कोलकाता: केंद्र की मोदी सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को भेजे गए कारण बताओ नोटिस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि, वह हमेशा अलपन बंद्योपाध्याय के साथ खड़ी रहेगी, सरकार हमेशा उनके साथ खड़ी रहेगी| दरअसल ,''
पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को 31 मई सुबह 10 बजे दिल्ली में नार्थ ब्लॉक में रिपोर्ट करना था, लेकिन वो नहीं आए|कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (Department of Personnel & Training) को रिपोर्ट नहीं करने पर बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को केंद्र सरकार ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था|
पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को कारण बताओ नोटिस पर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि,''वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सरकार हमेशा उनके साथ खड़ी रहेगी|
बंगाल के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए अलपन बंदोपाध्याय के मुख्यमंत्री ममता के सलाहकार बनने के चंद घंटे बाद ही उन्हें 31 मई को केंद्र की तरफ से कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया था। इस नोटिस में पूर्व सचिव बंदोपाध्याय को 72 घंटे का वक्त देते हुए केंद्र ने लिखित स्पष्टीकरण मांगा था कि उनके विरुद्ध आपदा प्रबंधन ऐक्ट 2005 की धारा 51 के तहत ऐक्शन क्यों न लिया जाए। इस प्रावधान के तहत दो साल तक की कैद हो सकती है।
इस विवाद की जड़ चक्रवात यास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समीक्षा बैठक में ममता बनर्जी का शामिल न होना है। बीते शुक्रवार 28 मई को पीएम मोदी चक्रवात से हुए नुकसान का जायजा लेने पीएम पश्चिम बंगाल पहुंचे थे। उनकी सीएम ममता बनर्जी और मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय के साथ समीक्षा बैठक थी, लेकिन आरोप है कि ममता बनर्जी ने पीएम को आधे घंटे इंतजार कराया। मुख्य सचिव के साथ बैठक में पहुंची ममता ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी और यह कहकर चली गईं कि उन्हें कुछ दूसरी बैठकों में हिस्सा लेना है।
इस बैठक के बाद ही केंद्र की ओर बंगाल सरकार को पत्र भेजकर बंदोपाध्याय को कार्यमुक्त करने को कहा गया था। 60 साल की उम्र पूरी कर चुके बंदोपाध्याय को सोमवार को रिटायर्ड होना था, लेकिन उसके पहले ही कोविड मैनेजमेंट के लिए केंद्र से मिली इजाजत से उनका तीन महीने का कार्यकाल बढ़ाया गया था।
पश्चिम बंगाल काडर के 1987 बैच के आईएएस अधिकारी बंदोपाध्याय 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद 31 मई को रिटायर होने वाले थे। हालांकि, केंद्र से मंजूरी के बाद उन्हें तीन महीने का सेवा विस्तार दिया गया था। सेवा विस्तार दिए जाने के सिर्फ चार दिन बाद 28 मई को ही केंद्र सरकार ने उनकी सेवाएं मांगी। ममता सरकार से कहा गया कि अपने मुख्य सचिव को तुरंत कार्यमुक्त करे।
तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इस कदम को जबरन प्रतिनियुक्ति करार दिया। हालांकि, मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय ने सोमवार को रिटायरमेंट ले लिया है, और अब ममता बनर्जी ने उन्हें अपना विशेष सलाहकार नियुक्त किया है।
केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय के दिल्ली तबादले और उन्हें सोमवार को दिल्ली पहुंचने के आदेश की अवज्ञा करने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा दांव चल दिया। 31 मई को ममता बनर्जी ने कहा था कि चूंकि अलापन बंदोपाध्याय आज रिटायर हो गए हैं, इसलिए उन्हें अब मुख्यमंत्री का मुख्य सलाहकार नियुक्त कर दिया गया है। वे अगले तीन साल तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार रहेंगे।
ममता बनर्जी ने कहा कि वह अलापन बनर्जी (अलापन बंदोपाध्याय) को नाबन्ना नहीं छोड़ने दूंगी। मालूम हो कि,''नाबन्ना बंगाल सरकार के मुख्यालय को कहा जाता है। ममता बनर्जी ने कहा था कि,''चूंकि अलप्पन बनर्जी आज 31 मई को अपनी सेवा से सेवानिवृत्त हुए हैं, इसलिए वह दिल्ली में शामिल नहीं होने जा रहे हैं| अलपन बनर्जी (अलप्पन बंदोपाध्याय) को नाबन्ना नहीं छोड़ने दूंगी। वह अब मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार हैं|
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि हमें भारत सरकार से एक पत्र मिला है (28 मई को जहां मुख्य सचिव को वापस बुलाया गया था)। हमने इसका जवाब दिया है| मुख्य सचिव के सेवा विस्तार पर सीएम बनर्जी ने कहा था, 'यह मेरे हाथ में नहीं है, समय आने पर मामले पर जवाब देंगे|