कन्नौज: कन्नौज में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा,“SBI और LIC जैसी कंपनियों में जनता ने पैसा निवेश किया है और वो डूब रहा है, तो उनके चेयरमैन जेल क्यों नहीं भेजे जा रहे हैं| सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव ने कहा, उद्योगपतियों की कम्पनियों में निवेश कराने वाले केंद्र की मोदी सरकार के लोग क्या जेल जाएंगे?| अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा बढ़ती मंहगाई, बेरोजगारी और हो रहे अन्याय के सवालों से बचने के लिए रणनीति के तहत नाम बदलती है।
दरअसल, हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी समूह पर 'कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े घोटाले' का आरोप लगाया था| रिसर्च ने ‘स्टॉक हेरफेर और लेखा धोखाधड़ी’ का आरोप लगाया था| अडानी ग्रुप की 7 प्रमुख लिस्टेड कंपनियां 85 फीसदी से अधिक ओवरवैल्यूज हैं। इस आरोप के बाद विविध कारोबार से जुड़े समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई है|
बैंकों ने अडानी ग्रुप की कंपनियों को करीब 80,000 करोड़ रुपये का कर्ज दे रखा है। दूसरी ओर एलआईसी (LIC) का अडानी ग्रुप की कंपनियों में 70,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश है। इस कर्ज और निवेश के डूबने की आशंका से बैंकों और एलआईसी के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई|
कन्नौज दौर पर पहुंचे अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ,SBI और LIC जैसी कंपनियों में जनता ने पैसा निवेश किया है और वो डूब रहा है, तो उनके चेयरमैन जेल क्यों नहीं भेजे जा रहे हैं|
उन्होंने कहा,“देश गहरे आर्थिक संकट में फंसता जा रहा है। एलआईसी बिक गई। एस.बी.आई डूबने जा रही है। महंगाई बढ़ रही है, बेरोजगारी ऐतिहासिक स्तर पर है। भाजपा सरकार की गलत नीतियों के चलते देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है। चंद उद्योगपति मित्रों की आमदनी में बेतहाशा वृद्धि हुई है। देश की कई आर्थिक संस्थाएं संकट में पड़ गई हैं। भाजपा को इन बड़े सवालों का जवाब देना होगा।
अखिलेश यादव ने कहा,“ जिस तरह यूपी में कर्मचारियों का पैसा एक प्राईवेट फर्म में निवेश कराने वाले कई लोगों को जेल जाना पड़ा, उद्योगपतियों की कम्पनियों में निवेश कराने वाले भारत सरकार के लोग क्या जेल जाएंगे?
इससे पहले, अन्य विपक्षी नेताओं ने भी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के अडानी समूह से संपर्क को लेकर चिंता जताई और इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया था|
शनिवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य रणदीप सुरजेवाला ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर अडानी शेयरों के गिरते मूल्य के कारण सरकार-नियंत्रित वित्तीय संस्थानों (एलआईसी और एसबीआई) के बाजार पूंजीकरण में गिरावट दिखाने के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा का उपयोग किया है|
यह देखते हुए कि एलआईसी को ‘जनता के धन’ द्वारा वित्तपोषित किया गया था, सुरजेवाला ने कहा कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद अडानी समूह के शेयरों में एलआईसी के निवेश का मूल्य 77,000 करोड़ रुपये से गिरकर 53,000 करोड़ रुपये हो गया, जिसके परिणामस्वरूप 23,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ| यही नहीं एलआईसी के शेयरों को 22,442 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ|
उन्होंने पूछा कि एलआईसी अभी भी अडानी समूह में 300 करोड़ रुपये का निवेश क्यों कर रही है?
एसबीआई के संबंध में सुरजेवाला ने कहा कि इसके बाजार पूंजीकरण में 54,618 करोड़ रुपये की भारी गिरावट आई है. अडानी समूह के लिए बैंकिंग क्षेत्र का ऋण जोखिम 81,200 करोड़ रुपये था, इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने सवाल किया कि एसबीआई कर्मचारी पेंशन फंड और एसबीआई लाइफ अभी भी अडानी समूह में 225 करोड़ रुपये का निवेश क्यों कर रहे हैं?
उन्होंने कहा, ‘24 और 27 जनवरी के बीच यानी 3 दिनों में एसबीआई और एलआईसी ने अकेले अपने शेयरों के मूल्य में 78,118 करोड़ रुपये की ‘बाजार पूंजी’ खो दी है! अडानी समूह में एसबीआई का ऋण जोखिम और एलआईसी के निवेश मूल्य में गिरावट इसके अतिरिक्त है|’
कांग्रेस नेता ने यह भी पूछा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी केंद्रीय एजेंसियों के साथ-साथ केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण क्यों इस मामले पर ‘चुप्पी’ साधे हुए हैं?
शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, ‘एलआईसी ने पिछले दो दिनों में अपनी होल्डिंग में 22 प्रतिशत की गिरावट देखी| इसके शेयर की कीमत दिन के दौरान 3.5 प्रतिशत और दो दिनों में 5.3 प्रतिशत गिर गई| यह भारतीय लोगों की गाढ़ी कमाई है, जिसे चूसा जा रहा है| उम्मीद है कि सेबी और आरबीआई देख रहे हैं और कार्रवाई कर रहे हैं|’
वहीँ, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद Jawhar Sircar ने कहा, ‘सरकार में 40 साल तक रहने के बाद मैं जानता हूं कि एलआईसी के बड़े निवेशों को वित्त मंत्री या प्रधानमंत्री से मंजूरी की जरूरत होती है| पता नहीं क्यों वे मध्यम वर्ग की जरूरतों को पूरा करने वाले एक उत्कृष्ट संस्थान को नष्ट करने पर उतारू हैं!’| उन्होंने आगे कहा, ‘स्विस क्रेडिट साइट्स ने बहुत पहले चेतावनी दी थी| मोदी सरकार ने नहीं सुनी| हमारे बैंक अब डूब जाएंगे| आपका पैसा, मेरा पैसा डूब जाएगा, जबकि अडानी बिना किसी दंड के मुक्त हो जाएगा|’
TMC सांसद ने कहा, ‘,अडानी के घोटाले से पता चलता है कि कैसे सभी नियामक निकाय – आरबीआई, वित्त मंत्रालय, सेबी, ईडी सीबीआई, एनएसई आदि – विफल हो गए थे या उन्हें विफल कर दिया गया था| ये सभी मोदी के अपने आदमियों से भरे हुए हैं| न जाने भारत इस मोदी मित्र के कारण कितना कुछ खोएगा|