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24 अगस्त 2026

राफेल डील में दसॉल्ट कम्पनी ने बिचौलिये को दी थी 1.1 मिलियन यूरो की रिश्वत: सुरजेवाला ने पूछा- इस खुलासे के बाद क्या PM मोदी अब ...

नई दिल्ली: फ़्रांस की रिपोर्ट के मुताबिक़, राफ़ेल डील में दसॉल्ट कम्पनी ने भारतीय बिचौलिये को 1.1 मिलियन यूरो रिश्वत दी थी| इसके बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला बोला है और PM मोदी से कई सवाल पूछे|…

राफेल डील में दसॉल्ट कम्पनी ने बिचौलिये को दी थी 1.1 मिलियन यूरो की रिश्वत: सुरजेवाला ने पूछा- इस खुलासे के बाद क्या PM मोदी अब ...
राफेल डील में दसॉल्ट कम्पनी ने बिचौलिये को दी थी 1.1 मिलियन यूरो की रिश्वत: सुरजेवाला ने पूछा- इस खुलासे के बाद क्या PM मोदी अब ... | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: फ़्रांस की रिपोर्ट के मुताबिक़, राफ़ेल डील में दसॉल्ट कम्पनी ने भारतीय बिचौलिये को 1.1 मिलियन यूरो रिश्वत दी थी| इसके बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला बोला है और PM मोदी से कई सवाल पूछे| कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पूछा कि,''राफेल में रिश्वत के इस खुलासे के बाद क्या प्रधानमंत्री अब देश को जवाब देंगे..?




राफेल केस को लेकर में कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'' कल खुलासे में सामने आया कि फ्रांस की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी (AFA) ने राफेल बनाने वाली 'द साल्ट' कंपनी के ऑडिट में पाया कि 23 सितंबर 2016 के चंद दिनों के अंदर राफेल ने 1.1 मिलियन यूरो एक बिचौलिये को दिए थे। इस सारे खर्जे को गिफ्ट टू क्लाइंट की संज्ञा दी|





रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'''राफेल कंपनी ने कहा कि यह पैसा राफेल एयरक्राफ्ट के मॉडल बनाने के लिए दिया था। AFA ने 'द साल्ट' से पूछा कि आपको अपनी ही कंपनी के मॉडल बनाने के लिए कॉन्ट्रैक्ट हिंदुस्तान की कंपनी को देने की क्या जरूरत थी, आपने इसे गिफ्ट टू क्लाइंट क्यों लिखा और वे मॉडल हैं कहां...?





प्रेस कॉन्फ्रेंस में रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,''60 हज़ार करोड रुपए से अधिक के देश के सबसे बड़े रक्षा सौदे में कमीशन खोरी, बिचौलियों की मौजूदगी और पैसे के लेनदेन ने एक बार फिर राफेल सौदे की परतें खोल दी हैं| सुरजेवाला ने कहा कि,''कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष श्री राहुल गांधी जी की बात आखिर सच साबित हुई। "ना खाऊंगा ना खाने दूंगा" की दुहाई देने वाली मोदी सरकार में अब कमीशन खोरी और बिचौलियों की मौजूदगी सामने आ गई है|




सुरजेवाला ने कहा कि,''यह बात हम नहीं कह रहे हैं बल्कि इस बात का खुलासा फ्रांस की एक न्यूज़ एजेंसी, न्यूज़ पोर्टल ने फ्रांस की एंटी करप्शन एजेंसी के माध्यम से किया है| उन्होंने कहा,''अब स्पष्ट है कि 60 हज़ार करोड रुपए से अधिक के सबसे बड़े रक्षा सौदे में; सरकारी खजाने को नुकसान, राष्ट्रीय हितों से खिलवाड़, क्रोनी कैपिटलिज्म की संस्कृति, कमीशन खोरी और बिचौलियों की मौजूदगी की चमत्कारी गाथा अब देश के सामने है|





उन्होंने कहा,''10 अप्रैल 2015 को श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा फ्रांस, पेरिस के अंदर 60 हज़ार करोड रुपए के 36 राफेल जहाज खरीदने की घोषणा की गई। ना कोई टेंडर, खरीद प्रक्रिया और ना ही डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर, बस गए और सबसे बड़े रक्षा सौदे की घोषणा कर आए| 23 सितंबर 2016 को मोदी सरकार ने दिल्ली में गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट कॉन्ट्रैक्ट, 36 राफेल जहाज- 8.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर या लगभग 60 हज़ार करोड़ रूपए में खरीदने का करार फ्रांस की सरकार से कर लिया |



रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'हमारे देश में हर रक्षा खरीद सौदे के अंदर रक्षा खरीद प्रक्रिया में अनिवार्य है कि एक इंटीग्रिटी क्लोज होगी। उसमें बिचौलियों की मौजूदगी, रिश्वतखोरी और कमीशन देन का आदान-प्रदान प्रतिबंधित है| अगर कोई रक्षा कंपनी जो हिंदुस्तान की सरकार को रक्षा उपकरण बेच रही है, अगर यह साबित हो गया कि उसने बिचौलिए रखे, कमीशन खोरी की तो पहले FIR दर्ज होगी, सौदा ख़ारिज कर दिया जाएगा, उस कम्पनी को बैन कर दिया जायेगा और उसके खिलाफ जांच होगी|





उन्होंने कहा,''फ्रांस की 'एंटी करप्शन एजेंसी' (AFA) ने जब 'डसॉल्ट कंपनी' जो राफेल के फाइटर एयरक्राफ्ट बनाती है, उसका ऑडिट किया तो उसमें पाया कि 23 सितम्बर 2016 के चंद महीनों के अन्दर राफेल ने 1.1 मिलियन यूरो एक मिडिल मैन को दिए थे| 30 मार्च 2017 को राफेल कंपनी ने एक एक्सप्लेनेशन दी और कहा कि यह पैसा राफेल एयरक्राफ्ट के मॉडल बनाने के लिए दिया था|





सुरजेवाला ने कहा कि,'''फ्रांस की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ने 'दसॉल्ट' से 3 सवाल पूछे: 

● आप खुद जहाज बना सकते हो तो उसका मॉडल बनाने के लिए एक मॉडल पर 20 हज़ार यूरो का कॉन्ट्रैक्ट हिंदुस्तान की कंपनी को देने की क्या जरूरत थी?

● अगर यह मॉडल बनाने के पैसे थे तो आपने अपनी बैलेंस शीट में इसे 'गिफ्ट टू क्लाइंट' क्यों लिखा हुआ है? 

● वह मॉडल गए कहां? क्या वह कभी बनाए गए या कहीं दिखाए गए? ना वो कभी दिखा पाए ना बनाने का कोई सबूत दे पाए|





सुरजेवाला ने कहा कि,'हमारे सवाल:  

● 'दसॉल्ट' द्वारा 1.1 मिलियन यूरो की राशि जो अपनी बैलेंस शीट में 'गिफ्ट टू क्लाइंट' दिखाई गई है, क्या यह वास्तव में बिचौलिए को  दिया गया कमीशन नहीं है?


● क्या हिंदुस्तान में रक्षा सौदों में बिचौलियों और बिचौलियों को दिया जाने वाला कमीशन अब मोदी सरकार द्वारा मंजूरशुदा है? ख़ासतौर से जो गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट कॉन्ट्रैक्ट हैं, अब उसमें बिचौलिए रखकर क्या कमीशन देना परमिटेड है?


● क्या इस कमीशन खोरी और बिचौलिए दलालों की मौजूदगी से पूरे राफेल सौदे पर प्रश्नचिन्ह नहीं खड़ा हो गया है? क्या ऐसे में 'दसॉल्ट' कंपनी पर जुर्माना लगाना, FIR करना और बैन करना अनिवार्य नहीं है?


● क्या अब देश के सबसे बड़े रक्षा सौदे में कमीशन खोरी, बिचौलियों की मौजूदगी और रिश्वतखोरी के इल्जामात की पूरी निष्पक्ष जांच नहीं होनी चाहिए?

● राफेल में रिश्वत के इस खुलासे के बाद क्या प्रधानमंत्री अब देश को जवाब देंगे?










tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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यह रिपोर्ट 5 अप्रैल 2021 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 24 अगस्त 2026 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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