नई दिल्ली:मध्यप्रदेश के गुना में मंगलवार को अतिक्रमण हटाने के लिए गई पुलिस ने किसान दंपति की लाठियों से पिटाई कर दी। इसके बाद दंपति ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की है। किसान दंपति की लाठियों से पिटाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसपर लगातार रिएक्शन आ रहे है|
इस घटना को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने BJP पर निशाना साधा और कहा हमारी लड़ाई इसी सोच और अन्याय के ख़िलाफ़ है| गुना में किसान दंपति पर पुलिसिया कहर का VIDEO ट्वीट कर राहुल गांधी ने कहा हमारी लड़ाई इसी सोच और अन्याय के ख़िलाफ़ है|
MP के गुना में कैंट थानान्तर्गत जगनपुर चक पर लगभग बीस बीघा जमीन है, जिस पर लंबे समय से गब्बू पारदी खेती कर रहा है। इससे सटी हुई जमीन पर नानाखेड़ी का रहने वाला एक दलित परिवार राजू और उसकी पत्नी सावित्री बटाई पर खेती कर रही है। राजू अपने छह छोटे-छोटे बच्चों के साथ उस जमीन पर एक अस्थाई झोपड़ी बनाकर रह रहा है। इस जमीन को कुछ समय पूर्व शासकीय मानकर मॉडल कॉलेज बनने के लिए शासन ने वह जमीन आवंटित की थी। जिस पर जल्द काम शुरू होना है। मॉडल कॉलेज का निर्माण करने वाली एजेन्सी का कहना था कि प्रशासन उनको जमीन खाली करके दे। इसी आशय से एसडीएम शिवानी रायकवार के निर्देश पर प्रभारी तहसीलदार निर्मल राठौर के नेतृत्व में मंगलवार को पटवारियों, आरआई के फौज-फाटा के साथ उक्त जमीन को खाली कराने पहुंचे। जमीन को देखने के बाद वहां से अतिक्रमण हटाने के लिए जेसीबी बुलवाई।
मेहनत करके खेत में बाजरा लगाने वाले दलित परिवार ने जैसे ही जेसीबी चलती देखी, वैसे ही उसने पत्नी व बच्चे समेत झोपड़ी तरफ दौड़ लगा दी। झोपड़ी में जाते ही पहले पत्नी सावित्री ने इल्ली की दवा पी ली, पति राजू ने छोटे-छोटे बच्चों को वह दवा पिलाने का प्रयास किया, इसके बाद स्वयं पी ली। यह देखकर हडक़म्प मच गया। सावित्री तो दवा के पीने के बाद बेहोश हो गई, उसकी छाती पर एक बच्ची बैठी और बुरी तरह बिलखने लगी और दूसरे बच्चे वहीं पास में पड़े बेहोश पिता को हिलाकर होश में लाने का प्रयास करते बिलख रहे थे।
जेसीबी की कार्रवाई तक तो पुलिसकर्मी शांत खड़े थे, बेहोशी महिला को टांग कर जब वाहन तक लाया जा रहा था, इसी बीच राजू का छोटा भाई शिशुपाल भागकर आया और उसने देखा कि उसको भाभी को पुलिस ले जा रही है, वह उनके पीछे दौड़ पड़ा, उसने जैसे ही एक महिला पुलिस कर्मी को धक्का दिया, यह देखते ही पुलिस कर्मियों को गुस्सा आ गया और उसको समझाया, न समझ में आने पर जमकर लाठियां चलाईं, जिससे वह बेहोश हो गया, इसको बचाने आई एक महिला की पुलिस ने पिटाई ही नहीं की बल्कि झूमा-झटकी में उस महिला के कपड़े तक फट गए। छोटे-छोटे बच्चे के बिलखने और हंगामा देखते प्रशासनिक टीम बगैर कार्रवाई के जेसीबी को लेकर वापस लौट आई।
बताया गया कि इस दलित परिवार के जहर खाने के बाद इनको अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस को बुलाते रहे, लेकिन एम्बुलेंस नहीं आई, अंत में पुलिस के वाहन से इनको अस्पताल भेजा गया।
दलित राजू अहिरवार का कहना था कि मेरे छोटे-छोटे छह बच्चे हैं, मैं बहुत गरीब हूं, मुझ पर तीन लाख रुपये का कर्जा है उसको पटाने के लिए मैं यहां बटाई से खेती कर रहा हूं। मुझे खेती कर लेने दो, नहीं तो हमारे परिवार को जहर दे दो, हम सब मर जाएं।
इस जमीन पर कुछ समय पूर्व एसडीएम शिवानी रायकवार के नेतृत्व में एक प्रशासनिक टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची थी, उस समय गब्बू पारदी के परिवार की महिलाओं से विवाद हुआ था। इस विवाद में एक पारदी महिला ने एक छोटे बच्चे को सडक़ पर फेंक दिया था, जिसके बाद काफी हंगामा हुआ था। कुछ दिन बाद प्रशासनिक टीम ने वहां से अतिक्रमण हटा दिया। प्रशासन ने कोई इंतजाम नहीं किया तो पुन: उस जमीन पर खेती होने लगी। जमीन की नापतौल के समय मंगलवार को फिर पारदी जाति की महिलाओं ने विरोध किया। इसको देखते हुए प्रशासनिक टीम अपने वरिष्ठ अधिकारियों और जेसीबी के आने का वहां से हटकर दूसरी जगह इंतजार करती रही। पारदी जाति की महिलाओं का कहना था कि जिस समय जमीन खाली थी, उस समय ये टीम क्यों नहीं आती। फसल लगते ही अधिकारियों को शासकीय जमीन खाली कराने की सुध आ जाती है। उन्होंने कहा कि इस जमीन को लेकर न्यायालय में हमारा शासन से विवाद चल रहा है