नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) द्वारा भारत की आर्थिक वृद्धि दर में कटौती किए जाने को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा कि,मोदी सरकार ने आंखों पर पट्टी बांध ली है और वह कोई समस्या देखना ही नहीं चाहती है, गिरती विकास दर, बढ़ती महंगाई और टूटता हुआ रुपया है, जिसकी सरकार को चिंता ही नहीं है। IMF ने भारत की अनुमानित विकास दर को इस वित्तीय वर्ष के लिए दूसरी बार कम करके 7.4% से 6.8% कर दिया है। भारत की अनुमानित विकास दर को वर्ल्ड बैंक, RBI, मूडीज (Moody's), एशियन डेवलपमेंट बैंक व फिच (Fitch) सहित अन्य संस्थाएं पहले ही कम कर चुकी हैं
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सप्रिया श्री??ेत ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा, “आईएमएफ ने भारत की अनुमानित ग्रोथ दर को इस वित्तीय वर्ष के लिए दूसरी बार काटकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है। 7.4 प्रतिशत पहले अनुमानित दर थी, उसको काटकर, कम करके 6.8 प्रतिशत कर दिया है। 0.6 प्रतिशत की कटौती आईएमएफ ने इस साल के लिए दूसरी बार की है। आईएमएफ ने दूसरी बार की है, वर्ल्ड बैंक ने चौथी बार काटा ग्रोथ टार्गेट, आरबीआई ने तीसरी बार काटा, मूडीज ने काटा, फिच ने काटा, एशियन डेवलपमेंट बैंक ने काटा, अंक्टाड ने काटा, तमाम लोगों द्वारा हमारी जो इस वित्तीय वर्ष की ग्रोथ अनुमानित दर है, उसको लगातार काटा जा रहा है। इस लगातार काटने का क्या मतलब है कि बेरोजगारी बढ़ रही है, गरीबी बढ़ रही है, आय कम हो रही है, उस पर से छोंका लगाया हुआ है सरकार ने, कमर तोड़ महंगाई का।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,“कछ बातें यहाँ पर जाननी और कहनी जरूरी हैं। बातें जाननी और कहनी इसलिए जरुरी है क्योंकि वित्तमंत्री विदेश के दौरे पर हैं। अब या तो वो अनभिज्ञ हैं, या तो उनको पता नहीं है, या वो जानबूझकर झूठ बोल रही हैं और दोनों ही सूरतों में बड़ी शर्म की बात है। उनके मूठ का पर्दाफाश कलें, इससे पहले ये बता देती है कि सरकार के नुमाइंदे, सरकार की वित्तमंत्री, सरकार के तमाम लोग क्या-क्या बोल रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘घटती हुई ग्रोथ रेट पर आरबीआई ने माना कि ये थर्ड स्टॉर्म है। ये तीसरा तूफान है, कोविड, यूक्रेन रूस के वॉर के बाद जिस रिसेशन को हम स्टेअर कर रहे हैं। चीफ इकॉनमिक एडवाइजर, उन्होंने भी माना चैलेंजेस बहुत बड़े हैं, लेकिन वित्तमंत्री कहती हैं, सब कुछ जी बहुत चंगा सी है। बस प्याज, लहसुन मत खाइए, बाकी सब चंगा है।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,“आगे आपको इसलिए बताना जरुरी है, क्योंकि सरकार के कुछ नुमाइंदे, कुछ मंत्री, कुछ प्रवक्ता, कुछ नेता और कुछ चरण चुंबक पत्रकार इसको फास्टेस्ट ग्रोथ इकॉनमी भी बताने पर आमादा हैं। बते को तिनके का सहारा होता है, वैसे आईएमएफ के कल के डेटा में. जहाँ पर ग्रोथ रेट को 7.4 प्रतिशत से घटाकर 6.8 प्रतिशत किया गया है। सरकार के नुमाइंदे और चरण चुंबक आपको अभी भी समझाएंगे कि ये फास्टेस्ट रेट ऑफ ग्रोथ है, चीन तो 4.4 प्रतिशत पर कर रहा है। अमेरिका 1 प्रतिशत पर कर रहा है, हम तो 56 इंच की छाती लेकर 6.8 प्रतिशत पर ग्रो कर रहे हैं। अब या तो वो इतने महा मूर्ख हैं कि वो इकॉनमी की 'ई' बराबर समझ नहीं रखते हैं, या बेचारों के व्हाट्सएप पर जो आ जाता है, वो खर्रा चलाने लगते हैं।
सुप्रिया ने कहा, ‘‘हमारी इकॉनमी का साइज 5 नहीं, 3 ट्रिलियन डॉलर है। चीन की इकॉनमी का साइज 17.5 से 18 टिलियन डॉलर के बीच में है और यूएस की इकॉनमी का साइज 21 ट्रिलियन डॉलर के बीच में है। तो 21 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी अगर एक प्रतिशत पर बढ़ेगी और 17 से 18 ट्रिलियन डॉलर के बीच की इकॉनमी अगर 4.5 प्रतिशत पर बढ़ेगी. वो हमसे फिर भी ज्यादा बढ़ेगी, क्योंकि हमारा जीडीपी का अनुमानित साइज 3 ट्रिलियन डॉलर है। तो 3 ट्रिलियन डॉलर पर आप उछलते रहिए, कूदते रहिए, आपसे जो 7.5 गुना ज्यादा बड़ी इकॉनमी है, वो भी बढ़ रही है; जो आपसे 8 गुना ज्यादा इकॉनमी है,वो भी बढ़ रही है और आप लोगों को भ्रमित करने के लिए ये समझाते रहिए कि हम तो फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमी हैं। नहीं, आप सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था नहीं हैं, क्योंकि आपकी चीजें, आपकी असलियत में अंतर है। आपकी इकॉनमी का साइज छोटा है। आप यहाँ से छलांग यहाँ तक कि लगाइए, लेकिन जो यहाँ पर है, वो छलांग आपसे और ऊंची लगा रहा है और इस फास्टेस्ट तथाकथित ग्रोथ रेट में हो क्या रहा है- बेरोजगारी बढ़ रही है, रुपया गिर रहा है, महंगाई है, आय घट रही है। तो ये फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमी का जो तमगा है, इसको लेकर जाइएगा कहाँ?
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, ‘‘आज सरकार एक और बात कहती है। एक बात तो ये कि इन्होंने भ्रमित कर रखा है कि हम फास्टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमी है, जिसका हमने पर्दाफाश किया। दूसरी एक और बात कहते हैं कि ऐसा है, सबकुछ वैश्विक है, हम क्या कर सकते हैं? तो अगर हाथ ही बांधकर खड़े होना था, तो आप सरकार में क्यों हैं? आइए, बैठिए विपक्ष में, हम आपको दिखाते हैं करके। क्या ये कोई सरकार कह सकती है, क्या कोई सरकार इस आपदा के वक्त में अपने हाथ खड़े कर सकती है, ये कहकर कि हम क्या कर सकते हैं, ये तो एक्सटर्नल शॉक है? किसी भी सरकार की जिम्मेदारी होती है कि एक्सटर्नल शॉक और आंतरिक समस्याओं का समाधान करके इकॉनमी को सुचारू रूप से चलाए।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने तो 2013 में टेपर टेंटरम के दौरान नहीं कहा था, ये वैश्विक कारण है। हाँ था वैश्विक कारण, लेकिन आपको चुना इसलिए गया था कि आप समाधान ढूंढ़िए, हमने समाधान ढूंढा। हम रुपए को 54 पर छोड़कर गए, इनके लिए। हमने तो 2008 के ग्लोबल रिसेशन (1930 के दशक के महामंदी के बाद सबसे बड़ी मंदी में से एक) हमने तो पलटकर नहीं कहा कि वैश्विक कारण है। फास्टेस्ट रेट ऑफ ग्रोथ की, लोगों की जेब में पैसा डाला, कंजम्पशन जारी रखा और इकॉनमी को संभाले रखा और इसलिए यूपीए के 10 सालों के दौरान फास्टेस्ट रेट ऑफ ग्रोथ हुई। तो ये कह देना कि वैश्विक कारण है, हम क्या कर सकते हैं, ये जिम्मेदारी से मुंह मोड़ना, जिम्मेदारी से भागना और हाथ खड़े करना है।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘अब समस्या ये है कि सरकार के सामने दिक्कतें कितनी हैं? सरकार के सामने मूल रूप से इस समय चार बड़ी दिक्कते हैं, एक्चुअली 5 और मैं जो सबसे बड़ी दिक्कत है, पहले उसी का जिक्र कर देती है। सरकार के सामने सबसे बड़ी दिक्कत है, आँख पर पट्टी और मुंह में जो दही जमा रखा है, सरकार ने वो है। आप आँख पर पट्टी बांध लीजिए और कहिए कि जगत बना ही नहीं है। आपके आँख पर पड़ी बांधने से ये देश समस्याओं से जूझ रहा है, जो इकॉनमी का बंटाधार हो रहा है, वो होना बंद नहीं हो जाएगा। आपके आँख पर पट्टी बांधने से आपको बताया जाएगा. सरकार ये समझ नहीं रही है कि लगातार ग्रोथ गिर रही है और ग्रोथ का जो आरबीआई का तीसरी तिमाही और चौथी तिमाही का अनुमान है वो और भी भयावह है।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, ‘‘तमाम एजेंसीज के अकॉर्डिंग ग्रोथ की रेट 4.6 से 5 प्रतिशत के बीच में होने वाली है तीसरी और चौथी तिमाही में और ये कोई जुबानी जमा खर्च नहीं है। अगर नॉमिनल रेट ऑफ ग्रोथ 12 प्रतिशत है और इंफ्लेशन आपका 7 प्रतिशत रहा है, तो किस तरह से आपकी ग्रोथ 6.8 प्रतिशत होगी'. किस तरह से होगी, ये समझा दीजिए आप।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,'पहली समस्या सरकार की अकर्मण्यता झठलाने की है। दूसरी समस्या ग्रोथ की है, तीसरी समस्या महंगे दामों की है। आज भी कच्चे तेल का दाम 116 डॉलर से गिरकर 91-92 के बीच में चल रहा है, लेकिन हम जी दाम कम नहीं करेंगे और लालच कैसा कि सारा पैसा कमाया जाएगा, सेस के जरिए, जिससे कि राज्यों के साथ साझा न करना पड़े।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,'उससे बड़ी समस्या, रुपए के टूटने की है। रूपया जिस तरह से टूट रहा है, उससे इंफ्लेशन और बढ़ेगा, समस्याएं और बढ़ेगी। 82 के पास रुपया 83,83 के बाद 84, शतक लगाने की तैयारी मोदी जी पूरी तरह से कर रहे हैं और करंट अकाउंट डेफिसिट। जानकारों की सुनिए तो करंट अकाउंट डेफिसिट 3.4 प्रतिशत पर है। पहले 6 महीने का आंकड़ा उठाकर देख लीजिए, इंपोर्ट्स में जबरदस्त बढ़ोतरी है, एक्सपोर्ट में जबरदस्त कमी आई है और ये इसलिए हो रहा है क्योंकि गोल्ड इंपोर्ट्स बेतहाशा बढ़ रहा है, सरकार उसके बारे में क्या कर रही है?
उन्होंने कहा, ‘निर्मला सीतारमण जी, हमारी वित्तमंत्री अमेरिका में हैं। थोड़ी देर पहले किंग्स इंस्टीट्यूशन में उन्होंने एक इंटरेक्शन किया और वहाँ पर उन्होंने एक वक्तव्य दिया। निर्मला जी का कहना है कि किसानों का डीएपी, किसानों की खाद के दाम भारत में नहीं बढ़ाए गए हैं। निर्मला जी अनभिज्ञ हैं, या जानबूझकर झूठ बोल रही हैं, ये उनकी अन्तरात्मा बता सकती है। लेकिन डीएपी के दाम इसी साल अप्रैल में 1,200 से 1,300 रुपए किए गए हैं और यूरिया की हर बोरी 50 किलो से घटाकर 45 किलो की कर दी गई है। दाम बही लग रहे हैं, इसका मतलब दाम बढ़े हैं। तो बिना पलक झपकाए झूठ बोलना क्या होता है, ये निर्मला सीतारमण जी अच्छी तरह प्रधानमंत्री मोदी जी से सीख चुकी हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''प्रधानमंत्री 24 घंटे प्रचार में, 24 घंटे इलेक्शन में, 24 घंटे चैनलों पर अपनी कभी भक्ति दिखाने में, कभी विक्टिम बनने में अपना समय बर्बाद कर रहे हैं, लेकिन इस देश का क्या हाल हो रहा है, वो आपको एजेंसीज एक के बाद एक बताती जा रही हैं। 3 प्रतिशत ग्रोथ हुई है, पिछले 3 साल में। अगर वास्तविक आंकड़ा देखकर चलिए, तो चाहे आइएमएफ हो, वर्ल्ड बैंक हो, मूडीज हो, फिच हो, एडीबी हो, इनके पीछे आप ईडी लगा दीजिए, इनके पीछे एक सीबीआई केस लगा दीजिए, ये इंटर्नेशनल साजिश बता दीजिए, लेकिन असलियत ये है कि आपके झूठ का बार-बार पर्दाफाश होता है। आप बार-बार खड़े होकर भ्रमित करने की बातें करते हैं, भ्रामक बातें करते हैं। तो या तो आपकी समझदारी में कमी है, या जानबूझकर भ्रमित किया जाता है, इसके असली जज आप हैं।
वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतरमण द्वारा सब्जियों की दुकान पर जाने को लेकर पूछे एक प्रश्न के उत्तर में श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,''मुझे दो चीजों का डर लगा। मुझे सबसे पहले तो लगा कि कहीं सब्जियों पर भी तो जीएसटी लगाने की नहीं सोच रही हैं? यहाँ देखने आई हैं, कैसा मार्केट चल रहा है और दूसरा मुझे लगा बेचारे सब्जी वाले को डांटने लगे कि लौकी पर मोदी जी की फोटो क्यों नहीं लगी है? कदद् पर मोदी जी की तस्वीर क्यों नहीं लगी है? एक बार उन्होंने ऐसा किया था न, कहीं गई थीं राशन की दुकान पर, एक आईएएस को डांटा था। तो मुझे दो चीजों का डर लगा, पता नहीं उन्होंने वहाँ पर क्या किया, जायजा लेकर आई हैं। ये मुझे पूरा विश्वास है कि उन्होंने लहसुन प्याज तो नहीं खरीदा होगा। लेकिन जो बाकी हरी सब्जियों के दाम में आग लगी हुई है, क्योंकि डीजल के दाम इतने ज्यादा हैं, पता नहीं उनके ऊपर क्या बीतती होगी, पता नहीं, वो सब्जियां बगैरह खाती हैं या नहीं, लेकिन आम जनता के लिए सब्जियों पहुंच से बाहर हो गई हैं। मुझे बड़ा डर लगा कि कहीं जीएसटी लगाने की तरकीब में तो नहीं हैं।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि हम इश उठा रहे हैं क्योंकि ये हमारा कर्तव्य है. इशू उठना, ये बिल्कुल पॉलिटिकल इशू है। आप दूर-दराज के इलाकों में जाकर लोगों से मिलिए। राहुल जी, जो भारत जोड़ो यात्रा में चल रहे हैं और जो लोग उनसे मिलने आते हैं, वो दो ही बात करते हैं, महंगाई की और बेरोजगारी की। तीसरी कोई बात नहीं है। तीसरी बात सरकार यहाँ से चलाती है कि मुद्दे भटकते रहें। कुछ ऐसा कह दो कि सब लोग उसकी तरफ आकर्षित हो जाएं। कुछ ऐसे विवादित बयान दे दो कि कोई महंगाई, बेरोजगारी की बात न करे। ये बहुत बड़ा पॉलिटिकल इशू है, और इसका भी आपको पता चलेगा, आने वाले वक्त में, जब चुनाव आएंगे। आपको लगता है कि ये पॉलिटिकल इशू नहीं क्योंकि शायद दिल्ली में बैठकर हम लोगों को लगता है, सरकार की बातें हम लोग ज्यादा सुनते हैं। हर गांव, हर देहात, हर कस्बे, हर शहर में लोग बेरोजगारी और महंगाई से बहुत परेशान हैं। बार-बार राहुल गांधी जी से जो लोग भारत जोड़ो यात्रा में मिल रहे हैं और हमारी यात्रा का एक मुख्य बिंदु भी है कि हम इन दो मुद्दों से हटकर बात नहीं करेंगे, लोग इस बारे में बहुत जिक्र करते हैं, बार-बार चर्चा करते हैं।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि मुझे लगता है कि हमारी पार्टी अभी इसको स्टडी करेगी और आपको अपना ऑफिशियल स्टैंड देगी, जब हम इसको स्टडी कर लेंगे। डेली बेसिस पर किया जा रहा है,क्या क्राइटिरिया लगाया जा रहा है, उसके बाद बताएंगे। There are people who have been entrusted to study this.
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि सबसे पहले तो मैं आपको बीसीसीआई पर ही जवाब दे देती हूँ। बीसीसीआई का तो कॉन्स्टीट्यूशन बदल दिया गया कि अमित शाह जी के बेटे वहाँ पर बने रहें। इतने धुरंधर खिलाड़ी थे वो क्रिकेट के, इतने कीर्तिमान उन्होंने स्थापित किए थे, इतने बड़े-बड़े वर्ल्ड रिकॉर्ड लगाए थे कि उनके अलावा वो जगह किसी को मिल नहीं सकती थी। उनसे ज्यादा उपयुक्त कैंडिडेट कोई नहीं था, तो बीसीसीआई का जो संविधान था, वही बदल दिया गया है। परिवारवाद की बात मोदी जी खड़े होकर करते हैं, उस स्टेडियम में जहाँ सरदार पटेल का नाम बदलकर जीते जी अपना ही नाम उन्होंने रख लिया। वहाँ पर खड़े होकर वो कहते हैं कि परिवारवाद खेल में नहीं होना चाहिए। अरे, थोड़ी शिक्षा अमित शाह जी के लड़के को, धूमल जी के लड़के को, अनुराग ठाकुर के भाई को ऐसी थोड़ी शिक्षा दीजिए। अभी कौन बन रहा है, कौन नहीं बन रहा है, इस पर हमारा वक्तव्य नहीं है। किसको बनना चाहिए, ऐसी जगहों पर खिलाड़ी होने चाहिए। तो आगे क्या होता है, मुझे नहीं पता, पर ये सच है कि जो दुनिया को पाठ पढ़ाते हैं, वो जब अपने घर पर बात आती है, अमित शाह जी के लड़के पर बात आती है, तो बिल्कुल चुप हो जाते हैं।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, ‘आपका पहला सवाल था राजभाषा पर, मैंने इस मंच से पहले भी कहा है और बार-बार कहती हूँ, प्यार से समझाओगे, 10 किलोमीटर साथ चलेंगे, जबरदस्ती करोगे, तो तुम्हारा भी हाथ पकड़कर तुम्हें बैठा देंगे। भाषा, संस्कृति, कल्चर, रिलिजन, ये सब अंदर से आने वाली चीजे हैं। मुझे हिंदी बहुत पसंद है, क्योंकि मेरी मातृभाषा हिंदी है। मुझे अंग्रेजी भी बहुत पसंद है। मुझे और भाषाएं, जो मैं बोल लेती हूँ, चाहे वो फ्रैंच हो, चाहे वो संस्कृत हो, वो भी बहुत पसंद है। तो मेरे ऊपर आप भाषा थोप नहीं सकते। जिन राज्यों में हिंदी नहीं बोली जाती है, वहाँ पर आप हिंदी इम्पीरियलिज्म नहीं कर सकते हैं और एक बात ये भी सच है कि भारत ने जो सूचना और आईटी की क्रांति देखी, वो इसलिए देखी, क्योंकि हमारे पास साइजेबल नंबर ऑफ इंग्लिश स्पीकिंग ग्रेजुएट्स थे और आज दुनिया में हमारा जो परचम लहरा रहा है, जो बैक ऑफिस ऑफ द वर्ल्ड है, जो भारत की आईटी कंपनीज ने जबरदस्त बढ़त और सफलता हासिल की है, दुनिया में, वो इसलिए हासिल की है,
श्रीनेत ने कहा कि,“आज कोई ये पलटकर क्यों नहीं पूछता कि इतनी बड़ी इकॉनमी बन जाने के बावजूद भी चीन सिर्फ और सिर्फ प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट क्यों करता है। वो सर्विस मार्केट क्यों नहीं बन पाया। वोआईटी में आगे क्यों नहीं बढ़ पाया, वो टेलिकॉम के बारे में, नेटवर्क छोड़ दीजिए, आगे क्यों नहीं बढ़ पाया- क्योंकि उनके यहाँ भाषा की समस्या है। आपको कुछ भाषाएं सीखनी पड़ेंगी। सीखनी अच्छी रहती हैं, मुझे ऐसा लगता है, इस पर और अभी विचार विमर्श की जरुरत है। इसको थोपा नहीं जा सकता है और खासतौर से उन राज्यों में, जहाँ पर हिंदी नहीं बोली जाती है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,“ हिंदी हमारे-आपके लिए बहत प्रिय है, क्योंकि हम हिंदी भाषी लोग हैं, लेकिन जो हिंदी नहीं बोलता है, उसके ऊपर थोपना, इसी को हिंदी इम्पीरियलिज्म कहते हैं। आप एक रंग से इस देश को नहीं रंग सकते हैं। इस देश के रंग बहुत विभिन्न हैं और उन विभिन्न विविधताओं से भारत बनता है, मेरा ये मानना है और मुझे लगता है इसका सबसे अच्छा जवाब तो राहुल जी ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में दिया था, जब उन्होंने कहा था कि आप एक रंग से मत भरिए, देश में तमाम भाषाएं हैं, राज्य हैं, तमाम संस्कृतियों हैं, जो एक साथ आकर एक माला में बड़ी खूबसूरत लगती हैं, लेकिन अगर उस माला को आप एक ही मोती की बना दीजिएगा, तो वो बड़ा बोरिंग हो जाएगा।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्रीमती श्रीनेत ने कहा कि आरएसएस के ये नेता कहाँ थे, जब इस देश में लोग बिना ऑक्सीजन के तड़प-तड़पकर बेदम हो रहे थे? आरएसएस के ये नेता कहाँ थे, जब हमारे और आपके हिस्से की वैक्सीन विदेश भेजी जा रही थी। आरएसएस के ये नेता कहाँ थे. जब प्रधानमंत्री बजाय महामारी के कंट्रोल करने के, चुनी हुई सरकार गिराने में व्यस्त थे, पहले मध्य प्रदेश में और जब वैक्सीन इस देश के लिए बनानी थी, तो दीदी ओ दीदी करके एक महिला मुख्यमंत्री को चिढ़ाते थे। आरएसएस के ये लोग कहाँ थे, मैं जानना चाहती हूँ, आरएसएस ने कोरोना काल के दौरान कितनों की मदद की, एक आदमी की, की हो तो बता दें।
आरएसएस के ये लोग कहाँ थे, जब लाखों करोड़ों लोग मजबूर होकर चिलचिलाती गर्मी में पैरों में छाले लिए अपने घर की ओर जा रहे थे, क्योंकि एक तुगलकी फरमान जारी हो गया था? मुझे ऐसा लगता है कि जो फाइजर के डायरेक्टर ने कहा है वो किस कॉन्टैक्स्ट में कहा है, उसका क्या पूरा वक्तव्य है, वो देखना और पढ़ना पड़ेगा, लेकिन हाँ, उस समय चाहे मॉडर्ना की वैक्सीन हो, चाहे फाइजर की वैक्सीन हो, चाहे अन्य और वैक्सीन्स हों. उनको देश में लाने की जरुरत थी, क्योंकि हमारी मैन्यूफैक्चरिंग कैपेसिटी उतनी नहीं थी।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,“ हमने विश्व में, अब आप कोई भी डंका बजा लीजिए, इस समय, और आप कुछ भी प्लांट कर दीजिए व्हाट्सएप और फेसबुक यूनिवर्सिटी के माध्यम से, हमने विश्व में सबसे धीमे वैक्सीन लगाने का काम किया और वो तब किया है, जब हम दुनिया में वैक्सीन की लैबोरेट्री थे। तो इस तरह के भ्रामक वक्तव्य और बेवकूफी की बातों का तो मुझे लगता है कोई जवाब नहीं होता है। लेकिन अगर जवाब होता है, तो उससे पहले चार सवाल उनसे हैं।