नई दिल्ली: कांग्रेस प्रवक्ता प्रो. गौरव वल्लभ ने देश पर कर्ज के मुद्दे को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला| प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा कि आजादी से लेकर 2014 तक देश पर 55 लाख करोड़ रु. का कर्ज था। 2014 से 2023 के बीच यह कर्ज बढ़कर 155 लाख करोड़ रु. हो गया। आज हर नागरिक पर 1 लाख 9 हजार रु. का कर्ज है। उन्होंने कहा,''देश में 'K शेप्ड' रिकवरी मॉडल है, जिसमें चुनिंदा लोग ऊपर बढ़े व बाकी सब नीचे चले गए।
प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा,'जो ग्रोथ मॉडल है देश का, वो 'के' शेप्ड रिकवरी मॉडल है । अंग्रेजी में जो शब्द है ना 'K', मतलब हम जो ग्रो कर रहे थे, नोटबंदी के बाद नीचे आए; गलत तरीके से जीएसटी लगाने से और नीचे आए; तालाबंदी के बाद फिर और नीचे आए, पर फिर जो बढ़े वह सिर्फ वो लोग बढ़े|
उन्होंने कहा,''जिनकी डीटेल्स अभी चार-पांच दिन पहले ऑक्सफेम की रिपोर्ट (Oxfam report) में आया, कि हिंदुस्तान में...। ताज्जुब की बात है कि हमारे देश में 5 प्रतिशत जो लोग है, उनके पास 60 प्रतिशत संपत्तियां हैं और बॉटम 50 प्रतिशत जो लोग हैं देश के, 140 करोड़ में से मैं गणना करूं, तो जो 70 करोड़ लोग, जो नीचे वाले हैं, उनके पास मात्र 3 प्रतिशत देश की संपत्तियां हैं।
तो 5 प्रतिशत अगर मैं कैल्कुलेट करूं, तो 140 का मतलब 7 करोड़ लोगों के पास देश की 60 प्रतिशत से ज्यादा संपत्तियां हैं और ऐसा नहीं है कि ये लोग जिनके पास 5 प्रतिशत, जिनके पास 60 प्रतिशत से ज्यादा संपत्तियां हैं, वो देश को ज्यादा कर (Tax) देते हैं, ऐसा नहीं है।
प्रो. ने कहा,'हम जो बॉटम 50 प्रतिशत के लोग हैं, जो मिडिल इन्कम ग्रुप, और लोअर इंकम ग्रुप हैं, अगर हम कर की बात करें, तो जीएसटी में हमारा कॉन्ट्रिब्यूशन 64 प्रतिशत है। मतलब जो बॉटम 50 प्रतिशत, जो 3 प्रतिशत देश के एसेट्स को होल्ड करता है, वो देश की जीएसटी में 64 प्रतिशत पैसा देता है और जो 5 प्रतिशत, जो देश के 60 प्रतिशत संपत्तियों को होल्ड करता है, जीएसटी में उनका कॉन्ट्रिब्यूशन मात्र 3 प्रतिशत है, जो फर्स्ट 10 प्रतिशत देश की जनसंख्या है।
उन्होंने कहा,''तो ये जो 'के' शेप्ड रिकवरी मॉडल है, इसमें जो मोदीनॉमिक्स है, उसके लिए हम यही कहेंगे rising debt, rising unemployment and rising inequality, जबकि राइज किसका होना चाहिए था- जीडीपी का । राइज किसका होना चाहिए था - पर कैपिटा इनकम का। राइज किसका होना चाहिए था- हमारी रेटिंग, जो हंगर इंडेक्स में है, वो हमारी रेटिंग बढ़नी चाहिए थी या नीचे आनी चाहिए थी, तो कुल मिलाकर आज की जो प्रेस वार्ता है, वो देश के डैट (Debt) के ऊपर है।