नई दिल्ली: केंद्र सरकार के राज्यों को जीएसटी भुगतान के लिए दिए जाने वाले 'आश्वासन पत्र' (लेटर ऑफ कंफर्ट) पर निशाना साधते हुए पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा ये सभी आश्वासन के ही शब्द हैं और इसका कोई मतलब नहीं है।
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि जरूरत है हार्ड कैश की। केंद्र सरकार के पास कई तरीके हैं जिसका उपयोग कर वो राज्यों को जीएसटी का भुगतान कर सकती है।
पी. चिदम्बरम ने कहा कि,''सरकार का कहना है कि वह राज्यों को जीएसटी मुआवजा के अंतर को पाटने के लिए 'लेटर ऑफ कम्फर्ट’ देगी, जिससे वो उधार ले सके। ये सिर्फ कागज के टुकड़े पर बेवकूफ बनाने वाले शब्द हैं, जिनकी कोई कीमत नहीं है। उन्होंने कहा,''राज्यों को नकद राशि की जरूरत है।
चिदम्बरम ने कहा कि,'' केवल केंद्र सरकार के पास संसाधनों को बढ़ाने और राज्यों को जीएसटी मुआवजे में कमी का भुगतान करने के लिए कई विकल्प और लचीलापन है। यदि राज्यों को उधार लेने के लिए मजबूर किया जाता है, तो उन राज्यों द्वारा पूंजीगत व्यय पर कुल्हाड़ी निश्चित ही गिर जाएगी, जो पहले से ही कटौती का सामना कर चुके हैं।
बता दें कि,''केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को जीएसटी के भुगतान के लिए ‘लेटर ऑफ कम्फर्ट दिया है|केंद्र की ओर से दिए गए लेटर ऑफ कम्फर्ट यानी आश्वासन पत्र को पंजाब, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्य ठुकरा चुके हैं| छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मांग की है कि केंद्र सरकार 2,828 करोड़ रूपए तुरंत उपलब्ध कराए जो कि 2020-21 की बकाया राशि है।
वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलनिस्वामी ने पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है और मांग की है कि राज्यों को जीएसटी से हुए नुकसान की पूरी भरपाई हो| उन्होंने कहा कि ये जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है| राज्यो से ये कहना कि वो खुद ही कर्ज ले, इससे राज्यों के संसाधनों पर असर पड़ेगा|
जीएसटी के भुगतान को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है| राज्य सरकारें केंद्र से जीएसटी का बकाया जल्द देने की मांग कर रही हैं| दूसरी तरफ केंद्र ने साफ कर दिया है कि उसके पास पर्याप्त धन नहीं है|