नई दिल्ली: भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा उजागर की गई कई सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं में अनियमितताओं /घोटालों को लेकर कांग्रेस (Congress) ने केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चुप्पी तोड़ने की मांग की। कांग्रेस ने कहा कि,''देश में मोदी विरोधी एक संस्था है। यह इंटरनेशनल साजिश में शामिल है। इस संस्था का नाम है- CAG इस संस्था ने मोदी सरकार के 7 बड़े घोटालों का पर्दाफाश किया है। मोदी जी को तत्काल इस संस्था पर ताला लगवाना चाहिए और रिपोर्ट निकालने वालों को जेल भेजने का काम करना चाहिए। इन्हें लगता है देश में प्रजातंत्र है...| घोटालों पर कांग्रेस (Congress) ने पूछा- PM मोदी 'घोटालों' पर चुप्पी तोड़ेंगे या नहीं?, क्या सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और मंत्री पर कोई कार्रवाई होगी?|
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत (Supriya Shrinate) ने पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बुधवार को कहा, ''यह घोटालों का बड़ा मुद्दा है। सरकारी खातों की ऑडिटिंग करने वाली सीएजी (कैग) ने सात घोटाले उजागर किए हैं। अब हमें लगता है कि प्रधानमंत्री और सरकार को सीएजी पर छापेमारी करानी चाहिए कि वे कैसे सरकार से सवाल पूछ रहे हैं।''
• CAG ने पर्दाफ़ाश किया मोदी सरकार के 7 घोटालों का, प्रधानमंत्री मोदी की नाक के नीचे हो रही है धांधली;
• भारतमाला प्रोजेक्ट की बिडिंग प्रक्रिया में फर्जीवाड़े, बनाई की लागत 100% बढ़ गई;
•द्वारका एक्सप्रेस-वे में भारी धांधली, सड़क बनाने की क़ीमत 18 करोड़ प्रति किलोमीटर से 250 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर पहुँच गई;
• आयुष्मान भारत में मृत लोगों को जीवित दिखा कर भुगतान और एक ही नंबर से 7.5 लाख लाभार्थियों के जुड़े होने का फर्जीवाड़ा;
• अयोध्या डेवेलपमेंट प्रोजेक्ट में ठेकेदारों के गल्ले में अनुचित लाभ पहुंचाने का घोटाला;
•टोल नियमों का उल्लंघन, NHAI ने गलत तरीके से यात्रियों से 132 करोड़ रुपये वसूले;
•HAL पर विमान इंजन की डिजाइन प्रोडक्शन में खामियों का गंभीर आरोप जिससे 159 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ;
• ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वृद्ध, विकलांग और विधवा पेंशन योजनाओं का पैसा अन्य योजनाओं के प्रचार में खर्च कर दिया;
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''एक देश विरोधी संस्था है CAG, जो सरकार के सारे खर्चे का ऑडिट करती है। यह संस्था प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ साज़िश रच रही है और उनकी नाक के नीचे हो रहे एक दो या तीन नहीं, 7 घोटालों को बेनकाब कर रही है। अब बस तुरंत मोदी जी उस पर ED की रेड करवाकर ताला लगवायें - ऐसे काम नहीं चलेगा, जेल तो वो भिजवा ही देंगे।
क्योंकि जिस झूठी ईमानदार छवि का गला फाड़ फाड़ कर प्रधानमंत्री दंभ भरते हैं, वो ध्वस्त हो चुकी है। मोदी सरकार में घोटाले ही घोटाले हैं और अब पूरा सच देश के सामने आ रहा है। लोग मोदी जी के भ्रष्टाचार के बारे में बात करने लगे हैं।
1) भारतमाला प्रोजेक्ट
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,'' CAG ने भारतमाला प्रोजेक्ट में फर्जीवाड़े की पोल खोली है। सड़क की लागत में लगभग 100% वृद्धि का भी खुलासा हुआ है। इस प्रोजेक्ट के फण्ड की अनुमति आर्थिक मामलों संबंधी कैबिनेट समिति CCEA देती है, जिसकी अध्यक्षता स्वयं प्रधानमंत्री करते हैं। इस परियोजना में CCEA ने मंजूरी दी थी 5,35,000 करोड़ रुपये की लागत पर 34,800 किलोमीटर सड़क बनाने के लिए, लेकिन असल में ठेका 26,316 किलोमीटर राजमार्गों का ही दिया गया, जिसकी स्वीकृत लागत 8,46,588 करोड़ रुपये थी। इसका मतलब CCEA ने जिन परियोजनाएं के लिए 15.37 करोड़ रुपए प्रति किमी की लागत को मंजूरी दी वो बढ़ कर दोगुनी से भी अधिक, मतलब क़रीब 32.17 करोड़ रुपए प्रति किमी की लागत हो गई है।
CAG ने बोली प्रक्रिया में भी अनियमितताओं को उजागर किया है। सफल बोली दाताओं ने टेंडर की शर्त पूरी नहीं की, फ़र्ज़ी दस्तावेज़ के आधार पर चयन हो गया, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के बिना काम आवंटित हुआ, Escrow अकाउंट से 3598.52 करोड़ रुपए के आस पास फण्ड डायवर्जन हुए और कई जगहों पर safety consultant तक नहीं रखे गए। सड़क पर चलते हुए आप खुद अपनी जान माल के ज़िम्मेदार हैं, ये सरकार का नहीं है।
2) द्वारका एक्सप्रेसवे
CAG ने द्वारका एक्सप्रेस-वे में भारी धांधली उजागर करते हुए सवाल उठाया कि कैसे सड़क बनाने की क़ीमत 250 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर पहुँच गई, जबकि स्वीकृत लागत 18 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर ही थी और मंत्रालय की ओर से आया बयान, ये नहीं समझा सका कि ऐसा क्या बना जिसमें क़ीमत 1400%, मतलब 14 गुना बढ़ गई। ये महँगाई के चलते अकेले नहीं हो सकता, कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार की बू आती है, इसमें ।
3) टोल में लूट
CAG ने टोल नियमों के उल्लंघन का खुलासा करते हुए बताया है कि NHAI ने गलत तरीके से यात्रियों से 132 करोड़ रुपए वसूले हैं। ऑडिटर के पास यह आंकड़ा महज़ 5 toll plaza के ऑडिट से ही सामने आ गया। CAG ने यह भी खुलासा किया है कि राजस्व को NHAI के concession agreements से करीब 133 करोड़ रुपए का नुक़सान हुआ है। अगर ये ऑडिट पूरे देश के toll plaza का हो जाए, तो कितने लाखों करोड़ों रुपया का ग़बन सामने आएगा इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता ।
4 ) आयुष्मान भारत योजना
CAG ने आयुष्मान भारत योजना में ही रही धांधली का भी पर्दाफ़ाश किया है, जिसमें मृत लोगों को जीवित दिखा कर भुगतान किया गया है और एक ही नंबर से 7.5 लाख लाभार्थियों के जुड़े होने का फर्जीवाड़ा भी उजागर किया है। उपचार के दौरान 88,760 रोगियों की मौत हो गई, पर उनकी मौत के बाद उनसे संबंधित 2,14,923 क्लेम का भुगतान किया गया।
जैसा कि पहले बताया 7.5 लाख लाभार्थी एक ही मोबाइल नंबर से जुड़े दिखाये गये और करीब 4,761 रजिस्ट्रेशन तो केवल 7 आधार नंबर पर दिखा दिये गये। असल में 1.24 करोड़ फ़र्ज़ी लाभार्थी कुछ 1.86 लाख नंबरों से जुड़े पाये गये।
5) अयोध्या डेवेलपमेंट प्रोजेक्ट
CAG ने अयोध्या डेवेलपमेंट प्रोजेक्ट में ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने का घोटाला भी उजागर किया है। अयोध्या डेवेलपमेंट प्रोजेक्ट में ठेकेदारों के गल्ले में करीब 19.73 करोड़ का अनुचित लाभ पहुंचाने का घोटाला भी सामने आया है। कार्यान्वयन एजेंसी अर्थात उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम ने ठेकेदारों की नियुक्ति करते वक़्त performance guarantee का पूरा पैसा तक नहीं जमा करवाया। जिन ठेकेदारों का रजिस्ट्रेशन रद्द हो गया था, उनको भी GST का भुगतान हो गया, यहाँ तक की सिंचाई विभाग ने ठेकेदारों द्वारा प्रस्तावित दरों का तुलनात्मक विश्लेषण भी नहीं किया ।
6) ग्रामीण विकास मंत्रालय
CAG ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अपनी पेंशन योजनाओं के 2 करोड़ 83 लाख रुपए केंद्र की अन्य योजनाओं के प्रचार में खर्च कर दिये। इस पैसे से तीन पेंशन चलती हैं - बुजुर्ग, विकलांग और विधवा पेंशन और सोचिए कि मंत्रालय ने जून 2017 पेंशन के पैसे को मंत्रालय की बाक़ी योजनाओं के प्रचार अभियान में लगा दिया, फिर अगस्त 2017 में 19 राज्यों के हर ज़िले में पाँच होर्डिंग्स 'ग्राम समृद्धि स्वच्छ भारत पखवाड़ा के प्रचार के लिए पेंशन के 2.44 करोड़ खर्च कर दिये ।
7) HAL
CAG ने HAL पर विमान इंजन की डिजाइन प्रोडक्शन में खामियों का गंभीर आरोप लगाया है, जिससे 159 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
प्रधानमंत्री से सीधे सवाल हैं:-
• क्या प्रधानमंत्री अपनी नाक के नीचे हो रहे इन घोटालों पर चुप्पी तोड़ेंगे?
• क्या प्रधानमंत्री अपनी सीधी निगरानी में हो रहे हैं भारतमाला प्रोजेक्ट में धाँधली पर कार्रवाई करेंगे?
• क्या प्रधानमंत्री केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे?
• क्या प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत में हो रहे फ़र्ज़ीवाडे पर कुछ करेंगे, क्या वो पता करेंगे कि आख़िर लाभार्थियों का पैसा कहाँ जा रहा है?
• क्या प्रधानमंत्री ये पता करने की कोशिश करेंगे कि ग्रामीण विकास मंत्रालय विकलांग, वृद्ध और विधवा पेंशन का बजट दूसरी योजनाओं के प्रचार पर ख़र्चा क्यों कर रहा है?
• क्या प्रधानमंत्री यह पता करने की कोशिश करेंगे कि अयोध्या में पहले ज़मीन की धाँधली और अब डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के नाम पर घोटाले के लिए ज़िम्मेदार कौन है, आख़िर कौन ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुँचा रहा है?
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,'किसी ज़माने में CAG का नाम भर सुन लेने पर उछलने वाले मीडिया ने आज व्रत धारण कर लिया है. लेकिन सरकार और अधिकांश मीडिया की चुप्पी से ना घोटाले बंद होंगे और ना हमारे सवाल पर मोटे पैसे और प्रचार प्रसार से बनी और टिकी हुई छवि ख़त्म हो चुकी है कमीशनखोरी, मुनाफ़ाख़ोरी और जनता के पैसे की लूट पर से पर्दा तो अब ख़ुद CAG उठा रहा है। उन्होंने कहा,''हमें पता है मोदी जी सवालों का जवाब नहीं देंगे, लेकिन CAG को देशविरोधी घोषित किया जाएगा और रेड तो बिलकुल होगी।
एक प्रश्न पर कि संबद्ध मंत्रालय की तरफ से द्वारका एक्सप्रेसवे घोटाले के संदर्भ में जवाब दिया है, क्या कहेंगी? श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि तो ये सड़क मंगलयान से ज्यादा बजट पर बनेगी। ये एक्सप्लेनर है इस मंत्रालय का । मैं तो जानना चाहती हूं कि जिस प्रोजेक्ट की बात कर रही हैं, द्वारका एक्सप्रेसवे की, जहाँ पर 18 करोड़ प्रति किलोमीटर पर बनना था और वो 250 करोड़ प्रति किलोमीटर पर चला गया, कोई एक ऐसा विशेषज्ञ पूरी दुनिया में इस धरती से ले आइए जो कह दे कि प्रोजेक्ट कॉस्ट ऐसे एसक्लेट हो सकती है, एक ले आइए। जितने पैसे में 2 किलोमीटर बना, उतने में मंगलयान पहुंच गया वहाँ और हम कह रहे हैं कि ऐसा हमने रोड़ बना दिया। फिर तो उस पर टिकट लगना चाहिए, लोगों को उस रोड पर चलना नहीं चाहिए, उस रोड़ को जाकर देखना चाहिए। उसको नेशनल मोन्यूमेंट घोषित करना चाहिए, उस पर टिकट लगा देना चाहिए, उसको विश्व का आठवां अजूबा घोषित कर देना चाहिए। 18 करोड़ प्रति किलोमीटर का रोड 250 करोड़ प्रति किलोमीटर पर बन रहा है । 1400 प्रतिशत, 14 गुना बढ़ गई कॉस्ट, ये किस हिसाब से हो सकता है, वो एक्सप्लनेशन आया वो और भी हास्यास्पद था।
एक अन्य प्रश्न पर कि सीएजी रिपोर्ट के हवाले से जो आरोप लगाए हैं, क्या उसको लेकर आप सीवीसी या सीबीआई में शिकायत देंगे? श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि मुझे ऐसा लगता है कि हमें जो करना होगा, पहले तो आपके सम्मुख आए हैं, जनता को पता चलना चाहिए और उसके बाद के जो स्टेप होंगे, हम वो जरुर लेंगे। लेकिन ये देश कुछ संस्थाओं से चलता है और वो संस्थाएं लोकतंत्र को चलाती हैं और उनमें से एक संस्था सीएजी है, जो सरकार के खर्चे का परीक्षण करती है, उसके खर्चे को ऑडिट करती है और अगर सीएजी का कहना है कि 7 जगह घोटाला हुआ है, तो विपक्षी सीबीसी चला जाए, विपक्ष सीबीआई चला जाए, विपक्ष कोर्ट चला जाए तो चुनी हुई सरकार झुनझुना जाएगी, साढ़े 9 साल से जो हम सुन रहे हैं।
उन्होंने कहा,'जो दम्भ भरा जाता है ईमानदारी का, जो रंगी पुती एक छवि बनाई गई वो ध्वस्त हो गई है, ल गई है, चौपट हो गई है, वो सबको पता है, लेकिन इस संस्था ने कुछ कहा है। इस संस्था ने ये कहा है कि ऐसा-ऐसा घोटाला हुआ है। इसमें प्रोविजन होते हैं, सरकार ले इस प्रोविजन को करे इस पर काम। हमें जो करना होगा हम जरुर करेंगे। ये रिपोर्ट पार्लियामेंट में टेबल हुई है।
एक अन्य प्रश्न पर कि चुनावी साल है, इस मुद्दे पर क्या आप बाकी मंत्रालयों की सफाई प्रधानमंत्री की सफाई का इंतजार करेंगे? श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि आपके सम्मुख आने का एक जरिया होता है...जनता तक जाने का। इसकी पोल इस देश के हर डिस्ट्रिक्ट में खोली जाएगी, इसकी पोल समूचा विपक्ष खोलेगा, इसकी पोल इंडिया तक पहुंचाने का काम भी इंडिया ही करेगा। लेकिन मेरा अपना मानना है और मैं थोड़ी सी दृष्टता कर सकती हूं आप लोगों से, तो जरुर करूंगी कि फाइनली 5 सवाल इससे आए, मैं उस दिन का इंतजार कर रही हूं, जब किसी टीवी चैनल के ऑफिस से फोन आए और कहा जाए कि आज आपको फलां चैनल पर जाना है, सीएजी की रिपोर्ट पर चर्चा है, क्योंकि बड़ी चर्चाएं हमने 2014 से पहले देखी हैं। आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक सिर्फ सीएजी नजर आता था टीवी चैनलों पर और जब वो रिपोर्ट ध्वस्त हुई, जब वो रिपोर्ट झूठी साबित हुई, जब न्यायालय में वो खड़ी नहीं हो पाई रिपोर्ट, तब मुझे कोई डिस्कशन नहीं नजर आया।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''आज मुझे कोई डिस्कशन क्यों नहीं नजर आता है? सीएजी किस पैसे की ऑडिट करता है? ये पैसा जो है, ये सरकार का खर्चा है, सरकार का खर्चा कहाँ से आता है - ये हमारा और आपका पैसा है, ये जनता का पैसा है, ये ऋणदाताओं का पैसा है, ये करदाताओं का पैसा है और हर व्यक्ति इस देश में टैक्स देता है, जीएसटी के माध्यम से, डायरेक्ट टैक्स के माध्यम से। 50 प्रतिशत सबसे निचली आबादी 64 प्रतिशत जीएसटी दे रहा है। तो मुझे ऐसा लगता है कि इस पूरे मामले पर थोड़ा सा 'जागो, मीडिया जागो' भी होना चाहिए, जरुरी है वो होना। 9 साल से सीएजी भी चुप था, 9 साल से मीडिया भी चुप था। हवा का रुख बदल रहा है दोस्तों, आप भी उस हवा के रुख को पहचानिए
एक अन्य प्रश्न पर कि आज आप 7 ऐसे स्कैम (घोटाला) की बात कर रही हैं, तो आपको अंदाजा है देश को कितने एक्सचेकर का नुकसान हुआ है? श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि हमारी जानकारी के ताकि अभी सीज की कुछ और रिपोर्ट आनी बाकी हैं, जब वो रिपोर्ट आ जाएंगी, क्योंकि पार्लियामेंट के पटल पर ये रखी गई हैं। हम आपको एक फिगर ऑफ लॉस जरुर दे देंगे। लेकिन मैंने जिन योजनाओं का यहाँ पर जिक्र किया है, वो प्रॉफिट, लॉस से ऊपर योजनाएं हैं। आयुष्मान भारत योजना ऐसी है, जिसमें लोगों को लाभ मिलना चाहिए हेल्थ कार्ड का, जिसमें लोगों को अस्पताल में फ्री सेवा मिलनी चाहिए, वहाँ पर धांधली हो रही है। मतलब सीधे लोगों की जेब पर डाका । वृद्धा, विधवा और विकलांग की पेंशन, इस पर धांधली कर रहे हैं ये लोग एनएचएआई के टोल वाली धांधली, सड़कों पर धांधली, ये वो धांधली है, जो डायरेक्टली लोगों को प्रभावित करती है। हम आपको एक बड़ा एस्टिमेटेड फिगर जरुर देंगे, क्योंकि एक कैल्क्युलेशन चल रहा है, पर क्योंकि कुछ रिपोर्ट आनी बाकी हैं, थोड़ा सा समय हमें भी दीजिए ।
एक अन्य प्रश्न पर कि इस पूरे मामले में क्या प्रधानमंत्री की भूमिका को आप संदेहास्पद मानती हैं? श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि मैंने अपने ओपनिंग वक्तव्य में कहा था कि प्रधानमंत्री SATA की अध्यक्षता वाली कमेटी, सीसीईए की नाक के नीचे ये घोटाले हुए हैं और एक बात सब जानते हैं, चाहे वो सड़क का उद्घाटन हो, चाहे वो शौचालय का उद्घाटन हो, चाहे वो एक कमरे के अस्पताल का उद्घाटन हो, चाहे वो रेल यात्रा का उद्घाटन हो, वो प्रधानमंत्री करते हैं। इस सरकार में प्रधानमंत्री की मर्जी के बिना पत्ता नहीं हिलता है, तो मैं शब्दों का चयन बड़ी जिम्मेदारी से करती हूं। इन घोटालों के लिए, इस भ्रष्टाचार के लिए सीधे-सीधे नरेंद्र मोदी, इस देश के प्रधानमंत्री जिम्मेदार हैं और उन्हीं की जवाबदेही तय होनी चाहिए ।
एक अन्य प्रश्न पर कि भाजपा नेता अमित मालवीय ने सीएजी रिपोर्ट को गलत बताया है? इस पर श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि ये जो रिपोर्ट आई है सीएजी की और एक नहीं, 7 रिपोर्ट आई हैं, उनकी जानकारी के लिए बता दीजिए, अभी 6 ट्वीट और करेंगे, सारी रिपोर्टको भ्रामक बताएंगे। ये रिपोर्ट हमें नहीं मिली हैं, ये आपके माध्यम से नहीं आई हैं, ये रिपोर्ट संसद के पटल पर रखी गई हैं, तो सीएजी के खिलाफ ब्रीच ऑफ पार्लियामेंट है? सीएजी की जवाबदेही है, सीएजी ने अपना काम किया है 9 साल बाद इस पर सरकार कार्यवाही करे, पता करे कैसे ये फिगर आ रहे हैं।
श्रीनेत ने कहा कि,''एक फेक न्यूज पेडलर (अमित मालवीय), एक सबसे बड़ी झूठी पार्टी का झूठा व्यक्ति (अमित मालवीय),, जो सिर्फ फेक न्यूज चलाते उनकी बात पर मैं जवाब दूंगी इस बात का ? सीएजी की बात पर भरोसा करूंगी या इस फेक न्यूज पेडलर की बात पर भरोसा करूंगी? मुझे ऐसा लगता है कि ये पार्लियामेंट के पटल पर रखी गई रिपोर्टें हैं और सरकार पर इसकी जवाबदेही तय होती है, मोदी जी की जवाबदेही तय होती है। इस सरकार की नाक के नीचे बड़े-बड़े घोटाले हुए हैं। इस सरकार की नाक के नीचे जो बड़े घोटालेबाज थे, वो वॉशिंग मशीन से नहाकर उनके साथ आ गए हैं, चाहे वो व्यापम घोटाला हो, चाहे वो शारदा घोटाला हो, चाहे वो टी-शर्ट घोटाला हो, चाहे वो सिंचाई घोटाला हो, ऐसे तमाम घोटालेबाज हैं।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''मैं शुरु कर सकती हूं अरुणाचल से लेकर गुजरात तक तमाम लोगों के नाम, लेकिन ये छुप वाली बात नहीं है।
एक अन्य प्रश्न पर कि क्या 2024 में रिजल्ट मोदी सरकार के विरोध में हो सकता है? श्रीमती श्री ने कहा कि मुझे लगता है कि जनता की आंखें वैसे ही खुल रही हैं। मुझे लगता है कि अगर जनता से परेशान ना होते, अगर जनता के मुद्दे प्रधानमंत्री को होंट ना कर रहे होते, तो उन्होंने लालकिले की प्राचीर से भाषण दिया, जो कि राष्ट्र के नाम संबोधन होना चाहिए था, वो मुझे किसी नुक्कड़ सभा का चुनावी रैली का भाषण लग रहा था। आपको नहीं लगता कि हवा बदल रही है, आपको नहीं लगता कि जनता जो है वो त्रस्त है महंगाई से 35 प्रतिशत महंगाई बढ़ी है सब्जियों में, 13 प्रतिशत अनाज में, 11 प्रतिशत फूड कमोडिटी में और ऑवर ऑल जो रिटेल महंगाई है वो साढ़े 7 प्रतिशत के पास पहुंच गई है, उस देश में जहाँ पर बेरोजगारी की दर साढ़े 8 प्रतिशत के आस-पास है। आपको नहीं लगता कि लोग परेशान हैं, लोग महंगाई से परेशान हैं, लोग बेरोजगारी से परेशान हैं और लोगों की आंखें खुल रही हैं। पैसा कहाँ जा रहा है, क्यों एक वर्ग अमीर होता जा रहा है और क्यों आपके हाथ में पैसा कम होता जा रहा है। ये सवाल पूरा देश पूछ रहा है।
2024 का चुनाव मुद्दों का चुनाव है, 2024 का चुनाव मोदी जी अहंकार का चुनाव है और एक बात आपको और बता दूं बड़े पते की, ये जो मोदी जी हर जगह, चाहे लोकसभा हो और कल वहाँ पर जब चुनावी नुक्कड़ सभा संबोधित कर रहे थे लालकिले की प्राचीर से और उन्होंने कहा कि तीसरा टर्म, ये आपको पता है क्यों कह रहे हैं बार-बार ये सिर्फ इनका अहंकार नहीं है, ये इनकी असुरक्षा है, ये इनकी इनसिक्योरिटी है। वो पिक्चर याद है आपको थ्री इडियट्स, ऑल इज वेल, ऑल इज वेल । अरे ये देश है, ये लोकतंत्र है, ऑल इज वेल, ह से ऑल इज वेल हो नहीं जाएगा । झोला उठाने का वक्त आ गया है, इसलिए मोदी जी की असुरक्षा है कि वो बार-बार ये कह रहे हैं कि मैं आने वाला हूं। वो आने वाले नहीं हैं, देश बना लिया है और ये बिल्कुल चुनावी मुद्दा है।
एक अन्य प्रश्न पर कि टू-जी के मामले में जो नंबर लॉस की थ्योरी दी गई थी, वो कोर्ट में नहीं टिकी, क्या आगे जाकर इन घोटालों का भी ऐसा हश्र होगा? श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि मुझे लगता है कि हमें भ्रष्ट साबित करने की जरुरत नहीं है, ये सारा देश जानता है कि कितनी भ्रष्ट सरकार है ये। ये सारा देश जानता है कि कैसे अडानी महाघोटाले का संरक्षण खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनकी पूरी कैबिनेट, उसके सारे सांसद, उनके सारे मंत्रियों ने किया। आप कभी-कभी आंख बंद करिए, तो आपको समझ नहीं आता तो भाजपा का प्रवक्ता बोल रहा है या अडानी का प्रवक्ता बोल रहा है। तो उनकी नाक के नीचे जो ये घोटाले हुए हैं, हमें प्रूफ करने की जरुरत नहीं है। देश जान रहा है कि कौन भ्रष्टाचार कर रहा है, देश जान रहा है किसने घोटाले किए हैं।
आपका ये जो सवाल था, ये अच्छा सवाल है कि ये कोर्ट में नहीं टिके थे, तो जिसने तब तांडव रचा था, वो अब हाथ जोड़कर माफी मांगेगे वो लोग ? कुछ आपके साथी भी होंगे, कुछ आज पक्ष के भी लोग होंगे, आ जाएं मैदान में माफी मांगे। मुझे ऐसा लगता है कि ये जो सारे घोटाले हैं, इनकी जांच होनी चाहिए, इस पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। पता करना चाहिए कि लाभार्थियों की जगह किसको फायदा मिल रहा है, क्योंकि ये नोशनल घोटाले नहीं है, ये लाभार्थियों को मिलने वाला पैसा कहीं और जा रहा है। ये पेंशनदारों का पैसा कहीं और जा रहा है, ये नोशनल लॉस नहीं है।
एक अन्य प्रश्न पर कि सीएजी रिपोर्ट आने के बाद क्या आने वाले समय में कांग्रेस पार्टी भी सड़क पर उतरकर, जनता तक सीधे तौर पर ये बात पहुंचाएगी? श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि हर वो काम करेंगे, जिससे ये सरकार बेनकाब हो, जिससे जनता तक ये मुद्दा पहुंचे। वो सड़कों पर उतरना होगा, वो और कोई रास्ता अख्तिआर करना होगा, हम वो सब चीजें करेंगे।
एक अन्य प्रश्न पर कि नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी का नाम बदलकर अब प्रधानमंत्री मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी हो गया है, क्या कहेंगी? श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि ये सरकार मानसिक और सैद्धांतिक विरोधाभासों से भरी हुई सरकार है। मैं इस पर जवाब दूंगी, उससे पहले मैं गांधी की बात करती हूं। कल प्रधानमंत्री ने ध्वजारोहण किया, उसके बाद वो राजघाट गए और जब- जब प्रधानमंत्री, महात्मा गांधी के आगे नतमस्तक होते हैं और शीश झुकाते हैं, मुझे व्यक्तिगत रूप से बहुत खुशी मिलती है और ये देश प्रफुल्लित होता है। इसलिए होता है, क्योंकि जिस गांधी के आगे आप शीश झुकाते हैं, ये उसका सच, उसका शाश्वत सत्य है, जिसके आगे आप नतमस्तक होते हैं, अनमने मन से ही सही, क्योंकि आप तो गोड़से के उपासकों के साथ खड़े हैं।
आप महात्मा गांधी के सेवा संघ पर काशी में नफरत से और सत्ता के मद में चूर अपना बुल्डो चलवा रहे थे और उसके बाद भी आपको गांधी के आगे नतमस्तक होना पड़ा, ये गांधी की ताकत है। आपने नेहरू मेमोरियल की बात की, लाइब्रेरी की बात की । इतिहास न रचा जाता है, इतिहास बनाया जाता है, इतिहास बदला नहीं जाता है और इमारतें बना देने से, किसी जगह का नाम बदल देने से आपकी संकीर्ण, क्षुद्र, छोटी सोच दिखाई देती है। जिनके अंदर जज्बा होता है न, वो इतिहास बना देते हैं, जिनके अंदर जज्बा होता है, वो पाकिस्तान के 2 टुकड़े करके विश्व का भूगोल बदलते हैं, जिनके अंदर जजबा होता है, 200 साल की गुलामी के बाद जब देश आजाद होता है और एक सुई नहीं बनती है, वो इस देश में आईआईटी, एम्स, आईआईएम, इसरो, भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर की स्थापना करते हैं। तो आपको अगर लगता है कि एक जगह का नाम बदलकर, आप उनकी विरासत को धूमिल कर दीजिएगा, तो ये सूरज को दीया आप दिखाते रहिए।
असलियत ये है कि मोदी जी ने अपने साढ़े नौ साल के कार्यकाल में एक... और मैं डंके की चोट पर कहती हूं, एक ऐसा काम नहीं किया है, जिससे इतिहास में उनका नाम अंकित होगा। सीमेन्ट और बालू की इमारतें तो बहुत लोगों ने बनवाई, एक काम ऐसा नहीं किया, जिससे देश उनको याद करेगा। तो नेहरू की विरासत के साथ छेड़छाड़ करना, उनका नाम हटाकर, किसी और का नाम रख देना, ये आपकी ओछी, छोटी राजनीति का परिचायक है, इस पर मैं क्या टिप्पणी करूं ।