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23 अगस्त 2026

रुपये को शतक लगाने से रोकें मोदी जी: कांग्रेस

नई दिल्ली: कांग्रेस ने डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट को लेकर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि अब उन्हें रुपये को शतक लगाने से रोक लेना चाहिए। कांग्रेस ने कहा, पिछले 8 स…

रुपये को शतक लगाने से रोकें मोदी जी: कांग्रेस
रुपये को शतक लगाने से रोकें मोदी जी: कांग्रेस | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: कांग्रेस ने डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट को लेकर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि अब उन्हें रुपये को शतक लगाने से रोक लेना चाहिए। कांग्रेस ने कहा, पिछले 8 साल में मोदी जी ने अपने हथकंडों और कारनामों से न सिर्फ अपनी बल्कि रुपए की साख को भी दो कौड़ी का बनाकर रख दिया है। इतिहास में पहली बार एक डॉलर के मुकाबले रुपया तेजी से 82 को भी पार करने को उतारू है| कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, जो कभी गिरते रुपए को प्रधानमंत्री की आबरू और साख से तौला करते थे, वह (नरेंद्र मोदी) आज अपनी साख और विश्वसनीयता को किस धरातल में खोज रहे हैं? |  गिरते रुपए पर खामोश बैठी मोदी सरकार की नाकामी से पर्दाफ़ाश करती ..| कांग्रेस प्रवक्ता कहा ने कहा,''मोदी जी से एक ही आग्रह है कि रुपए को शतक लगाने से रोक लें।



प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,'

● मोदी सरकार ने रुपए को इतिहास में सबसे कमजोर किया, 1 डॉलर के मुकाबले 82 पार करने पर तुला हुआ है। 

● पिछले 12 महीनों में रुपए के मूल्य में 12% से ज्यादा गिरावट। 

● मोदी सरकार के कार्यकाल में 1 डॉलर के मुकाबले 24 रुपए (43.5%) गिरा भारतीय रुपया। 

● विदेशी मद्रा भंडार पिछले 1 महीने में 26 बिलियन डॉलर कम हुआ, 1 साल में 642 बिलियन डॉलर से गिरकर 545.5 बिलियन डॉलर पर पहुंचा। 

● लगातार रुपए के गिरने से महंगाई और बढ़ी, लोन की किश्तें भी बढ़ीं। 

● जून 2013 में रुपया 15% गिरकर 1 डॉलर के मुक़ाबले 58 से 69 पर पहुंचा था, लेकिन 4 महीने के अंदर रुपया को मजबूत करके वापस 58 $ पर ले आए। 


मोदी सरकार ने इतिहास में सबसे कमजोर किया रुपया

● इतिहास में पहली बार डॉलर के मुकाबले भारत का रूपया 82 की तरफ़ तेजी से दौड़ लगा रहा है - अब 1 अमरीकी डॉलर के बदले 81.47 रुपए देने होंगे। लग रहा है मोदी जी पेट्रोल की तरह रूपये से भी शतक लगवाने के लिए बेताब हैं। . 

● मोदी जी की असीम अनुकम्पा से रुपया निरंतर कमजोर होते हुए इतिहास में सबसे कमजोर बन गया है और जो गिरती साख की बात करते थे, ना जाने किस गड्ढे में गोता खा रही आबरू को अब ढूंढ ही नहीं पा रहे हैं।



सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''आगे बात करने से पहले कुछ तथ्य सामने रख दें:

● ठीक एक साल पहले, सितम्बर 2021 में 1 डॉलर के मुकाबले रुपए का मूल्य 73 था, जो अब 81.47 हो गया है - मतलब 12 महीने में 12% से ज़्यादा गिर गयी प्रधानमंत्री की आबरू।


● 26 मई 2014 को जब मोदी जी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, तब 1 डॉलर के मुक़ाबले रूपए का मूल्य 58.62 था, मतलब मोदी जी के कार्यकाल में रुपए का मूल्य 41.5% गिरा

● रुपया गिरता ही जा रहा है
$1= ₹45 (2004)
$1 = ₹58 (2014) ( 13 रुपए)
$1 = ₹82 (2022) (24 रुपए)

●  भारत का विदेशी मुद्रा भंडार ठीक एक साल पहले. सितम्बर 2021 में 642 अरब डॉलर था, अब 545.65 अरब डॉलर है। 

● यही नहीं, सिर्फ 1 महीने पहले देश का विदेशी मुद्रा भंडार 571 अरब डॉलर था, जो अब 545 अरब डॉलर पर आ गिरा है। यानि 1 महीने में 26 अरब डॉलर की गिरावट!


1- पर सवाल तो यह है कि रुपए के कमजोर होने का असर आपकी जेब पर कैसे पड़ता है?

● रुपया कमजोर होने का मतलब है आयात की लागत बढ़ना। जैसे - कोई सामान विदेश से 1 डॉलर में आता है तो सितंबर 2021 में हमें 73 रुपए चुकाने होते थे। 

● वहीं, अब इसी सामान के 82 रुपए चुकाने होंगे, पूरे 9 रुपए ज्यादा। 

●  जब कोई सामान विदेश से 9 रुपए ज्यादा कीमत पर देश में आएगा, तो लोगों को भी महंगे दाम पर मिलेगा। जैसे - भारत 80% कच्चा तेल आयात करता है, अब यह महंगे दाम पर भारत आएगा। 

● तेल महंगा होगा, तो महंगाई बढ़ेगी; आख़िर डीज़ल के ट्रकों से ही ज़्यादातर माल (फल, सब्जी, खाद्यान्न, और अन्य चीजें) ढोए जाते हैं, तो उसकी लागत बढ़ जाएगी। इसकी वजह से चीजें महंगी होंगी।

2- महंगाई का असर बैंक की किश्तों पर कैसे पड़ता है?

● जब महंगाई बढ़ेगी तो RBI इसे काबू करने के लिए ब्याज दर बढ़ाएगी। ऐसे में लोन की EMI (किश्तें) बढ़ जाएगी और लोगों को ज्यादा रकम चुकानी होगी।



3- क्या सरकार कुछ नहीं कर रही है?

● मोदी सरकार पानी की तरह पैसा बहाने के बावजूद रुपए को स्थिर करने में नाकाम है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार ठीक एक साल पहले सितम्बर 2021 में 642 अरब डॉलर था, अब 545.65 अरब डॉलर है। 

● लेकिन असली कहानी तो यह है कि सिर्फ 1 महीने पहले देश का विदेशी मुद्रा भंडार 571 अरब डॉलर था, जो अब 545 अरब डॉलर पर आ गिरा है। 1 महीने में 26 अरब डॉलर की गिरावट। 

● एक साल में सरकार ने 96 अरब डॉलर से ऊपर लगाए हैं, रुपए को मज़बूत करने में, लेकिन अर्थव्यवस्था में व्याप्त कमियों के कारण ऐसा हो ना सका। 

● मोदी सरकार की विफल नीतियों से उपभोग, निवेश और रोज़गार के टे चक्र और महंगाई के कारण निवेशकों का भरोसा मार्केट में डगमगा चुका है। इसी कारण वह पलायन कर रहे हैं - जिससे रुपया और कमज़ोर होता जा रहा है।


4- क्या रुपए का गिरना निर्यात के लिए सुखद संदेश है?

●  ऐसा होता अगर हमारा निर्यात बढ़ रहा होता, लेकिन अगस्त में आयात 37% बढ़ कर 61.9 अरब डॉलर पर पहुंचा, वहीं निर्यात मात्र 1.5% बढ़ कर 33 अरब डॉलर पर है। 

● अगस्त में व्यापार घाटा लगभग ढाई गुना बढ़कर 28.7 अरब डॉलर पर पहुंचा, जो रुपए को और कमजोर करेगा।



5) 2013 में रुपया गिरा, तो इतनी बखूबी से सम्भाला कैसे?

● 82 की तरफ़ लुढ़कते रुपए और सरकार की विफलताओं के बचाव में 2013 में रुपए की गिरावट पर बड़ी चर्चा होती है, पर असलियत यह है कि 2013 में तो अंतर्राष्ट्रीय कारण और भी भयावह थे, और तब कांग्रेस सरकार ने रुपए को मज़बूत करके ही दम लिया था। 

● जून 2013 में जब taper tantrum के चलते विदेशी निवेशक देश छोड़ के जाने लगे, तब रुपया मई से अगस्त के बीच 15% गिर कर 585 से 69 $ पर पहुँच गया था। 

● लेकिन डा मनमोहन सिंह जी की सरकार, वित्त मंत्री पी चिदम्बरम और तत्कालीन RBI गवर्नर रघुरामराजन ने साथ मिलकर रुपए को सम्भाला: 4 महीने के अंदर ना सिर्फ रुपया वापस 58 $ पर ले कर आए, बल्कि 1 साल के अंदर GDP ग्रोथ 5.1% से बढ़ा कर 6.9% भी लाए। यही नहीं, 12 अरब डॉलर का जो विदेशी निवेश देश छोड़ के गया था उसके बनिस्बत 35 बिलियन डॉलर का निवेश वापस भारत में आया।



रुपए से भी शतक, मोदी जी?

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,'प्रधानमंत्री बनने से पहले मोदी जी कहते थे- रुपए के साथ देश के प्रधानमंत्री की साख गिरती है और सरकार बनने पर रुपए को 40 डॉलर पर लाएँगे। रुपए का कमजोर होना आपके और देश के कमजोर होने की निशानी है। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''मोदी जी से एक ही आग्रह है कि रुपए को शतक लगाने से रोक लें।




रुपए की कीमत गिरने पर कांग्रेस द्वारा किए गए प्रोटेस्ट को लेकर पूछे एक प्रश्न के उत्तर में श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,' हमने बहुत बड़ा प्रोटेस्ट किया था, लेकिन प्रोटेस्ट से न रुपया संभलेगा, न महंगाई संभलेगी। उन दोनों को संभालने के लिए आज की चुनी हुई मोदी सरकार को ही काम करना पड़ेगा, लेकिन सरकार ने महंगाई और टूटते रुपए दोनों पर आँखें मूंदी हुई हैं। सरकार, इसको दिक्कत मानती ही नहीं है। सरकार कहती है, हम तो लहसुन-प्याज खाते ही नहीं हैं, दाम बढ़ रहे हैं तो हमारी गलती नहीं है।



सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''सरकार के मंत्री, सरकार के सांसद सदन में कहते हैं- महंगाई कहीं है ही नहीं। सरकार जो कहती थी, प्रधानमंत्री की साख गिरती है, होड़ लगी हुई है, रुपए के गिरने और प्रधानमंत्री की नीचे होती आबरू में। आज आबरू किस गड्ढे में जाकर घुस गई है और वो चुपचाप बैठे हैं। दिक्कत की बात ये है कि समाधान तो सरकार को निकालना पड़ेगा, लेकिन सरकार समस्या तो स्वीकारे।



उन्होंने कहा,''85 प्रतिशत ट्रेड हम दुनिया से डॉलर में कर रहे हैं, तो पाउंड की तरह आपका क्या हो रहा है और किसी और करंसी का आपका क्या हो रहा है, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, जिसमें आप 85 प्रतिशत ट्रेड कर रहे हैं, अगर वो लगातार गिर रहा है, तो आप महंगाई बढ़ाने में और लोगों का जीवन दूभर करने में कोई भी हथकंडा अपनाने से पीछे नहीं हट रहे हैं।


हिपोक्रिसी की भी सीमा होती है...

श्रीमती श्रीनेत ने कहा,'सरकार समस्या को स्वीकारे तो समाधान के पहले। यहाँ तो वो मानते ही नहीं हैं कि रुपया टूट रहा है। वित्तमंत्री को आपने देख लिया, जब अपोजीशन में थीं तो कहती थीं, बड़ी विकट समस्या है। आज कह रही हैं- रुपया अपना लेवल पा रहा है, बहुत जरुरी है करंट अकाउंट डेफिसिट के लिए। तो ये जो दोगलापन है, ये जो हिपोक्रिसी की भी सीमा होती है, एक ही बार सच बोला था, मोदी जी ने अपने लिए, वो वही बोला था।



एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि ये अंधेर नगरी, चौपट राजा। 1,680 करोड़ नोट यानी, 19,21,000 करोड़ के नोट का इस देश के आरबीआई को पता नहीं है। जिन लोगों ने नोटबंदी की थी, आज उनको चौराहे पर खड़ा करके सवाल पूछने का दिन है। 1,680 करोड़ नोट इस इकॉनमी में से गायब हो गया और सरकार के पास कुछ कहने को नहीं है! अब आप ठीकरा आरबीआई पर फोड़ दीजिएगा। आपने नोटबंदी की थी, कहाँ है वो पैसा। आप लगातार गोल पोस्ट चेंज करते रह गए। आपने पहले कहा इससे टेरर फंडिंग बंद होगी, वो नहीं हुई। 




आपने कहा सारे ऑनलाइन ट्रांजेक्शन हो जाएंगे, कैश आज इकॉनमी में ज्यादा है, पहले से।  आपने कहा- इससे काला धन वापस आएगा, 15 लाख का लोग अभी भी इंतजार कर रहे हैं। तो आपने नोटबंदी क्यों की थी, ये हर व्यक्ति जानना चाहता है और अगर आपने की थी, तो आज आपको इस बात का भी जवाब देना होगा कि नोटबंदी का क्या फायदा हुआ। 1,680 करोड़ नोट हमारी इकॉनमी में से कैसे गायब हो गए, इसका जवाब तो आपको देना पड़ेगा। ये गबन है, ये घोटाला है, ये विफलता है, ये मैं नहीं जानती हूँ, लेकिन जवाब तो सरकार को देना पड़ेगा। 9,21,000 करोड़ पैटी चेंज नहीं है, बहुत ज्यादा पैसा है, ये।



अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पूछे एक प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि मैं इससे पहले कि इसका जवाब दूं, इसको क्रमवार तरीके से एक ही बात मैं कहना चाहती हूँ। एक 19 साल की लड़की रिजॉर्ट में काम करने गई। उसकी आँखों में कुछ सपने थे, दिल में एक हौसला था, कुछ कर देने का। पुलकित आर्य, भाजपा के बड़े नेता विनोद आर्य का बेटा, अंकित आर्य जिसको राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त था, भाजपा की उत्तराखंड की सरकार में, उसका भाई उसको देह व्यापार में पुश करता है। वो देह व्यापार से मना करती है, उसकी नहर में धक्का देकर हत्या कर देता है, और अब ये भी साध्य सामने आ गए कि हत्या करने के बाद वो अंकिता के जानने वालों को बरगलाता है और कहता है कि मुझे तो पता ही नहीं, अंकिता कहाँ गई और क्या हुआ और उसका फोन गायब है और फलाना- ढिमकाना।  सरकार क्या करती है, आपको तो साक्ष्य बचाने थे।  आपको पता करना था कि क्या यह देह व्यापार का धंधा बहुत बड़ा है और उसमें कौन-कौन लोग इवॉल्व्ड है। 



सुप्रिया श्रीनेत ने कहा,''आपने (BJP सरकार ने) सबसे पहले सबूत मिटाने का काम किया और मुझे ये कहने में कोई गुरेज नहीं है कि जिस सरकार को सबूत वहाँ इकटे करने चाहिए थे, आपने जानबूझकर डिमोलिशन किया कि सारे सबूत मिट जाएं और ये हत्यारे बच जाएं। ये सारे सबूत मिटाने का काम है और किसी भी कोर्ट को उत्तराखंड की सरकार से ये पूछना चाहिए कि किसने ऑर्डर दिए।  आज सरकार कहती है, उत्तराखंड की अथॉरिटीज कहती हैं- किसने ऑर्डर दिए थे डिमोलिशन के, अभी यही नहीं पता है, ये क्या विचित्र प्रोब कर रहे हैं? क्राईम सीन पर किसने डिमोलिशन का ऑर्डर दिया था, उत्तराखंड की सरकार कह रही है कि हम अभी ये पता लगा रहे हैं। 



ये वीआईपी कौन था?

सबसे बड़ी बात ये है कि अंकिता की हत्या के बाद ये पता चला है कि कोई वीआईपी आने वाला था और उसके लिए पुलकित आर्य उसके साथ जोर-जबरदस्ती कर रहा था। ये वीआईपी कौन था? अगर ये भाजपा नेता का रिजॉर्ट था, तो वहाँ आने वाला वीआईपी कौन था, जिसके लिए ये किया जा रहा था और इस देश को कैसे पता चलेगा कि भाजपा नेता का बेटा और भाजपा नेता का परिवार मिलकर किस तरह का देह व्यापार चला रहा था? आप साइट जला देते हैं, आप बुलडोजर कर देते हैं, कहाँ से सच पता चलेगा? क्या ये साक्ष्य मिटाने का काम उत्तराखंड की सरकार ने नहीं किया है, सवाल आज ये है? आज कठघरे में न सिर्फ पुलकित आर्य या उसका पिता, बीजेपी का नेता विनोद आर्य है, आज कठघरे में धामी जी की उत्तराखंड की सरकार भी खड़ी है, क्योंकि उन्होंने साक्ष्य मिटाने का कार्य किया।



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TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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यह रिपोर्ट 27 सितंबर 2022 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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