नई दिल्ली: कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगातार नौवें दिन जारी है। किसान आंदोलन के समर्थन में पंजाब से अवार्ड वापसी का दौर शुरू हो गया है। इस बीच आंदोलनरत किसानों ने 8 तारीख को भारत बंद का ऐलान किया| आंदोलनरत किसानों ने कहा,''5 दिसंबर को मोदी सरकार और कॉर्पोरेट घरानों के पुतले पूरे देश में फूंके जाएंगे।7 तारीख को सभी वीर अपने मेडलों को वापिस करेंगे।
सिंघु बॉर्डर से भारतीय किसान यूनियन के जनरल सेक्रेटरी एचएस लखोवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि,''5 दिसंबर को मोदी सरकार और कॉर्पोरेट घरानों के पुतले पूरे देश में फूंके जाएंगे। 7 तारीख को सभी वीर अपने मेडलों को वापिस करेंगे। 8 तारीख को हमने भारत बंद का आह्वान किया है व एक दिन के लिए सभी टोल प्लाज़ा फ्री कर दिए जाएंगे|
सिंघु बॉर्डर से अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि,इसे सिर्फ पंजाब आंदोलन बोलना सरकार की साजिश है मगर आज किसानों ने दिखाया कि ये आंदोलन पूरे भारत में हो रहा है और आगे भी होगा। हमने फैसला लिया है कि अगर सरकार कल कोई संशोधन रखेगी तो हम संशोधन स्वीकार नहीं करेंगे|
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आज शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 8 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान किया।
दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर से किसान नेता राकेश टिकैत ने बताया कि,''8 तारीख को पूरा भारत बंद रहेगा। इस बार 26 जनवरी की परेड में किसानों के पूरे सिस्टम को शामिल किया जाए। ट्रैक्टर हमेशा उबड़-खाबड़ ज़मीन पर ही चला है उसे भी राजपथ की मखमली सड़क पर चलने का मौका मिलना चाहिए|
गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने अपने पद्म पुरस्कार वापस किए।शुक्रवार को पंजाबी में भारतीय साहित्य अकादमी पुरस्कार के विजेता पंजाब के प्रसिद्ध शायर डॉ. मोहनजीत, प्रख्यात विचारक डॉ. जसविंदर सिंह और पंजाबी नाटककार व एक अखबार के संपादक ने किसानों के समर्थन में अपने पुरस्कार लौटा दिए हैं। यह जानकारी सेंट्रल पंजाबी राइटर्स एसोसिएशन ने दी।
वहीं पूर्व हॉकी कप्तान परगट सिंह समेत पंजाब के 27 खिलाड़ियों ने किसानों के समर्थन में अपने पुरस्कार लौटाने का एलान कर दिया है। परगट सिंह समेत सभी खिलाड़ी पांच दिसंबर को पुरस्कार लौटाएंगे। परगट सिंह जालंधर कैंट से कांग्रेस के विधायक हैं और किसान परिवार से जुड़े हुए हैं।
परगट सिंह के अलावा करतार सिंह पहलवान, ब्रिगेडियर हरचरण सिंह, दविंदर सिंग गरचा, सुरिंदर सोढ़ी, गुनदीप कुमार, सुशील कोहली, मुखबैन सिंह, कर्नल बलबीर सिंह, गुरमैल सिंह, गोल्डन गर्ल रादबीर कौर, जगदीश सिंह, बलदेव सिंह, अजीत सिंह, हरमीक सिंह, अजीत पाल सिंह, चंचल रंधावा, सज्जन सिंह चीमा, हरदीप सिंह, अजैब सिंह, शाम लाल, हरविंदर सिंह, हरमिंदर सिंह, सुमन शर्मा, प्रेमचंद डोगरा, बलविंदर सिंह व सरोज बाला जैसे खिलाड़ी भी पुरस्कार लौटाने जा रहे हैं।
भारतीय साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने पर उपन्यासकार डॉ. जसविंदर सिंह ने कहा कि अगर कोई लेखक लोगों की आवाज को प्रस्तुत नहीं कर सकता है तो क्या फायदा है। मैंने पुरस्कारों के लिए लिखना शुरू नहीं किया। केन्द्रीय सरकार को किसानों के साथ निर्दयता से पेश आना और बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन करते देखना निराशाजनक है।