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23 अगस्त 2026

मोदी सरकार में बैंक ठगों की हुई चांदी', 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की करते रहे बात, बैंकों को दी 5 ट्रिलियन रु. की ठगी की सौगात: प्रो. वल्लभ

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रो. गौरव वल्लभ ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि,''5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की बात करते-करते पिछले 7 सालों में बैंकों को 5 ट्रिलियन रुपए की ठगी की सौ…

मोदी सरकार में बैंक ठगों की हुई चांदी', 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की करते रहे बात, बैंकों को दी 5 ट्रिलियन रु. की ठगी की सौगात: प्रो. वल्लभ
मोदी सरकार में बैंक ठगों की हुई चांदी', 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की करते रहे बात, बैंकों को दी 5 ट्रिलियन रु. की ठगी की सौगात: प्रो. वल्लभ | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रो. गौरव वल्लभ ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि,''5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की बात करते-करते पिछले 7 सालों में बैंकों को 5 ट्रिलियन रुपए की ठगी की सौगात दी है। पिछले 7 साल में बैंकों में ₹5 लाख करोड़ रुपए अर्थात 5 ट्रिलियन रुपए का फ्रॉड हुआ है| RBI के अनुसार वर्ष 2019-20 व 2020-21 में बैंकों में ठगी होने व ठगी का पता चलने की तारीख़ में क्रमशः 24 व 23 महीने का अंतर था।  अर्थात जो ₹1.85 लाख करोड़(2019-20) व ₹1.38 लाख करोड़(2020-21)की ठगी सामने आयी, वास्तव में वो वर्ष 2017-18 व 2018-19 में की गयी थी




कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रो. गौरव वल्लभ ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि,''रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने साल 2020-21 के लिए अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी कर दी है। अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति का ब्यौरा देते हुए, इस रिपोर्ट में कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। कोविड-19 की दूसरी लहर के कारण फैले संक्रमण को रोकने में मोदी सरकार की विफल्ता एक बार फिर अर्थव्यवस्था पर भारी प्रहार कर रही है। आरबीआई की मानें तो, "रिज़र्व बैंक के कंज़्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे (सीसीएस) के मार्च, 2021 राउंड में सामान्य आर्थिक स्थिति, आय एवं मूल्यों पर बिगड़ती भावनाओं के चलते उपभोक्ताओं की भावना में गिरावट देखी गई।"




प्रो. ने कहा कि,''वार्षिक रिपोर्ट के महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक बैंक ठगी के मामलों से जुड़े आँकड़े थे। बैंक ठगी के मामलों एवं राशि में 2014-15 के बाद से तीव्र वृद्धि हुई है। अकेले साल 2020-21 में बैंक से कुल 1.38 लाख करोड़ रु. की ठगी की गई (संलग्नक A)। यद्यपि आरबीआई और अन्य एजेंसियों ने साल, 2020-21 के लिए ठगी के मामलों की संख्या को 2019-20 के मुकाबले कम होता हुआ दिखाने की कोशिश की है, लेकिन इस कहानी का दूसरा पक्ष भी है।




नीचे कुछ मुख्य बिंदु दिए जा रहे हैं, जो हर किसी को समझना जरूरी है:

1. 2014-15 के मुकाबले ठगी की कुल राशि 2014-15 और 2019-20 के बीच 57 प्रतिशत की सीएजीआर की दर से बढ़ी है।

2. साल 2020-21 के लिए, जब 31 अगस्त, 2020 तक लोन मोरेटोरियम और 31 दिसंबर, 2020 तक रिस्ट्रक्चरिंग कार्य लागू थे, तो भी पूरे साल के लिए ठगी की राशि 1,38,422 करोड़ रु. थी।

3. यदि हम पिछले 3 सालों पर भी केंद्रित हों, तो ठगी की औसत राशि 2018-19 में 10.5 करोड़ रु. से बढ़कर 2019-20 में 21.3 करोड़ रु. हो गई और 2020-21 में 18.8 करोड़ रु. हो गई। 201415 में ठगी की औसत राशि 4.2 करोड़ रु. थी। 2014-15 की तुलना में, 2019-20 व2020-21 में ठगी की औसत राशि 4 से 5 गुना हो गई है।



4. आरबीआई के अनुसार, ठगी होने की तारीख और ठगी का पता चलने की तारीख के बीच का औसत समय 2020-21 में सूचित की गई ठगी के लिए 23 महीने और 2019-20 में सूचित की गई ठगी के लिए 24 महीने था। 100 करोड़ रु. से ज्यादा की बड़ी ठगी के लिए, 2020-21 में यह औसत समय 57 महीने और 2019-20 में 63 महीने था। इसलिए वित्तवर्ष 2020-21 में सामने आई ठगी वित्तवर्ष 2018-19 में कभी की गई थी और बड़ी राशि की ठगी वित्तवर्ष 2015-16 में कभी की गई थीं।




आरबीआई द्वारा दिए गए विवरण अर्थव्यवस्था की स्थिति एवं बैंकों से की गई ठगी की ज्वलंत वास्तविकता पर रोशनी डालते हैं। इससे साबित हो जाता है कि मोदी सरकार ‘बातें करे हजार, काम के मामले में फरार' सरकार है, और अपने चुनावी वादों के समान ही अपनी कही हर बात में खोखली है।



हम मोदी सरकार से तीन सवालों के जवाब मांगते हैं:

1. पिछले 7 सालों में मोदी सरकार बैंकों से की जा रही ठगी को रोकने में विफल क्यों हो गई?

2. इन सभी मामलों में बैंक से ठगी गई रकम को वापस लाने के लिए मोदी सरकार क्या कर रही है?

3. हमारी बैंकिंग व्यवस्था को कमजोर करने वाले इन ठगों से कितना पैसा अभी तक वसूला गया है?




मोदी सरकार ने बैंकों से ठगी गई रकम को वसूलने का कोई प्रयास न करते हए ठगों को देश में ही काम करते रहने या फिर देश छोड़कर भागने का मौका देकर बैंकिंग व्यवस्था को कमजोर किया है। केंद्र सरकार ने सरकारी बैंकों को पर्याप्त कैपिटल सपोर्ट भी नहीं दिया है। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि मोदी सरकार इन ठगों पर कठोर कार्यवाही करे और उनके द्वारा ठगी गई पूरी रकम, जो हमारे देश की संपत्ति है, उसे जल्द से जल्द वसूला जाए।




 एक प्रश्न पर कि सबसे ज्यादा फ्रॉड किस बैंक से हुआ है? प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से हुआ है सबसे ज्यादा,, सबसे बड़ा अमाउंट वहीं से फ्रॉड हआ. इस 5 लाख करोड़ का जो कल फ्रॉड हआ है. इसमें सबसे बड़ा अमाउंट उसी बैंक का है। तो पिछले सात सालों में 5 लाख करोड़ हुआ है।



2014-15 में 19,455 था, जो 2020-21 में बढ़कर 1 लाख 38 हजार 422 है। ध्यान रहे 2020-21 में 6 महीने तक का मोरेटोरियम था और तीन महीने तक लोन रिस्ट्रक्चरिंग थी। उसके बावजूद ये फ्रॉड हुआ। तो कौन लोग हैं वो, जो बैकों को चूना लगाकर जा रहे हैं? कौन लोग हैं वो, जिनके कारण बैंक के जो फ्रॉड हैं, एवरेज फ्रॉड 4 करोड़ 20 लाख था, 2014-15 में, जो आज बढ़कर लगभग 20 करोड़ रुपए हो गया है? कौन लोग हैं वो? 




आप अपनी जिम्मेदारी से अब नहीं बच सकते, क्योंकि एवरेज टाइम लेग का भी रिजर्व बैंक ने हवाला दिया है कि जो 2020-21 के फ्रॉड हैं, वो 2018-19 के अंदर बैंकों में घुसे। 2020-21 के फ्रॉड हैं, वो 201718 के मध्य में बैंकों के अंदर घुसे और 2017-18 और 2018-19 में किसकी सरकार थी, वो सबको पता है। तो आप अपनी जिम्मेदारी से भी नहीं भाग सकते। ये फ्रॉडस्टर कौन हैं, क्यों निरंतर बैंकों में फ्रॉड बढ़ रहा है, क्यों 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी की बात करते-करते हम 5 ट्रिलियन रुपए के बैंकों के फ्रॉड पर पहुंच चुके हैं?




एक अन्य प्रश्न पर कि एसबीआई ने सबसे ज्यादा लोन अडानी को दिया था, अडानी को लोन देने के लिए चेयरमैन को ऑस्ट्रेलिया तक जाना पड़ा था, तो क्या इसमें इनका कुछ इन्वोल्वमेंट है? प्रो. वल्लभ ने कहा कि वो डिटेल रिजर्व बैंक अपनी एनुअल रिपोर्ट में प्रकाशित नहीं करता। हमने हमारे सवाल में भी, अगर आपने ध्यान से सुना हो तो हमने पूछा कि ''What is government doing to recover? कई लोग हैं उसमें। 



अडानी भी हैं, हो सकते हैं हमारे मेहुल भाई भी हों, हमारे नीरव मोदी भी हो सकते हैं, विजय माल्या भी हो सकते हैं। कई लोगों के नाम हैं, तो हम ये पूछ रहे हैं कि ये कौन लोग हैं, जो बैंकों को चूना लगाकर निरंतर जा रहे हैं? ये कौन लोग हैं, जो कि फ्रॉड के एवरेज को जो 4 करोड़ रुपए होता था, उसको 20 करोड़ किया? ये कौन लोग हैं, 



जब देश कोरोना से जूझ रहा है, जब 6 महीने का मोरेटोरियम है, उसके बावजूद 38 हजार 422 करोड़ रुपए का बैंकों को चूना लगाकर कौन लोग गए? तीन महीने तक रिस्ट्रक्चरिंग थी, फिर भी बैंकों से फ्रॉड हो रहा है, कौन हैं वो लोग? यही तो हम जानना चाहते हैं। अब एक्ट ऑफ गोड से काम नहीं चलेगा, एक्ट ऑफ प्रीवियस के पीछे भी जाकर आप अपनी नाकामियों को नहीं छुपा पाओगे, आपको आगे आकर बताना पड़ेगा कि क्यों ऐसा किया, किसके कहने से ऐसा किया, किसके कहने से ऐसा हुआ कि 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी का सपना देखतेदेखते देश के लोगों को 5 ट्रिलियन रुपए का फ्रॉड झेलना पड़ा? और ये 5 ट्रिलियन रुपए किसके हैं - ये उस हर टैक्स पेयर के पैसे हैं, जो समय पर अपना इंकम टैक्स देता है। ये हर उस व्यक्ति के पैसे हैं, जो जब भी कोई चीज खरीदता है, तो जीएसटी देता है। उसके पैसे लेकर कौन फरार हो रहा है? यही हम पूछ रहे हैं।




एक अन्य प्रश्न पर कि 100 करोड़ से ज्यादा राशि के टोटल फ्रॉड कितने हैं? दूसरे लगातार जो बैंक फ्रॉड होते जा रहे हैं, इसमें सरकार का डायरेक्ट या इनडायरेक्ट रोल का आरोप आप लगाना चाहते हैं? प्रो. वल्लभ ने कहा कि नहीं, हम तो आपसे ये पूछ रहे हैं कि 19 हजार 455 रुपए का कुल फ्रॉड हुआ था 2014-15 में, जो 2020-21 में 1 लाख 38 हजार 422 करोड़ हो गया, कैसे हो गया? किसी की इंकम नहीं बढ़ी, दो जनों की इंकम जरुर इसी रफ्तार से बढ़ी। सिर्फ तीन चीजें हो रही हैं -2 जनों की इंकम 57 प्रतिशत से ज्यादा से बढ़ रही होगी और ये बैंकों में वो फ्रॉड है, ये 57 प्रतिशत से बढ़ रहे हैं। अब 100 करोड़ से ऊपर के कितने हुए, इसका बाइफरकेशन रिजर्व बैंक ने नहीं दिया। 




पर मैं आपको एक ओपिनियन दे रहा है कि ये 5 लाख करोड़ में से 80 प्रतिशत तक, 70 से 80 प्रतिशत जो अमाउंट होगा, वो 100 करोड़ से ज्यादा के बड़े एक्सपोजर का होगा। रिजर्व बैंक ने इसका एक्सप्लनेशन अपनी एनुअल रिपोर्ट में नहीं दिया। उन्होंने तो ये कहा कि इस 5 ट्रिलियन रुपए का फ्रॉड पिछले सात सालों में हुआ। मैंने 2014-15 से लेकर 2020-21 की सारी एनुअल रिपोर्ट से वन बाय वन ये सारा डेटा संकलित किया. कलेक्ट किया. जो आपको प्रेस रिलीज के माध्यम से हमने आपको शेयर भी कर दिया। 




टोटल नंबर ऑफ फ्रॉड भी जो थे, वो 4,639 टोटल फ्रॉड हुए थे 2014-15 में। जो 2019-20 में इतने 1.85 लाख करोड की राशि तक पहुंच गए। एक तरफ तो देश में अर्थव्यवस्था निरंतर नीचे गिरती जा रही है और आप फ्रॉड बढ़ाते जा रहे हैं। ये किसका पैसा है, फ्रॉड से जिसका नुकसान बैंकों को फ्रॉड से हो रहा है? ये आपका, मेरा, हर हिंदुस्तानी का पैसा है, उस पैसे को कौन लोग लेकर जा रहे हैं, कहाँ लेकर जा रहे हैं? क्यों 2016-17, 2017-18, 2018-19, क्योंकि एवरेज टाइम लेग जो मैंने बताया 24 महीने और 23 महीने, उस दौरान किसकी सरकार थी - नरेन्द्र मोदी जी की सरकार थी। 



किसके कहने से वो लोन दिए गए, किसको लोन दिए गए? उस सारे का विवरण देना पड़ेगा। अब आप छुप नहीं सकते अपनी नाकामियों को लेकर। अब आप ये भी नहीं कह सकते कि ये लोन पहले दिए गए थे,क्योंकि उसी रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि टाइम लेग 24 और 23 महीने में हैं, 2020-21 के फ्रॉड के लिए 23 महीने और 2019-20 के फ्रॉड के लिए 24 महीने हैं। अर्थात् 2019-20 में जो फ्रॉड दिखाया जा रहा है, वो बैंकों में एंटर हुआ 2017-18 में। 2020-21 में जो 1 लाख 38 हजार 422 करोड़ का फ्रॉड करा, वो बैंकों में एंटर हआ 2018-19 में, तो आप अब अपनी नाकामी से नहीं छप सकते।




एक अन्य प्रश्न पर कि क्या आप ये कहना चाहते हैं कि इन फ्रॉड में सरकारी मदद मिल रही थी? प्रो. वल्लभ ने कहा कि अब सरकारी मदद, मैं आपको कह रहा हूं कुल अमाउंट ऑफ फ्रॉड क्यों बढ़ा, हम तो ये पूछ रहे हैं, कौन लोग हैं जो ये फ्रॉड करके भाग गए हैं या कौन लोग हैं जिनके कारण ये फ्रॉड हुआ है? कौन लोग हैं, जिनके कारण पिछले सात सालों में 5 लाख करोड़, 5 ट्रिलियन रुपए का फ्रॉड हुआ है? हम तो ये पूछ रहे हैं कि किसके कहने से हो रहा है ये, क्यों हो रहा है? और किसी के कहने से भी हो रहा है, इस फ्रॉड में अगर नुकसान होता है, तो हिंदुस्तान के लोगों का नुकसान होता है। क्योंकि 5 लाख करोड़ किसके पैसे डूबे, ये आपके, मेरे, हम सबके पैसे डुबे ना। ये हमारी जो परियोजनाएं है, हमारे डेवलपमेंट हैं, हमारे डायरेक्ट कैश ट्रांसफर में उपयोग में किए जा सकते थे। 5 लाख करोड़ रुपए में क्या अमाउंट होता है, हम 5 साल तक जो हमारा मनरेगा बजट है, अभी मनरेगा का बजट 5 लाख करोड़ रुपए से कम है, जो हमारे फ्रॉड में चला गया। तो ये सवाल महत्वपूर्ण है। अब ये कौन कर रहा है, किसके कहने से हो रहा है, कौन दबाव डाल रहा है, ये सब सवाल हम पूछ रहे हैं? इसकी जानकारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में नहीं है




एक अन्य प्रश्न पर कि बहुत सारे पीएसयू घाटे में चल रही हैं, क्या किसी भी प्रकार के पीएसयूस को सरकार की तरफ से बैंको से कोई मदद मिली या नहीं, दूसरा, जितना आपने 5 लाख करोड़ की राशि बताई, इस राशि से और क्या-क्या हो सकता है?, प्रो. वल्लभ ने कहा कि पांच लाख करोड़ में से आप जैसे, मेरे जैसे करोड़ो मध्यम आय वर्गीय, जो टैक्स देते हैं, इंकम टैक्स, वो एक साल तक हमें टैक्स से रीबेट हो सकती है। इतना अमाउंट होता है, क्योंकि पर्सनल जो टैक्स है, पर्सनल इंकम पर वो 5 लाख करोड़ के आस-पास है।



मतलब पूरे देश को इंकम टैक्स जीरो इंकम टैक्स दिया जा सकता है, ये पांच लाख करोड़ रुपए अमाउंट होता है। 5 लाख करोड़ का वो अमाउंट है, जिससे कम से कम जो मौजूदा सरकार है, उसका 10 साल का मनरेगा का बजट लगभग 5 लाख करोड़ होता है। 5 लाख करोड़ में जो एम्स होता है, उसकी एवरेज कॉस्ट लगभग 1 हजार करोड़ होती है, तो 5 लाख करोड़ में लगभग 500 एम्स खोले जा सकते हैं देश में, ये रकम होती है, 5 लाख करोड़।



5 लाख करोड़ में हम देश में जो जरुरी सामानों पर, किसान की जो फर्टिलाइजर है, उसके उपकरण हैं, उस पर जीएसटी लगाकर वसूल रहे हैं, उसको जीरो कर सकते हैं, 5 लाख करोड़ इतना अमाउंट होता है, जो पेट्रोल और डीजल के जो रेट हैं, और 95 रुपए प्रति लीटर पर देश के कई भागों में पहुंच चुकी है, उसको वापस आप 50 रुपए और 8 रुपए प्रति लीटर पर सकते हो, इतना अमाउंट होता है, 5 लाख करोड़ का।




आपके फ्रॉड हो जाते हैं, पिछले 7 साल में और टाइम लैग बड़ा सिंपल सवाल है, क्योंकि काश पहले बच जाती, या आर्गेमेंट देकर आ रहे हैं, ये तो पहले हुए थे, आज उजागर हुए हैं, हुए पहले थे। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि 2019-20 में जो फ्रॉड हुए, कितने हुए- 1 लाख, 85 हजार करोड़ और 2020-21 में जो फ्रॉड हुए, 1 लाख, 32 हजार करोड़, अगर हम इन दोनों को जोड़ें तो लगभग सवा तीन लाख करोड़। इन पांच ट्रिलियन में से, सवा तीन ट्रिलियन तो इन दो सालों में हुआ, जो 2019-20 और 2020-21 में जो सवा तीन ट्रिलियन के फ्रॉड हुए वो 2017-18 और 201819 के बीच मे बैंको में हुए। 



तो अब आप बच नहीं सकते, क्योंकि आप ये नहीं कह सकते कि ये तो पहले बैंको में एंटर हए थे। बैंक में एंटर भी 2017-18 और 2018-19 के मध्य हुए हैं। now you can't escape. आपके पास कोई गली नहीं है, आपको बताना पड़ेगा देश को कि ये कौन लोग हैं, जो 5 लाख करोड़ का बैंकों को फ्रॉड करके देश में बैठे हैं या दुनिया के सूदूर इलाकों में जो बैठे हैं, वो कौन लोग हैं। क्यों फ्रॉड का जो एवरेज अमाउंट है, वो पिछले सालों में 4 गुना से 5 गुना हो गए हैं, क्यों? कौन हैं वो? किसने कहने से ये हो रहा है, ये सारे सवाल पूछने और इनका जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है और हर हिंदुस्तानी इन सवालों का उत्तर जानना चाहता है।




प्रो. वल्लभ ने कहा कि,''रहा सवाल आपने पूछा कि पब्लिक सेक्टर यूनिट्स को कितना एक्सपोजर दिया, ये तो रिजर्व बैंक ने अपनी एनुअल रिपोर्ट में लिखा नहीं कि ये लोग फ्रॉड्स्टर्स हैं, पर कौन हैं वो फ्रॉडस्टर्स। गीतांजलि जेम्स एंड ज्वैलर्स होंगे, बिल्कुल है। हमने पहले भी देखा उनके नाम बिल्कुल डिफॉल्टर्स मे हैं। कई लोग जो प्रधानमंत्री जी, हमारे मेहुल भाई, नीरव मोदी, प्रधानमंत्री जी के साथ जिनकी फोटो सबके पास उपलब्ध हैं, जिनके साथ किस तरह के आत्मीयता के रिश्ते थे, पूरे देश ने देखा।




प्रो. ने कहा कि,'' किसके कार्यकाल मे विजय माल्या भागा, किसके कार्यकाल में फ्रॉड पर फ्रॉड और हम तो पूछ रहे हैं कि जो देश में भी बैठे हैं, वो कौन लोग हैं, किनके कहने पर आपने ये 5 लाख करोड़ का एक्सपोजर दिया, किसके कहने पर सवा तीन लाख करोड़ का एक्सपोजर 2019-20 और 2020-21 में हुआ, ये 2017-18 और 2018-19 में कौन इसके पीछे था? क्यों कहा जा रहा था, बैंको को उनको एक्सपोजर देने के लिए क्योंकि ये छोटी रकम नहीं है, ये देश के विकास के लिए इसके बड़ा महत्व है और आज इसका महत्व और भी ज्यादा है, क्योंकि कोरोना के कारण बहुत भयंकर मंदी है, अगर 5 लाख करोड़ अभी होते तो हम आराम से 72 हजार रुपए जैसी न्याय स्कीम इमीजेटली इंप्लीमेंट कर देते। हर व्यक्ति के खाते मे 72 हजार रुपए आते। पर हमने ये पैसा गंवा दिया. पिछले सात सालो में फ्रॉड से।




‘सेंट्रल विस्टा’ पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा कि,' भईया, 20 हजार करोड़ से लगभग 20 एम्स नए बनते। तो 20 नए एम्स बनाने चाहिए थे, या मोदी महल बनाना चाहिए था. 20 हजार करोड़ रुप जो ये रोज कहते हो न स्टेट गवर्मेंट लगा देगी, प्राईवेट वैक्सीन लगा देगी, हम उससे वैक्सीन नहीं खरीद सकते, वो सारी प्रॉब्लम खत्म हो जाती। हम ये पूछना चाहते हैं कि ये जो 20 हजार करोड़ रुपए का मोदी महल बनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है या लोगों के हाथ में डायरेक्ट कैश देना ज्यादा इंपोर्टेट है. ये तो वैसी ही बात हो गई कि मेरे घर में लोग बीमार हैं और मैं मेरे लिए नई कार खरीद रहा हूँ।



गौरव वल्लभ ने कहा कि,क्या इस तरह लोकतंत्र व्यवहार करता है अपने नागरिकों के लिए कि नागरिक मर रहे हैं, आज भी सवा तीन लाख लोग देश में जान गंवा चुके हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स का आंकड़ा है कि ये सरकार का आंकड़ा झूठा है। उनके अनुसार 42 लाख लोगों ने कोविड में अपनी जान गंवा दी और आप अपने लिए मोदी महल बना रहे हो उन सबके बीच में। हर चीज का एक टाइम होता है, हर चीज का एक कैरेक्टर होता है, हर चीज की एक मोरैलिटी होती है, हर चीज की एक इकॉनमिक प्रडैन्स होता है, हर चीज का एक फिस्कल डैन्स होता है, आप उसमें हर जगह फेल हुए हैं। आप अब हठधर्मिता करना चाहते हो, अपने महल के लिए आप लोगों की जान को जोखिम में डालना चाहते हो।



गौरव वल्लभ ने कहा कि,''अब जरुरी क्या है, हमारा जो देश है न, उसके पास लिमिटेड रिसोर्सेस है, पर हमारे पास अभूतपूर्व विजन है, देश के पास। उस लिमिटेड रिसोर्स का यूज हम उस अभूतपूर्व विजन के साथ कैसे करें, इसी के कारण हमारी ग्रोथ रेट 8 प्रतिशत, 9 प्रतिशत, साढे नौ प्रतिशत रही थी, 2011-12-13 में। 2015-16 तक भी 8 प्रतिशत थी, पर आपने उस ग्रोथ रेट को खत्म किया पहले। पैंडेमिक के पहले 8 प्रतिशत की जीडीपी को 4.2 प्रतिशत पर ले आए और उसके बाद अब मोदी महल बनवा रहे हो, अच्छा , आपने अपने रहने के लिए एश-ओ-आराम से युक्त नया भवन बनाना है।



प्रो. ने कहा कि,''मैं तो आपसे पूछता हूँ, आपके माध्यम से हर व्यक्ति से पूछता हूँ कि जो मौजूदा संसद है, उसमें क्या खराबी है। आप हजारों बार उस संसद में गए होंगे, क्या वहाँ पर पानी ऊपर से टपकता है? क्या वहाँ पर पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है? क्या वहाँ सिक्योरिटी के इशू हैं ? क्यों आप ऐसी हठधर्मिता दिखा रहे हो, आप ऐसे शासक के रूप मे क्यों विहेव कर रहे हो जिसको जनता की कोई परवाह नहीं, उसको सिर्फ अपने ईगो को सैटिस्फाई करना था।




प्रो. ने कहा कि,''जब वेव-1 चल रही थी, जब आपने सरदार पटेल स्टेडियम का नाम बदलकर नरेन्द्र मोदी स्टेडियम बना दिया। जब वेव-1 चल रही थी, तो आपने 20 हजार करोड़ का यहाँ पर एक एलोकेशन का डिसीजन लिया। जब वेव-1 चल रही थी, तो आपने हवाई जहाज खरीदा अपने लिए। अरे देश में लोग बीमारी से मर रहे हैं, लोगों को इंजेक्शन नहीं मिल रहे हैं, ब्लैक फंगस एक बड़ी महामारी हो गई है, सारे वैज्ञानिक, जो दुनिया के वैज्ञानिक हैं, वो थर्ड वेव की चेतावनी दे रहे हैं और आप अपने लिए मोदी महल बनवा रहे हो। ये मुझे लगता है कि ये न इकॉनमिक प्रूडेन्स से जस्टिफाइड है, न ये फाइनेंशियल पूडेन्स से जस्टिफाइड है और न ये मोरलिटी के पैमाने पर जस्टिफाइड है।



तो आपने प्रोक्योरमेंट के सारे नियम की धज्जियाँ उधेड़ दीं। आप अपनी जिम्मेदारी से कभी उसको लेते नहीं हो। जो आपको कोई समस्या आती है, आप कह देते हो, ये तो राज्य सरकारों की है। आपसे गलती हुई, राइट टाइम की तो आप मानिए, राइट टाइम की गलती हई। आपकी गलती हई राइट क्वांटिटी को ब्लॉक करने की तो बाहर करिए कि हमसे गलती हुई राइट क्वांटिटी को ब्लॉक करने में। आपकी गलती हुई की आपने डिफरेंशियल प्राइसिंग की तो अभी सुधारिए उसको, बोलिए इतनी प्राइसिंग नहीं चलेगी। मुझे तो समझ में नहीं आता।  कोई दिक्कत नहीं है, सब चलता है। जब सब चलता है तो इतनी डिफरेंस प्राइसेस में क्यों है? अब नीति आयोग के जो मेम्बर कह रहे हैं, दोनों एक ही है तो फिर एक चीज. जो 300 में भी मिल रही है. एक ही चीज 1.200 में मिल रही है. ये मत हआ है इन चीजों का हम उनको सलाह भी दे सकते हैं, , आप बाहर तो आओ। आप तो मानते ही नहीं हो किसी चीज को। आप तो अपने वो कहते हैं न कि एक ड्रीम वर्ल्ड में ऐसे घूम रहे हो आप तो वहीं पर बैठे हो। आपको लगता है कि जो हो रहा है वो सही है। साढ़े पन्द्रह लाख प्रतिदिन सही नहीं है।




आप 15 लाख पर हो अभी. . हम 15 लाख प्रतिदिन के वैक्सीनेशन से इस बीमारी को नहीं हरा सकते और क्यों 15 लाख कर रहे हैं, उसका भी कारण बता देता हूँ क्योंकि सप्लाई ही नहीं है आपकी। आपने कुछ किया ही नही है। आपने साढ़े छः करोड़ जो हमारी डोजेजे हैं, वो दुनिया के दूसरे देशों को दे दी। सीरम इंस्टीट्यूट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स बाहर आकर बोलते हैं कि हमें पता ही नहीं है कि हमारे पास कितना स्टॉक है। आपकी सरकार को पता ही नहीं है कि उसके पास कितना स्टॉक है और साढ़े छः करोड़ से ज्यादा डोजेजे आपने दुनिया के दूसरे देशों को दे दिए।



''साढ़े छः करोड़ से दिल्ली, मुम्बई, कलकत्ता और चेन्नई, चारो मेट्रो में सौ प्रतिशत वैक्सीनेशन हो सकता था और अगर ये वैक्सीनेशन यहाँ सौ प्रतिशत होता तो, पहला रुप बढ़ना कम हो जाता और आपने वो बस भी मिस कर दी। अभी भी हम बोलते हैं, आप अपने जो आडम्बर और जो आपके सेल्फ ईगो है, उससे बाहर आइए, एक व्हाइट पेपर प्रिजेंट करिए, अपनी गलतियों के लिए देश से माफी मांगिए और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ  कि हम उनको एक अच्छी सप्लाई चेन पॉलिसी कोई बनाकर दे देंगे। हम उनको कैसे इस वैक्सीनेशन ड्राइव को फुल प्रूव बनाना है, वो भी समझाएंगे। हम उनको ये भी बताएंगे कि सप्लाई कैसे बढ़ानी है।  पर आप बाहर तो आईए, आप बिना बाहर आए। हम बोलते हैं, रोज आपसे सवाल पूछते हैं, आप कह रहे हो, 31 दिसम्बर तक सब कर देंगे, कैसे कर देंगे,  करोड़ डोजेजे आप कहाँ से लाएंगे?




हम पिछले तीन महीने से बोल रहे हैं कि आप इंटरनली, जो और मैन्यूफैक्चरिंग फैसिलिटीज हैं, और कंपनियों की उनको इस्तेमाल करके सप्लाई बढ़ाइए, . आप तो अपने सेल्फ ईगो में एक नई डेट दे देते हो। आपको लगता है जैसे हमने कहा, 15 लाख डाल देंगे, खत्म हो गई बात। आपने कहा 24 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बना देंगे, खत्म हो गई बात। आपने कहा कि किसानों की आय दोगुनी कर देंगे, खत्म हो गई बात। 



आपने कहा सौ स्मार्ट सिटी बना देंगे, खत्म हो गई बात। अरे वो बात खत्म हो गई, ठीक है, पर अगर आप अब बोल रहे हो, 31 दिसम्बर तक हम सबको वैक्सीनेट कर देंगे, कैसे कर दोगे, कहाँ है आपके पास सप्लाई, कितनी सीरिंज की जरुरत पड़ेगी, सीरिंज कौन देगा, 280 करोड़ का आप ब्यौरा दीजिए देश को जब हम मानेंगे कि आप कर सकते हो। और यहाँ पर पैसों की बात नहीं है, विकास की बात नही है, ये जिंदगी और मौत का सवाल है, इस समय देश आपको माफ नहीं करेगा। अगर आपने अब जरा सी भी चूक कर दी तो देश आपको माफ नहीं करेगा। देश आपको कभी नहीं माफ करेगा। जब 2-2 हजार लोगों की लाशें गंगा मैया के अंदर तैरती मिली, देश आपको कभी माफ नहीं करेगा, उसका दंड आपको जरुर मिलेगा। नैतिकता के उसूलों पर भी मिलेगा और डेमोक्रेसी के उसूलों पर भी मिलेगा।








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TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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