नई दिल्ली: कांग्रेस ने बीजेपी अध्यक्ष जगतप्रकाश नड्डा की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे गए पत्र को लेकर मंगलवार को पलटवार करते हुए कहा कि कोरोना महामारी के संकट के समय उसने सरकार को आगाह करके और अच्छे सुझाव देकर विपक्ष होने का ‘राजधर्म’ निभाया। प्रमुख विपक्षी दल ने कहा कि दूसरी तरफ सत्तापक्ष की तरफ से सिर्फ अहंकार दिखाया गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने कहा कि नड्डा और केंद्र सरकार को अहंकार त्यागकर इस वक्त देशवासियों की जान बचाने पर ध्यान देना चाहिए। दु:ख की बात यह है कि एक तरफ हमारे नेता इस सरकार को चेताते रहे और दूसरी तरफ यह सरकार इतने अहंकार में डूबी हुई थी कि केवल अपने राजनीतिक स्कोर पर ध्यान दे रही थी; इसके अलावा उन्हें कुछ और नज़र ही नहीं आ रहा|
कांग्रेस नेता अजय माकन ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि गंगा नदी में 150 लाशों को पाया गया। ये दृश्य जिसने भी देखा, ये हृदय विदारक दृश्य था। भाजपा और मोदी सरकार के अहंकार, आंकड़ों की बाजीगरी और कुशासन की पराकाष्ठा है ये। जो सरकारें अपने लोगों की चिकित्सा में लापरवाही कर सकती हैं और मृतकों की गरिमा भी सुरक्षित नहीं रख सकती। उन सरकारों को अपने पदों पर रहने का कोई अधिकार नहीं।
कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा कि,''हम लोगों ने देखा पिछले दिनों में शवदाह केंद्रों पर लंबी-लंबी कतारें, फुटपाथों पर जलती लाशें, अस्पतालों के आगे गाड़ियों में बैठे दम तोड़ते मरीज ऑक्सीजन ना मिलने पर, साइकिलों पर ले जाते शव। हम गत दिनों से ये सारी की सारी तस्वीरें देख रहे हैं और कांग्रेस पार्टी ने एक सजग सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाते हुए हमेशा भारत सरकार को चेताया है।
उन्होंने कहा,''यह सरकार तो जैसे कल हम लोगों ने अपनी वर्किंग कमेटी में भी कहा कि ''Modi Government has abdicated its responsibility,''' सरकार तो अपनी पूरी की पूरी जिम्मेदारी से मुक्त एक तरीके से लगता है हो गई है। लेकिन कांग्रेस पार्टी विपक्ष की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती। इसलिए वक्त-वक्त पर राहुल गांधी जी ने सरकार को चेताया है।
अजय माकन ने कहा कि,''मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं, 12 फरवरी, 2020 को जब केवल तीन केस हमारे देश में आए थे, तो सबसे पहले राहुल जी ने उस वक्त भारत सरकार को चेताया था। 17 मार्च को जब सिर्फ 137 केस हुई थे। 26 मार्च जब सिर्फ 730 केस हुए थे। 14 अगस्त जब 25 हजार केस हो गए थे। जब भी राहुल जी ने कहा और फिर उसके बाद जब ये सरकार सो गई थी, तो सोती हुई सरकार को इसी साल 17 फरवरी को 1 करोड़ से भी ज्यादा केस हो गए, राहुल जी ने फिर इस सरकार को जगाया। 7 अप्रैल को फिर जगाया, 18 अप्रैल, 25 अप्रैल, 7 मई, लगातार इस सरकार को जगाया, चेताया, चिट्ठियां लिखी और ये चिट्ठियां केवल वो चिट्ठियां नहीं थी कि सरकार को क्रिटिसाइज किया।
उन्होंने कहा,''ये हर एक चिट्ठी, हर एक बार जब सरकार को राहुल जी ने, कांग्रेस पार्टी ने, डॉ. मनमोहन सिंह जी ने, कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने, श्रीमती सोनिया गांधी ने जब – जब इस सरकार को कोई बात कही, कोई वार्तालाप किया, तो साथ में इस सरकार को अच्छी, सोची-समझी, वेल रिसर्चड सब लोगों से बात करके, क्योंकि सरकार ने तो अपने कान-नाक, आंख बंद कर रखे हैं, लेकिन हमारे नेताओं ने सबसे बात करके, विशेषज्ञों से बात करके, हमारी पार्टी, हमारे नेता लगातार इस सरकार को बताते रहे, सजेशन देते रहे, लेकिन इस सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
अजय माकन ने कहा कि,''दुख की बात ये है कि एक तरफ हमारे नेता इस सरकार को चेताते रहे और दूसरी तरफ यह सरकार इतने अहंकार में डूबी हुई थी केवल राजनैतिक दो लोगों को स्कोर करने के अंदर लगी हुई थी कि सरकार को कुछ और सामने नजर ही नहीं आ रहा था।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने कहा कि,''28 जनवरी को इसी साल प्रधानमंत्री जी ने कहा कि ''India has saved the world from disaste'r और आज मुश्किल से 4 महीने बीते हैं और 4 महीने से कम समय के अंदर आज दुनिया का हर दूसरा व्यक्ति कोरोना से संक्रमित हो रहा है, वो हमारे देश का है। पूरी की पूरी दुनिया ने एक तरीके से भारत को लॉकडाउन कर दिया है। भारत से आना-जाना बंद कर दिया है।
अजय माकन ने कहा कि,''आज हमारे उस प्रधानमंत्री जी से हम पूछना चाहते हैं जिन्होंने 28 जनवरी को कहा था कि India has saved the world from disaster. आज उनका क्या कहना है? हमारे हेल्थ मिनिस्टर साहब 19 फरवरी को कहते हैं कि बाबा रामदेव की जो कोरोनिल है, वो हम सबको बचा देगी और बाबा रामदेव के कोरोनिल के ऊपर चलना चाहिए।
उन्होंने कहा,''7 मार्च को हमारे हेल्थ मिनिस्टर कहते हैं, We are in the endgame. और एक महीने के अंदर - अंदर यह हमारी पूरी की पूरी पैंडेमिक किस तरीके से विकराल रुप ले लेती है, ये हम सब लोगों ने देखा। इन सबके इतने सारे उदाहरण हैं कि किस प्रकार से अहंकारी ढंग से इन लोगों ने अपने स्टेटमेंट दिए हैं कि आप सब लोग इन चीजों से परिचित है।
अजय माकन ने कहा कि,''लेकिन अब तो हैरानी और दुख करने वाली बात ये है कि जहाँ पर एक तरफ कांग्रेस पार्टी अपनी सशक्त और सजग विपक्ष की भूमिका निभा रही है। एक तरफ कांग्रेस पार्टी, जो अपना राष्ट्रधर्म विपक्ष होने के नाते भी निभा रही है, कि सरकार को अच्छे सुझाव दे रही है, सरकार को क्या करना चाहिए, कहाँ पर सरकार गलत हो रही है, उन सब चीजों को सरकार को बता रही है।
अजय माकन ने कहा कि,''लेकिन इस सरकार की रूलिंग पार्टी के अध्यक्ष आज श्रीमती सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर जिस अहंकार पूर्वक जवाब उन्होंने दिया, आज हम सब लोगों का सिर शर्म से झुक जाना चाहिए। जिस प्रकार से चिट्ठी उन्होंने लिखी। हम तो उम्मीद कर रहे थे कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी, राहुल जी, सोनिया जी, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी, जो लगातार चिट्ठियां उनको लिख रहे हैं। जो लगातार बातें, सुझाव इनको दे रहे हैं, सरकार के कानों पर जूं रेंगेगी। हम तो उम्मीद कर रहे थे कि हमारे चिकित्सा मंत्री, हमारे प्रधानमंत्री, हमारी टास्क फोर्स इन सब चीजों को समझेगी। लेकिन उल्टा वापस चिट्ठी लिखकर अपने आपको बचाना और वही अहंकार पूर्ण बातें करना इनको शोभा नहीं देता है।
उन्होंने कहा,''आज जब देश के अंदर, पवित्र गंगा के अंदर 150 के करीब लाशों को तैरते हुए पूरा का पूरा देश देख रहा है, तो क्या इस बात का द्योतक है, क्या इस बात का सूचक है? और केवल राहुल जी, केवल सोनिया जी या केवल कांग्रेस वर्किंग कमेटी नहीं कह रही। हमारे कोरोना वॉरियर्स को कौन रिप्रेजेंट करता है, कौन कोरोना वारियर्स के सही मायने में रिप्रेजेंटेटिव हैं - इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, जो 3 लाख 27 हजार डॉक्टर्स की हिंदुस्तान की सबसे बड़ी संस्था है, 1928 में स्थापित संस्था। वो कोरोना वॉरियर्स की संस्था, वो कह रही है कि सरकार जागे। वो कह रही है कि सरकार ने ठीक काम नहीं किया।
उन्होंने कहा,''हमारी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कह रही है कि हमारे हेल्थ मिनिस्टर को हटाया जाना चाहिए। हमारी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कह रही है कि साइंटिस्ट से, डॉक्टर से, हम लोगों से किसी से सलाह नहीं ली जा रही है, पता नहीं, कहाँ पर फैसले हो रहे हैं। ये इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कह रही है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने कहा कि,''तो मैं नड्डा जी आपसे ये पूछना चाहता हूं कि क्या इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भी राजनीति कर रही है? मैं आपसे नड्डा जी पूछना चाहता हूं, दी लैंसेट, जो दुनिया का सबसे पुराना मेडिकल जर्नल है, नेचर, जो सबसे पुराना साइंस जर्नल है दुनिया का, क्या वो भी राजनीति कर रहा है? मैं तो बात ही नहीं कर रहा हूं कि वॉल स्ट्रीट जर्नल क्या लिख रहा है, गार्डियन क्या लिख रहा है। मैं तो बात ही नहीं कर रहा कि न्यूयार्क टाइम्स क्या लिख रहा है, ऑस्ट्रेलिया के न्यूज पेपर क्या लिख रहे हैं।
मैं तो बात ही नहीं कर रहा कि पूरी दुनिया के, विश्व के न्यूज पेपर आपके बारे में क्या कह रहे हैं, सरकार के बारे में क्या कह रहे हैं। मैं तो केवल बात कर रहा हूं कि दी लैंसेट, जो हमारा जर्नल है, नेचर जो हमारा साइंस का सबसे पुराना और महत्वपूर्ण जर्नल है, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जो हमारे कोरोना वारियर्स के नुमाइंदे हैं, मैं उनकी बात कर रहा हूं। कांग्रेस पार्टी उनकी बात कर रही है।
आज दी लैंसेट, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और नेचर जो बातें कह रही हैं, वही बातें, same to same वही बातें राहुल जी ने, सोनिया जी ने, डॉ. मनमोहन सिंह जी ने बार-बार कही हैं, तो क्या आपका मतलब कि सभी के सभी राजनीति कर रहे हैं और आप नहीं कर रहे हैं? हैरानी की बात है कि आप राजनीति नहीं कर रहे हैं और बाकी सारे के सारे राजनीति कर रहे हैं। ये कौन कह रही है कि सरकार आंकड़े छुपा रही है, सिर्फ विपक्ष थोडे कह रहा है। ये इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कह रही है, दी लैंसेट कह रहा है, ये नेचर कह रहा है कि आप आंकड़े छुपा रहे हैं और आज तो गंगा मां ने भी कह दिया है कि आप किस तरीके से आंकड़े छुपा रहे हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने कहा कि,''मोदी जी आज हम आपसे ये पूछना चाहते हैं, नड्डा साहब आप इस चीज का जवाब दीजिए कि गंगा मां में जो आज हम सब लोगों ने देखा, लाशों को तैरते हुए क्या ये आंकड़े छुप नहीं रहे, क्या ये आपके अहंकार का द्योतक नहीं? ये किसने कहा कि the success will depend on government owning up its mistake, ये किसने कहा, ये दी लैंसेंट ने कहा। ये कांग्रेस पार्टी नहीं कह रही, ये दी लैंसेट ने कहा कि आगे आने वाले समय में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार अपनी गलतियां स्वीकारती है या नहीं स्वीकारती है और आज आपने जो चिट्ठी लिखी है कांग्रेस वर्किंग कमेटी के कल के हमारे प्रस्ताव के बाद में सोनिया जी को।
पूर्व केंद्रीय मंत्री माकन ने कहा कि,''मुझे नहीं लगता कि आपको रत्ती भर भी अफसोस है कि आप लोगों ने जिस तरीके से पिछले एक-डेढ वर्ष के अंदर हमारे देश का हाल किया है और सब ये कह रहे हैं कि the success will depend on government owning up its mistake. ये हम नहीं कह रहे हैं, ये साइंस के जर्नल कह रहे हैं, ये इंटरनेशनल जर्नल कह रहे हैं और दुनिया के सबसे पुराने जर्नल कह रहे हैं। ये कौन कह रहा है कि Modi Government will be responsible for presiding over self inflicted catastrophe ये कुदरती, ये प्राकृतिक आपदा नहीं है, ये self inflicted catastrophe है। ये किसने कहा है मोदी जी कि Modi Government will be responsible for presiding over self inflicted catastrophe. अपने आप, खुद के द्वारा निर्मित आपदा, त्रासदी में आप सब के सब लोग जिम्मेदार हैं। ये कौन कह रहा है - ये कांग्रेस पार्टी नहीं कह रही है, मोदी जी, नड्डा साहब ये कांग्रेस पार्टी ने नहीं कहा है।
ये दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित साइंस का जर्नल कह रहा है कि आप लोग प्रिसाइड कर रहे हैं, आप लोग सदारत कर रहे हैं। सबसे बड़ी मानव निर्मित त्रासदी के लिए, खुद के द्वारा निर्मित त्रासदी के लिए, मोदी सरकार द्वारा निर्मित त्रासदी के ऊपर प्रिसाइड अगर कोई कर रहा है, तो वो आप कर रहे हैं। और ये कांग्रेस पार्टी, विपक्षी पार्टी नहीं कह रही है, ये इंटरनेशनल जर्नल कह रहा है। ये कौन कर रहा है कि Task force did not meet for months before April.
ये कौन कह रहा कि टास्क फोर्स मिला ही नहीं है अप्रैल से पहले कई-कई महीने तक। हम क्यों ना कहें कि Modi Government has abdicated from its responsibility. जब आपने जो टास्क फोर्स बनाया है, वो अप्रैल से पहले कई महीनों तक नहीं मिला तो इस चीज के लिए कौन जिम्मेदार है? और ये चीजें हम नहीं कह रहे हैं, ये अंतर्राष्ट्रीय जो मैगजीन हैं, अंतर्राष्ट्रीय जो जर्नल हैं, पीयर रिव्यू जिनका होता है, जिनके कई -कई नोबेल पुरस्कार विजेता एडिटर होते हैं, वो सब लोग मिलकर रहे हैं।
माकन ने कहा कि,''तो मोदी जी, बीजेपी के हमारे सभी नेता कम से कम अब तो जाग जाईए। कम से कम अब तो स्वीकारिए कि क्या गलती है और स्वीकारेंगे नहीं तो किस तरीके से आगे ठीक करेंगे?
उन्होंने कहा,''जीनोम सिक्वेंसिंग के बारे में किसने कहा, सिरो सर्वे को आप लोगों ने अक्टूबर-नवंबर में अगर गंभीरता से ले लिया होता तो आज हमारे यहाँ पर दूसरी, तीसरी वेव ना आई होती। ये कौन कह रहा है, ये इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कह रहा है। ये कौन कह रहा है कि जीनोम ऊपर असर करते हैं तो कोई स्टेट सीधे के सीधे दुनिया के और दूसरे साइंटिस्ट्स से बात करके, सलाह लेकर नहीं कर सकता है और पूरी दुनिया के अंदर नेशनल गवर्मेंट जिसको आगे बढ़कर टेक ओवर कर रही हैं। पूरी दुनिया के अंदर जो नेशनल गवर्मेंट हैं, जो फेडरल गवर्मेंट्स हैं, जो नेशनल गवर्मेंट जो हैं, वो पूरी दुनिया के अंदर, इसके अंदर आगे बढ़कर इसका मुकाबला कैसे किया इसका रास्ता बना रही हैं, इसकी तैयारी कर रही हैं, न कि स्टेट गवर्मेंट, पूरी दुनिया में।
श्री माकन ने कहा कि हम लोग अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। इतिहास इस बात का भी साक्षी रहेगा कि किस-किसने अपनी जिम्मेदारी और अपनी भूमिका छोड़कर भागा। अगर नरेन्द्र मोदी सरकार अपनी भमिका नहीं निभा रही है तो विपक्ष के रूप में हम अपनी भूमिका निभाना नहीं छोड़ सकते हैं। हमारी भूमिका यही है कि हम सरकार को चेताते रहें, बताते रहें, सुझाव देते रहें। सरकार ने तो साइंस का हाथ बिल्कुल छोड़ दिया है, जो कि हमारे साइंस के जर्नल्स भी कह रहे हैं कि आप साइंटिस्ट्स से नहीं पूछ रहे हैं, आप डॉक्टर्स से नहीं पूछ रहे हैं, कौन कैसे निर्णय ले रहा है, ये किसी को भी पता नहीं। तो जब कांग्रेस पार्टी विपक्ष की भूमिका निभाती है, तो कांग्रेस पार्टी के हमारे लीडर्स सभी दुनिया के जो सबसे बेहतरीन से बेहतरीन एक्सपर्ट्स हैं, उनसे बात करके हम लोग हिंदुस्तान के लिए क्या अच्छा सोलूशन हो सकता है, उसको हम निकालकर बताते हैं, और कांग्रेस पार्टी ये करती रहेगी।
''''सेन्ट्रल विस्टा प्रोजैक्ट को लेकर पूछे एक अन्य प्रश्न तथा दिल्ली सरकार ने ये कहा है कि जो प्राइवेट कंपनियों को राज्य ऑर्डर कर रहे हैं स्वतंत्र रुप से, उसमें भी केन्द्र सरकार कोटा तय कर रही है, इसके बारे में क्या कहेंगे, श्री माकन ने कहा कि आज जब देश के अंदर हम लोग देख रहे हैं कि वैक्सीनेशन, पूरी दुनिया में सबसे महंगी वैक्सीनेसन प्राइवेट सेक्टर में हमारे देश में हैं और जो राज्य सरकारों को भी जो 18 से 45 वर्ष के बीच में राज्य सरकारों के ऊपर जो जिम्मेदारी दी गई है, राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति भी ऐसी नहीं है कि वो कर सकें, क्योंकि पूरे के पूरे देश के अंदर वित्तीय स्थिति सरकारों की बहुत ही खराब स्थिति है, तो ऐसे समय में जिस वक्त पूरे देश को वैक्सीनेशन करने की जरुरत है, सबसे जल्दी करने की जरुरत है, तो ऐसे समय के ऊपर 20 हजार करोड़ रुपए इस प्रोजैक्ट के ऊपर खर्च करने का क्या औचित्य है।
ऐसे समय में जबकि हमारे देश को वैंटीलेटर्स की जरुरत है, हमारे देश को ऑक्सीजन की जरुरत है। ऐसे समय में जब हमारे देश में जो मृतक हैं, उनकी गरिमा को भी बरकरार नहीं रखा जा रहा है, उनका भी अंतिम संस्कार ठीक तरह से नहीं हो रहा है, तो ऐसे समय में 20 हजार करोड़ रुपए खर्च करने का क्या औचित्य है। सरकार के द्वारा हम लोग ये पूछना चाह रहे हैं। क्या ये पैसा इस वक्त जरुरी नहीं है कि इस वक्त ये वैक्सीनेशन के ऊपर खर्च हो, चिकित्सा सुविधाओं के ऊपर ये खर्च हो? क्या ये जरुरी नहीं है कि ये पैसा किसी भी तरीके से हमारे जो बेरोजगार हुए लोग हैं, उन लोगों के खातों में डाला जाए ताकि लोग जो अपने गांव की तरफ वापस पलायन कर रहे हैं मजदूर, वो पलायन रुक सके? क्या ये पैसा लोग भूखे न रह सकें, उस चीज के ऊपर खर्च करने के लिए जरूरी नहीं है।
क्या इन सब चीजों से ज्यादा जरुरी सेन्टल विस्टा प्रोजैक्ट है. तो ये हम सरकार से पछना चाहते हैं और दर्भाग्यवश जो जवाब इन्होंने दिया है, ये पूरी तरह से अहंकार पूर्वक है और ये शोभा नहीं देता कि रूलिंग पार्टी के अध्यक्ष इस प्रकार की ऐसी प्रकार की आपदा और मानव निर्मित त्रासदी भी हम साथ में कहेंगे कि जिस तरीके से इस सरकार ने हैंडल किया है ऐसे समय में ये सरकार के रूलिंग पार्टी की तरफ से इस तरह का जवाब आए,ये पूरी तरह से अहंकार युक्त है।
दुसरा सवाल जो आपने वैक्सीन कोटा का कहा है, हम ये नेशनल पैंडेमिक है, इस नेशनल पैंडेमिक के अंदर केन्द्र सरकार इसके अंदर एक रोल प्ले करता है, लेकिन साथ-साथ में हम लोग ये जरुर चाहेंगे कि इसमें कोई भेदभाव न हो। अगर केन्द्र सरकार भी तय करे, तो केन्द्र सरकार इस तरीके से तय करे कि इसके अंदर पॉलिटिकल इस हिसाब से कि अपने राज्य सरकार जहाँ पर हैं, वहाँ पर उस हिसाब से उसको बांटा जाए।
जब ये नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत सारी की सारी चीजें केन्द्र सरकार ने अपने पास रख ली, जिसमें ऑक्सीजन भी है, जिसमें वैक्सीन भी है, तो ऐसे समय में हमारी केवल एक मांग है, जो हम लोगों को सुनने को भी मिलता है, कल वर्किंग कमेटी के अंदर हमारे चीफ मिनिस्टर्स भी कह रहे थे कि उनको ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा मे सही तरीके से एलोकेट नहीं किया जा रहा है और जिस तरीके से रेमडेसिविर का भी एलोकेशन किया गया था, वो एलोकेशन ठीक तरीके से नहीं हुआ था, उसके बारे में हम लोगों ने कहा था। तो हमारा इस वक्त तूतू, मैं-मैं न पड़कर हम केवल केन्द्र सरकार से ये कहना चाहते हैं, कांग्रेस पार्टी ये कहना चाहती है, कि इसको अगर बांटा जाए तो इस तरीके से बांटा जाए कि इसके अंदर कोई राजनीति न हो और इसमें पारदर्शिता भी रहनी चाहिए, तो ये किस हिसाब से बांटा जा रहा है, कितना बांटा जा रहा है, ये सब लोगों के सामने होना चाहिए, इसमें कोई पारदर्शिता होनी चाहिए ये कांग्रेस पार्टी का इस बारे में कहना है।