● हर भर्ती व पेपर लीक घोटाले में जाँच के नाम पर सिर्फ "लीपा पोती करती है खट्टर सरकार
● बिना “सरकारी सफ़ेदपोशों” के संरक्षण के इतने पेपर लीक घोटाले सम्भव नही
● उच्च न्यायालय के किसी सिटिंग जज से हो उच्चस्तरीय न्यायिक जाँच
चंडीगढ़: हरियाणा प्रदेश में उघड़ते जा रहे एक के बाद एक पेपर लीक व भर्ती घोटालों पर राज्यसभा सांसद और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महासचिव, रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए पूछा है कि पेपर लीक के किसी भी "बड़े मगरमच्छ ” को आज तक क्यों नहीं पकड़ा गया ? इसका मतलब साफ़ है कि “सरकार के संरक्षण” में चल रहे इस गोरखधंधे में छिटपुट कार्रवाई करके असली अपराधियों को बचाया जा रहा
है।
उन्होंने प्रदेश के सभी पेपर लीक और भर्ती घोटालों की समयबद्ध जाँच हाईकोर्ट के पदेन न्यायाधीश से कराने की माँग की है।
प्रदेश की भाजपा-जजपा सरकार पर सीधे और कड़वे सवालों की बौछार करते हुए उन्होंने कहा कि हाल ही में आयोजित “केंद्रीय विद्यालय संगठन " की टीजीटी की भर्ती परीक्षा हैक करने का मामला कोई पहला नहीं है। उन्होंने कहा कि हरियाणा अब देश का "पेपर लीक हब" बन चुका है और इस माफिया को सरकार का सीधा संरक्षण हासिल है। सुरजेवाला कहा कि पिछले साढ़े आठ साल में प्रदेश की ऐसी कोई भर्ती नही जिसका पर्चा लीक नही हुआ हो और ऐसा कोई भर्ती घोटाला नही जिस पर सिर्फ लीपापोती करने की बजाय खट्टर सरकार ने साफ नीयत से एक भी कार्रवाई की हो।
उन्होंने याद दिलाया कि खट्टर सरकार की पहली भर्ती 2016 की क्लकों की थी। उस पहली ही भर्ती में पानीपत के एक भाजपा नेता के स्कूल से परीक्षा का पर्चा लीक होने के आरोप लगे। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी के लोगों के कबूलनामे आए और गुप-चुप ढंग से मामला खत्म कर दिया गया ? माननीय न्यायालय को इस भर्ती के खिलाफ दाखिल अर्ज़ी तकनीकी कारणों से रद्द करनी पड़ी।
रणदीप ने कहा कि घोटाले के पीछे राज्य सरकार का लचीला रुख देखकर इस प्रदेश में भर्ती घोटालों की श्रृंखला ही चल पड़ी। पुलिस कांस्टेबल भर्ती की परीक्षा लीक हुई। सरकार ने जांच का ड्रामा किया और अंत मे विजिलेंस जांच को कारगिल ले जाकर उलझा दिया।
फिर नायब तहसीलदार की भर्ती का पर्चा लीक हुआ। कुछ लोगों को बलि का बकरा बनाकर मामला रफा-दफा कर दिया गया और सारे माफिया सरगनाओं को बचा लिया गया ?
सुरजेवाला ने कहा कि “परीक्षाओं के पर्चे बेचने का धंधा " केवल परीक्षा केंद्रों तक सीमित हो, ऐसा नही है। खट्टर सरकार के समय जितनी भी ऑनलाइन परीक्षाएं हुई सभी मे धांधली के आरोप लगे हैं। किसी भी भर्ती में कट-ऑफ अंक 90-95% से कम नही रहे जो बिना हेराफेरी के सम्भव ही नही लेकिन खट्टर सरकार ने आज तक कोई ठोस कार्रवाई नही की।
उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षाओं के पर्चे बेचने का धंधा लगातार चलता रहा और सरकार मैरिट तथा पारदर्शिता के झूठे नारे देकर मामलों को दबाती रही । हद तो उस दिन हो गई जब हरियाणा लोक सेवा का डिप्टी सेक्रेटरी अनिल नागर अपने ऑफिस में करोड़ों रुपए से भरी अटैची के साथ एचसीएस परीक्षा की ओएमआर शीट भरता हुआ पकड़ा गया। इस अटैची कांड में बदनामी के छींटे सीएम ऑफिस तक उड़े लेकिन सरकार ने सारा मामला अकेले अनिल नागर के सिर डालकर बाकी सभी बड़े सरगनाओं व मगरमच्छों को साफ बचा लिया। यही नहीं, अब तो नागर की भी ज़मानत मिल चुकी ।
■ रणदीप ने सरकार से सवाल किया कि क्या ये सम्भव है कि इतने सारे घोटाले बिना सरकारी हस्तक्षेप के दबा दिए जाएं?
■ क्या इतने सारे भर्ती घोटालों के बाद भी सरकार को पारदर्शिता के दावे करने का कोई नैतिक अधिकार है ?
सुरजेवाला ने कहा कि खट्टर - दुष्यंत राज में फल-फूल रहे भर्ती माफिया के कारनामे केवल एचएसएससी या एचपीएससी की भर्तियों तक सीमित हो ऐसा नही है । प्रदेश में फैली भयावह बेरोजगारी के बीच केंद्रीय संस्थानों, रेलवे, एनटीए, बैंक्स और एलआईसी द्वारा आयोजित परीक्षाएं भी भर्ती माफिया से सुरक्षित नही हैं। पिछले साल सोनीपत से ही एक सॉल्वर गैंग पकड़ी गई थी जिसने जांच में नेट, रेलवे सहित सैंकड़ो परीक्षाओं गड़बड़ी की बात स्वीकार की थी लेकिन कुछ ही दिन के बाद सब साफ दबा दिया गया। यहां मैं ये भी बता दूं कि उस घोटाले में पकड़े गए परीक्षा माफिया के सरगना के भाजपा नेताओं के साथ फोटो सोशल मीडिया में तैर रहे थे।
रणदीप ने कहा कि वर्तमान केवीएस पीजीटी भर्ती घोटाले के तार भी फिर से सोनीपत और समालखा आकर जुड़ गए हैं।
■ आखिर पूरे देश के भर्ती घोटालों का केंद्र हरियाणा ही क्यों?
■ क्यों हर घोटाले की जांच बिना निष्कर्ष के कुछ लोगों को बलि के बकरे बनाकर बन्द हो जाती है?
खट्टर राज में देश मे बेरोजगारी में नम्बर वन चल रहे हरियाणा में बच्चे पहले तो घर फूंककर कोचिंग पर खर्चा करते हैं, कोचिंग संस्थानों में मेहनत करते हैं और जब नौकरी नही मिल पाती तो मजबूरी में दूसरे रास्तों को अपनाने पर मजबूर हो जाते हैं। उनकी इस मजबूरी का फायदा भर्ती संस्थाओं में बैठे बागड़-बिल्ले, ऑनलाइन परीक्षाओं की लैब के संचालक और भर्ती माफिया उठाते हैं तथा उनसे लाखों लूटते हैं।
धरपकड़ होने पर ये बागड़ बिल्ले तो अपने बड़े सम्बन्धों के सहारे बच निकलते हैं और इनके द्वारा फांसे गए अभ्यर्थी तथा सॉल्चर सालों तक मुकद्दमे झेलते हैं। सीधी सी बात है- दोनो तरफ मध्यम वर्ग पर ही मार पड़ती है।
उन्होंने सरकार को एक बार फिर से चेतावनी दी है कि सरकार एक के बाद एक उघड़ रहे भर्ती घोटालों पर लीपापोती करने की बजाय नियम के अनुसार कड़ी कार्रवाई करे अन्यथा हम सरकार में आने पर उच्च स्तरीय न्यायिक जांच आयोग का गठन करके इन घोटालेबाजों को इनके अंजाम तक पहुंचाएंगे।