Time:
Login Register

प्रीमियम पेट्रोल ₹2 महंगा, इंडस्ट्रियल डीजल में ₹22 की छलांग: तेल झटके के बीच बढ़ा ईंधन दबाव

By tvlnews March 20, 2026
प्रीमियम पेट्रोल ₹2 महंगा, इंडस्ट्रियल डीजल में ₹22 की छलांग: तेल झटके के बीच बढ़ा ईंधन दबाव

देश में प्रीमियम पेट्रोल के दाम 20 मार्च 2026 से करीब ₹2–₹2.35 प्रति लीटर बढ़ाए गए हैं, जबकि bulk/industrial diesel में लगभग ₹22 प्रति लीटर की तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई। आम उपभोक्ताओं के लिए regular petrol और diesel की कीमतें फिलहाल नहीं बदली गईं। यह फैसला वैश्विक कच्चे तेल की तेज़ी, पश्चिम एशिया तनाव और सप्लाई जोखिम के बीच आया है।


प्रीमियम पेट्रोल महंगा, इंडस्ट्रियल डीजल में बड़ी छलांग

देश में ईंधन कीमतों को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। 20 मार्च 2026 से तेल कंपनियों ने प्रीमियम-ग्रेड पेट्रोल के दाम करीब ₹2 से ₹2.35 प्रति लीटर तक बढ़ा दिए हैं। साथ ही bulk या industrial diesel की कीमत में भी लगभग ₹22 प्रति लीटर की तेज बढ़ोतरी की गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि आम उपभोक्ताओं के लिए बिकने वाले सामान्य पेट्रोल और डीजल के दाम फिलहाल जस के तस रखे गए हैं।

दिल्ली के उदाहरण से तस्वीर और साफ होती है। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, IOCL के XP95 जैसे प्रीमियम पेट्रोल की कीमत ₹99.89 प्रति लीटर से बढ़कर ₹101.89 प्रति लीटर हो गई। वहीं bulk/industrial diesel का भाव ₹87.67 प्रति लीटर से बढ़कर ₹109.59 प्रति लीटर पहुंच गया। यह बढ़ोतरी सीधे उन क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है जो bulk fuel पर निर्भर हैं, जैसे उद्योग, जेनरेटर संचालन, लॉजिस्टिक्स और कुछ कमर्शियल उपयोगकर्ता।

इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह वैश्विक कच्चे तेल के दामों में तेज उछाल मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और सप्लाई रूट्स को लेकर अनिश्चितता के बीच ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को लगभग $110 प्रति बैरल के आसपास रहा, जबकि एक दिन पहले यह $119 प्रति बैरल तक पहुंच गया था। ऐसे माहौल में भारतीय तेल कंपनियों पर लागत दबाव बढ़ा और premium fuels तथा industrial diesel में कीमत समायोजन किया गया।

महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार और तेल कंपनियां फिलहाल आम उपभोक्ताओं को सीधे झटका देने से बचती दिख रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, regular petrol और diesel की retail prices unchanged रखी गई हैं, जबकि premium segment और industrial users पर लागत का हिस्सा डाला गया है। सरकारी पक्ष ने यह भी संकेत दिया है कि रिफाइनरियां सामान्य रूप से चल रही हैं और घरेलू उपलब्धता बनाए रखना प्राथमिकता है।

यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत दुनिया के सबसे संवेदनशील बड़े तेल-आयातक देशों में गिना जाता है। भारत अपनी करीब 90% crude oil जरूरतें आयात से पूरी करता है और उसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। ऐसे में जब वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल होती है, तो उसका असर केवल fuel marketing कंपनियों की लागत पर नहीं, बल्कि महंगाई, freight cost, industrial operating expense और broader economic sentiment पर भी पड़ता है। भारतीय मौद्रिक आकलनों के अनुसार, crude prices में 10% की वृद्धि महंगाई पर भी असर डाल सकती है, अगर उसका pass-through घरेलू कीमतों तक पहुंचे।

फिलहाल निष्कर्ष साफ है: आम वाहन उपभोक्ता को तत्काल राहत मिली है, लेकिन premium fuel users और industrial diesel खरीदने वाले क्षेत्रों के लिए लागत बढ़ गई है। आगे का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतरराष्ट्रीय crude prices कितनी तेजी से शांत होते हैं, पश्चिम एशिया का तनाव कितना लंबा खिंचता है और घरेलू स्तर पर सरकार व तेल कंपनियां consumer shielding policy को कितने समय तक बनाए रख पाती हैं।




Powered by Froala Editor

You May Also Like