ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जूनियर डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर सामूहिक इस्तीफा दिया था। कल यानी गुरुवार को मांगें पूरी न होने पर ग्वालियर में 3000 जूनियर डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया था| 3000 जूनियर डॉक्टरों के सामूहिक इस्तीफे पर जबलपुर रेंज के कमिश्नर ने कहा,''जूनियर डॉक्टरों का इस्तीफा मायने नहीं रखता है| जूनियर डॉक्टरों के इस्तीफे का कोई महत्व नहीं है क्योंकि वे शासकीय कर्मचारी नहीं हैं|
ग्वालियर में 3000 जूनियर डॉक्टरों के सामूहिक इस्तीफे पर जबलपुर रेंज के कमिश्नर ने कहा,'''जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल की है और उच्च न्यायालय ने इस हड़ताल को गैरकानूनी बताया है। न्यायालय ने डॉक्टरों से कहा है कि वे हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटें। जूनियर डॉक्टरों के इस्तीफे का कोई महत्व नहीं है क्योंकि वे शासकीय कर्मचारी नहीं हैं|
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने कहा,'हमने उनसे बात की और बातें मानी भी। वे हमसे बात नहीं करना चाह रहे हैं।हाईकोर्ट ने कहा है कि हड़ताल असंवैधानिक है,वे काम पर लौटें।उन्हें हाईकोर्ट के निर्णय का पालन करना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि मरीज का अहित न हो|
गौरतलब है कि,''कोरोना संकट के बीच मांगें पूरी न होने पर ग्वालियर में 3000 जूनियर डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है| वहीं जबलपुर में 400 डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया था और भोपाल में भी जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (juda) ने भी आंदोलन जारी रखने और सामूहिक इस्तीफे का ऐलान किया है|
एक जूनियर डॉक्टर ने बताया था, मध्य प्रदेश में सभी 3000 जूनियर डॉक्टरों ने सामुहिक इस्तीफा दिया है। ये हमारी मजबूरी है। हम अपने माननीय से अनुरोध करते हैं कि हमारी मांगे मानी जाएं।"
भोपाल के गांधी चिकित्सा महा विद्यालय में अपनी मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल आज भी जारी है। महासचिव डॉ. शुभम ने कल यानी गुरुवार को बताया था, ''सरकार का रवैया पहले दिन जैसा ही है और बातचीत की कोई पहल नहीं की गई है। सरकार हमसे बात करे नहीं तो आंदोलन चलता रहेगा।''
गौरतलब है कि, मध्य प्रदेश में अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले हड़ताल पर बैठे जूनियर डॉक्टर्स को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा था| हाई कोर्ट ने राज्य में चल रहा जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया था। इसी के साथ जूनियर डॉक्टर्स को 24 घंटे के भीतर काम पर लौटने के सख्त निर्देश दे दिए। ऐसा न किये जाने पर कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी गई |