभावनाएं भरपूर हैं, हूबनाथ पाण्डेय की ‘गिरो’ कविता चर्चा में

By tvlnews June 26, 2026
गिरो : हूबनाथ पांडेय | गिरो अभी और गिरने की संभावनाएं भरपूर हैं, हूबनाथ पाण्डेय की ‘गिरो’ कविता चर्चा में

हूबनाथ पाण्डेय की ‘गिरो’ कविता फिर चर्चा में, नैतिक पतन पर तीखे व्यंग्य ने सोशल मीडिया पर छेड़ी बहस


गिरो!

अभी और गिरने की

संभावनाएं भरपूर हैं

इतना गिरो

कि गुरुत्वाकर्षण बल भी

शर्म के मारे गिर पड़े।


अभी तो

गिरने की शुरुआत है

गिरने के

अपने सामर्थ्य पर

भरोसा गिरने मत दो

सारा विश्व

तुम्हारा गिरना

देख रहा है

और ख़ुद

न गिर पाने पर

अफ़सोस कर रहा है


गिरो !

पर अकेले मत गिरो

रुपए के साथ गिरो

चरित्र के साथ गिरो

गर्व के साथ गिरो

कि एक तुम्हीं हो

जिसमें गिरने का

इतना साहस है।


साहस के साथ गिरो

बेशर्मी के साथ गिरो

बेदर्दी के साथ गिरो

कि दुनिया तुमसे

गिरना सीख रही है


किसी एक ही

मामले में सही

तुम्हें विश्वगुरु होने से

कोई रोक नहीं सकता


आनेवाली पीढ़ियां

तुम्हारे गिरने में

अपने गिरने की

संभावनाएं तलाशेंगी

वे तुमसे भी ज़्यादा

गिरने का पराक्रम करेंगी


उनके पराक्रम पर

यकीन करते हुए

ज़रा और ज़ोर से गिरो

थोड़े शोर से गिरो

चारों ओर से गिरो

निपट भोर से गिरो

और गिरते रहो


यह सच है

कि इससे पहले

तुम्हारी तरह

कोई नहीं गिरा

इसका कोई नहीं गिला


तुम्हें तो ख़ुश होना चाहिए

कि सदियों से खड़े समाज को

तुम गिरना सिखा रहे हो

एक ही जगह खड़े खड़े

लोग जड़ हो गए थे

उन्हें जड़ से तुम्हीं हटा रहे हो

यह कोई आसान काम नहीं

जो तुम ज़माने को बता रहे हो


जो गिरने में असमर्थ हैं

वे तुम्हारी आलोचना करेंगे

तुम्हारी निंदा करेंगे

इन सबसे घबराना नहीं

गिरने से डगमगाना नहीं


आज तक

जो कुछ

न गिरने के लिए

प्रतिबद्ध था

वह सब लेकर गिरो

धर्म लेकर गिरो

कर्म लेकर गिरो

देश लेकर गिरो

भेस लेकर गिरो

पेड़ लेकर गिरो

रेंड़ लेकर गिरो

पानी लेकर गिरो

पहाड़ लेकर गिरो

सावन लेकर गिरो

अषाढ़ लेकर गिरो

प्रकृति लेकर गिरो

संस्कृति लेकर गिरो

विकृति लेकर गिरो


ओ वर्तमान सदी के

महानतम महापुरुष

पूरी कायनात को दिखा दो

कि तुम और कितना गिर सकते हो


कल हो सकता है

कि तुम्हारा गिरना

देखकर ही

लोगों में उठने की कामना उठे

आनेवाली पीढ़ियों को

उठने का अर्थ बताने

के लिए

कम और ज़्यादा

गिरने का फ़र्क बताने के लिए


बिना किसी की फ़िक्र

सिर्फ़ और सिर्फ़

गिरो !!


गिरते रहो!

जब तक

गिरने की क्रिया

निष्क्रिय न हो जाय !!!


~ हुबनाथ पाण्डेय 




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