डॉ. रीना रवि मालपानी द्वारा लिखित कविता “कोरोना काल में ईश अवतार: डॉक्टर”,डॉ. रीना रवि मालपानी द्वारा लिखित कविता “कोरोना काल में ईश अवतार: डॉक्टर”,
'कोरोना काल में ईश अवतार: डॉक्टर'-
- पुनः कैसी आई भीषण कोरोना की यह दूसरी लहर।
पर इस विषम परिस्थिति में भी डॉक्टर ड्यूटी देते हर प्रहर॥
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40 डिग्री सेंटीग्रेट में भी पीपीई किट में कैसा होता होगा हाल।
इनकी कर्तव्य परायणता से ही बच सके कितने लाल॥
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12 घंटे पीपीई किट में करते अविराम कठिन तपस्या।
दिन-रात के कालचक्र में दूर करते पीड़ितों की समस्या॥
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निःशब्द है इनकी कर्तव्यनिष्ठा के आगे आज हम।
इनकी उदार सेवाभावना, अथक परिश्रम से हुए कोरोना के आँकड़े कम॥
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जब भी कोरोना महामारी का नाम मुख पर आएगा।
तुम्हारी सेवानिष्ठा के प्रति शीश स्वतः झुक जाएगा॥
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कोरोना संक्रमण से बेपरवाह रहते कर्तव्यपथ की ओर अग्रसर।
यहीं तो है सच्चे अर्थो में माँ भारती की सेवा का अवसर॥
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इस महामारी में तुम तो हो प्रत्यक्ष भगवान का रूप।
परिस्थितियों के साथ सामंजस्य में तुमने दिखाया अपना करुणामयी स्वरूप॥
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तुम हुए परिस्थितियों से कभी-कभी लाचार।
फिर भी उपलब्ध संसाधनो से किया कुशल व्यवहार॥
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कोरोना पीड़ितों के ईलाज में भूल गए अपना घर-परिवार।
तुम्हारी अनवरत सेवा से ही कम हो सका कोरोना हाहाकार॥
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यह पसीना तुम्हारा नहीं जाएगा बेकार।
कोरोना मुक्त भारत का स्वप्न होगा साकार॥
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डॉ. रीना कहती मत जाने दीजिए इनका परिश्रम व्यर्थ।
रोक लो स्वयं को घरो में, नहीं तो होगा अनर्थ॥
डॉ. रीना रवि मालपानी (कवयित्री एवं लेखिका)