नई दिल्ली: केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों को लेकर अभी भी किसानों का प्रदर्शन जारी है। किसान भीषण ठंड में भी सड़कों पर डटे हुए हैं।कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन सातवें दिन और जोर पकड़ लिया है| कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'' जब किसान संगठनों को बातचीत के लिए बुलाया गया तो हम सबको उम्मीद थी कि मोदी सरकार किसानों की पुकार सुनेगी और 3 कृषि विरोधी कानूनों को खत्म करने की घोषणा करेगी।लेकिन कृषि मंत्री ने विशेष कमेटी का जुमला पेशकर किसानों के आँखों में धूल झोंकने का काम किया|
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,''क्या पीएम और बीजेपी पार्टी की सरकार बताएगी कि 3 खेती विरोधी कानूनों पर विचार करने के लिए कानून बनाने से पहले ये कमेटी क्यों नहीं बनाई गई। मोदी सरकार ने ये काले कानून चोर दरवाज़े से अध्यादेश बनाकर क्यों लेकर आई|सुरजेवाला ने कहा कि,''जब कांग्रेस और विपक्षी दलों ने देश की संसद में इन कानूनों का विरोध किया था और इन्हें संसद की विशेष समिति में भेजने की मांग रखी थी तो मोदी सरकार ने उस मांग को क्यों नहीं माना। क्या जो काम विशेष कमेटी करेगी वो संसद की विशेष समिति को नहीं करना चाहिए था|
मोदी सरकार राजनैतिक तौर से बेईमान - किसान की पीठ में छुरा घोंप रही! देश में ‘भाजपा सरकार’ नहीं, ‘कंपनी राज’ है - संघर्ष ही इसका इलाज है!! राजनैतिक ‘लॉलीपॉप व झुनझुने’ पकड़ाने की बजाय तीनों खेती विरोधी कानून खत्म करे मोदी सरकार!!!
सुरजेवाला ने कहा कि,''देश का किसान आंदोलनरत है। पिछले एक हफ्ते से देश का किसान ‘करो या मरो’ आंदोलन की राह पर है। किसान-मजदूर की आत्मा कराह रही है, देश की मिट्टी, खेत-खलिहान न्याय मांग रहे हैं, अन्नदाता अपना अधिकार मांग रहा है और मोदी सरकार उन्हें घाव देने में जुटी है।मोदी सरकार राजनीतिक तौर से बेईमान है व किसान की पीठ में छुरा घौंप रही है। देश में BJP सरकार नही, लगता है कंपनी राज है व संघर्ष ही इसका इलाज है। क्या ये महात्मा गांधी जी का भारत है? क्या BJP सरकार के मालिक ‘मुट्ठीभर उद्योगपति’ हैं या इस देश के 130 करोड़ नागरिक?