नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने विपक्षी दलों पर मणिपुर (Manipur) मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि यह साबित हो गया है कि विपक्ष मणिपुर मुद्दे पर सदन में चर्चा नहीं करना चाहता है। सरकार चर्चा के लिए तैयार है, मणिपुर का दौरा करने वाले गृह मंत्री अमित शाह उन्हें वहां के बारे में जानकारी देने को तैयार हैं, जवाब देने को तैयार है। लेकिन, विपक्ष चर्चा से भाग रहा है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि,'विपक्ष मणिपुर मुद्दे पर चर्चा में हिस्सा नहीं लेना चाहता। आज जब यह मुद्दा संसद में उठा तो विपक्ष चर्चा से भाग गया। विपक्ष के व्यवहार से दुखी हूं। मणिपुर उनके (विपक्ष) के लिए सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा है। आज यह साबित हो गया कि वे मणिपुर मुद्दे पर सिर्फ घड़ियाली आंसू बहा रहे थे। यदि उन्हें वास्तव में परवाह होती, तो उन्होंने इस पर चर्चा की होती|
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि,''हमने जब उनकी मणिपुर पर चर्चा की मांग को स्वीकार किया तो उन्होंने प्रधानमंत्री के सदन में आकर जवाब देने की मांग रखी। विपक्ष की ज़िम्मेदारी है कि मसला शांतिपूर्ण समाधान की तरफ बढ़े। वे ऐसे मसले पर भी राजनीति कर रहे हैं... |
AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि,''सरकार मणिपुर पर चर्चा नहीं चाहती। मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था और आज 11 दिन हो गए..अगर पिछले 11 कार्य दिवसों में से एक दिन भी मणिपुर पर चर्चा होती तो बाकी दिनों में विधायी कार्य हो सकते थे|
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि,'68 सांसदों ने मणिपुर पर चर्चा के लिए नोटिस दिया था लेकिन सरकार इससे भाग रही है। वे (सरकार) चाहते हैं कि चर्चा आधा या एक घंटे से कम हो और उस दौरान भी विपक्ष के लोग न बोले। प्रधानमंत्री को सदन में आना होगा और इस मुद्दे पर बोलना होगा|
TMC सांसद डेरेक ओब्रायन ने कहा कि,'मणिपुर बहुत गंभीर मुद्दा है, प्रधानमंत्री क्यों नहीं आ सकते? हम सभी मणिपुर पर चर्चा के लिए तैयार हैं...हम मणिपुर मुद्दे पर इमरजेंसी रूल के तहत चर्चा चाहते हैं|
कांग्रेस सांसद फूलोदेवी नेताम ने कहा कि,' राहत शिविरों में न ढंग के खाने की व्यवस्था है न शौचालय है। लोग बच्चों के लिए दवाएँ तक खरीद नहीं पा रहे। महिलाएं रोते हुए न्याय की मांग कर रही थी... |