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25 अगस्त 2026

लोजपा संकट: पार्टी माँ के समान है और माँ के साथ धोखा नहीं करना चाहिए, चाचा पारस पर बरसे चिराग

पटना: लोक जनशक्ति पार्टी से बगावत करने वाले चिराग पासवान के चाचा और सांसद पशुपति कुमार पारस को सोमवार को लोकसभा में पार्टी संसदीय दल का नेता चुना गया है| आज यानी मंगलवार को लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) क…

लोजपा संकट: पार्टी माँ के समान है और माँ के साथ धोखा नहीं करना चाहिए, चाचा पारस पर बरसे चिराग
लोजपा संकट: पार्टी माँ के समान है और माँ के साथ धोखा नहीं करना चाहिए, चाचा पारस पर बरसे चिराग | फ़ोटो: TVL News

पटना: लोक जनशक्ति पार्टी से बगावत करने वाले चिराग पासवान के चाचा और सांसद पशुपति कुमार पारस को सोमवार को लोकसभा में पार्टी संसदीय दल का नेता चुना गया है| आज यानी मंगलवार को लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से भी चिराग पासवान को हटाया गया है| लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष और बिहार के जमुई से सांसद चिराग पासवान अपनी ही पार्टी में अकेले पड़ गए हैं| चाचा पशुपति कुमार पारस और भाई प्रिंस राज की बगावत के बाद उनकी पार्टी के सभी सांसदों ने उनका साथ छोड़ दिया है| इस घटना के बाद पहली बार चिराग ने अपनी प्रतिक्रिया दी है



पार्टी के संसदीय बोर्ड से बेदखल किए जाने के और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से भी बेदखल किए जाने के बाद चिराग पासवान ने  ट्विटर पर चाचा पशुपति कुमार पारस के लिए एक पुराना लेटर जारी किया है।



चिराग पासवान ने ट्विटर पर लिखा,,''पापा की बनाई इस पार्टी और अपने परिवार को साथ रखने के लिए किए मैंने प्रयास किया लेकिन असफल रहा।पार्टी माँ के समान है और माँ के साथ धोखा नहीं करना चाहिए।लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है। पार्टी में आस्था रखने वाले लोगों का मैं धन्यवाद देता हूँ। एक पुराना पत्र साझा करता हूँ।



सोशल मीडिया पर जारी छह पेज के इस लेटर को होली के दिन लिखा बताया है। लेटर का सार है कि चिराग पासवान पार्टी छोड़कर परिवार को एकजुट रखना चाहते हैं। कहते हैं कि मैं सबकुछ भूलने को तैयार हूं, आप परिवार को साथ रखने के लिए वापस आ जाएं।



चिराग ने अपने लेटर में कई जगह चाचा पशुपति कुमार पारस को संबोधित करते हुए कहा है कि आप बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीब हो गए थे। यह बात पापा (रामविलास पासवान) को पसंद नहीं थी। आपने मेरा साथ कई मौकों पर नहीं दिया। मेरा ही नहीं, आपने अपने भतीजे प्रिंस (समस्तीपुर सांसद) को भी उचित प्यार नहीं दिया। पापा जैसा चाहते थे, मेरे राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर भी आप खुश नहीं थे। आपसे कई बार बात-मुलाक़ात करने की कोशिश की, लेकिन सकारात्मक जवाब नहीं मिला।



जब भी मौका आया, आपने नीतीश कुमार के खिलाफ कुछ नहीं कहा। आपके द्वारा पार्टी विरोधी बयान भी दिया गया, जिससे पापा नाराज भी हुए, लेकिन आपने उसका खंडन भी नहीं किया। पापा के जाने के बाद जब मुझे आपकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, आप हमारे साथ नहीं थे, बल्कि नीतीश कुमार की तारीफ कर रहे थे। आपने विधानसभा चुनाव में भी पार्टी का सहयोग नहीं किया। जबकि आपकी हर डिमांड पूरी की गई। इन वजहों से अब रिश्तों पर भरोसा नहीं कर पा रहा हूं।



चिराग ने यह भी लिखा है कि कुछ समय पहले प्रिंस पर एक  स्वाति नाम की महिला ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। वह प्रिंस को ब्लैकमेल कर रही थी। आपके अनदेखा करने के बाद मैंने उसे पुलिस के पास जाने को कहा। इस मामले पर भी मैंने आपसे परिवार में बड़े होने के नाते बात करनी चाही, लेकिन आपने इस गंभीर मामले को अनदेखा कर दिया। आपके अनदेखा करने के बाद मैंने प्रिंस को पुलिस के पास जाने की सलाह दी ताकि सच और झूठ सामने आये एवं जो कोई भी दोषी हो वह दंडित हो।



चिराग ने अपने लेटर में प्रिंस के पिता स्वर्गीय सांसद रामचंद्र पासवान का भी जिक्र किया है। कहा है कि उनके जाने के बाद प्रिंस को भी आपकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, लेकिन आप हमारे लिए मौजूद नहीं थे। पिताजी के निधन के बाद मुझे व मां को आपकी व चाची की जरूरत थी, तब भी आप हमारे लिए नहीं थे। मुझे व प्रिंस को चाचा की जरूरत है। इसलिए मैं यह सब भूलने को तैयार हूं, ताकि परिवार एकजुट रहे। पापा और मम्मी ने पार्टी व परिवार को एकजुट रखने के लिए मेहनत की है, मैं इस सपने को विफल होते नहीं देख सकता। इसलिए आपसे आग्रह है कि बड़े होने के नाते पार्टी व परिवार को एकजुट रखने की जिम्मेदारी उठाएं।






चिराग की चाचा पारस को चिट्ठी (छह पेज के इस लेटर को होली के दिन का लिखा)

आदरणीय चाचा जी, आज (29 मार्च 2021 ) होली के दिन यह पत्र मैं इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि पापा के बिना यह पहली होली है जिसमें हम सब साथ नहीं है। जब तक पापा थे इस त्योहार को हम लोग खूब धूमधाम से मनाते थे। पर अब उनके नहीं रहने पर शायद ही हम कभी वैसी होली दुबारा मना पाये। इस पत्र के लिखने से पहले आपसे मिलकर बात करना चाहता था। खालिक साहब और सूरजभान जी ने कई बार प्रयास किया कि यदि कहीं कोई समस्या है तो उसे साथ बैठकर सुलझा लिया जाए। लेकिन आपकी तरफ से कभी कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला जिसके परिणामस्वरूप आज सारी बातें इस पत्र के माध्यम से आपको लिख रहा हूँ।



2019 में रामचंद्र चाचा के निधन के बाद से ही मैंने आपमें बदलाव देखा है और आज तक देखते आ रहा हूँ। चाचा के निधन के बाद प्रिंस की जिम्मेदारी चाची ने मुझे दे दी और कहा कि आज से ही मैं ही प्रिंस के लिए पिता समान हूँ और मुझे इसके भविष्य को बेहतर करने की जवाबदेही दी। रामचंद्र चाचा के नहीं रहने के कारण पापा और मम्मी भी बहुत दुःखी रहने लग गये थे। प्रिंस को आगे बढ़ाने के लिए उसको प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मैंने दी ताकि आप सबके सामने ही प्रिंस पार्टी को बढ़ा पाये और बिहार में अपने पांव जमा ले। मेरे इस फैसले से सभी लोग खुश हुए। मुझे विश्वास था कि प्रिंस को मिली नई जिम्मेदारी से आप भी संतुष्ट होंगे और प्रिंस के लिए खुश होंगे परन्तु उस वक्त मुझे पीड़ा हुई. जब आप इस फैसले के विरोध में नाराज हो गये और आपने प्रिंस को मिली नई जिम्मेदारी के लिए उसे शुभकामना देना भी उचित नहीं समझा। पापा चाहते थे कि मैं पार्टी के लिए और समय दूं जिसके लिए उन्होंने मुझे पार्टी का राष्ट्रीय बनाने का निर्णय लिया। आपने इस फैसले पर भी अपनी नाराजगी जताई। जिस दिन मुझे राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया आप सिर्फ 5 मिनट के लिए आये प्रस्तावक बनें और चले गए उस दिन पापा कार्यक्रम के बाद बहुत दुःखी थे। मेरे अध्यक्ष बनने के आपने घर आना जाना कम कर दिया।



मुझे मिली नई जिम्मेदारी के बाद मैंने बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट यात्रा की शुरूआत की। इसका उद्देश्य था कि मैं पूरे बिहार का भ्रमण कर बिहार की छोटी बड़ी समस्या को सझकर पार्टी के विजन डॉक्यूमेंट का हिस्सा बनाऊं। इस यात्रा में बिहार के लोगों का अभूतपूर्व साथ और प्यार मिला। पार्टी के सभी सांसद, विधायक और कार्यकर्ता इस यात्रा से काफी खुश थे। मैं चाहता था कि इस यात्रा में मुझे आपका भी आशीर्वाद मिले परन्तु आपने पूरी यात्रा से दूरी बनाये रखी।




कोरोनाकाल के दौरान कई बार यह महसूस हुआ कि प्रदेश सरकार दूसरे प्रदेशों में रह रहे बिहारियों के साथ कैसा सौतेला व्यवहार कर कर रही है। पापा भी कोरोना में बिहार सरकार के कार्य से बेहद चिंतित थे और मुझसे हमेशा कहते थे कि मैं वही करूं जिस पर मैं विश्वास करता हूँ अन्यथा जीवन भर मुझे इस बात का पछतावा होगा कि क्यों मैंने कोरोना के दौरान देशभर में फंसे बिहार के लोगों की समस्या सुलझाने के दौरान बिहारियों के पक्ष में अपनी बातों को मजबूती से बिहार सरकार के समक्ष नहीं रखा। 




मुझे आज भी याद है वह दिन जब रातों रात श्री नीतीश कुमार जी एनडीए की मदद से मुख्यमंत्री बनें और आपने खुद एमएलसी और मंत्री बनने की इच्छा जताई और खुद पहले ही नीतीश कुमार जी से इस विषय पर बात कर अपनी इच्छा जाहिर की। इससे पहले पापा श्री राजू तिवारी या श्रीमती नूतन सिंह जी को मंत्री बनाने की बात सोच रहे थे लेकिन आपके बोलने के बाद पापा ने कुछ नहीं बोला।आपके मंत्री बन जाने से पापा बेहद खुश थे। परन्तु मंत्री बनने के बाद आपको पशुपालन विभाग मिला और इससे नाराज होकर आपने मंत्रालय बदलने की बात करने को कहा। पापा कई दिनों बाद आपको मंत्री बना देख खुश थे। लेकिन आप तब भी खुश नहीं थे इस बात से पापा काफी दुःखी थे। आपको लेकर पापा हमेशा चिंतित रहते थे कई बार उन्होंने अमित शाह जी से आपके लिए बात की ताकि आपको केन्द्र में किसी आयोग में जगह दिलाई जा सके।




चाचा जी पापा के हर उस फैसले के साथ मैं खुशी-खुशी सहमत था जिसमें आपको एमएलसी, मंत्री और फिर एमपी बनाने की बात कही थी। हमेशा पापा बोलते थे कि मैं अपने भाईयों को पिता के जैसा प्यार करता हूँ ताकि बाबूजी अगर देख रहे हो तो उन्हें शांति मिले।



लॉकडाउन में अनाज बांटने को लेकर पापा और बिहार सरकार में विवाद हुआ जिस पर आपने नीतीश कुमार को कोई जवाब नहीं दिया। मुझ पर या पार्टी पर नीतीश जी की पार्टी द्वारा जब-जब प्रहार किया गया आप हमेशा खामोश रहे। मुझे याद है कि कुछ दिनों बाद पापा की तबियत खराब हुई और मैं उन्हें अस्पताल ले गया। उनकी रिपोर्ट आने के बाद चला कि उनका हार्ट ट्रांसप्लांट करवाना पड़ेगा। अस्पताल में भी पापा को मीडिया के माध्यम से आपसे जुड़ी पार्टी विरोधी खबरों की जानकारी प्राप्त हुई जिसका आपने कभी खंडन नहीं किया तब पापा ने आईसीयू से आपको फोन कर ऐसी खबरों पर अंकुश लगाने के लिए कहा। मैं उस दौरान निरंतर पार्टी के काम और उनके इलाज के बीच संघर्ष करता रहा। इसी बीच पापा ने सुझाव दिया की पेपर में ऐड दिया जाये ताकि पार्टी अपने विचारों को और अधिक लोगों तक पहुंचा पाये। पेपर में विज्ञापन छपवाने के लिए पार्टी के हर एक मजबूत साथी ने अपना योगदान दिया। विज्ञापन छपने से पापा बहुत खुश थे और उस पूरा दिन अस्पताल से ही पार्टी के लोगों को फोन कर विज्ञापन से हो रही पार्टी की चर्चा के बारे में जानकारी ली।



पापा ने मुझे बोला कि अब पार्टी को आगे बढ़ाने का समय आ गया है। अब यह समय आ गया था जहाँ पापा और मैं नीतीश जी के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे। एक साल में पार्टी ने भी काफी मेहनत की थी जिसके आधार पर चुनाव अकेले ही लड़ा जा सकता था।



आप अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं थे और यह बात किसी से छुपी नहीं थी चुनाव के दौरान भी आपने नीतीश कुमार जी की तारीफ की जिससे पार्टी के प्रदर्शन पर असर पड़ा। मुझे पापा के जाने के बाद सबसे ज्यादा आपकी जरूरत थी लेकिन आपने जब चुनाव के पूर्व नीतीश जी के पक्ष में बात की तो मुझे बेहद दुःख हुआ। पार्टी के प्रत्याशियों ने आपके ऊपर कार्रवाई करने की मांग की लेकिन मैंने नजर अंदाज किया।



पापा के नहीं रहने के बाद एक पिता के तौर पर आपसे मागदर्शन की अपेक्षा रखता था। मुझे उम्मीद थी कि जब मैं पापा के निधन के बाद उनकी क्रिया कार्यों में एक पुत्र जिम्मेदारी निभा रहा था तब आप चुनाव की तैयारियों में मेरा साथ देते परन्तु आपने चुनाव के प्रचार प्रसार या रणनीति बनाने में कभी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। पिता तुल्य होने के नाते आपने कभी मुझसे जानना नहीं चाहा कि पापा के निधन के बाद मैं अकेले चुनाव का खर्चा कैसे उठा रहा हूँ? पूरे चुनाव में आपने एक भी विधानसभा का दौरा नहीं किया, एक बार भी आर्थिक व्यवस्था की बात मुझसे नहीं की। आपके कहने पर उचित टिकट भी दिया लेकिन लालगंज की सीट आप श्री बिटू गुप्ता जी को देना चाहते थे जबकि पार्टी ने फैसला लिया था कि पार्टी अपने सिटिंग विधायक का टिकट नहीं काटेगी।




श्री राज कुमार साह का टिकट पार्टी नहीं काटना चाहती थी और ऐसा ही विवाद जगदीशपुर की सीट पर हुआ था। आपने चुनाव में पांच सिंबल मांगे थे मैंने वो भी आपको भिजवा दिए थे। मात्र दो टिकट नहीं मिलने के कारण आपने पापा की मृत्यु के बाद जिस प्रकार का व्यवहार किया उससे मैं टूट गया और अब रिश्तों पर भरोसा नहीं कर पाता हूँ।




मैंने हमेशा चाहा कि जैसे पापा हमेशा अपने दोनों भाईयों को साथ लेकर आगे बढ़े उसी तरह मैं भी प्रिंस, कृष्ण और मुस्कान को अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद करूं। मुझे उम्मीद थी की हम बच्चों को आगे बढ़ते देख आप खुश होंगे। पापा के बाद मेरी गलतियों को सुधारने की जिम्मेदारी आपकी थी मुश्किल दौर में आपको मेरा मार्गदर्शन करना था परन्तु ऐसा करना तो दूर आपने मुझसे बात करना ही बन्द कर दिया। पार्टी या परिवार में जब भी कोई मुश्किल आई मैंने सबसे पहले आपको याद किया। पापा के रहते और उनके बाद भी कई बार आपने पार्टी को तोड़ने की कोशिश की।



चाचा जी इन सभी बातों के साथ यह बात भी मुझे बहुत दुःख देती है की पापा की तेरहवीं के लिए भी मम्मी ने पापा की तेरहवीं का कार्यक्रम करने के लिए 25 लाख रूपये दिए। मुझे यह बात सुनकर पीड़ा हुई और अकेला होने का अहसास हुआ।



कुछ दिन पूर्व स्वाति नाम की महिला जो पहले पार्टी से जुड़ी हुई थी वह प्रिंस पर यौन शोषण का आरोप लगाकर ब्लैकमेल कर रही थी। परिवार के बड़े होने के नाते आपसे इस विषय पर परामर्श किया लेकिन आपने इस गंभीर मामले को भी अनदेखा कर दिया। आपके अनदेखा करने के बाद मैंने प्रिंस को पुलिस के पास जाने की सलाह दी ताकि सच और झूठ सामने आये एवं जो कोई भी दोषी हो वह दंडित हो।



संगठन को लेकर जब भी मैंने आपसे चर्चा करनी चाही या सुझाव मांगा तो आपने हमेशा ये कहकर नकार दिया कि आपका इससे कुछ लेना देना ही नहीं। पार्टी के कार्यक्रमों में जब भी आपको आमंत्रित किया गया आपने हमेशा उसे अस्वीकार किया। सार्वजनिक तौर पर आपने अपने साथियों के बीच हमेशा मेरी निंदा की व पार्टी के प्रति हमेशा नकारात्मक बातें कही। मम्मी ने पूरी उम्र इस परिवार को एक रखने में बिताई। आपको एवं रामचंद्र चाचा को सगे भाई से बढ़कर प्यार किया हर सुख-दुःख में आपके एवं चाची के साथ वह चट्टान की तरह खड़ी रही परन्तु आज पापा के नहीं रहने पर उन्हें सबसे ज्यादा आपकी और चाची की जरूरत थी तो आप दोनों ने पूरे तरीके से उन्हें अकेला छोड़ दिया यदि आपको मुझसे शिकायत है तो इसकी सजा मम्मी या पूरे परिवार को क्यों दी जा रही है।




पार्टी के साथ आप काम करना चाहे तो करें नहीं करना चाहे तो ना करें। लेकिन मुझे और प्रिंस को चाचा की जरूरत है ताकि हमारा परिवार एक रहे। मेरे लिए मुस्कान और प्रिंस में कोई अंतर नहीं है। पार्टी के कामों को परिवार से अलग रखना चाहिए यही मैंने अपने अनुभव से सीखा है। आपने जो भी कुछ कहा किया मेरे मन में अब कुछ नहीं है यदि आपके मन में कुछ है तो मुझसे खुलकर बात करें। पापा हमेशा चाहते थे कि परिवार एक रहे। पापा के सपनों को और मम्मी की मेहनत को मैं विफल होते नहीं देख सकता इसलिए इस पत्र के माध्यम से आपसे आग्रह करता हूँ कि बड़े होने के नाते परिवार एवं पार्टी को एक रखने की जिम्मेदारी आप उसी तरह निभाये जैसे पापा निभाते थे।






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TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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यह रिपोर्ट 15 जून 2021 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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