नई दिल्ली: जम्मू में बगावत का झंडा बुलंद करने वाले G-23 ग्रुप के कांग्रेस नेताओं को पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कांग्रेस परिवार का अभिन्न अंग बताया है। हालांकि उन्होंने चुनाव के वक्त नेताओं के इस तरह बगावती तेवर अपनाने को लेकर सवाल भी खड़े किए। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'गुलाम नबी आजाद के संसद में 7 टर्म गुजारने पर हमें गर्व है। माननीय सोनिया गांधी ने कभी उन्हें मुख्यमंत्री बनाया, कभी वो मंत्री रहे, कभी उन्हें महासचिव बनाया गया। जिन्होंने आजाद का इस्तेमाल होने की बात कही है, उन्हें शायद इतिहास पता नहीं है।'
दरअसल जम्मू और कश्मीर में हुई एक सभा में श्री गुलाम नबी आज़ाद और कुछ अन्य कांग्रेस नेताओं की भागीदारी के सन्दर्भ में पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि,'' मैंने आपके प्रश्न सुने, उन प्रश्नों के संदर्भ में मैं कह रहा हूं, मैंने खुद ना मालूम किया है ना देखा है, लेकिन मैं बहुत आदर सहित कहना चाहता हूं -3-4 बिंदू। नंबर एक, जो-जो लोग गए हैं, जिन्होंने ये भाषण दिए हैं, जिन्होंने ये कहा है, जिनके ऊपर आप प्रश्न पूछ रहे हैं, वो बहुत सम्मानित व्यक्ति हैं, आदरणीय व्यक्ति हैं। कांग्रेस उन सबका बहुत आदर करती है। और हमें गर्व है कि उनके बहुत लंबे राजनीतिक जीवन कांग्रेस पार्टी में बीते हैं।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने आगे कहा कि,नंबर दो, ये सभी हमारे कांग्रेस परिवार का एक अभिन्न हिस्सा हैं। हम सबकी इज्जत करते हैं और जो कुछ मैं कह रहा हूं, बहुत आदरपूर्वक इसलिए कह रहा हूं। मैं समझता हूं, कांग्रेस पार्टी समझती है कि जब 5 प्रांतों में चुनाव हो रहे हैं, जिस पर कांग्रेस संघर्ष कर रही है, तो ज्यादा उपयुक्त होता, अगर ये सभी नेता इन प्रांतों में अभियान करते, कांग्रेस का हाथ मजबूत करते, कांग्रेस की बात आगे बढ़ाते।
कांग्रेस प्रवक्ता और वरिष्ठ वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि ''आपमें से कुछ ने 'इस्तेमाल' शब्द का इस्तेमाल किया है। तो मैं वहाँ भी विनम्रता से कहना चाहूंगा कि जिस व्यक्ति के बारे में ये टिप्पणी की गई, उन्होंने कोई शिकायत नहीं की है और(अन्य) व्यक्ति उनका नाम लेकर शिकायत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि,''तो मैं सिर्फ ये कह सकता हूं कि उनको शायद पूरे रुप से संज्ञान नहीं है- कांग्रेस के समकालीन इतिहास का भी और कांग्रेस के पुराने इतिहास का भी। जहाँ तक इस्तेमाल की बात है, सिर्फ उसी संदर्भ में बोल रहा हूं क्योंकि प्रश्न पूछा गया है मुझसे। उनको भी गर्व है और हमें भी गर्व है कि 7 टर्म संसद में कांग्रेस के झंडे के अंदर उन्होंने बिताए, 5 राज्यसभा में, 2 लोकसभा में। हमें गर्व है, उनको गर्व है। हमें भी गर्व है, उनको भी गर्व है कि माननीय सोनिया गांधी जी ने उनको जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री मनोनीत किया और बड़ा सफल उनको टैन्योर रहा। हमें भी गर्व है, उनको भी गर्व है, उन्होंने कभी शिकायत नहीं की कि इंदिरा गांधी जी के कार्यकाल से और यूपीए-1 और यूपीए-2 लगभग 20 से 25 वर्ष गिन लीजिए, वो केन्द्रीय मंत्री रहे। हमें भी गर्व है, उनको भी गर्व है कि वो उस समय भी उसी 20 या 25 वर्ष से ज्यादा महासचिव रहे।
सिंघवी ने कहा कि,''देश के हर कोने-कोने में, विभिन्न प्रांतों में अगुवाई की। तो ये जो जिन लोगों ने उनके विषय में इस्तेमाल का शब्द इस्तेमाल किया है, मैं नहीं समझता कि उन्हें संज्ञान है इस इतिहास का और मैं वापस अपनी बात खत्म करना चाहूंगा ये कहकर, बड़ी विनम्रता से कि सच्ची निष्ठा कांग्रेस के प्रति तब होगी, जब आप सभी लोग, सभी व्यक्तियों को याद दिलाएं कि अभियान इन 5 प्रांतों में करना अति आवश्यक है, जहाँ अभी चुनाव हो रहे हैं, जहाँ कांग्रेस संघर्ष कर रही है। मैं नहीं समझता कि बाकी जो आपके प्रश्न हैं, क्योंकि सभी हमारे आदरणीय नेता हैं, बाकी आपके प्रश्न जो जानबूझ कर आपने पूछे हैं, अनुशासन वाले और ये वाले, उनका कोई संदर्भ बच जाता है, मेरे ये कहने के बाद?
सोशल मीडिया रूल्स के बारे में पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में डॉ. सिंघवी ने कहा कि मैं ये कहना चाहूंगा कि ये एक ऐसा विशाल एरिया है, जहाँ आपने बहुत विशाल अधिकार क्षेत्र दिए हैं और वो सब अधिकार क्षेत्र कार्यपालिका के ब्यूरोक्रेट्स को दिए गए हैं। निश्चित रुप से इसमें पोटेंशियल बहुत बड़ा है। स्वतंत्र सोच पर आघात का, स्वतंत्र क्रिएटिविटी पर, स्वतंत्र बोलने, विचार रखने, प्रस्तत करने, वितरण करने पर। इन सबके लिए अति आवश्यक है कि ज्यादा से ज्यादा धीरज, धैर्य और सीमाएँ बांधी जाएं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि, दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस सरकार में धीरज, धैर्य और सीमाएँ किसी सेक्टर में नहीं हैं। इसलिए ऐसी अपेक्षा करना इस विषय में भी गलत होगा। संक्षिप्त में मैं ये कहंगा कि इतने बड़े विशाल अधिकार क्षेत्र दिए गए हैं बिना संसद के कानून के। संसद ने क पारित नहीं किया है।
नंबर दो- लगभग तीन, साढ़े तीन वर्ष निकाल दिए हैं आपने डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के आने में। श्रीकृष्णा कमेटी हो गई, रिपोर्ट आ गई, संसदीय समिति में चली गई, उसके बाद आज तक नहीं लाए हो, तो जब-जब आप ऐसे कानून लाते हो कार्यपालिका के क्षेत्र में तो कानून को आप अवोयड कर जाते हो, विधायिका की स्पीच पर। नंबर तीन- ऐसे अधिकार क्षेत्र पूरा आघात कर सकते हैं, इसलिए आपको बहुत ही रिस्टेंट एक्सरसाइज करना होगा और मुझे ऐसा रिस्टेंट, धैर्य, सीमाएँ इस सरकार में नहीं दिखती।