लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बुनियादी शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी के भाई अरुण द्विवेदी की सिद्धार्थ नगर स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है| अरुण द्विवेदी को गरीब कोटे से मनोविज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर नियुक्त किया गया है| योगी सरकार के बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश द्विवेदी के भाई डॉ अरुण द्विवेदी के भाई को गरीब कोटे के तहत प्रोफेसर नियुक्त पर कांग्रेस महासचिव और यूपी कांग्रेस प्रभारी प्रियंका गांधी ने हमला बोलते हुए कहा यही है आपदा में अवसर|
यूपी कांग्रेस प्रभारी प्रियंका गांधी ने कहा.''जहां लाखों युवा अपनी नौकरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं, दूसरी ओर, राज्य के शिक्षा मंत्री ने ‘आपदा में अवसर’ के तहत अपने भाई के लिए एक नौकरी का प्रबंधन किया| उन्होंने इस घटना को समाज के गरीब और कमजोर वर्ग के साथ मजाक करार दिया| प्रियंका ने यह भी पूछा कि क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मामले का संज्ञान लेंगे और कार्रवाई करेंगे|
कांग्रेस महासचिव और यूपी कांग्रेस प्रभारी प्रियंका गांधी ने कहा,'' इस संकटकाल में यूपी सरकार के मंत्रीगण आम लोगों की मदद करने से तो नदारद दिख रहे हैं लेकिन आपदा में अवसर हड़पने में पीछे नहीं हैं। प्रियंका गांधी ने कहा,,''यूपी के बेसिक शिक्षा मंत्री के भाई गरीब बनकर असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति पा गए।
प्रियंका गांधी ने कहा,''लाखों युवा यूपी में रोजगार की बाट जोह रहे हैं, लेकिन नौकरी “आपदा में अवसर” वालों की लग रही है।ये गरीबों और आरक्षण दोनों का मजाक बना रहे हैं। उन्होंने कहा,''ये वही मंत्री महोदय हैं जिन्होंने चुनाव ड्यूटी में कोरोना से मारे गए शिक्षकों की संख्या को नकार दिया और इसे विपक्ष की साज़िश बताया। क्या मुख्यमंत्री जी इस साज़िश पर कोई ऐक्शन लेंगे?
इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई|उन्होंने कहा कि चुनाव ड्यूटी में 1621 शिक्षक की मौत हुई है लेकिन यह मंत्री सतीश द्विवेदी को मालूम नहीं है| उन्होंने मरने वाले शिक्षकों की संख्या 3 बताई है| लेकिन अपने सगे भाई को ईडब्ल्यूएस कोटे में नौकरी कैसे देनी है, यह मंत्री जी को मालूम है|यह नौकरी के लिए लाठी खा रहे उत्तर प्रदेश के युवाओं का घोर अपमान है|
इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार डॉ नूतन ठाकुर ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखकर इस मामले में जांच की मांग की है| उन्होंने कहा कि डॉ अरुण कुमार शिक्षा मंत्री के भाई होने के साथ ही स्वयं भी वनस्थली विद्यापीठ राजस्थान में मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर थे|इसके बावजूद डॉक्टर अरुण द्वारा ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट प्राप्त करना प्रथम दृष्टया जांच का विषय दिखता है| उन्होंने यह भी कहा कि कुलपति का कथन और शिक्षा मंत्री की सूची इस पूरे प्रकरण को और भी अधिक संदिग्ध और गंभीर बना देती है|