सभी सम्मानित प्रिय, मित्रों अग्रजो सम्मानित देश वासियों को नव वर्ष की अनन्त हार्दिक बधाई एवं मंगल कामना ❤️।
सभी के जीवन में सकारात्मक नव वर्ष हो,उत्कर्श, उत्थान होने, करने के लिए अपने आसपास के लोगों,एवं प्राकृतिक, सांस्कृतिक पर्यावरण का प्रमुखता से ख्याल रखना होगा।
जिसके कुछ मुख्य बिन्दु का जिक्र करता हूं।
१ सन्तुलित विकास होना परम आवश्यक है, जिसमें प्राकृति का बिना विनाश के विकास हो, प्रकृति को वरदान मानकर लिया जाए,लूटा न जाए।
२ संधृत विकास होना नितांत हीआवश्यक है, जिसमें सभी क्षेत्रों का समान विकास हो गांव,शहर, खनिज सम्पन्न य विपन्न, क्षेत्र का जिससे सभी के जीवन में समान विकास का अवसर हो, एक पूरे गांव का जितना मिल्कियत होता है शहर के एक बड़े नेता, अधिकारी के मकान का होता है।जो की असंतुलन को जन्म देता है,एवं पर्यावरण पर दवाब बढता है बड़े महानगर उदाहरण है। नहीं संभाला गया तो प्रकृति मौन रहकर खुद नियन्त्रण करेंगी जो की मानवता के लिए बहुत कष्टकारी होता है।
३ समन्वित विकास का आधार रूसी विद्वान मार्क्स है जो के समाज,देश, दुनिया के मनुष्यों में समानता पर जोर देता है, जिसमें सरकारों की जिम्मेदारी है कि संसाधनों का सामान वितरण हो निर्धन जनों को भी मुख्य। धारा में लाना होगा, सभी की मूल आवश्यकता,रोटी, कपड़ा,मकान की बेसिक जरूरत पूरी हो।गरीब परेशान हैं क्या खाएं वहीं अमीर सोचता है क्या क्या खाएं। अमीर आदमी के अति धन लूट के कुकर्मों का भिभत्ष दंश गरीब भोगता है जोकि सभी लोग अपने आसपास देखते हैं। जैसे २ सन्साधन का एकत्रीकरण होता जाएगा अमीर गरीब की खाई और तेजी से गहरी होगी। जिससे प्राकृतिक असंतुलन होगा ग़रीब आभाव से ख़त्म होगा,तो वहीं अमीर अपने अति संसाधन प्रयोग के कुप्रभावों से तेज़ी ख़त्म होगा। सभी विकसित देशों के धन्ना सेठ अपनी अमिरियत छोड़कर प्राकृतिक की गोद में, नदियों, पहाड़ों, जंगलों, खेतों में रहना पसंद करते हैं।
जापान में लोगों के पास इतना पैसा है की एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपने केबिन में बैठकर लगभग सभी काम आनलाइन ही कर लेता है,पूरे दिन २४ घन्टें केबिन से बाहर नहीं निकलना है। दैनिक जरूरत से लेकर हर वह वस्तु जिसे वह चाहे आनलाइन सुविधाओ से ले सकता है। नतीजा सूर्य की रोशनी को तरश जाते हैं एवं बाहर की दुनिया कैसी है भूल जाते हैं दुष्परिणाण शरीर में विभिन्न तरह के रोग होना।फिर हम वहीं पहुंच जाते हैं, स्वस्थ से हो जातें हैं, स्वस्थ से गरीब सबसे अधिक गरीब होता है।
इसलिए सभी क्षेत्रों , सभी लोगों, सभी प्राकृतिक तत्वों का सम्मान के साथ संतुलित विकास ही जीवन का आधार है। तभी हर नये दिन नये वर्ष का आनन्द मिल सकेगा।सोचो यदि छड़ भर के लिए पृथ्वी अपना संतुलन खो दे तो सभी एक समान होते देर नहीं लगेगा।
अभिवादन स्वीकार करें डॉ चन्द्र प्रकाश वर्मा का