कुम्भ का ऐतिहासिक पर्व का आयोजन चल रहा है ऐसे मे कई वीडियो और लोग वायरल है।
हरियाणा के मेधावी छात्र अभय सिंह हैं, जिन्होंने IIT बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। उनके पास विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उत्कृष्टता की सभी योग्यताएं है।
कुंभ में आइआइटी बॉम्बे से पासआउट एयरोस्पेस इंजीनियर जो अब अध्यात्म की राह पर है। उनसे एक पत्रकार की भेंट हुई।
अब एक बाबा वायरल जो बॉम्बे से IITटियन है । उनकी मिडिया पर चर्चा हो रही हैँ ।
तो पत्रकार कुछ पूछने लगता है ।सवाल आप देख सकते है।
पत्रकार का प्रश्न : IIT बॉम्बे से पढ़े हैं तो इस अवस्था में कैसे पहुंचे? मानों पूछना तो चाहता है, इस दुर्देशा में कैसे पहुंच गए? सामान्य समाज अपने नीचता के पराकाष्ठा पर जिसके लिए नौकरी, संसाधन ही मानो सबकुछ हो ।
साधु का उत्तर : यह अवस्था तो सबसे बेस्ट अवस्था है ज्ञान के पीछे चलते जाओगे तो यहीं पर आओगे....
अधिकांश लोगों को ज्ञान विज्ञान और अध्यात्म दोनों विरोधाभासी लगते हैँ जबकि ज्ञान की परम अवस्था ही सच्चा अध्यात्म है। भारत की ऋषि ज्ञान परम्परा अध्यात्म के चरमोत्कर्ष पर पहुंची तभी भारत मे आयुर्वेद, खगोलशास्त्र, योग, अर्थशास्त्र, अंतरिक्ष विज्ञान, दर्शनशास्त्र, चिकित्सा शास्त्र, गणित आदि विषयों पर अनुसन्धान किये गए।
वैदिक काल के ऋषियों ने अनेक शास्त्रों, विज्ञानों एवं वेदांगों की नींव डाली थी।
भारत के प्राचीन ऋषि-मुनियों जैसे आर्यभट, भास्कर प्रथम, सुश्रुत, चरक, हलायुध, नागार्जुन, कपिल, वराहमिहिर, महर्षि कणाद आदि ने अपने समय से बहुत आगे की कल्पनाओं और विचारों को साकार किया है। उन्होंने हजारों साल पहले ही प्रकृति से जुड़े कई रहस्य उजागर करने के साथ कई आविष्कार किये और युक्तियाँ बतायीं। पश्चिम के अधिकांश वैज्ञानिकों तथा आविष्कारकों ने भारतीय वैदिक विज्ञान की महत्ता को स्वीकार किया है।