नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2024-25 में किसान कल्याण के लिए MSP की कानूनी गारंटी, स्वामीनाथन फार्मूला के आधार पर MSP और किसानों के लिए कर्ज माफी की जरूरत है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार (22 जुलाई 2024) को कहा कि ,'' केंद्र सरकार की तमाम विफलताओं में से कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की क्षमताहीनता और दुर्भावना से भरा व्यवहार सबसे अधिक हानिकारक है।
उद्दाहरण के तौर पर कुछ मुख्य तथ्य ―जहां यूपीए ने गेहूं की एमएसपी 119% और धान की एमएसपी में 134% बढ़ाई थी, वहीं मोदी सरकार ने इसे क्रमशः 47% और 50% बढ़ाया है। यह महंगाई और कृषि इनपुट की बढ़ती कीमतों के हिसाब से बिलकुल भी लिए पर्याप्त नहीं है।
• किसानों का कर्ज़ बहुत बढ़ गया है। एनएसएसओ के अनुसार, 2013 के बाद से बकाया ऋण में 58% की वृद्धि हुई है। आधे से ज़्यादा किसान कर्ज में डूबे हैं।
2014 के बाद से हमने 1 लाख से अधिक किसानों को आत्महत्या से मरते देखा है।
आगामी बजट में कृषि कल्याण के लिए केंद्र सरकार की तरफ़ से तीन मुख्य घोषणा किए जाने की आवश्यकता है -
1. स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशों के अनुरूप C2+50% के फॉर्मूले के अनुरूप, एमएसपी के अंतर्गत आने वाली 22 फसलों के लिए एमएसपी बढ़ाएं।
2. सरकार की अपनी मान्यता कि एमएसपी को कानूनी दर्ज़ा देकर लागू करने के लिए सभी कृषि उत्पादों की ख़रीद की आवश्यकता नहीं है – के विपरीत एमएसपी को कानूनी दर्जा दें और इसे मजबूती से लागू करने के लिए एक प्रणाली स्थापित करें, जिसमें रणनीतिक ख़रीद, बेहतर विनियमन और मूल्य अंतर मुआवजा शामिल है। इसके लिए बस नियत और साहस की आवश्यकता है।
3. किसान क़र्ज़ माफी की आवश्यकता का आकलन करने, परिमाण का आकलन करने, और कृषि ऋण माफ़ी के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक स्थायी आयोग की स्थापना । इस अत्यंत आवश्यक कदम से क़र्ज़ में डूबे किसानों को राहत मिलेगी।
याद रखें कि केंद्र सरकार के पास इन तीनों क़दमों को उठाने के लिए पूरी शक्ति है। सिर्फ़ इस बात का इंतज़ार है कि स्वयंभू नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री थोड़ी हिम्मत दिखाएं और अपनी ज़िद को छोड़कर किसानों के हित में फैसला लें।
• नवंबर 2021 में, तीन काले कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद, स्वयंभू नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री ने MSP से संबंधित मामलों की समीक्षा के लिए एक समिति के गठन की घोषणा की थी। सरकार को समिति गठित करने में आठ महीने लगे - और दो साल बाद भी, उसने अभी तक कोई अंतरिम रिपोर्ट जारी नहीं की है। अगर सरकार चाहती तो अब तक रिपोर्ट जारी हो जाता और MSP को कानूनी दर्जा मिल जाता ।
• तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने राज्य में क़र्ज़ लिए हुए किसानों के लिए कृषि ऋण को माफ़ करना शुरू कर दिया है। इससे कुल 40 लाख किसानों को 2 लाख रुपए तक के लोन पर राहत मिलेगी। • 2008 में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए ने 72,000 करोड़ रुपए का कृषि ऋण माफ़ किया था। इससे बड़ी संख्या में किसानों को लाभ हुआ, जिनमें शामिल हैं:
― यूपी के 54 लाख किसान
― महाराष्ट्र के 42 लाख किसान
―हरियाणा के 8.9 लाख किसान • बिहार के 17.6 लाख किसान
― झारखंड के 6.66 लाख किसान
जयराम रमेश ने कहा कि ,'' नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री की सरकार ने पूंजीपतियों के 16 लाख करोड़ रुपए के बैंक ऋण माफ़ किए हैं। लेकिन दूसरी तरफ इस साल आरबीआई से रिकॉर्ड 2.11 लाख करोड़ का लाभांश मिलने के बावजूद इसने किसानों के एक रुपए का कृषि ऋण भी माफ़ नहीं किया है।
4 जून को मिली निर्णायक व्यक्तिगत, राजनीतिक और नैतिक हार के घावों से अभी भी उबर रहे स्वयंभू नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री क्या कृषि कल्याण के लिए ये महत्वपूर्ण कदम उठायेंगे?