नई दिल्ली: '''''आप अस्पताल पहुंच जाइए, वहां पर आपको बिलखते हुए लोग मिलेंगे; ऑक्सीजन और दवाओं की कमी से, उपचार न मिलने की वजह से त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहे हैं; यह शब्द सिर्फ सुना था आज उसको क्रियान्वित होते हुए देखा जा रहा है| इतने रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीरों के बीच, इस बेबसी के आलम में हमारे स्वास्थ्य मंत्री कहते हैं कि पिछले साल के मुकाबले इस साल स्थिति ज्यादा बेहतर है| आज हमारे देश में हर चीज की किल्लत है; चाहे वह ऑक्सीजन हो, दवाइयां, बेड, अस्पताल, रेमडेसिविर हो या वैक्सीन; लेकिन विडम्बना तो यह है कि इन सब चीज़ों में हम विश्व के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक हैं|
देश जानना चाहता है कि स्वास्थ्य मंत्री क्या कहते हैं - -लोग अपनों को खो रहे हैं आप क्या कहेंगे? - आप क्या कहेंगे उस औरत को जिसने कृत्रिम रूप से अपने कोविड पॉजिटिव पति को साँस देने की कोशिश की, उसके बाद भी नहीं बचा पाई? | सच है मनोहर लाल खट्टर जी कि लाशें बोलती नहीं हैं लेकिन उनके पीछे की वेदना चीख-चीख कर बयाँ करती हैं कि आप कितने नाकाम, निक्कमे और कितना कुशासन भरा है आपके प्रशासन में; वो बयाँ करती है आपकी नाकामी और वो लाशें आपकी नाकामियों का पुलिंदा हैं,' ''''ये उपरोक्त बातें कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कही है|
सुप्रिया श्रीनेत ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि मैं आशा करती हूं कि आप सब लोग जहाँ पर भी हों, आपके घरवाले भी और आपके मित्र भी पूरी तरह से सुरक्षित हों। मुश्किल है ये कह पाना कि कितने लोग इस समय जो जूम कॉल से जुड़े हैं, वो इस आपदा को झेल रहे हैं, अपने घरों में और at least मैं तो झेल रही हूं और जिस तरह का मंजर देखने में आ रहा है भयावह है।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''खैर, आज हम जरूर बात इसलिए करना चाहते हैं क्योंकि अगर आप अगरतला से कांडला तक, लद्दाख से कन्याकुमारी तक, पूरे देश में आज एक आतंक का माहौल है, एक भय का माहौल है। मौत का जो मंजर है, ऐसा लग रहा है कि मौत हमारे सर के ऊपर मंडरा रही है और मुझे अपनी लीविंग मेमोरी में नहीं याद है कि पूरे देश में ऐसी कोई बेबसी, ऐसी कोई बदहाली का रुप, ये स्वरुप कभी देखा हो इससे पहले। आप अस्पताल पहुंच जाईए, वहाँ पर बिलखते हुए लोग हैं, ऑक्सीजन की कमी से, दवाइयों की कमी से, उपचार के ना चलते। लोग सच में त्राहिमामत्राहिमाम कर रहे हैं। बचपन से सुना था ये शब्द त्राहिमाम और मुझे ऐसा लगता है कि पहली बार अपने जीवन में इसे क्रियान्वित होते देख रही हूं मैं।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''''कहीं पर संवेदना है, कहीं पर निराशा है और कहीं पर बहुत गुस्सा भी है और इसलिए है क्योंकि चीजें संभल सकती थी और इसी की अभी हम बात करेंगे। मैं खुद क्योंकि पर्सनल तौर पर इस चीज से जूझ रही हूं, तो मैं आपको दावे के साथ कह सकती हूं तो आपका कलेजा है, तो किसी अस्पताल चले जाइए, किसी इमरजेंसी के बाहर खड़े हो जाईए और वहाँ पर देखिए कि किस तरह से मौतें हो रही हैं, किस तरह से मानवता का गला घोंटा जा रहा है। अगर इलाज संभव हो जाता है, तो आप बहुत लकी हैं। कहीं पर इलाज संभव नहीं है, कहीं पर अगर जीते-जी आपका इलाज नहीं हो पाता, मौत हो जाती है, तो आपकी ठीक से विदाई भी नहीं हो पा रही है।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,'' आप श्मशान घाट जाईए, जहाँ पर पहले होल्डिंग एरिया होता था, लोग बैठते थे, हाथ-पैर धोते थे, वहाँ तक चिताएं जल रही हैं। और कहीं पर ऐसा लगता है कि चाहे शमशान हो या कब्रिस्तान हो और ये सिर्फ राजधानी दिल्ली की बात नहीं है, पूरे देश की कहानी है। भयावह दृश्य है। चिताएं इतनी जल रही हैं कि अगर ऊपर से एरिया कोई देखे तो जैसे पुराने दिखता था कि दीए जल रहे हैं, उस तरह से चिताएं जल रही हैं। कब्रिस्तान चले जाइए, लखनऊ के कब्रिस्तानों में तो तख्ती लगा दी गई है कि हमारे पास जमीन नहीं है। जमीन खुद खोज लीजिए और खुदवाने वाले भी ले आईए, क्योंकि हमारे वाले तो पहले ही कब्र खोद रहे हैं, उसी में बिजी हैं।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''जब इतने रोंगटे खड़े करने वाली ये तस्वीर आती है, तो जरुर ये लगता है कि हमारे लोग इस मंजर को समझ रहे हैं। जरुर ये लगता है कि हमारें नीति निर्माता संवेदना रखते हैं। पर इतनी रोंगटे खड़े करने वाली तस्वीरों के बीच में, इस बेबसी के आलम में हमारे स्वास्थ्य मंत्री कहते हैं कि पिछले साल के मुकाबले इस साल स्थिति ज्यादा बेहतर है। मैं पूरे सम्मान के साथ कहती हूं, उनके सर पर लगता है कि बड़ी गहरी चोट लग गई है और अगर गहरी चोट नहीं लगी है, तो वो मानवता का मूल धर्म, मूल मंत्र भी भूल चुके हैं। वो सत्ता के अहंकार में इतने चूर हो चुके हैं, कि उन्हें लोगों का दुख, उनकी वेदना दिखाई नहीं दे रही है।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''अप्रैल, 2021 में मार्च, 2020 से स्थिति बेहतर हो गई है, ये किस मुँह से वो बोल रहे हैं? और ये मैं बहुत गुस्से से बोल रही हूं, क्योंकि लोगों के अंदर आज आक्रोश है, लोगों के अंदर आज गुस्सा है और मैं बोलना चाहती हूं कि लाशों के काफिले के बीच में आप चले जाइए किसी शमशान घाट के बाहर और किस तरह से लाशों का काफिला लगा है, इस बात को बोलने के बाद उनको हाथ जोडकर माफी मांगनी चाहिए।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''लेकिन सवाल जरूर पूछंगी और सवाल इसलिए पूछंगी, क्योंकि सवाल पूरी मुस्तैदी से पूछना जरूरी है, इस बदइंतजामी का जिम्मेदार कौन है? क्यों स्थिति ऐसी हो गई और इनके अंदर तो नैतिकता है नहीं कि ये इस्तीफा दें दें, इसलिए हम मांग करते हैं कि इनको तुरंत बर्खास्त करना चाहिए। ये वही स्वास्थ्य मंत्री हैं, जिन्होंने राहुल गांधी जी के आगाह करने पर कहा था कि ऐसी कोई बात नहीं, वो डर फैला रहे हैं। ये वही स्वास्थ्य मंत्री हैं, जो कहते थे कि कोरोना का एंड गेम आ गया है। ये वही स्वास्थ्य मंत्री हैं जो एक कारोबारी बाबा का जाकर कोरोनील का प्रचार करते थे, साइंस को ताक पर रख देते थे। ये किस मुँह से इस देश के स्वास्थ्य मंत्री हैं?
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''इनके बारे में कुछ बातें बता दूं और बातें बतानी जरूरी हैं। आज हमारे देश में हर चीज की किल्लत है। ऑक्सीजन की किल्लत है, बेड की किल्लत है, अस्पतालों की किल्लत है, वैक्सीन की किल्लत है, रेमडेसिविर की किल्लत है और विडंबना तो ये है कि हम इस सब चीजों में विश्व के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक हैं। ऑक्सीजन के सबसे बड़े प्रोड्यूसर हैं। वैक्सीन की लैब कहा जाता है, फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड कहा जाता है। हमारी जेनरिक ड्रग्स दुनियाभर को जीवित रखती है और आज हमारे यही किल्लत आ गई। तो कुछ आंकड़े आपके साथ जरुर शेयर करुंगी जो दिखाएगा कि कैसे डॉ. हर्षवर्धन मंत्री. जो देश के स्वास्थ्य मंत्री हैं. जो इस देश का कलंक कहे जाने लायक हैं।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''मैं वैक्सीन से शुरु करती हूं, क्योंकि इस पर राजनीतिक बहस छिड़ी हुई है। 15 दिन में हमारा टीकाकरण 45 प्रतिशत गिर गया। आप लोगों से पूछिए, लोगों के अपॉइंटमेंट कैंसिल हो रहे हैं, क्योंकि टीका है ही नहीं। बड़े-बड़े सेंटर बंद हो रहे हैं, राज्यों में 800-800 सेंटर बंद हो गए। एक ही आंकड़ा है, 15 दिन में 40 से 45 प्रतिशत के बीच में वैक्सीनेशन गिर गया है, क्योंकि प्रचुर मात्रा में टीके उपलब्ध ही नहीं है, टीकाकरण के लिए। हम रेमडेसिविर की इंस्टॉल्ड कपैसिटी 38 लाख 80 हजार है। 38 लाख 80 हजार रेमडेसिविर की इंस्टॉल्ड प्रोडक्शन कपैसिटी है, 7 कंपनियों की। रेमडेसिविर का भी एक्सपोर्ट कर दिया गया। जैसे वैक्सीन का तालियां बटोरने के लिए एक्सपोर्ट किया गया था, रेमडेसिविर का भी एक्सपोर्ट कर दिया गया। 38 लाख 80 हजार की कपैसिटी होने के बावजूद भी आज रेमडेसिविर की घोर किल्लत है और अब एम्स को मजबूरन लिखना पड़ा है कि वो प्रोटोकॉल में शामिल नहीं है। लोग उसको एडमिनिस्टर, लोग उसको अपने कागजों पर ना लिखें, डॉक्टर अपने प्रिस्क्रिप्शन में प्रिस्क्राइब ना करें। 38 लाख 80 हजार बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कपैसिटी थी, इसको भी एक्सपोर्ट किया गया।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''दिक्कत क्या थी, आईसीएमआर का एक सिरो सर्वे आया था, जिसने कहा था कि बड़ी आपदा आने वाली है, उसको इग्नोर किया गया। स्टैंडिंग कमेटी ऑफ पार्लियामेंट ऑन हेल्थ ने आगाह किया था कि प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन चाहिए होगा, ऑक्सीजन का इंतजाम करिए, ऑक्सीजन की किल्लत हो सकती है सेकंड वेव में, उसको इग्नोर किया गया। एक्सपर्ट कमेटी को इग्नोर किया गया। यहाँ तक कि सरकार का जो साइंटिफिक टास्क फोर्स है, उसने फरवरी और मार्च के महीने में मिलना भी जरूरी नहीं समझा।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''जब केस बढ़ रहे थे, जब एक, डेढ़, दो लाख, ढाई लाख, तीन लाख केस हो रहे थे, इन्होंने जरुरी नहीं समझा कि वो एक बार मिले साइंटिफिक टास्क फोर्स । तो सिरो सर्वे इग्नोर हुआ, हेल्थ एक्सपर्ट कमेटी इग्नोर, हेल्थ की स्टैंडिंग कमेटी इग्नोर हुई, एक्सपर्ट कमेटी इग्नोर हुई, सांइटिफिक फोर्स मिला नहीं और मैं आपको ये भी बताना चाहती हूं कि जो इगोम (EGOM) की मीटिंग, 22 अप्रैल, 2020 को हुई थी, उसमें ये निर्णय लिया गया था कि इंडस्ट्रियल को मेडिकल सिलेंडर में कैसे कन्वर्ट किया जाए। उसमें मॉनिटरिंग सेंटर की बात कही थी, कैबिनेट सेक्रेटेरिएट, प्रिंसिपल सेक्रेटरी से बातचीत की थी। उसके बाद 22 अप्रैल, 2020 के बाद इगोम (EGOM) की मीटिंग जो हुई है, वो 15 अप्रैल, 2021 में हुई है, एक साल बाद जब देश में 2 लाख 16 हजार केस हो गए थे।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''तो मुझे बताईए कि अंततोगत्वा ये जिम्मेदारी किसकी थी? ये किसकी जिम्मेदारी थी, कि बैठ कर आंकलन किया जाए, देखा जाए कि कैसे यूएस और बाकी जगहों पर सेकंड वेव आ रही है और साइंटिफिक्ली अप्रूव था कि हमारे यहाँ ये वेव तीन महीने बाद आती। कैसे प्रूव किया जाए कि किस तरह से ये बदइंतजामी है, ये जानबूझ कर बेवकूफी की गई है, ये जानबूझकर क्रिमिनल नेगलिजेंस है। ये अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ना करना है। ये मुँह मोड़ना है। इसको मैं क्या नाम दूं? This is almost criminal negligence, सरकार ने जानते, बूझते हुए किस चीज की तैयारी की, ये आज पूरा देश पूछ रहा है।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''आज देश में जिस तरह का आतंक और दुख का माहौल है, मैं जरुर पूछना चाहती हूं कि उसके बारे में स्वास्थ्य मंत्री जी क्या कहेंगे? आप आज मटर छीलेंगे, आप आज अंताक्षरी खेलेगे, आप आज रामायण देखेंगे टीवी पर, आप क्या कहिएगा? लोग बिना स्वास्थ्य के अपनों को खो रहे हैं। आप क्या कहेंगे उस औरत से जिसने कृत्रिम रूप से, आर्टिफिशियल सांस देने की कोशिश की अपने कोरोना पॉजिटिव पति को, उसके बाद भी खो दिया? आप क्या कहिएगा उस बेटी से, जिसके पिता कहीं लुप्त हो गए यूपी के अस्पताल सिस्टम में, मिल ही नहीं रहे हैं? आप क्या कहेंगे उस बेटी से जिसने अपनी मां को सरकारी अस्पताल में तो भर्ती कराया, लेकिन डेढ़ दिन बाद पता चला कि उनके पास एक बूंद पानी और थोड़ा सा खाना भी नहीं पहुंचा? आप क्या कहेंगे इन लोगों से? आप किस तरह से समझाइएगा कि स्थिति कितनी भयावह है? और मैं कुछ राज्यों की बात इसलिए करना चाहती हूं कि ये पॉलिटिक्स का मुद्दा नहीं है, लेकिन राज्यों की बात करना भी जरुरी है।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,'' आज राज्यों में क्या हो रहा है - उत्तर प्रदेश के तुगलकी फरमानों से तो भगवान बचाए। पहले फरमान आया एडमिशन चाहिए, सीएमओ की चिट्ठी लेकर आओ। चलो थोड़ा सेंस आया, 6-7 दिन के बाद वो फरमान हटाया गया। फिर एक नया फरमान आया गवर्मेंट ऑर्डर का कि आपको कितना ऑक्सीजन दिया जाएगा, इसका निर्णय डॉक्टर नहीं करेगा, सरकार द्वारा गठित एक समिति करेगी। ये कौन सी मुर्खता है, मैं नहीं जानती हूं। आपकी सांस ही अगर सिलेंडर से चल रही है घर पर, तो उसका रीफिल लेने के लिए आपको पुलिस की अनुमति चाहिए होगी। ये उत्तर प्रदेश के फरमान हैं।
,'' एक नया फरमान है, अगर डॉक्टरों ने, स्वास्थ्य कर्मियों ने या किसी ने भी ऑक्सीजन की किल्लत पर आवाज उठाई, तो उसके खिलाफ एनएसए लगा दी जाएगी। किसी ने भी आवाज उठाई तो आपकी संपत्ति जब्त हो जाएगी। आज जब जरुरत है कि ध्वस्त व्यवस्था में आपकी नाकामियों के चलते डॉक्टर अपनी जान की बाजी लगा कर लोगों की मदद करने की कोशिश कर रहा है, उसकी पीठ पर हाथ रखकर उनको थपथपाया जाए, योगी जी की जो सरकार है, उनकी जो निरंकुश प्रशासन है, वो कानपुर में डॉक्टर को जेल में डाल देता है। कौन जाएगा? योगी जी जाएंगे इंजेक्शन लगाने, लोगों को सुविधा पहुंचाने, उनका प्रशासन जाएगा या एक डीएम जिसकी इतनी हिम्मत थी कि डॉक्टर को जेल में डाला, क्या वो एक इंजेक्शन लगा सकता है किसी को? बुखार के लिए दवाई दे सकता है? ये निरंकुश शासन उत्तर प्रदेश का है।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''अब आगे सुनिए, जब चुनी हुई सरकारों को मुर्दो के टीले देखकर सर झुका लेना चाहिए तो हरियाणा के मुख्यमंत्री जी क्या कहते हैं। मनोहर लाल खट्टर जी कहते हैं कि जो मृत हो गए हैं, उनके बारे में शोर मचाने से वे जीवत नहीं हो जाएंगे, वो कौन सा अब आकर बोलने वाले हैं। सच है खट्टर जी। सच है लाशें बोलती नहीं हैं, लेकिन उनके पीछे की वेदना और चीखें बयां करती हैं कि आप कितने नाकाम, कितने निकम्मे और कितना कुशासन भरा है आपके प्रशासन में। वो बयांकरती हैं, आपकी नाकामी, आपकी विफलताओं का पुलिंदा है, वो लाशें। आप कहते हैं ना कि मृत बोलते नहीं है, मृत बोलते हैं और वो बयां करते हैं कि कैसे उनकी हत्या की है और हां, मैं हत्या का शब्द बहुत जिम्मेदारी से प्रयोग कर रही हूं यहाँ।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''कैसे माफ किया जाए उत्तराखंड के उस मुख्यमंत्री को, जिसने पहले तो कुंभ कराने की इजाजत दी और फिर, हम सब सम्मान करते हैं धर्म का, लेकिन उसके बाद कहा कि गंगा का पानी वैक्सीन का पर्याय है। एक जैसे उसके प्रभाव होंगे। ये किस तरह की गैर जिम्मेदाराना लोग हैं? ये लोग शासन चलाने के काबिल भी हैं, ये पूछना पड़ेगा?
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''और मैं जरुर पूछना चाहती हूं, आज तमाम वीडियो आ रहे हैं, जहाँ पर भाजपा के बहुत सारे कार्यकर्ता कह रहे हैं कि सरकार पूरी तरह से विफल हो चुकी है। भाजपा में होने से शर्म आ रही है। भाजपा कार्यकर्ता होने से शर्म आ रही है। उन सब लोगों को भी आप चुप करा दीजिएगा, वो भी देशद्रोही हैं, वो भी एंटी नेशनल हैं या वो भुगत भोगी हैं और वो आपकी पोल खोल रहे हैं?
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''मैं मोदी जी के बारे में जरुर कुछ कहना चाहती हूं, क्योंकि मोदी जी को सत्ता का लोलुपता में चुनावी सभाओं में, तालियों की गड़गड़ाहट में, भाड़े की भीड़ देखकर उनकी बाछे खिल जाती थी। जब ढाई, पौने तीन लाख का आंकड़ा हो गया, तब भी वो इस देश में रैली कर रहे थे। मोदी जी 7 साल से आप सत्ता में हैं और आज आप सिस्टम के पीछे छुपना चाहते हैं। क्या होता है सिस्टम ये जरा बताइए मुझे? सिस्टम का मतलब है आप, आप जो शासन में हैं, आप जो सरकार चला रहे हैं।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''आपके कुछ चुनिंदा मीडिया के साथी भले ही आपकी छुपने में मदद करें सिस्टम के पीछे, लेकिन ये देश का व्यापक जो दुख है, जो आक्रोश है, वो आपको छुपने नहीं देगा। काशी को क्योटो बनाने चले थे आप, आज काशी में पढ़िए अखबारों को, बता रहे हैं कि कैसे कंधा देने के लिए भी 5,000 रुपए देने पड़ रहे हैं। आप 8.000 करोड़ के हवाई जहाज में सैर करके क्या करिएगा. आप आज भी सेंटल विस्टा बनाने पर तुले हुए हैं, आपने लोगों की जान जोखिम में वहाँ पर डाल दी है, एसेंशियल सर्विस कहकर। क्या एसेंशियल सर्विस है, एक पार्लियामेंट बनाना एसेंशियल सर्विस है? 162 ऑक्सीजन प्लांट की कीमत केवल 200 करोड़ रुपए थी और एक नए पार्लियामेंट सेंट्रल विस्टा में 2-3 फिगर हैं, सिर्फ एक पार्लियामेंट की कीमत 900 करोड़ रुपए से ज्यादा है, 970 करोड़ रुपए के आस-पास है।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''5 गुना कीमत है, उस पैसे में आप कितने ऑक्सीजन प्लांट, आप कितनी वैक्सीन, कितनी दवाइयां, कितने अस्पताल, कितने वेंटिलेटर, कितने बेड, कितनी प्रचुर मात्रा में, ये सब उपलब्ध करा सकते थे। लेकिन आपको लगता है कि आपका नाम इमारतों पर रखा जाएगा। मोदी जी शासक अपने शासनकाल से याद किए जाते हैं, इमारत ढह जाती हैं, इमारतों से लोग अमर नहीं हो होते हैं। अमरत्व और ख्याति लोगों को अपने काम से प्राप्त होती है।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''क्या करिएगा आप 8 हजार करोड़ के हवाई जहाज में घुमकर और 20 हजार के सेंट्रल विस्टा में बैठकर, जब इस देश में त्राहिमाम मच गया है, जब देश मुर्दो का टीला बनता जा रहा है? और ये सिर्फ हम नहीं कह रहे हैं मोदी जी, मैं ये भी बोलना चाहती हूं। हम इस पर राजनीति नहीं करना चाहते हैं।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''आप सबने वो इंटरव्यू पढ़ा होगा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के वाइस प्रेजिडेंट डॉ. दहिया का वो स्टेटमेंट, जहाँ पर वो कहते हैं कि प्रधानमंत्री पूरी तरह से नाकाम हैं, पूरी तरह से विफल हैं, पूरी तरह से फेल हो चुके हैं, कोरोना के प्रबंधन में और इन्फेक्ट वो एक सुपर स्प्रेडर भी हैं। आप किस मुँह से यूके और यूएस के पास जा रहे हैं? आप क्या कहिएगा उन देशों को, जो पलट कर आपसे पूछ रहे हैं कि आप अपने वैनिटी खर्चों को, अपने सेंट्रल विस्टा को, अपनी ऐसी चीजों को बंद नहीं कर रहे हैं? आप किस मुँह से इसको एसेंशियल सर्विस बनाते हैं? लोगों की जीविका चला रहे हैं आप? इस तरह की बयानबाजी सिर्फ वो लोग करते हैं, जो इमारतों पर अपना नाम देखना चाहते हैं।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''मैं बहुत ज्यादा लंबा नहीं बोलूंगी, मुझे लगता है कि आज देश में संवेदना की जरुरत है, आज देश में सहानुभूति की जरुरत है। आज हर सूबे का मुख्यमंत्री, अपने सूबे का, अभिभावक के रुप में है। उसको जरुरत है कि वो लोगों के घाव पर मरहम लगाए। लोगों को डराए, धमकाए नहीं, मृतकों का मजाक नहीं उड़ाए, लोगों के ऊपर एनएसए नहीं लगाए। आज जरुरत है कि बीमारों को इलाज मिले और सच ये है कि देश हमारा इस कगार पर आकर इसलिए खड़ा हो गया, क्योंकि एक साल से आप जुबानी जमाखर्च करते रहे।
अगर जॉर्डन के स्वास्थ्य मंत्री मार्च के महीने में 6 लोगों की मौत पर क्योंकि ऑक्सीजन की कमी से हुई, इस्तीफा दे सकते हैं, तो आपका कुछ ना कुछ तो मोरल कंपास, जरुर होगा ना डॉ. हर्षवर्धन। अगर नहीं है तो आपको बोस, आपके मुखिया, प्रधानमंत्री, मोदी जी और योगी जी, जागिए और देखिए देश में कितना आक्रोश है और नाकाम लोगों को, विफल लोगों को निकालना शुरु करिए। शुरुआत तो खैर आपसे होनी चाहिए, लेकिन डॉ. हर्षवर्धन को बर्खास्त तुरंत करिए। जो आंकड़े हैं, वो आपकी, आपके प्रशासन की और आपके स्वास्थ्य मंत्री की विफलताओं को चीख-चीख कर बयां कर रही है . टेस्टिंग क्यों कम कर रहे हैं? हम दिल्ली में टेस्टिंग कम कर रहे हैं,|
हम उत्तर प्रदेश में टेस्टिंग कम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में आरटी पीसीआर 60, 70, 80 प्रतिशत होना चाहिए। आरटी पीसीआर हो रहा है less than 50 प्रतिशत। ढाई लाख की टेस्टिंग में एक लाख आरटी पीसीआर हो रहा है। कैसे पता चलेगा, सबसे पहला स्तंभ ही बीमारी से लड़ने का टेस्टिंग है। दिल्ली में भी आरटी पीसीआर की टेस्टिंग कम करिए, 6-6 दिन बाद रिजल्ट आ रहा है
और आप सबको पता है कि 6 दिन में बिगड़ती हुई तबीयत इररिवर्सिबल हो जाती है।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,'' I am sorry अगर मैं इमोशनल साउंड कर रही हैं। I am sorry for I am sounding angry, but, this is the stage, of everybody who is battling this disease. This is the state of every Indian today, who has lost someone and lives that could be saved.
जो जीवन बहुत सारे गए हैं, वो बचाए जा सकते थे, अगर समय रहते प्रबंधन किया गया होता और सरकार आज अपना ठीकरा राज्य सरकारों के सिर पर बिल्कुल ना फोडें। ये मैं बार-बार बोलना चाहती हूं। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लगा हुआ है। ये भी सच है कि आबंटन आप कर रहे थे वैक्सीन का अभी तक।
आप कर रहे थे ऑक्सीजन का आबंटन, आपने 45 साल से छोटे लोगों का, कम लोगों का आबंटन आपने कहा राज्य सरकारों को करने को, लेकिन किसी भी पोर्टल पर कोई भी रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा। कितने ही स्वास्थ्य मंत्री राज्य सरकारों के, जब उन्होंने सीरम इंस्टीट्यूट से या बाकी जगहों से कॉन्टेक्ट किया, कोई मनोपली आपने बनाई हुई है, उन लोगों ने कहा कि 15 मई से पहले हम कोई आपूर्ति नहीं कर सकते, क्योंकि 15 मई तक हम सिर्फ केन्द्र सरकार की वैक्सीन बना रहे हैं। कहाँ से लगाएंगे राज्य सरकारें, आप ठीकरा राज्य सरकारों के सर पर क्यों फोड़ रहे हैं, जबकि मेपिंग और आबंटन ऑक्सीजन का आप कर रहे थे? और ये बात साफ है तुषार मेहता, जो सॉलिसिटर जनरल हैं, उन्होंने कोर्ट में जाकर कहा है कि प्राइवेट लोगों को क्यों लिखी जा रही हैं चिट्ठियां। हमें आना चाहिए जो भी अतिरिक्त ऑक्सीजन है।
अगर आपके पास आएगा, तो जब किल्लत होगी तो किसको बोला जाएगा, इस बात का जवाब दीजिए? आप क्या कहिएगा जिसका 25 साल का बेटा ऑक्सीजन की कमी से चला गया? आपकी पूरी की पूरी पॉलिसी वैक्सीनेशन की गलत थी। आपने क्यों कमोबिटिडी को नहीं दिया, आपने क्यों वैक्सीन को एक्सपोर्ट किया, आपने क्यों रेमडसिविर को एक्सपोर्ट किया, आपने क्यों ऑक्सीजन को एक्सपोर्ट किया? और एक्सपोर्ट करने के बाद बजाए देश से माफी मांगने से आप टर्न अराउंड करके कहते हैं कि वो इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन था।
श्रीनेत ने कहा कि,'''कौन बेवकूफ है इस देश में, क्या आपको नहीं पता है कि इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन को मेडिकल ऑक्सीजन में कन्वर्ट किया जा सकता है। आज से 6 दिन पहले अनुमति दी कि नाइट्रोजन सिलेंडर में ऑक्सीजन को कैरी किया जा सके। ये तो सब जानते हैं कि ये हो सकता था और ये शासनादेश पहले क्यों नहीं आए, ये किस तरह की बातें हो रही हैं? इन बातों के बारे में जवाब तो सरकार को देना ही पड़ेगा और आज जवाब सिर्फ हम नहीं. जवाब आज पूरा देश मांग रहा है।
सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर पूछे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,'' मैं सिर्फ इतना कहूँगी कि सेन्ट्रल विस्टा जैसे जो प्रोजेक्ट्स पर अभी भी पैसा खर्चा हो रहा है, वो कहीं पर सरकार की उदासीनता को ही नहीं, उनकी वीभत्स मानसिकता को भी बयां करता है। हम किस मुंह से विश्व से मदद मांग रहे हैं, जब हम अपने ही खर्चों को सीमित नहीं कर पा रहे हैं।
हमें क्यों चाहिए एक सेन्ट्रल विस्टा, ये मैं जानना चाहती हूँ। हमें 162 ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए सिर्फ 201 करोड़ रुपए चाहिए। हमें सेन्ट्रल विस्टा का एक पार्ट, एक नया पार्लियामेंट बनाने के लिए 970 करोड़ रुपए चाहिए, 5 गुना। उस पांच गुने में हम कितने वेंटिलेटर, कितने अस्पताल, कितने बैड, कितना ऑक्सीजन, कितना रेमडेसिविर, कितनी वैक्सीन, कितना कुछ कर सकते थे, अपने लोगों के लिए। किस मुंह से हम सेन्ट्रल विस्टा बनवा रहे हैं।
श्रीनेत ने कहा कि,''''श्रीनेत ने कहा कि,''हमारे लिए ये लोकतंत्र का जो नया प्रतीक है, उसका क्या मतलब है, जो लोकतंत्र के लोग हैं, अगर वो सुरक्षित नहीं है। आज आपको नहीं लगता कि इस देश में हर एक संस्था दल एक-एक पाई, एक-एक पैसा कोरोना की इस महामारी से लड़ने में और इस महामारी में रिसोर्सेस संसाधनों के अभाव से जो लोग मर रहे हैं. उनको बचाने में खर्चा होना चाहिए. ये एक वीभत्स गंदी मानसिकता को दिखाता है।
180 व्हीकल्स, ये डाटा है, 180 व्हीकल्स लोगों को इस जगह लेकर आती है रोज काम के लिए, लॉकडाउन और कयूं के बावजूद। जो डिप्टी कमिश्नर हैं, पास दिया, उसको असेंशियल सर्विस कहा गया, ये कौन सी असेंशियल सर्विस है, जरा मुझे बताइएगा? ऑक्सीजन का मिलना असेंशियल सर्विस है, वैक्सीन का लगना असेंशियल सर्विस है, रेमडेसिविर का लगना असेंशियल सर्विस है, या सेन्ट्रल विस्टा का बनना असेंशियल सर्विस है?
श्रीनेत ने कहा कि,''''मैं बार-बार कहती हूँ, मोदी जी, इतनी दिशाहीन, इतनी संवेदनहीन ये सरकार है कि वो भूल चुके हैं कि आपको देश, आपके शासन के लिए याद रखेगा। आपका इतिहास में नाम आपके शासन के लिए और अब तो मैं कहूंगी आपके कुशासन के लिए अंकित होगा। इमारतों पर अपना नाम लिखाने वाले लोग ये भूल जाते हैं कि देश ने आपको शासन चलाने के लिए चुना था और आपने उनको पूरी तरह से डिसअपॉइंट किया।
उत्तर प्रदेश में पंचायती चुनावों में ड्यूटी करने वाले 135 शिक्षकों की मृत्यु पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की मुख्यमंत्री से हर्जाने की मांग को लेकर पूछे एक प्रश्न के उत्तर में श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि मैं सबसे पहले तो ये कहना चाहती हूँ कि उत्तर प्रदेश की जनसंख्या करीब 23 करोड़ है, पर वहाँ पर पंचायत चुनाव हो रहे हैं।
बिहार की जनता 13 करोड़ है, वहाँ पर पंचायत चुनाव स्थगित कर दिए हैं। और मरता क्या न करता, मुझे भी जाकर पंचायत चुनावों में कुछ वक्त गुजारना पड़ा और मैं सच बताऊँ हर वो दिन जो हम पंचायत चुनाव में गए थे, ऐसा लग रहा था कि मौत का कफन बांध कर आप घूम रहे हैं और जब बहुत स्थिति भयावह हुई तो कहा गया कि भईया, माफ करो, जिसको लड़ना है, लड़ो, बाकि लोग घर पर बैठो, टेस्टिंग हो नहीं रही है, इलाज हो नहीं रहा है, स्थिति बहुत भयावह है।
ये बिल्कुल सच है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने से 135 शिक्षक- शिक्षा मित्र और अनदेशकों की मौत हो चुकी है। ये सरकारी आंकड़ा है ये डॉक्यूमेंटेड है। इसमें से कितना अनडॉक्यूमेंटेड है, वो मैं नहीं बता सकती। तो जरुरी है कि आज, और ऐसा नहीं है कि आगाह नहीं किया जा रहा था। उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि जिन 7 जिलों में विस्फोटक स्थिति हो गई है, वहाँ पर लॉकडाउन लगाया जाए। उस पहल को माना नहीं गया।
मैं मानती हूँ कि उच्चतम न्यायालय ने उस आदेश को स्टे कर दिया था, लेकिन सच ये है कि अगर उच्च न्यायालय कुछ अपने संज्ञान में लेकर कह रहा है तो चुनी हुई सरकार को ज्यादा संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। लेकिन प्रचार हो रहा है, आप तस्वीरें देखिए, आप घबरा जाइएगा। सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं, आप तेलंगाना में देखिए, कल जब जुलूस निकला है, वो तस्वीर देखकर मुझे लगा, शाबाश, ऐसे हम कोरोना को हराएंगे और मेरे मुंह से वही शब्द निकले। भयावह भीड़, जबरदस्त लोग, किसी ने मास्क नहीं पहना हुआ है।
ये सब लोग कोरोना कैरियर्स और कोरोना के सुपर स्प्रेडर्स हैं। और ये किस तरह से अनुमति इसकी करने को दी जा रही है, भगवान ही मालिक है। मैं आशा करती हूँ कि सोई हई सरकार अभी जागेगी और जरुर जो आपने मुआवजे की, जो आपने हैल्प की, जो आपने कंपंसेशन की बात की, वो हाँ बिल्कुल मिलना चाहिए।