मुख्य सामग्री पर जाएँ
24 अगस्त 2026

“देश पर 155 लाख करोड़ कर्ज..”: कांग्रेस का सरकार पर हमला, पूछा- मोदी जी, पिछले 8 साल में पौने 3 गुना से ज्यादा कर्ज कैसे बढ़ गया?

नई दिल्‍ली : देश पर कर्ज के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने रविवार (22 जनवरी 2023) को केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है| मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कांग्रेस ने कहा कि,“आजादी से लेकर 2014 तक देश पर 55…

“देश पर 155 लाख करोड़ कर्ज..”: कांग्रेस का सरकार पर हमला, पूछा- मोदी जी, पिछले 8 साल में पौने 3 गुना से ज्यादा कर्ज कैसे बढ़ गया?
“देश पर 155 लाख करोड़ कर्ज..”: कांग्रेस का सरकार पर हमला, पूछा- मोदी जी, पिछले 8 साल में पौने 3 गुना से ज्यादा कर्ज कैसे बढ़ गया? | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्‍ली : देश पर कर्ज के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने रविवार (22 जनवरी 2023) को केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है| मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कांग्रेस ने कहा कि,“आजादी से लेकर 2014 तक देश पर 55 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था| बीते करीब नौ सालों में देश पर कर्ज 55 लाख करोड़ रुपये से बढ़ कर 155 लाख करोड़ रुपये हो गया'| आज हर नागरिक पर 1 लाख 9 हजार रुपये का कर्ज है। ये जो कर्ज लिया है वो आर्थिक विकास में नहीं लग रहा है|  इसका फायदा भी देश के नागरिक को नहीं मिल रहा है|”



 AICC HQ नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा कि, “आज 22 जनवरी है और 8- 9 दिन बाद मोदी सरकार का इस कार्यकाल का अंतिम बजट प्रस्तुत होने वाला है। उस बजट में क्या इशू हैं, हम विस्तार से उनके बारे में समय-समय पर अपनी बात करते आए हैं, पर आज जो इशू, हम आपके सामने लेकर आए हैं, वो देश पर कर्ज की स्थिति, the debt on India और ये कर्ज की स्थिति इतनी भयानक बन चुकी है, मैं जो आंकड़े आपके सामने रख रहा हूं, आपको जानकर ताज्जुब होगा कि हम में से बैठा हुआ प्रत्येक व्यक्ति, हमारे ऊपर एक लाख नौ हजार रुपए का कर्ज है, जो हमने नहीं लिया है, आपने नहीं लिया है। एक लाख नौ हजार का कर्ज हमारे बिहाफ पर भारत सरकार ने हमारे ऊपर एक लाख नौ हजार रुपए का कर्ज चढ़ाया हुआ है, प्रत्येक हिंदुस्तानी पर। पहले कितना था, कितना 9 साल में बढ़ा, सारे का आंकड़ा लेकर आया हूं।”



प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा, “आपके और मेरे, और कोई भी विवेकशील व्यक्ति के मन में ये जरूर आएगा कि भाई कर्ज लिया है, तो आर्थिक विकास के कार्यों में लग रहा होगा, पर आपके और मेरे ऊपर एक लाख नौ हजार रुपए का कर्ज तो है, पर इस कर्ज का फायदा हमें नहीं मिल रहा है। क्योंकि जो ग्रोथ मॉडल है देश का, वो 'के' शेप्ड रिकवरी मॉडल है । अंग्रेजी में जो शब्द है ना 'K', मतलब हम जो ग्रो कर रहे थे, नोटबंदी के बाद नीचे आए; गलत तरीके से जीएसटी लगाने से और नीचे आए; तालाबंदी के बाद फिर और नीचे आए, पर फिर जो बढ़े वह सिर्फ वो लोग बढ़े, जिनकी डीटेल्स अभी चार-पांच दिन पहले ऑक्सफेम की रिपोर्ट (Oxfam report) में आया, कि हिंदुस्तान में...। ताज्जुब की बात है कि हमारे देश में 5 प्रतिशत जो लोग है, उनके पास 60 प्रतिशत संपत्तियां हैं और बॉटम 50 प्रतिशत जो लोग हैं देश के, 140 करोड़ में से मैं गणना करूं, तो जो 70 करोड़ लोग, जो नीचे वाले हैं, उनके पास मात्र 3 प्रतिशत देश की संपत्तियां हैं।”



उन्होंने कहा,“तो 5 प्रतिशत अगर मैं कैल्कुलेट करूं, तो 140 का मतलब 7 करोड़ लोगों के पास देश की 60 प्रतिशत से ज्यादा संपत्तियां हैं और ऐसा नहीं है कि ये लोग जिनके पास 5 प्रतिशत, जिनके पास 60 प्रतिशत से ज्यादा संपत्तियां हैं, वो देश को ज्यादा कर (Tax) देते हैं, ऐसा नहीं है। कर (Tax)....हम जो बॉटम 50 प्रतिशत के लोग हैं, जो मिडिल इन्कम ग्रुप, और लोअर इंकम ग्रुप हैं, अगर हम ''Tax'' की बात करें, तो जीएसटी में हमारा कॉन्ट्रिब्यूशन 64 प्रतिशत है। मतलब जो बॉटम 50 प्रतिशत, जो 3 प्रतिशत देश के एसेट्स को होल्ड करता है, वो देश की जीएसटी में 64 प्रतिशत पैसा देता है और जो 5 प्रतिशत, जो देश के 60 प्रतिशत संपत्तियों को होल्ड करता है, जीएसटी में उनका कॉन्ट्रिब्यूशन मात्र 3 प्रतिशत है, जो फर्स्ट 10 प्रतिशत देश की जनसंख्या है।”



तो ये जो 'के' शेप्ड रिकवरी मॉडल है, इसमें जो मोदीनॉमिक्स है, उसके लिए हम यही कहेंगे rising debt, rising unemployment and rising inequality, जबकि राइज किसका होना चाहिए था- जीडीपी का । राइज किसका होना चाहिए था - पर कैपिटा इनकम का। राइज किसका होना चाहिए था- हमारी रेटिंग, जो हंगर इंडेक्स में है, वो हमारी रेटिंग बढ़नी चाहिए थी या नीचे आनी चाहिए थी, तो कुल मिलाकर आज की जो प्रेस वार्ता है, वो देश के डैट (Debt) के ऊपर है।” 



उन्होंने कहा, “जब मोदी सरकार ने सत्ता संभाली, तो देश के ऊपर टोटल कर्ज था 55 लाख करोड़ रुपए और 2023, मार्च 31 को अनुमानित है, भारत सरकार का आंकड़ा दे रहा हूं अनुमानित है - 155 लाख करोड़ रुपए। मतलब 55 लाख करोड़ रुपए हुआ वर्ष 1947 से लेकर मार्च 31, 2014 तक और मार्च 31, 2014 से लेकर, मार्च 31, 2023 में हो गया 55 का 155 लाख करोड़। आजादी से लेकर 2014 तक प्रति देशवासी पर कर्ज था 43 हजार रुपए, जो मार्च 2023 में भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार रहने का अनुमान है - 1,09,373 रुपए और मैंने पिछले 9 साल का पूरा आंकड़ा बनाया है, ये टेबल आपके सामने रखूंगा।।” 


155 लाख करोड़ का कैसे हो गया? मोदी जी

प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा, “इस टेबल में प्रतिवर्ष भारत सरकार ने कितना कर्ज लिया और पर कैपिटा कर्ज देशवासियों पर कैसे चढ़ा। जो मार्च, 2014 में 55 लाख करोड़ का कर्ज था, वो 155 लाख करोड़ का कैसे हो गया, मोदी जी ? मोदी जी, ऐसा क्या हुआ कि पिछले 9 सालों में जो कर्ज है, वो ढाई गुना से भी ज्यादा बढ़ा है, 43,124 रुपए से बढ़कर 1,09,373 रुपए ? पिछले 9 सालो में प्रति हिंदुस्तानी पर कर्ज बढ़ा है - 66,249 रुपए। Sixty six thousand two hundred forty nine is the increase in per capita debt on every Indian in our country. ऐसा क्या हुआ कि 55 लाख, 155 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो टोटल कर्ज 31 मार्च, 2014 को 55 लाख करोड़ था, वो 155 लाख करोड़ कैसे हो गया और ये पैसा किसके उपयोग में आया? उसका ब्योरा दे देता हूं| ” 



इस कर्ज का फायदा देशवासियों को क्यों नहीं मिल रहा है? मोदी जी

उन्होंने कहा, “मैं कई बार राइजिंग अनएम्प्लॉयमेंट की बात की। मैंने कई बार इस पटल से राइजिंग पॉवर्टी की बात की कि आज दुनिया में सबसे ज्यादा गरीब हमारे देश में निवास करते हैं? पर आज आपको राइजिंग इनईकैलिटी की बात बताता हूं कि ये कर्ज हम ले रहे हैं, हमारे प्रत्येक देशवासी के ऊपर चढ़ रहा है। 1,09,373 रुपए हममें से प्रत्येक हिंदुस्तानी के ऊपर चढ़ गया, पर उस कर्ज का फायदा हमें नहीं मिल रहा है। फायदा मिल रहा है चंद लोगों को, जिनकी वेल्थ बढ़ रही है, बाकी सब लोगों की वेल्थ कम होती जा रही है और ये मैं नहीं कह रहा हूं। 


5 प्रतिशत अमीर लोगों के पास देश की 60 प्रतिशत से ज्यादा संपत्ति

उन्होंने कहा, “जो मैंने आपको 55 लाख करोड़ से 155 लाख करोड़ बताया, ये भारत सरकार का आंकड़ा है। जो मैं आपको ऑक्सफेम की रिपोर्ट के अनुसार पढ़कर सुनाता हूं कि देश के 5 प्रतिशत अमीर लोगों के पास देश की 60 प्रतिशत से ज्यादा संपत्ति है और नीचे के 50 प्रतिशत लोगों के पास देश की मात्र 3 प्रतिशत संपत्ति है, 3 प्रतिशत वेल्थ है। पर ये नीचे के 50 प्रतिशत, जिनके पास 3 प्रतिशत वेल्थ है, वो जीएसटी देते हैं, देश की 64 प्रतिशत वहीं से आ रही है और जो ऊपर के 10 प्रतिशत अमीर लोग हैं, जिनके पास देश की 70-80 प्रतिशत की वेल्थ है, वो जीएसटी देते हैं मात्र 3 प्रतिशत | मतलब अगर 100 रुपए जीएसटी इकट्ठी होती है, तो जो नीचे के 50 प्रतिशत लोग हैं, उनकी तरफ से 64 रुपए इकट्ठी होती है और जो वेल्थी लोग हैं, जिनके पास देश की 60 प्रतिशत से ज्यादा संपत्ति है, वो सिर्फ 3 प्रतिशत जीडीपी देते हैं।” 


कर्ज हमारे ऊपर चढ़ रहा है और फायदा खरबपतियों को हो रहा है

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि, “तो कर्ज ले रहे हैं हम सब लोग, आप लोग, मैं, हम जैसे करोड़ों लोग । बेरोजगारी की बात ही नहीं कर रहा कोई, उसका विश्व रिकॉर्ड तो रोज बढ़ता जा रहा है। कर्ज हमारे ऊपर चढ़ रहा है और फायदा उस कर्ज का किनको हो रहा है- उन खरबपतियों को, जिनकी संख्या दिन- प्रतिदिन प्रत्येक वर्ष बढ़ती जा रही है। रिपोर्ट आती है कि इस वर्ष में भारत में इतने खरबपति हो गए हैं, पर रिपोर्ट में कभी ये नहीं आता है कि दुनिया में सबसे ज्यादा गरीब आज हिंदुस्तान में हैं। रिपोर्ट कभी ये नहीं आती कि कोरोना के दौरान जितने लोग दुनिया में गरीबी में ''ग'' उनमें से 79 प्रतिशत लोग हिंदुस्तान के थे।” 



प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा, “तो ये 'के' शेप्ड जो मॉडल है, जिसने हाई डैट (Debt), हाई अन एम्प्लॉयमेंट, हाई इन्फ्लेशन, हाई इनईक्कैलिटी, जबकि हाई क्या होना चाहिए था - हाई पर कैपिटा इन्कम, हाई जीडीपी, हाई रैंकिंग ऑन दी ग्लोबल प्लेटफार्म, वो हाई होना चाहिए थी, वहाँ पर हम रोज नीचे गिर रहे हैं और हम बढ़ा किसे रहे हैं- प्रति व्यक्ति कर्ज को, जो पिछले 9 साल में ढाई गुना से ज्यादा बढ़ गया और हम अगर कुल कर्ज की बात देखें, तो कुल कर्ज देश के ऊपर पौने तीन गुना ज्यादा बढ़ गया।”


 
अब आप कहेंगे साहब कर्ज तो कोई भी देश पर बढ़ सकता है, इसमें क्या है? उसका भी अध्ययन करके आपके सामने लाया हूं कि अगर हमारा कंपेरिजन हम जैसी इमर्जिंग इकॉनमी से करें, हमारा जीडीपी के अनुपात में कर्ज है, 83 प्रतिशत है। 83% debt as a percentage of GDP और दुनिया की इमर्जिंग इकॉनमी, क्योंकि भारत एक इमर्जिंग इकॉनमी है, जो आईएमएफ का आंकड़ा है, उनका प्रतिशत एवरेज आता है - 64.5 प्रतिशत।



प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा, “तो मोदी जी ये 20 प्रतिशत ज्यादा कर्ज क्यों ले रहे हैं, आप जीडीपी के? दूसरे देशों को उसकी जरुरत क्यों नहीं पड़ रही है, जो आपको पड़ रही है और इस कर्ज, जो आपने हर व्यक्ति के ऊपर 1,09,373 रुपए का कर्ज चढ़ाया, उसका फायदा उन व्यक्तियों को क्यों नहीं मिल रहा है, उसका फायदा सिर्फ खरबपतियों को क्यों मिल रहा है? देश में इनईक्कैलिटी को क्यों ये कर्ज बढ़ा रहा है?

तो इस बावत हमारे तीन सवाल हैं

1. देश में जो प्रति व्यक्ति कर्ज 43, 124 रुपए था 2014 में, वो 2023 में 1,09,373 रुपए, मतलब 9 साल में 2.53 टाइम्स क्यों बढ़ा, पहला सवाल?

2. आजादी से लेकर 2014 तक 55 लाख करोड़ कुल कर्ज और 2014 से 2023 तक 155 लाख करोड़ कुल कर्ज, मतलब पौने 3 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी क्यों हुई मोदी जी?

3. इस कर्ज का फायदा देशवासियों को क्यों नहीं मिल रहा है? क्यों हमारे देश का जो विकास का मॉडल है वो 'के' शेप्ड है, वो 'वी' शेप्ड क्यों नहीं है।  

दुनिया के सारे देश कोरोना में नीचे आए, पर सभी की पूरी पॉपुलेशन ऊपर उठी, पर हमारे यहाँ, हम नीचे तो सब आ गए, पर ऊपर सिर्फ खरबपति उठ रहे हैं, हम लोग नहीं उठ पा रहे हैं। तो मोदी जी ये 'के' शेप्ड इकॉनमिक मॉडल को कैसे बंद किया जाएगा, क्योंकि 50 प्रतिशत पोपुलेशन जो कि मात्र 3 प्रतिशत वेल्थ को ऑन करती है, पर जीएसटी देश का 64 प्रतिशत वो देती है,  ऐसा क्यों?


...सच्चाई नहीं छुपेगी

2002 में हुए गुजरात दंगों पर पीएम मोदी पर बनी बीबीसी की डॉक्‍यूमेंट्री (BBC documentary ) पर प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा, “अगर बीबीसी का जहां ये डॉक्यूमेंटरी बनी उसका मुख्यालय हिंदुस्तान में कहीं होता तो ईडी, मान लो बिजी है तो सीबीआई, सीबीआई बिजी है तो इन्कम टैक्स, इन्कम टैक्स बिजी है तो एसएफआईओ, एसएफआईओ बिजी है तो डीआरआई, डीआरआई बिजी है तो लोकल पुलिस, लोकल पुलिस भी मान लो बिजी है तो ट्रोल आर्मी । पर अनफॉर्चुनेटली फॉर मोदी गवर्नमेंट आँखें बन्द करने से सच्चाई नहीं छुप सकती है। आप इन चीजों को बन्द कर दोगे उससे सच्चाई छुप जाएगी क्या?



बाजपेयी जी ने क्या कहा था मोदी जी? ऐसे ही प्रेस वार्ता थी, बाजपेयी जी के राइट हैंड साइड में आप बैठे हुए थे, उन्होंने कहा- राजधर्म निभाओ, राजधर्म । कौन से राजधर्म के लिए बोला- वही राजधर्म वो बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री दिखा रही है, जो आपने नहीं निभाया था, जो आपको भारत के प्रधानमंत्री उस समय के उन्होंने चेताया था, जिनको आप रोज भूलने का, भुलाने का, उनकी नीतियों को, उनके व्यक्तित्व को छोटा करने का आप प्रयास करते हो, उन्होंने आपको कहा था, वो आप ही की पार्टी के थे कि राजधर्म निभाओ और ब्लॉक इंडिया से आपको क्या लगता है सच्चाई छुप जाएगी - सच्चाई नहीं छुपेगी।



गौरव वल्लभ ने कहा, “ये इस तरह के हथकण्डे, इस तरह का एक्शन ये लोगों में विश्वास दिलाता है कि वो जो दिखा रहे हैं, वो सही है वर्ना आपको ये करने की कहाँ जरूरत पड़ी थी। थोड़े दिन बाद हो सकता है कि और भी इस तरह का और हमने पूर्व भी देखा कि इस तरह के काम मोदी सरकार ने किए है। वो वर्ल्ड हंगर इंडेक्स में हमारी रैंकिंग खराब आई, हम नहीं मानते, प्रेस फ्रीडम इंडेक्स रैंकिंग में खराब आई, हम नहीं मानते, दुनिया में सबसे ज्यादा गरीब हमारे देश में हैं, यूएनडीपी और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के अनुसार, हम नहीं मानते, कोई भी आप सवाल पूछ लो, हम नहीं मानते। आपके न मानने से सवाल खत्म नहीं होगा, सवाल तो एज इट इज वहीं पर है। तो इस चीज को आपने ब्लॉक करके प्रूफ कर दिया कि जो वो बोल रहे हैं वो सही है, उसमें सत्यता है। ये आपका एक्शन इसको दिखा रहा है, आपके मन में घबराहट है, अगर आपके मन में सच्चाई होती आप इस तरह का रिएक्शन नहीं करते।



दरअसल,“ केंद्र सरकार ने 2002 में हुए गुजरात दंगों पर बने बीबीसी की डॉक्‍यूमेंट्री को शेयर करने वाले  Tweets /YouTube वीडियो को ब्लॉक करने का आदेश दिया है| केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीबीसी की डॉक्‍यूमेंट्री के पहले एपिसोड को प्रकाशित करने वाले YouTube वीडियो को ब्लॉक करने का आदेश दिया है| 



...सॉफ्ट यौन दुष्कर्म का प्रयास: मेरठ की घटना पर प्रो. गौरव वल्लभ

उत्तर प्रदेश के मेरठ की घटना के सम्बन्ध में प्रश्न के उत्तर में प्रो गौरव वल्लभ ने कहा कि मुझे याद है कि कुछ समय पूर्व मुंबई में भी एक साउथ कोरिया के ब्लॉगर के साथ.. ... एक दुष्कर्म की कोशिश की गई और वो जब वीडियो बना रही थी तो वहां पर उसके साथ बदतमीजी की कोशिश की गई, ऐसा क्यों हो रहा है? देश में इस तरह का प्रचलन क्यों बढ़ता जा रहा है? क्योंकि पहले क्या होता है ये लोग बदतमीजी करते हैं, उसके बाद जब फस जाते हैं तो धर्म की आढ़ के पीछे छुपने का प्रयास करते हैं। ये मोडस ओपरेन्डी बन गई है देश की ।



हमारे देश में पर्यटन को हम बढ़ावा दे रहे हैं 'इंक्रेडिबल इंडिया', 'पधारो म्हारे देश', बड़ी-बड़ी स्कीम है हमारे टूरिज्म मिनिस्ट्री की, प्रत्येक राज्य सरकार का प्रयास रहता है कि उनके राज्यों में टूरिस्ट का फुटफॉल बढ़े, क्योंकि ये फॉरन एक्सचेंज लाता है, ये हमारा रुपया जो दिन व दिन गिर रहा है, उसको रोकने का काम करता है और अंर्राष्ट्रीय पटल पर देश की छवि को विकसित करने का काम करता है। तो इस तरह की घटना होती है तो क्यों अभी तक उत्तर प्रदेश सरकार चुप बैठी हुई है। अभी मान लो और कोई छोटी सी भी घटना हो जाती तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का ट्वीट आ जाता। क्यों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री खामोश बैठे हैं। जब विदेशी पर्यटक के साथ इस तरह की बदतमीजी हो रही है और आप पहले बदतमीजी करके खामोश बैठे हैं ।



प्रो गौरव वल्लभ ने कहा कि,''उनके साथ मैं कहूंगा ये सॉफ्ट यौन दुष्कर्म का प्रयास है। इस तरह की बदतमीजी को भी आप दुष्कर्म के दायरे से बाहर नहीं निकाल सकते। ये फर्स्ट स्टेप है दुष्कर्म का और सरकारें चुप बैठी हुई हैं और सवाल पूछते ही उसमें धर्म का एंगल, सवाल पूछते ही इसमें कनवर्जन का एंगल । उन्होंने कहा, “आप वहां पर बैठे हो, क्या आपके पास प्रूफ है कि भाई ये लोग इन चीजों में लिप्त हैं, उन चीजों की जानकारी दीजिए और अगर नहीं है आपके पास इस तरह की जानकारी, तो तुरन्त दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई कीजिए, क्योंकि इससे देश का नाम भी खराब होता है, इस तरह के वीडियोज़, इस तरह वाकया अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में, जो सोशल मीडिया के प्लेटफार्म हैं, वहां पर चलते हैं। विदेशी पर्यटक भारत में आने से घबराते हैं और जो देश के लिए न तो इकोनॉमी वाइज सही है, न देश ख्याति के लिए अच्छी बात है।



दरअसल, दो कोरियाई युवती जब उत्तर प्रदेश के मेरठ की चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी पहुंची तो उन पर (दोनों युवतियों पर) कुछ युवकों ने धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। युवकों ने इन कोरियाई युवतियों के सामने नारेबाजी शुरू कर दी। युवकों ने युवतियों के सामने जय श्री राम के नारे लगाए...]सूचना पर पहुंची पुलिस दोनों युवतियों को पूछताछ के लिए थाने ले गई, जिन्हें पूछताछ के बाद दिल्ली भेज दिया गया।



कोरियाई युवतियों ने बताया कि वो भारत में रहकर हिंदी सीख रही थीं। वो दिल्ली के किसी कॉलेज से हिंदी की पढ़ाई कर रही हैं, क्योंकि कोरिया जाकर उनको वहां की जनता को हिंदी पढ़ानी है। विदेशी युवतियों ने बताया कि वो मेरठ में अपनी सहेली से मिलने आई थीं। मेरठ घूमने के साथ-साथ वो यूनिवर्सिटी भी घूमने आ गईं।



शिवराज सिंह चौहान के बच्चे पढ़ रहे हैं लंदन, अमेरिका में..., सारा ज्ञान मध्यम आय वर्गीय परिवारों के लिए

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में प्रो गौरव वल्लभ ने कहा कि, “ शिवराज सिंह चौहान, साहब मेरी आपको चुनौती है, क्या आपके बच्चे हिन्दी माध्यम के स्कूल से पढ़े हैं? मुझे पता है वो कहाँ से पढ़े हैं। एक बच्चा तो सिम्बायोसिस से पढ़ रहा है, क्या हिन्दी माध्यम में परीक्षा दी उस बच्चे ने? मैं आपसे पूछ रहा हूं हमारे बच्चे जाएं हिन्दी माध्यम में और शिवराज सिंह चौहान के बच्चे अमेरिका, लंदन की यूनिवर्सिटियों में पढ़े, बड़े-बड़े विश्विविद्यालयों में पढ़ें, अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़े।



उन्होंने कहा, “सारा ज्ञान है हम लोगों के लिए, सारा ज्ञान है मध्यम आय वर्गीय परिवारों के लिए, निम्न आय वर्गीय परिवारों के लिए और क्यों करते हैं, पता है आपको ये बात ताकि हम उनके बराबर नहीं बैठ सके, उनसे आँखों में आँखे डालकर सवाल नहीं पूछ सकें। खुद के बच्चे पढ़ रहे हैं लंदन में, एक बच्चा पढ़ रहा है अमेरिका में बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ते हैं और यहाँ पर हमको अंग्रेजी का बखान कर रहे हैं। 



प्रो गौरव वल्लभ ने कहा कि, “मैं उनको कहना चाहूंगा जो भी लोग ये सवाल पूछते हैं पहले अपनी मार्कशीट और अपने बच्चो की मार्कशीट रखें कि ये मेरी मार्कशीट हिन्दी माध्यम की । मैं रख सकता हूं शिवराज जी, मेरे में है वो कलेजा और ये मेरे बच्चों की मार्कशीट हैं हिन्दी माध्यम में, सरकारी स्कूलों की और फिर हम आपसे चर्चा करेंगे। आप 'खुद गुरुजी बैंगन खाएं, दूजों को उपदेश, तो ये इस तरह की बातें देश के बच्चों को देश के मिडिल इन्कम ग्रुप के परिवारों के बच्चों को, लोअर इन्कम ग्रुप के परिवार के बच्चों को आगे बढ़ने से रोकने की प्रक्रिया है। क्योंकि जैसे ही वह अंग्रेजी माध्यम में पढ़ेंगे, उनके पास पढ़ने का लिटरेचर ज्यादा होगा, ज्यों ही वो पढ़ने का लिटरेचर ज्यादा होगा, उनके पास अपॉर्चुनिटीज़ खुलेंगी, अपॉर्चुनिटीज़ खुलेंगी तो उनको पता लगेगा कि सही मुद्दा देश में बेरोजगारी का है।



सही मुद्दा ये नहीं हैं कि कपड़ों के कलर देखकर व्यक्तित्व का मैं विश्लेषण कर लूं, सही मुद्दा श्मशान और कब्रिस्तान के कंपेरिजन नहीं है, सही मुद्दा स्कूल और कालेजों के कंपेरिजन का है, सही मुद्दा देश की यूनिवर्सिटी और अमेरिका की यूनिवर्सिटी के कंपेरिजन का है, श्मशान और कब्रिस्तान के कंपेरिजन का नहीं है तो ये इनकी एक मोडस ओपरैन्डी है।



कांग्रेस नेता प्रो गौरव वल्लभ ने कहा, “मैं हिन्दी माध्यम से जीवन भर पढ़ा हूं, कोई गलत नहीं है पर क्या हिन्दी माध्यम के बच्चे, हम अंग्रेजी नहीं पढ़ें, क्यों नहीं पढ़ें भाई। क्यों नहीं पढ़ें, हम क्यों नहीं पढ़ें मैं ये पूछना चाहता हूं। हमारे लिए स्किल, स्कोप और फ्यूचर ग्रोथ बढ़ता है, अंग्रेजी माध्यम से, अंग्रेजी की किताब पढ़ने से तो क्यों नहीं पढ़ हम । 



दरअसल, “मध्य प्रदेश के सिंगरौली के एक कार्यक्रम में CM शिवराज सिंह चौहान ने रविवार (22 जनवरी 2023) को कहा, “अंग्रेज तो चले गए मगर कांग्रेस ने अंग्रेजी हमारे सिर पर डाल दिया, उच्च शिक्षा अंग्रेजी में होगी। गरीब किसान का बेटा-बेटी क्या अंग्रेजी जानता है? ये षडयंत्र था कि अगर हिंदी में हो गई तो गरीब के बच्चें भी आगे बढ़ जाएंगे| अंग्रेजी लाद दो ताकि बड़े लोगों के बच्चें बड़े पदों पर हों। अंग्रेजी कोई योग्यता का प्रमाण नहीं है, योग्यता किसी भी भाषा में हो सकती है। मध्य प्रदेश ने तय किया कि राज्य में उच्च शिक्षा की पढ़ाई हिंदी में होगी|




मैंने जीवन की सारी परीक्षाएं हिन्दी में लिखीं, इसका मतलब ये थोड़े ही है कि मैं अंग्रेजी से नफरत करूं: प्रो. 

प्रो .वल्लभ ने कहा, “मैंने जीवन की सारी परीक्षाएं हिन्दी में लिखीं तो इसका मतलब ये थोड़े ही है कि मैं अंग्रेजी से नफरत करूं, जो भी अंग्रेजी बोले उसको कहूं कुछ नहीं आता, सीखना चाहिए मुझे और आपको जानकर ताज्जुब होगा कि जो हमारी सर्विस इंडस्ट्री की, जो लिब्राईजेशन, प्राईवेटाईजेशन, ग्लोबलाइजेशन के बाद देश की जो मिडिल क्लास बूम की, डॉ० मनमोहन सिंह जी की नीतियों के बाद जो देश में एक नया वर्ग बना जिसको हम मिडिल इन्कम ग्रुप कहते हैं, वो क्यों बना? क्योंकि हमारे पास इंग्लिश अंडरस्टेंडिंग और इंग्लिश स्पीकिंग पॉपुलेशन थी जिसने उस सर्विस इंडस्ट्री को अपना मेन पावर सप्लाई की और वो सर्विस इन्डस्ट्री बूम करी और जिसका नतीजा ये हुआ कि देश में सिलिकॉन वैली, देश में नए-न टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट हुए, जिसका नतीजा ये हुआ कि दुनिया में कहीं भी सॉफ्टवेयर का नाम आता है तो लोग यही कहते हैं कि ये हिंदुस्तान को होगा व्यक्ति, दुनिया में कहीं पर आईटी सर्विस का नाम आता है भले वो कैलिफोर्निया हो, इज़राइल हो या दुबई हो, दुनिया में कहीं नाम आता है कि ये टेक्नोलॉजी है, तो बोला जाता है कि बंदा हिंदुस्तान का होगा और आप हमको वापस पुराने पाषाण युग में पहुंचाना चाहते हो, और खुद के बच्चों को अंग्रेजी बुलवाते हो, खुद के बच्चे अंग्रेजी में बात करते हैं, अंग्रेजी माध्यम में पढ़ते हैं और गरीब का बच्चा, मिडिल क्लास का बच्चा अंग्रेजी में नहीं पढ़ना चाहिए, वो सरकारी स्कूल में जाए ।


‘भारत जोड़ो यात्रा’ बड़ी सार्थक रही...

‘भारत जोड़ो यात्रा’ से संबंधित प्रश्न के उत्तर में प्रो वल्लभ ने कहा कि मैंने आपको बोला न, ये तीन एजेंडे हैं, और ये तीनों एजेंडे, पहले एजेंडा में हमने भारी सफलता पाई है। सेकेंड और थर्ड एजेंडा में भी आज लोग डिस्कशन में आ चुके हैं। देश के बच्चे, युवा जिस तरह से ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में जुड़ रहे हैं, उससे लग रहा है, महिलाएं जिस तरह से यात्रा में जुड़ रही हैं, उससे लग रहा है कि देश के युवाओं का मुख्य एजेंडा रोजगार है, जो इस यात्रा का सेकेंड ऑब्जेक्टिव है और जब यात्रा में महिलाएं देश की जुड़ती हैं, तो हमें इस बात पर और जोर देने की जरुरत है, जो हमारा थर्ड एजेंडा था कि राइजिंग इन्फ्लेशन, महंगाई, वो भी डिस्कशन में आ रहा है। 



उन्होंने कहा,“तो हमें ये यात्रा बड़ी सार्थक लग रही है। इस यात्रा का जिस ऑब्जेक्टिव के साथ, जिस पॉजीटिव माइंडसेट के साथ इस यात्रा की जो शुरुआत की थी, उसमें हमने बड़ी सफलता पाई है, मैं कहूँगा, सौ प्रतिशत । तो विश्लेषण तो करेंगे ही, यात्रा संपूर्ण होने के बाद, पर बड़ी सफलता हमने पाई है।






tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

मुफ़्त अलर्ट

ऐसी हर खबर सबसे पहले पाएँ

बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अपडेट सीधे आपके WhatsApp पर।

इन्हें भी पढ़ें

टॉप न्यूज़ की सभी खबरें

इस खबर से जुड़े सवाल

यह खबर कब प्रकाशित हुई और आखिरी बार कब अपडेट की गई?

यह रिपोर्ट 22 जनवरी 2023 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

इस क्षेत्र की और खबरें कहाँ पढ़ें?

इस क्षेत्र की ताज़ा खबरें TVL News के ज़िला सेक्शन में पढ़ी जा सकती हैं। thevirallines.net पर बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अलग-अलग पेज हर दिन अपडेट होते हैं।

इस खबर में कोई तथ्य ग़लत लगे तो क्या करें?

TVL News हर सुधार को गंभीरता से लेता है। +91 99996 56869 पर WhatsApp करें या thevirallines@gmail.com पर लिखें — पुष्टि के बाद खबर तुरंत सुधारी जाती है।