मुख्य सामग्री पर जाएँ
24 अगस्त 2026

शिवसेना: शिवसेना और अकाली दल द्वारा ‘एनडीए’ को राम-राम कर दिए जाने से एनडीए में अब कोई राम बचा है क्या? चलो अच्छा हुआ पीछा छूटा की..

नई दिल्ली: कृषि विधेयक के विरोध में बीजेपी के सबसे पुरानी सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने केंद्र में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के एनडीए को छोड़ दिया है| शिरोमणि अकाली दल के एनडीए छोड़ने पर शिवसेना ने कहा कि…

शिवसेना: शिवसेना और अकाली दल द्वारा ‘एनडीए’ को राम-राम कर दिए जाने से एनडीए में अब कोई राम बचा है क्या? चलो अच्छा हुआ पीछा छूटा की..
शिवसेना: शिवसेना और अकाली दल द्वारा ‘एनडीए’ को राम-राम कर दिए जाने से एनडीए में अब कोई राम बचा है क्या? चलो अच्छा हुआ पीछा छूटा की.. | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: कृषि विधेयक के विरोध में बीजेपी के सबसे पुरानी सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने केंद्र में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के एनडीए को छोड़ दिया है| शिरोमणि अकाली दल के एनडीए छोड़ने पर शिवसेना ने कहा कि, पंजाब के अकाली दल ने भी NDA छोड़ दिया है। चलो अच्छा हुआ पीछा छूटा की तर्ज पर उनका इस्तीफा तुरंत स्वीकार कर लिया गया। उन्हें लगा था कि उनसे कहा जाएगा कि वे विचलित न हों, ऐसा कदम न उठाएं लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ|



शिवसेना ने कहा कि,केंद्र सरकार की सत्ता हाथ में है तो कुछ भी असंभव नहीं है, लेकिन सत्ता का ‘किला’ भले जीत लिया हो पर वे NDA के दो शेरों को गंवा चुके हैं, इस तथ्य से कैसे इनकार किया जा सकता है? 



मुखपत्र सामना शिवसेना ने कहा कि पंजाब के अकाली दल ने भी एनडीए अर्थात राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन छोड़ दिया है। उनका भाजपा के साथ एक लंबा जुड़ाव था, लेकिन अब वो छूट गया है। अकाली दल के सर्वेसर्वा प्रकाश सिंह बादल की बहू पहले ही किसानों के मुद्दों पर केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे चुकी हैं। चलो अच्छा हुआ पीछा छूटा की तर्ज पर उनका इस्तीफा तुरंत स्वीकार कर लिया गया। उन्हें लगा था कि उनसे कहा जाएगा कि वे विचलित न हों, ऐसा कदम न उठाएं लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। अब भले ही बादल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन छोड़ दिया हो, लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि उन्हें रोकने का कोई प्रयास नहीं हुआ। 




शिवसेना ने कहा कि,''अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने केंद्र सरकार पर किसानों के मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। केंद्र सरकार ने कृषि विधेयक को जबरन पारित किया है। हम सरकार के एक साथी दल थे लेकिन हमें विश्वास में नहीं लिया गया, ऐसा सुखबीर सिंह बादल का कहना है| आखिरकार, अकाली दल को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से हटना पड़ा और भाजपा ने एक और पुराने, सच्चे सहयोगी के छोड़ने पर आंसू की एक बूंद भी नहीं बहाई। इससे पहले शिवसेना को एनडीए छोड़ना पड़ा।




शिवसेना ने कहा कि,'' अब अकाली दल बाहर हो गया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के दो मुख्य स्तंभों के बाहर हो जाने से क्या वास्तव में कोई एनडीए बचा है? यह सवाल बना हुआ है। आज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में कौन है, यह शोध का विषय है। जो हैं उनका हिंदुत्व के साथ कितना संबंध है? पंजाब और महाराष्ट्र, दोनों मर्दाना तेवर वाले राज्य हैं। अकाली दल और शिवसेना उस मर्दानगी का चेहरा हैं। इसलिए उसका राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बजाय भाजपा नीत वाले गठबंधन के रूप में उल्लेख करना होगा। 




शिवसेना ने कहा कि,''वोटों के विभाजन से बचने के लिए, महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ गठबंधन किया गया था और बाद में कांग्रेस के खिलाफ ‘एनडीए’ के रूप में एक मजबूत गठबंधन बनाया गया। इस गठबंधन में कई उतार-चढ़ाव आए। सत्ता आई, सत्ता गई। कई सहयोगी दल अपनी सुविधानुसार निकल गए, लेकिन राजग के दो स्तंभ शिवसेना और अकाली दल, भाजपा के साथ बने रहे। इन दोनों दलों द्वारा ‘एनडीए’ को राम-राम कर दिए जाने से एनडीए में अब कोई राम बचा है क्या? 



,''प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, भाजपा ने दो आम चुनाव जीते। कई राज्यों में उनकी सत्ता है। जहां वे अल्प मत में थे, वहां भी कुछ-न-कुछ जुगाड़ करके सत्ता हासिल की।  अगर केंद्र सरकार की सत्ता हाथ में है तो कुछ भी असंभव नहीं है, लेकिन सत्ता का ‘किला’ भले जीत लिया हो पर वे एनडीए के दो शेरों को गंवा चुके हैं, इस तथ्य से कैसे इनकार किया जा सकता है? 




शिवसेना ने कहा कि,''आज देश की राजनीति को एकतरफा शासन की ओर धकेला जा रहा है। हालांकि, कई राज्यों में भाजपा को गठबंधन करके ही चुनावी मैदान में उतरना पड़ रहा है। महाराष्ट्र में ये स्थिति है कि शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी सरकार अच्छा काम कर रही है और सरकार पांच साल चलेगी। भविष्य में देश की राजनीति में उथल-पुथल मचानेवाला गठबंधन तैयार होगा क्या? इसका ट्रायल शुरू रहता है। लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से शिवसेना के बाद अकाली दल के बाहर हो जाने से राष्ट्रीय राजनीति बेस्वाद हो गई है। 




कांग्रेस आज भी एक बड़ी पार्टी है। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव जीते बिना राजनीतिक महानता साबित नहीं होती। जिन कारणों से ‘एनडीए’ की स्थापना हुई, वे कारण ही मोदी के बवंडर में नष्ट हो गए। इस सत्य को स्वीकार करके नया झंडा फहराना होगा। फिलहाल ‘एनडीए’ का आखिरी ‘स्तंभ’ अकाली दल भी हट गया है। राष्ट्रीय स्तर पर हिंदुत्व की राजनीति इससे निस्तेज होती दिख रही है। नए सूर्य का उदय होगा क्या?





tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

मुफ़्त अलर्ट

ऐसी हर खबर सबसे पहले पाएँ

बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अपडेट सीधे आपके WhatsApp पर।

इन्हें भी पढ़ें

टॉप न्यूज़ की सभी खबरें

इस खबर से जुड़े सवाल

यह खबर कब प्रकाशित हुई और आखिरी बार कब अपडेट की गई?

यह रिपोर्ट 28 सितंबर 2020 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

इस क्षेत्र की और खबरें कहाँ पढ़ें?

इस क्षेत्र की ताज़ा खबरें TVL News के ज़िला सेक्शन में पढ़ी जा सकती हैं। thevirallines.net पर बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अलग-अलग पेज हर दिन अपडेट होते हैं।

इस खबर में कोई तथ्य ग़लत लगे तो क्या करें?

TVL News हर सुधार को गंभीरता से लेता है। +91 99996 56869 पर WhatsApp करें या thevirallines@gmail.com पर लिखें — पुष्टि के बाद खबर तुरंत सुधारी जाती है।