मुंबई: चुनाव आयोग के फैसले पर उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने आज शाम को कहा कि,'हमारी पार्टी, और हमारा जो धनुष-बाण (चुनाव चिन्ह) है, उसकी चोरी हो गई है। इस चोरी में कौन-कौन शामिल है, हम उसकी जांच करेंगे और उन चोरों के बारे में जनता को जागरूक भी करेंगे। दूसरे चुनाव चिन्ह पर हमारी पार्टी में चर्चा हो रही है|
गौरतलब है कि, उद्धव ठाकरे गुट को एक बड़ा झटका देते हुए, चुनाव आयोग ने शुक्रवार को आदेश दिया कि ‘शिवसेना’ का नाम और पार्टी का प्रतीक ‘धनुष और तीर’ एकनाथ शिंदे गुट के पास ही रहेगा|
संजय राउत ने चुनाव आयोग के इस फैसले को ''लोकतंत्र की हत्या'' बताया था| राउत ने कहा था,''सब ग़ुलाम बनकर बैठे हैं, ये लोकतंत्र की हत्या है|
संजय राउत ने शुक्रवार को कहा था कि,''इस सरकार ने करोड़ो रुपये पानी की तरह बहाया है वो पानी कहां तक पहुंचा है ये दिख रहा है। हमें फिक्र करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि जनता हमारे साथ है। हम नया चिह्न लेकर जाएंगे और फिर एक बार यही शिवसेना खड़ी करके दिखाएंगे| राउत ने कहा,''देश में लोकतंत्र बचा ही नहीं है। सब ग़ुलाम बनकर बैठे हैं, ये लोकतंत्र की हत्या है|
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी शुक्रवार को शिंदे गुट को 'शिवसेना' नाम और 'चुनाव चिन्ह' देने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी दी थी| चुनाव आयोग के फैसले पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा था कि, यदि विधायकों और सांसदों की संख्या के आधार पर पार्टी का अस्तित्व तय किया जाएगा तो कोई भी पूंजीपति विधायक खरीद कर मुख्यमंत्री बन जाएगा|
शिंदे गुट को 'शिवसेना' नाम और 'चुनाव चिन्ह' देने के चुनाव आयोग के फैसले पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि,'यह अन्याय है, देश में तानाशाही शुरू हो गई है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि, बेहतर होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसा ऐलान कर दें कि- देश में तानाशाही है...|
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि,'मैंने कहा था कि चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले फैसला नहीं देना चाहिए। यदि विधायकों और सांसदों की संख्या के आधार पर पार्टी का अस्तित्व तय किया जाता है, तो कोई भी पूंजीपति विधायक, सांसद खरीद सकता है और मुख्यमंत्री बन सकता है|
पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा था कि,ये अन्याय है, देश में तानाश??ही की शुरुआत हो गई है, ऐसा ऐलान प्रधानमंत्री कर दें तो ज्यादा अच्छा रहेगा। देश में प्रजातंत्र नहीं रहा। उनमें (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) चुनाव कराने की हिम्मत नहीं है...सभी उनके गुलाम हैं|