नई दिल्ली: राष्ट्र को संबोधित करते हुए PM नरेंद्र मोदी ने कहा,,भारत कोरोना की लहर के दौरान बहुत बड़ी पीड़ा से गुजरा है। हममे से कई लोगों ने अपनों को खोया है। ऐसे परिवारों के प्रति मेरी संवेदना है। बीते 100 सालों में आई यह सबसे बड़ी महामारी है। इस तरह की महामारी आधुनिक विश्व ने कभी नहीं देखी थी| कोविड से लड़ने के लिए पिछले सवा साल में देश में नया हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया। दूसरी लहर के दौरान मेडिकल ऑक्सीजन की मांग बढ़ गई थी। इसे पूरा करने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया गया। ऑक्सीजन को पूरा करने के लिए सरकार के सभी तंत्र काम में लग गए|
PM नरेंद्र मोदी ने कहा,''कोरोना से लडाई में वैक्सीन हमारे लिए सुरक्षा कवच की तरह है। आज अगर हमारे पास वैक्सीन नहीं होती तो भारत जैसे विशाल देश की क्या स्थिति होती? कई दशक पहले भारत को विदेशों से वैक्सीन लेने के लिए दशकों लग जाते थे। आज भारत ने एक साल के अंदर 'मेड इन इंडिया' वैक्सीन लांच कर दी|
मोदी ने कहा,''देश में अब तक 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज़ दी जा चुकी है। आने वाले दिनों में कोरोना वैक्सीन की सप्लाई बढ़ने वाली है। देश में 7 विभिन्न कंपनियां वैक्सीन का उत्पादन कर रही हैं। अन्य 3 वैक्सीन का ट्रायल भी चल रहा है। बच्चों के लिए भी दो वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है| देश में नेजल वैक्सीन पर अनुसंधान जारी है। इसे सिरिंज से ना लेकर नाक में स्प्रे किया जाएगा। अगर यह ट्रायल सफल हो गया तो इससे भारत के वैक्सीन अभियान में और भी तेजी आएगी|
PM नरेंद्र मोदी ने कहा,''जो लोग भी वैक्सीन को लेकर आशंका पैदा कर रहे हैं, अफवाहें फैला रहे हैं, वो भोले-भाले भाई-बहनों के जीवन के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसी अफवाहों से सतर्क रहने की जरूरत है| पीएम मोदी ने टीकों के बारे में अफवाहों के प्रति आगाह किया, युवाओं से टीकाकरण के लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाने को कहा|
देश में कम होते कोरोना के मामलों के बीच, केंद्र सरकार के सामने अलग-अलग सुझाव भी आने लगे, भिन्न-भिन्न मांगे होने लगीं। पूछा जाने लगा, सब कुछ भारत सरकार ही क्यों तय कर रही है? राज्य सरकारों को छूट क्यों नहीं दी जा रही? राज्य सरकारों को लॉकडाउन की छूट क्यों नहीं मिल रही? One Size Does Not Fit All जैसी बातें भी कही गईं|
इस साल 16 जनवरी से शुरू होकर अप्रैल महीने के अंत तक, भारत का वैक्सीनेशन कार्यक्रम मुख्यत: केंद्र सरकार की देखरेख में ही चला। सभी को मुफ्त वैक्सीन लगाने के मार्ग पर देश आगे बढ़ रहा था। देश के नागरिक भी, अनुशासन का पालन करते हुए, अपनी बारी आने पर वैक्सीन लगवा रहे थे| इस बीच, कई राज्य सरकारों ने फिर कहा कि वैक्सीन का काम डी-सेंट्रलाइज किया जाए और राज्यों पर छोड़ दिया जाए। तरह-तरह के स्वर उठे। जैसे कि वैक्सीनेशन के लिए Age Group क्यों बनाए गए? | दूसरी तरफ किसी ने कहा कि उम्र की सीमा आखिर केंद्र सरकार ही क्यों तय करे? कुछ आवाजें तो ऐसी भी उठीं कि बुजुर्गों का वैक्सीनेशन पहले क्यों हो रहा है? भांति-भांति के दबाव भी बनाए गए, देश के मीडिया के एक वर्ग ने इसे कैंपेन के रूप में भी चलाया: PM
आज ये निर्णय़ लिया गया है कि राज्यों के पास वैक्सीनेशन से जुड़ा जो 25 प्रतिशत काम था, उसकी जिम्मेदारी भी भारत सरकार उठाएगी। ये व्यवस्था आने वाले 2 सप्ताह में लागू की जाएगी। इन दो सप्ताह में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नई गाइडलाइंस के अनुसार आवश्यक तैयारी कर लेंगी| 21 जून, सोमवार से देश के हर राज्य में, 18 वर्ष से ऊपर की उम्र के सभी नागरिकों के लिए, भारत सरकार राज्यों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराएगी। वैक्सीन निर्माताओं से कुल वैक्सीन उत्पादन का 75 प्रतिशत हिस्सा भारत सरकार खुद ही खरीदकर राज्य सरकारों को मुफ्त देगी: PM
देश की किसी भी राज्य सरकार को वैक्सीन पर कुछ भी खर्च नहीं करना होगा। अब तक देश के करोड़ों लोगों को मुफ्त वैक्सीन मिली है। अब 18 वर्ष की आयु के लोग भी इसमें जुड़ जाएंगे। सभी देशवासियों के लिए भारत सरकार ही मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध करवाएगी| देश में बन रही वैक्सीन में से 25 प्रतिशत, प्राइवेट सेक्टर के अस्पताल सीधे ले पाएं, ये व्यवस्था जारी रहेगी। प्राइवेट अस्पताल, वैक्सीन की निर्धारित कीमत के उपरांत एक डोज पर अधिकतम 150 रुपए ही सर्विस चार्ज ले सकेंगे। इसकी निगरानी करने का काम राज्य सरकारों के ही पास रहेगा: PM