नई दिल्ली: केंद्र ने सोमवार को लोकसभा में बताया है कि प्रवासी मजदूरों की मौत पर सरकार के पास आंकड़ा नहीं है, ऐसे में मुआवजा देने का 'सवाल नहीं उठता है| केंद्र के लॉकडाउन के दौरान कितने मज़दूरों की मौत हुई' नहीं पता वाले बयान पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर हमला बोला है|कांग्रेस नेता ने कहा कि,लॉकडाउन में कितने प्रवासी मज़दूरों की मौत हुई मोदी सरकार ने नहीं गिना तो क्या मौत ना हुई?
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया,'मोदी सरकार नहीं जानती कि लॉकडाउन में कितने प्रवासी मज़दूर मरे और कितनी नौकरियाँ गयीं। तुमने ना गिना तो क्या मौत ना हुई? हाँ मगर दुख है सरकार पे असर ना हुई, उनका मरना देखा ज़माने ने, एक मोदी सरकार है जिसे ख़बर ना हुई।
बता दें कि कल संसद में केंद्र सरकार ने पूछा गया था कि लॉकडाउन के दौरान कितने प्रवासी मजदूरों की मौत हुई, क्या सरकार के पास इसके संबंध में कोई डाटा है। इस पर केंद्र ने कहा कि सरकार के पास प्रवासी मजदूरों की मौत की संख्या को लेकर कोई डाटा उपलब्ध नहीं है।
दरअसल, केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय से लोकसभा में जानकारी मांगी गई थी कि क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि कितने प्रवासी मजदूरों ने अपने मूल निवास लौटने की कोशिश में जान गंवाई और क्या सरकार के पास राज्यवार आंकड़ा मौजूद है।इस सवाल का जवाब देते हुए मंत्रालय ने कहा कि 25 मार्च से लगाए गए लॉकडाउन प्रतिबंधों के कारण होने वाली प्रवासी मजदूरों की मौतों की संख्या पर सरकार के पास कोई आंकड़ा या डाटा नहीं है।
मंत्रालय ने कहा कि चूंकि इस तरह का डेटा नहीं जुटाया गया था, इसलिए पीड़ितों या उनके परिवारों को मुआवजे का सवाल ही नहीं उठतागौरतलब है कि 68 दिनों के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान कई प्रवासी श्रमिकों ने अपनी जान गंवाई।इस दौरान सैकड़ों मील चले कई मजदूरों की या तो भूख-प्यास से मौत हो गई थी फिर कुछ सड़क हादसों में मारे गए थे|