New Sainik School Opened: 100 नए सैनिक स्कूलों पर फिर जोर: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर दी जानकारी
सैनिक स्कूलों से निकलने वाले बच्चों का, अनुशासन और समर्पण, बाकी दूसरे बच्चों के लिए, एक example होता है। इसलिए सैनिक स्कूल की संख्या को बढ़ाने के लिए, कुछ समय पहले हमारी सरकार ने यह निर्णय लिया, कि हम PPP, यानी public-private partnership के आधार पर, देश भर में 100 नए सैनिक…
— रक्षा मंत्री कार्यालय/ RMO India (@DefenceMinIndia) March 21, 2026
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार, 21 मार्च 2026 को उत्तराखंड के सैनिक स्कूल घोड़ाखाल के हीरक जयंती समारोह में कहा कि देशभर में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि नेशनल कैडेट कोर यानी NCC की क्षमता 17 लाख कैडेट से बढ़ाकर 20 लाख कर दी गई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार सैन्य-प्रेरित अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रीय मूल्यों को स्कूली शिक्षा के बड़े ढांचे से जोड़ने की कोशिश तेज कर रही है।
हालांकि, इस घोषणा को बिल्कुल नई योजना मानना सही नहीं होगा। आधिकारिक रिकॉर्ड दिखाते हैं कि 100 नए सैनिक स्कूलों की पहल को सरकार ने पहले ही मंजूरी दे दी थी। मार्च 2022 में संसद को दी गई जानकारी में स्पष्ट कहा गया था कि नए सैनिक स्कूलों को NGO, निजी स्कूलों और राज्य सरकारों के साथ साझेदारी में, कक्षा 6 से चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। उसी महीने रक्षा मंत्रालय ने शुरुआती दौर में 21 नए सैनिक स्कूलों को मंजूरी भी दी थी।
यानी 21 मार्च 2026 का बयान दरअसल उस पहले से चल रही नीति की ताज़ा राजनीतिक और प्रशासनिक पुनर्पुष्टि है, न कि शून्य से शुरू होने वाली नई घोषणा। यह बात 2024 के आधिकारिक वर्षांत विवरण से भी पुष्ट होती है, जिसमें कहा गया कि 100 नए सैनिक स्कूलों की पहल के तहत 45 स्कूलों को मंजूरी दी जा चुकी थी, 41 के साथ समझौता-पत्र हस्ताक्षरित हो चुका था, और 40 स्कूल 2024-25 सत्र से काम भी शुरू कर चुके थे। ये स्कूल मौजूदा 33 पारंपरिक सैनिक स्कूलों से अलग, अतिरिक्त नेटवर्क के रूप में विकसित किए जा रहे हैं।
इस पूरी कवायद का नीति-स्तर पर महत्व इसलिए भी है क्योंकि सरकार सैनिक स्कूल मॉडल को केवल रक्षा सेवाओं की तैयारी तक सीमित नहीं दिखा रही, बल्कि उसे नेतृत्व, अनुशासन, मानसिक दृढ़ता और “राष्ट्र-निर्माण” के मूल्यों से जोड़कर पेश कर रही है। घोड़ाखाल के कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति—आर्थिक, साइबर, अंतरिक्ष और सूचना युद्ध—का जिक्र करते हुए कहा कि तैयार नागरिक और तैयार युवा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उतने ही जरूरी हैं जितनी मजबूत सेना।
NCC क्षमता को 20 लाख तक बढ़ाने की बात भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा लगती है। 2024 के आधिकारिक दस्तावेज़ में “थ्री लाख कैडेट एक्सपेंशन प्लान” का उल्लेख है, जिसके तहत NCC की कुल ताकत 20 लाख तक ले जाने, बड़ी संख्या में छात्र संस्थानों को जोड़ने और पूर्व सैनिकों को प्रशिक्षक भूमिका में शामिल करने की रूपरेखा दी गई थी। इससे साफ है कि स्कूल शिक्षा, कैडेट प्रशिक्षण और रक्षा-उन्मुख मूल्य शिक्षा को एक ही नीति-पथ पर रखा जा रहा है।
इस घोषणा का एक और अहम पहलू लड़कियों की भागीदारी है। सरकार पहले ही सैनिक स्कूलों में लड़कियों के प्रवेश को ऐतिहासिक कदम बता चुकी है, और मौजूदा सैनिक स्कूल नेटवर्क को सह-शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ाया गया है। इससे संकेत मिलता है कि नए PPP सैनिक स्कूल भी केवल संख्या बढ़ाने की कवायद नहीं, बल्कि सैन्य-प्रेरित शिक्षा मॉडल के सामाजिक विस्तार का हिस्सा हैं।
कुल मिलाकर, 100 नए सैनिक स्कूलों और 20 लाख NCC क्षमता का संदेश सिर्फ एक भाषण की सुर्खी नहीं है। यह केंद्र की उस दीर्घकालिक नीति का हिस्सा है जिसमें रक्षा-तैयारी, अनुशासन, नेतृत्व और युवा सहभागिता को शिक्षा व्यवस्था में गहराई से पिरोने की कोशिश दिखाई देती है। अब असली सवाल यह होगा कि 100 का लक्ष्य किस समयसीमा में पूरा होता है, कितने नए स्कूल वास्तव में चालू होते हैं, और यह मॉडल गुणवत्ता, पहुंच और समावेशन—तीनों कसौटियों पर कितना टिकता है
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