बस्ती: शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों व अन्य अधिकारियों द्वारा जनहित में दिये जाने वाले पत्रों पर कार्यवाही न करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को भेजे रजिस्ट्रर्ड पत्र के जरिए समाजसेवी भाजपा नेता चन्द्रमणि पाण्डेय ने बताया कि बस्ती जनपद के विकास खण्ड हर्रैया में विगत तीन वर्षों से खण्ड शिक्षा अधिकारी के पद पर काबिज बड़कऊ बर्मा जिले के उच्चाधिकारियों पर इतना भारी पड़ रहे हैं कि इनके द्वारा कर्मचारी सेवा नियमावली के विपरीत आचरण के क्रम में परशुराम जयंती के दिन भगवान परशुराम के चित्र को स्क्रैच कर विभिन्न शिक्षक ग्रुपों में वायरल किया गया, जिसे संज्ञान लेते हुए हमने कई बार जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन भेजकर बड़कऊ बर्मा को बर्खास्त करने का मांग किया.
कोई कार्यवाही न होने की दशा में 25 जून को जिलाधिकारी बस्ती के माध्यम से उक्त अधिकारी के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की मांग निदेशक बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश व आप मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार के साथ साथ विभिन्न उच्चाधिकारियों को प्रेषित किया किन्तु जिले के कुछ जनप्रतिनिधियों व उच्चाधिकारियों का संरक्षण प्राप्त उक्त अधिकारी के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही कौन कहे उनके कार्यक्षेत्र तक में बदलाव नहीं किया गया व संभवतः मेरे ज्ञापन को अग्रसारित करने की जगह रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया.
इतना ही नहीं खण्ड शिक्षा अधिकारी व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने मेरी अध्यापिका पत्नी का इस माह वेतन ही रोक दिया ताकि हम इनके विरुद्ध आवाज न बुलंद करें ज्ञात हो कि मेरी पत्नी हर्रैया विकास खण्ड के प्रा.वि.महेवा कुंवर सिंह प्र.अ.के पद पर वर्ष 2016 से कार्यरत हैं व शिक्षण कार्य पूर्ण निष्ठा से कर रही है। शिक्षण कार्य को लेकर आज तक उनकी कोई शिकायत नहीं आई है, यह कि खण्ड शिक्षा अधिकारी भेदभाव करते हुए पूर्व में भी फरवरी 2024 में उनके बच्चों के बोर्ड परीक्षा के दौरान शासन द्वारा अनुमन्य शिशु देखभाल अवकाश को स्वीकृत नहीं किया था । जिसके विरुद्ध जब मैं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरने पर बैठा तो, धरने को निदेशक बेसिक शिक्षा परिषद ने संज्ञान में लिया । तब जाकर शिशु देखभाल अवकाश स्वीकृत हुआ था ।
मेरे द्वारा नैतिक विरोध पर दबाव बनाने हेतु इस बीच मेरी पत्नी का वेतन रोक दिया गया है और अब खण्ड शिक्षा अधिकारी से लेकर उच्चाधिकारी वेतन रूकने का कारण विद्यालय में दूध वितरण न होना बता रहे हैं बड़ा सवाल जब वर्ष 2016 से आज तक मेरी शिक्षिका पत्नी ने वित्तीय चार्ज नहीं ले रखा है तो दुग्ध वितरण न होने की जिम्मेदारी उनकी कैसे इतना ही नहीं वो पूर्व में उन्होंने खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय को एमडीएम न बनने की लिखित सूचना भी दे दिया था व वर्तमान में वो अवकाश पर भी है ऐसे में विभाग का ये कृत्य खण्ड शिक्षा अधिकारी को संरक्षण प्रदान करने वाला है ।
यह कि कार्यवाही करने की नियति से विभाग द्वारा 27जून 2024को वित्तीय चार्ज के संदर्भ में एक नोटिस देते हुए उसे अंतिम नोटिस बताया गया था जिसका लिखित जबाब भी 1जुलाई 2024को खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में रिसीव करा दिया गया था श्री पाण्डेय ने बताया कि प्रायः जनपद के फरियादियों को उनके प्रार्थना पत्र की रिसीविंग नहीं दी जाती रिसीविंग दी भी जाती है तो उसे या तो अग्रेषित नहीं किया जाता या उसके कार्य प्रगति से फरियादियों को अवगत नहीं कराया जाता जबकि पूर्व में हर्रैया में उपजिलाधिकारी रहे प्रेम प्रकाश मीणा, नन्दलाल कलाल, सुखवीर सिंह यादव या गुलाब चन्द्र रहे हों या बस्ती जिले के जिलाधिकारी राजशेखर,माला श्रीवास्तव या आशुतोष निरंजन जी ने केवल प्रार्थना पत्र को सम्बन्धित विभागों को निस्तारण हेतु अग्रसारित करते थे अपितु कार्य प्रगति से भी हम लोगों को अवगत कराते थे किन्तु वर्तमान में जनहित से सम्बन्धित ज्ञापन को भी या तो रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाता है अथवा उसके कार्य प्रगति से अवगत नहीं कराया जाता।
उन्होंने मांग किया कि खण्ड शिक्षा अधिकारी व उनके संरक्षण में संलग्न अधिकारियों पर कठोर कार्यवाही हो व जनहित की मांगों के त्वरित व पारदर्शी निस्तारण हेतु मांग पत्र की रिसीविंग तत्काल उपलब्ध कराने व आवेदक को समय समय पर कार्य प्रगति से अवगत कराने हेतु स्पष्ट निर्देश जारी किया जाये निर्देशों का पालन न करने वाले अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जाये।
रिपोर्ट- शिव कुमार चौधरी