नई दिल्ली: देशभर में तेज़ी से बढ़ते कोरोना मामलों को लेकर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा,''आप समझ सकते हैं कि कितनी गंभीर परिस्थिति में हम जा रहे हैं। इसके लिए जो भी सहयोग करने की आवश्यकता है, राज्य सरकार कर ही रही है और केंद्र सरकार पर भी उम्मीदें निश्चित तौर पर हैं| अशोक चव्हाण ने कहा,''''एक तरफ NGO और अच्छे लोग सामने आ रहे हैं, इंडस्ट्री के लोग सामने आ रहे हैं, जो कि एक सकारात्मक चित्र है। वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार जिन्हें हम जिम्मेदार समझते हैं वो कितने गैर-जिम्मेदार दिखाई दे रहे हैं|
कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने कहा,''मैं डॉ. मनमोहन सिंह जी का आभारी हूं जो उन्होंने संक्षिप्तता से पूर्व प्रधानमंत्री होने के नाते सीधे और सही तरीके से अपना पक्ष रखा है कि देश में किन-किन चीजों की आवश्यकता है? एक सकारात्मक बयान उन्होंने सामने रखा है|
कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने कहा,''डॉ मनमोहन सिंह जी ने एक पत्र देश के प्रधानमंत्री के सामने रखा। उम्मीद थी कि उस पत्र के बाद उसे पॉजिटिव सेंस में लेकर पॉजिटिव काम किया जायेगा। जिसका जवाब प्रधानमंत्री जी से मिलने की उम्मीद थी लेकिन एक 'सड़क छाप' जवाब दिया देश के एक नाकाम मंत्री हर्षवर्धन जी ने| चव्हाण ने कहा,''यह भी जिक्र सामने आ रहा है कि पीयूष गोयल एक बयान देते हैं, देवेंद्र फडणवीस दूसरा बयान देते हैं, तो क्या यह लक्षण मदद करने की भूमिका है या फिर देश में जो काम अच्छा हो रहा है उस पर अपनी राजनीति करना इनका मकसद है|
महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा,''सक्षम रूप से देश का नेतृत्व कर चुके डॉ. मनमोहन सिंहजी द्वारा सुझाया गया पांच सूत्रीय कार्यक्रम उचित था। ऐसे सुझावों का सरकार से सकारात्मक जवाब की उम्मीद है। लेकीन इन सुझावों को प्रधानमंत्री के बजाय उनके असफल स्वास्थ्य मंत्री द्वारा दिया गया सड़कछाप जवाब निराशाजनक है।कोरोना की गंभीर स्थिति को देखकर कांग्रेस नेता श्री. Rahul Gandhi ने पांच राज्यों के चुनावों में और अधिक प्रचार रैलियों का आयोजन नहीं करने का समझदार निर्णय लिया। प्रधानमंत्री भी इसी तरह का निर्णय लेकर डॉ. मनमोहन सिंह के सुझावों पर विचार-विमर्श करते तो देश के लोगों को फायदा होता।
अशोक चव्हाण ने कहा,'गुजरात में रेमेडिसवीर के काले बाज़ार के मामले में ब्रुक फार्मा के एक निदेशक को गिरफ्तार किया गया। उसी कंपनी के एक निदेशक को जब मुंबई पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया, तो भाजपा के दोनों विरोधी दल नेता और कई विधायक पहुंच गए और पूछताछ में हस्तक्षेप करने की कोशिश की।केंद्र सरकार छोटे-छोटे मामलों की जांच सीबीआई, एनआईए, ईडी से करवाती है। तो फिर रेमडेसिवीर की कालाबाजारी और जमाखोरी की जांच इन्हींं केंद्रीय जांच एजेंसियों से क्यों नहीं कराई जा रही है?
अशोक चव्हाण ने कहा,''कोरोना के इलाज में रेमडेसिविर रामबाण इलाज़ नहीं है, लेकिन इस दवा को एक विशिष्ट कालावधि में देने से मरीज को कुछ राहत मिल सकती हैं। केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह रेमडेसिविर कहां और कितनी मात्रा में उपलब्ध है, तथा सभी राज्यों के जरूरत के अनुसार वितरण करना चाहिए। चव्हाण ने कहा,.''महाराष्ट्र सरकार ने 15 अप्रैल से लॉकडाउन लगाने से पहले कुल 5,476 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की है। इस पैकेज के माध्यम से लाखो गरीब, श्रमिकों व आदिवासी परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक मदद दी मिलेंगी। इस पैकेज में जरूरतमंदों का विशेष ध्यान रखा गया है।
महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा,''महाराष्ट्र में हम फ्रंट लाइन पर रहकर काम कर रहे हैं। हमारे सभी लोग इसमें शामिल हैं। राज्य सरकारें इसमें काम कर रही हैं। हम सब मिलकर एक टीम वर्क के तहत इसमें काम कर रहे हैं| निश्चित तौर पर देश में इस वक्त 'मेडिकल इमरजेंसी' की स्थिति बनी हुई है। जिसको देखकर मुझे ऐसा लगता है कि हर चीज़ को लेकर तुरंत रिस्पोंस की आवश्यकता है|
कैबिनेट मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा,''आर्थिक स्थिति पर बहुत बड़ा प्रभाव हुआ है इसके बावजूद भी महाराष्ट्र सरकार ने पिछले साल कोरोना के इलाज़ के लिए तक़रीबन ₹20000 करोड खर्च किए और इस साल भी तकरीबन सभी जरूरतों के लिए ₹12000 करोड़ की राशि हमने उपलब्ध करायी है| मुख्यमंत्री ने जिस पैकेज की घोषणा की है, उसके अंतर्गत हमने अपनी सभी स्कीम जिसमें लगभग 35 लाख लाभार्थी हैं, हमने हर व्यक्ति को ₹2000 देने का फैसला किया है |
कैबिनेट मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा,''ये व्यक्तिगत आलोचना का समय नहीं है। जिस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिस तरह से केंद्रीय मंत्री बयान देते हैं जिस तरह से महाराष्ट्र के भाजपा नेताओं के बयान आ रहे हैं वह ठीक नहीं है। इस समय देश के लोगों को हमारी जरुरत है |
बता दें कि,'रविवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी देश में खराब हो रहे कोरोना महामारी के हालात पर चिंता जाहिर की है. इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा है|इसमें उन्होंने कोरोना से लड़ने के लिए अहम सुझाव दिए हैं| उन्होंने कहा है कि कोरोना से निपटने के लिए देश में टीकाकरण को बढ़ाने की जरूरत है|
'रविवार को पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा है कि महामारी को काबू करने के लिए टीकाकरण महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा है कि कितने लोगों को टीका लगा है, यह आंकड़ा ना देखकर हमें इस पर फोकस करना चाहिए कि आबादी के कितने फीसद लोगों को टीका लगा है।
मनमोहन सिंह ने कहा कि सबसे पहले सरकार को अगले छह महीने के लिए टीकों के दिए गए ऑर्डर, किस तरह से टीके राज्यों के बीच वितरित होंगे, इस बारे में बताना चाहिए। उन्होंने कहा, ''सरकार को यह बताना चाहिए कि अलग-अलग वैक्सीन उत्पादकों को कितने ऑर्डर दिए गए हैं, जिन्होंने अगले छह महीने में डिलीवरी का वादा किया है। यदि हम लक्षित संख्या में लोगों को टीका लगाना चाहते हैं तो हमें अडवांस में पर्याप्त ऑर्डर देने चाहिए ताकि उत्पादक समय से आपूर्ति कर सकें।''
दूसरी सलाह में पूर्व पीएम ने कहा, ''सरकार को यह बताना चाहिए कि इन संभावित टीकों का वितरण राज्यों के बीच किस तरह पारदर्शी फॉर्मूले के आधार पर किया जाएगा। केंद्र सरकार 10 फीसदी आपातकालीन जरूरत के लिए रख सकती है, लेकिन बाकी का राज्यों को साफ सिग्नल मिले ताकि वे उस तरह टीकाकरण की योजना बना सकें।''
तीसरी सलाह में पूर्व पीएम ने कहा है कि राज्यों को यह छूट दी जाए कि वे फ्रंटलाइन वर्कर्स की कैटिगरी तय करें, जिन्हें 45 साल से कम उम्र के बावजूद टीका लगाया जा सके। उदाहरण के तौर पर राज्य स्कूल टीचर, बस, थ्री व्हीलर और टैक्सी ड्राइवर्स, म्यूनिसिपल और पंचायत कर्मियों और वकीलों को टीका लगाना चाहेंगे। 45 साल से कम उम्र के बावजूद इन्हें टीका लगाया जा सकता है।
पूर्व पीएम ने यह भी कहा कि पिछले कुछ दशकों में भारत सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक के रूप में उभरा है। उन्होंने आगे कहा, ''अधिकांश क्षमता निजी क्षेत्र में हैं। जनस्वास्थ्य के लिए मौजूदा आपात स्थिति में भारत सरकार को वैक्सीन उत्पादकों को मदद देनी चाहिए, ताकि वे तेजी से मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का विस्तार कर सकें।'' उन्होंने इसके लिए कंपनियों को फंड और छूट देने की सलाह दी।
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने यह भी कहा कि वैक्सीन के घरेलू आपूर्तिकर्ता सीमित हैं, इसलिए ऐसे किसी भी टीके जिसे यूरोपीय मेडिकल एजेंसी या यूएसएफडीए ने मंजूरी दी हो, देश में आयात की मंजूरी देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए देश में ट्रायल के बिना ही उन्हें मंजूरी देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में यह छूट न्यायोजित है।
बताते चले कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण इन दिनों बेहद तेजी से फैल रहा है दिनोंदिन रिकॉर्ड संख्या में कोरोना संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं| इसके साथ ही बड़ी संख्या में लोगों की मौत भी हो रही है| प्रतिदिन नए कोरोना मरीजों और कोविड से मरने वालों की संख्या में भारी बढ़ोतरी दहशत पैदा कर रही है। सोमवार को देश में कोरोना संक्रमण ने अब तक के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। देश में पिछले 24 घंटों में करीब 2.74 लाख नए कोरोना मरीज मिले हैं और 1,619 से अधिक लोगों की जिंदगी इस संक्रमण ने लील ली। कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में बेड, वेंटिलेटर, रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की किल्लत हो गई।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में पिछले 24 घंटे में COVID19 के 2,73,810 नए मामले आने के बाद कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 1,50,61,919 हुई। 1,619 नई मौतों के बाद कुल मौतों की संख्या 1,78,769 हो गई है। देश में सक्रिय मामलों की कुल संख्या 19,29,329 है और डिस्चार्ज हुए मामलों की कुल संख्या 1,29,53,821 है।