नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर जोरदार पलटवार किया| मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा कि ,“ किसकी छतरी की छाया के नीचे आपके “परम मित्र” (अरबपति व्यवसायी गौतम अडानी ) ने देश के आकाश से लेकर पाताल तक सब कुछ लूटा ?
दरअसल,76 वर्षीय पूर्व कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए PM मोदी ने आज सोमवार को कर्नाटक के बेलगावी में कहा, “छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कांग्रेस का अधिवेशन चल रहा था, मल्लिकार्जुन खरगे सबसे सीनियर नेता हैं। वहां धूप थी, लेकिन धूप में छतरी का सौभाग्य उनको नसीब नहीं हुआ, बल्कि छाता किसी और के लिए लगा था। ये देख कर जनता समझ रही है कि रिमोट कंट्रोल किसके हाथ में है|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान पर मल्लिकार्जुन खरगे ने ट्वीट कर कहा, "नरेंद्र मोदी जी, किसकी छतरी की छाया के नीचे आपके “परम मित्र” ने देश के आकाश से लेकर पाताल तक सब कुछ लूटा ? हम तो तिरंगे की छाँव में खड़े कांग्रेसी हैं, जिसने “कंपनी राज” को हराकर देश को स्वतंत्र बनाया, और देश को “कंपनी राज” कभी बनने नहीं देंगे। ये बताइये, अडानी पर JPC कब ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "PM मोदी घटिया बेमतलब की बातों के उस्ताद हैं सोनिया जी नासाज़ तबियत के चलते, धूप धूल से बचने की सलाह के बावजूद समर्पण के चलते महाधिवेशन में आयीं शीर्ष नेतृत्व के बीच आपसी सम्मान और अपनत्व आदर्श आचरण का प्रतीक है वैसे सदन में खरगे जी के भाषण को कटवाते वक्त सम्मान याद नहीं आया?
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कांग्रेस के 85वें पूर्ण सत्र राष्ट्रीय महाअधिवेशन के समापन रैली में मल्लिकार्जुन खरगे ने था कहा, “आज हालत ये है कि गरीब और मध्यम वर्ग एड़ियां रगड़ रहा है। महंगाई में बजट और घर दोनों तोड़ डाले हैं और मुट्ठी भर अमीर मित्रों की दौलत में इतनी बढ़ोतरी हुई कि ये दुनिया के दूसरे नंबर के बड़े अमीर बन बैठे। मैं पूछता हूं कि हमारा देश किस दोराहे पर आ खड़ा हुआ है, जहाँ अन्नदाता किसान की प्रतिदिन की आय 27 रुपए है और प्रधानमंत्री के एक दोस्त की आय एक हजार करोड़ रुपए प्रतिदिन है।
देश के 72 प्रतिशत यानी 3 चौथाई एमएसएमई एक फूटी कौड़ी भी नहीं कमा पाए और प्रधानमंत्री के एक दोस्त की संपत्ति 13 गुना यानि 1,300 प्रतिशत बढ़ जाए और मुझे इश्तिहार में खुद को छपवाने वाले दिल्ली के प्रधानसेवक ये समझ में नहीं आता कि रोज अपने मित्र की सेवा कर रहे हैं। और ऊपर से एक-एक करके 70 साल में बनाई देश की हर संपत्ति को अपने मित्रों के हवाले कर रहे हैं। ये तो रेल, भेल (BHEL), सेल (SAIL), तेल, सब बेच रहे हैं। आकाश हो, धरती हो या पाताल हो, देश की सब चीजें बेची जा रही हैं।
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, “मैं पूछता हूँ कि हमारा देश किस दोराहे पर आ खड़ा हुआ है, जहाँ अन्नदाता किसान की प्रतिदिन की आय ₹27 है, और प्रधानमंत्री के एक दोस्त की आय प्रतिदिन ₹1,000 करोड़ है । रोज इश्तेहार में खुद को छपवाने वाले दिल्ली के राजा 'प्रधान सेवक' हैं या 'मित्र सेवक' ?
खरगे ने कहा, “मेरे देश के करोड़ों लोगों को अब चिंता है कि अब हमारा एलआईसी और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया भी बच पाएगा या नहीं या इसको भी वो बेच देंगे, ये आज एक बहुत बड़ा हमारे सामने सवाल है और ये सरकार सबकुछ हमने जो बनाया था, उसको एक-एक करके बेच रही है। आर्थिक खाई के बीच देश को सामाजिक भेदभाव की भयंकर खाई में धकेल दिया है। गरीबों, मजदूरों, दलितों, आदिवासी और पिछड़ों के अधिकारों को सरेआम सत्ता के बुलडोज़र से कुचला जा रहा है।