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27 सितंबर 2026

भाजपा की नीतियों से कृषि अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट और बर्बाद हो गई: अखिलेश यादव

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा की नीतियों से कृषि अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट और बर्बाद हो गई है। किसान प्राकृतिक आपदा से ज्यादा सरकारी…

भाजपा की नीतियों से कृषि अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट और बर्बाद हो गई: अखिलेश यादव
भाजपा की नीतियों से कृषि अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट और बर्बाद हो गई: अखिलेश यादव | फ़ोटो: TVL News

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा की नीतियों से कृषि अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट और बर्बाद हो गई है। किसान प्राकृतिक आपदा से ज्यादा सरकारी रवैये से संकट में है। भाजपा ने कर्ज माफी, आय दुगनी करने तथा उपज की उत्पादन लागत का डेढ़ गुना दाम देने के झूठे वादों से उसके वोट ले लिए और फिर कारपोरेट के पास उसको बंधक बनाने की साजिश को अंजाम दे दिया।



अखिलेश यादव ने कहा है कि,'आज बेमौसम बरसात और धान की खरीद में भ्रष्टाचार के चलते किसान बदहाली में है और सरकार उसके प्रति संवेदनाशून्य व्यवहार कर रही है। ऐसे में किसान आत्महत्या न करेंगे तो क्या करे? बेमौसम बरसात में खेतों में तैयार और खलिहान में पड़ी धान की काफी फसल खराब हो गई है। तिलहनी फसलों को भी नुकसान हुआ है। कई स्थानों पर धान क्रय केन्द्रों के बाहर खुले में रखा धान भी भीगकर खराब हो गया। पराली जलाने को लेकर भी किसानों का उत्पीड़न हो रहा है। 




अखिलेश यादव ने कहा है कि,'किसान के धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1888 रूपए प्रति कुंतल है किन्तु बाजार में उसे हजार, बारह सौ रूपये में ही धान बेचना पड़ रहा है। धान क्रय केन्द्रों पर किसान को अपमानित किया जाता है। धान की खरीद में कई बाधाएं डाली जाती हैं। धान की क्वालिटी, नमी आदि कमियां बता कर किसान लौटा दिया जाता है। उसे खाद के दाम भी देने में देरी की जाती है।




अखिलेश यादव ने कहा है कि,'किसान को बाजार से मंहगा डीजल, खाद, कीट नाशक, खेती के उपकरणों की खरीद करनी पड़ती है। भाजपा राज में एक अक्टूबर 2020 से डीएपी खाद पर 50 रूपये और एन.पी.के. खाद पर 78 रूपये प्रति बोरी दाम बढ़े हैं। सरकारी देयों की वसूली बेरहमी से की जा रही है। किसान को आसानी से बैंकों से कर्ज नहीं मिल रहा है। फलतः वह किसी न किसी साहूकार के चंगुल में फंसना पड़ता है। जब घर-बाहर से वह सब तरफ से निराश, हताश हो जाता है तो अवसाद का शिकार होता है।




अखिलेश यादव ने कहा है कि,'किसानों को इस वर्ष धान की फसल से बहुत उम्मीदे थी। मकान की मरम्मत के अलावा पिछला कर्ज चुकाने के साथ बेटे-बेटी की शादी ब्याह, पढ़ाई का खर्च भी उसे इसी की आय से चलाना था। लेकिन भाजपा सरकार में उसे मंहगाई से लेकर भ्रष्टाचार तक की मार सहनी पड़ रही है। भाजपा सरकार ने अब ऐसी व्यवस्था की है कि किसान का खेत पर मालिकाना हक समाप्त हो जाएगा और अब उसकी खेती भी कारपोरेट की शर्त पर होगी।




अखिलेश यादव ने कहा है कि,'सच तो यह है कि किसान भगवान भरोसे ही जिंदा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही सरकारों में उसे शोषण और उत्पीड़न का शि???ार होना पड़ा है। अब किसान सन् 2022 के विधानसभा चुनावों की ही प्रतीक्षा कर रहा है जब वह अपने मन की नई समाजवादी सरकार चुनेगा और भ्रष्ट भाजपा से निजात पा सकेगा।





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यह रिपोर्ट 18 नवंबर 2020 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 26 सितंबर 2026 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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