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24 अगस्त 2026

पत्रकार समाज का आईना होता है एवं समाज का सच्चा साथी है : सत्येन्द्र उपाध्याय, मंडल अध्यक्ष अखिल राष्ट्रीय पत्रकार संघ

सिद्धार्थनगर/लखनऊ: अखिल राष्ट्रीय पत्रकार संघ के मंडल अध्यक्ष सत्येन्द्र उपाध्याय ने कहा मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है| समाज में विश्वनियता का बड़ा ही महत्व है , यदि विश्वास खत्म हो जाएग…

पत्रकार समाज का आईना होता है एवं समाज का सच्चा साथी है : सत्येन्द्र उपाध्याय, मंडल अध्यक्ष अखिल राष्ट्रीय पत्रकार संघ
पत्रकार समाज का आईना होता है एवं समाज का सच्चा साथी है : सत्येन्द्र उपाध्याय, मंडल अध्यक्ष अखिल राष्ट्रीय पत्रकार संघ | फ़ोटो: TVL News

सिद्धार्थनगर/लखनऊ: अखिल राष्ट्रीय पत्रकार संघ के मंडल अध्यक्ष सत्येन्द्र उपाध्याय ने कहा मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है| समाज में विश्वनियता  का बड़ा ही महत्व है , यदि विश्वास खत्म हो जाएगा तो समझ लेना चाहिए कि सब कुछ खत्म हो गया है|समाज विश्वास पर ही चल रहा है एक दूसरे पर विश्वास करना अच्छे समाज के लक्षण हैं| वह केवल पत्रकारिता पर ही नहीं लागू होता है सब पर लागू होता है| हां इतना जरूर है कि पत्रकारिता पर लोग ज्यादा विश्वास करते हैं जिस कारण सुबह उठकर सबसे पहले अखबार ही तलाशते हैं टीवी चाहे जितना देखते हो सारी जानकारी मिल जाने के बावजूद भी अखबार पढ़ कर खबर को पक्का कर लेते हैं|




हां बदलती परिवेश में पत्रकारिता भी दोष से अछूता नहीं है मीडिया की भूमिका पर बहस का दौर है कहीं प्रोफेशन तो कहीं मिशन ,इस बीच पेड न्यूज़ और खबर की शक्ल के विज्ञापन में समाज के उन वर्गों को गुमराह कर दिया जो व्यापारिक जीवन की बोलचाल की भाषा वाली खबरों को समझ पाते हैं शायद खबरों का उद्देश आम जनता तक आवाज पहुंचाना है  , विषय विचारणीय है विज्ञापन तो विज्ञापन होते हैं लेकिन खबर रूपी विज्ञापनों के अखबार में छाए रहने से पाठकों के समक्ष असहज स्थिति उभरी है|




 यह दौर ऐसी परिस्थितियों में देखा जा रहा है जब प्रेस काउंसिल ने पेड न्यूज को लेकर मीडिया को खबरदार किया है , ऐन केन प्रकारेण शॉर्टकट में अपना मकसद हल करने में सफल होती है जानकार भी कालम के किसी कोने को देखकर ही समझ पाते हैं की खबर अथवा विज्ञापन है इसके पीछे मीडिया की मंशा स्पष्ट है मैं समझता हूं कि वह समाज को कदापि गुमराह नहीं करता| लेकिन पूंजीवाद के दबाव में लाचार है शायद विज्ञापन ही मीडिया की पूंजी बन चुकी है इस आर्थिक पूजी के सहारे मीडिया मालिका अपना उपक्रम संचालित रख पाते हैं लेकिन इसके पीछे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को समाज के प्रति अपनी वफादारी को कदापि नहीं भूलना होगा|



 आम लोगों में यह अवधारणा बनती जा रही है की विज्ञापन मीडिया को मैसेज करने का शानदार फंडा है इसी के चलते पूंजीवाद काफी हद तक अपना मकसद हल कर लेते हैं इस पर गंभीर होने की जरूरत है विश्व नियता मीडिया की सबसे बड़ी पूजा है  ,इस पूजी को हम पूरी तरह तो नहीं खोए लेकिन अभाव के दौर से जरूर गुजर रहा हूं| 



वर्तमान दौर कलम कारों के लिए कठिन है , इन्हें अपनों से भी जूझना पड़ रहा है फिर सवाल पैदा होता है कि जिस तरह की खबरों को वजन दिया जाए जिस खबर से समाज को दिशा मिल रही है| खबरों में आई गिरावट को रोकने की जरूरत है, यह कहना कि मीडिया जागरूक नहीं है गलत है शहर व ग्रामीण क्षेत्र में प्रिंट इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने जनता के दुख दर्द में शेयर किया है लेकिन खबर का असर अपेक्षा के अनुकूल नहीं है| इसके पीछे सिर्फ विश्वनियता अहम कारण मान लेना न्याय संगत नहीं है| कार्रवाई करने वाले शासन प्रशासन के जिम्मेदार लोग भ्रष्टाचार के शिकंजे में तो नहीं है जिसके लिए सिर्फ मीडिया तंत्र ही नहीं बल्कि लोकतंत्र में उन महत्वपूर्ण स्तंभों को समाज के सुखद संचालन के लिए व्यवस्थाएं प्रदान करते हैं| 





 इसी हस्तक्षेप के बाद बुनियादी जरूरतों से जूझ रहे मीडिया तंत्र सुविधा संपन्न होंगे यदि समय रहते ठोस पहल नहीं की गई तो बेगार की स्थिति में खड़े आर्थिक समस्या से जूझ रहे मीडिया कर्मियों का जीवन और मीडिया तंत्र अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो सकता है, खबर स्वयं खबर बनकर रह जाएगा और इसकी दास्तां की खबर छपी रह जाएगी| 




इस पर ध्यान देना होगा कि मीडिया समाज का आईना होता है| क्षेत्र की समस्या अखबार के पन्नों पर दिखती है समाज के लोग अखबार के बिना असहज महसूस करते हैं इसके लिए मीडिया को अपनी विश्वनियता बनाए रखना होगा| भारत गांवों का देश है यहां पर देश की जनता का आहार व आय कृषि पर आधारित है देखा जाए तो आजादी के इतने लंबे समय के बाद भी आज भी बहुतेरे जनता गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर हैं | सरकार ग्रामीण क्षेत्र के चौमुखी विकास के लिए सच्चे मन से काम नहीं कर पा रही है यदि सच्चे मन से काम करने लगेंगे तो ग्रामीण क्षेत्र की जनता एवं पत्रकारों की स्थिति में सुधार आ जाएगा सब जनता खुशहाल हो जाएगा| पत्रकार समाज का सच्चा साथी होता है पत्रकार समाज का आईना होता है  !







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