मुंबई: महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री व NCP नेता अनिल देशमुख ने दावा किया कि उन्हें भी ऑफर मिला था कि अगर वह उसे कबूल कर लेते तो उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार काफी पहले गिर जाती, पर मैंने समझौता नहीं किया उन्होंने कहा कि उनके ऊपर झूठे आरोप लगाकर फंसाया गया और जेल भेजा गया था। अनिल देशमुख जमानत पर जेल से रिहा होने के 15 महीनों के बाद रविवार (12 फरवरी) को अपने गृह नगर नागपुर पहुंचे। नागपुर पहुंचने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने नागपुर एयरपोर्ट पर अनिल देशमुख का जोरदार स्वागत किया।
NCP नेता अनिल देशमुख ने रविवार (12 फरवरी) को कहा कि,''जैसा की आप सबको पता ही है कि मुझे 14 महीने झूठे आरोप लगाकर जेल में रखा गया। अनिल देशमुख ने कहा कि,''मेरे पास भी समझौते का प्रस्ताव आया था अगर मैंने समझौता किया होता तो मैं जेल नहीं गया होता। सरकार (MVA) ढाई साल से पहले ही गिर गई होती पर मैंने समझौता नहीं किया|
महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख धनशोधन मामले में करीब 14 महीने जेल में थे। उन्हें नवंबर 2021 में गिरफ्तार किया गया था। 28 दिसंबर, 2022 को वह मुंबई आर्थर रोड जेल से रिहा हुए थे।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल से रिहा होने के बाद, महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा था कि उनके खिलाफ आरोप निराधार और बिना सबूत के थे। देशमुख ने कहा था, "परम बीर सिंह (तत्कालीन मुंबई पुलिस आयुक्त) ने अदालत में दायर एक हलफनामे में कहा था कि मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप अफवाह पर आधारित थे और उनके पास मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं था।"उन्हें बदले की भावना के तहत फंसाया गया था|
पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा था,''परम बीर सिंह ने शपथ पत्र में लिखा कि उन्होंने सुनी सुनाई बातों पर मुझ पर इल्जाम लगाया था। उसी प्रकार परम बीर सिंह के नजदीकी API सचिन वाजे के बारे में जब हाई कोर्ट में सुनवाई हुई तो कोर्ट ने पाया कि उसका आपराधिक इतिहास है| हाई कोर्ट ने पाया कि जो आदमी अपराधी है उसके आरोप पर विश्वास करना मुश्किल है और उसके आरोप में कोई तथ्य नहीं है और जब सुप्रीम कोर्ट में इस पर सुनवाई हुई तो कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर मुहर लगाई|