कांग्रेस ने रविवार को कोविड के टीकों की खरीद पर सवाल उठाया। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार ने बढ़ी हुई कीमत पर कोविड वैक्सीन खरीदी है, बावजूद इसके निर्माताओं ने यह दावा किया था कि वे बिना लाभ के टीकों की आपूर्ति करेंगे। कांग्रेस ने कहा,''कोरोना की मुफ़्त वैक्सीन किसे, कहां, कैसे मिलेगी। क्या मोदी सरकार नहीं जानती कि 28% लोग गरीबी रेखा से नीचे या गरीब की श्रेणी में आते हैं? मोदी सरकार ये बताने से इनकार कर रही है कि कितने करोड़ लोगों को कोरोना का मुफ़्त टीका मिलेगा और किसको नहीं मिलेगा|
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,''पूरा देश हमारे मेहनती वैज्ञानिकों और केमिस्ट एवं शोधकर्ताओं की योग्यता व अथक परिश्रम को नमन करता है जिन्होंने कठोर परिश्रम कर रिकॉर्ड समय में कोरोना महामारी की विभीषिका से लड़ने के लिए हिंदुस्तान में टीके का आविष्कार किया| हमें भारत के वैज्ञानिकों पर गर्व है। भारत ने यह आत्मनिर्भरता 4 या 6 साल में अर्जित नहीं की। यह आजादी के बाद 73 साल की मेहनत का नतीजा है|
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,''आज दुनिया के बड़े सबसे टीकाकरण अभियान में गर्भवती माताओं और बच्चों सहित हम 40 करोड़ मुफ़्त टीके हर साल देश के नागरिकों को लगाते हैं| आजादी के बाद भारत के आधुनिक इतिहास में कांग्रेस की सरकार ने वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा दिया तथा व्यापक तौर पर देश में फैले अंधविश्वास को खत्म करने के लिए एक देशव्यापी टीकाकरण अभियान शुरू किया|
सुरजेवाला ने कहा कि,''कुछ महत्वपूर्ण बीमारियां जिनसे टीकाकरण के माध्यम से 73 वर्षों में हम लड़ पाए वह हैं- टीबी, चेचक, पोलियो, कुष्ठ रोग, खसरा, टेटनस, बैक्टीरिया, काली खांसी, हैजा, दिमागी बुखार और मस्तिष्क की सूजन| हमें गर्व है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सरकारों और वैज्ञानिकों की दशकों की मेहनत से आज भारत दुनिया की आधी से अधिक वैक्सीन पैदा करता है, बनाता है|
इस टीकाकरण और स्वदेशी वैक्सीन उत्पादन नीति की कुछ उपलब्धियां इस प्रकार है : - हमने राष्ट्रीय ट्यूबरक्लोसिस नियंत्रण कार्यक्रम 1962 शुरू किया - राष्ट्रीय चेचक उन्मूलन कार्यक्रम 1962 शुरू किया - 20 सूत्रीय कार्यक्रम के तहत टीकाकरण को 1975 में अनिवार्य बनाया|
- यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम, यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम 1985 में शुरू किया
- पांच राष्ट्रीय मिशन के तहत 1986 में टीकाकरण को शामिल किया गया
- राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम 1986 में और राष्ट्रीय टीकाकरण नीति 2011 में कांग्रेस की सरकारें लेकर आई|
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत 1985 में राजीव गांधी जी ने की जिसके तहत देश में 6 बीमारियों का टीका लगाया गया| सरकार की प्रतिबद्धता एवं हमारे वैज्ञानिकों के दृढ़ निश्चय से भारत ने 1977 में चेचक से संपूर्ण मुक्ति पाई। 2005 में ‘कुष्ठरोग’ का संपूर्ण उन्मूलन किया और 2011 में देश को ‘पोलियो-मुक्त’ बनाया | यह सरकार की गहन प्रतिबद्धता और वैज्ञानिकों की काबिलियत थी कि देश में घरेलू वैक्सीन का विकास एवं उत्पादन हो पाया|
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'प्रधानमंत्री जी एवं भाजपा सरकार को इन महत्वपूर्ण प्रश्नों के जवाब देने होंगे: -
निशुल्क कोरोना वैक्सीन किसे मिलेगी?
कितने लोगों को निशुल्क कोराना वैक्सीन दी जाएगी?
आपको निशुल्क कोरोना वैक्सीन कहां से मिलेगी?
उन्होंने कहा कि,''प्रधानमंत्री जी एवं भाजपा सरकार इस बात का जवाब देने से कतरा रहे हैं कि भारत की बाकी जनसंख्या, यानि 135 करोड़ नागरिकों को कोरोना वैक्सीन कैसे मिलेगी और क्या यह वैक्सीन उनके लिए भी निशुल्क होगी...?. क्या दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, बीपीएल, एपीएल, गरीब एवं सुविधाओं से वंचित लोगों को वैक्सीन निशुल्क मिलेगी या नहीं..?. यदि हाँ, तो उन्हें वैक्सीन दिए जाने की क्या योजना है और सरकार कब तक उन्हें निशुल्क वैक्सीन देगी....?
भारत सरकार सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को 'एस्ट्राजेनेका' वैक्सीन के लिए ज्यादा राशि यानि 200 रुपए क्यों दे रही है? जबकि उन्होंने वैक्सीन, ‘बिना कोई मुनाफा कमाए’ देने का वादा किया है| मोदी सरकार भारत बायोटेक को इस वैक्सीन के लिए 95 रुपए ज्यादा क्यों दे रही है? जबकि इसका विकास भारत सरकार के स्वामित्व की ICMR के वैज्ञानिकों ने अपने अनुभव व विशेषज्ञता द्वारा किया है?
क्या इस वैक्सीन का मूल्य सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन - एस्ट्राजेनेका से कम नहीं होना चाहिए?
कोरोना वैक्सीन का मूल्य ‘खुले बाजार’ में ₹1000/खुराक क्यों है?
जब ‘कोविशील्ड वैक्सीन’ SII द्वारा सरकार को ₹200/खुराक में दी जा रही है, तो उन्हें इसे बाजार में 500% मुनाफे पर बेचकर लोगों की जेब पर डाका डालने की अनुमति कैसे दी जा सकती है?
क्या मोदी सरकार का यह कर्तव्य नहीं कि वो सुनिश्चित करें कि लोगों को ‘कोविशील्ड वैक्सीन’ ₹1000/खुराक की बजाय 200/खुराक में मिले, ताकि लोग इसे आसानी से खरीद सकें.....?, मोदी सरकार ‘उत्पादन की लागत’, ‘लाईसेंसिंग’ एवं ‘मुनाफे के मार्जिन’ में कंपनियों से पारदर्शिता रखने की मांग क्यों नहीं कर रही है? कोरोना वैक्सीन के निर्यात की अनुमति क्यों?
भारत की पूरी जनसंख्या को टीका लगाए जाने से पहले वैक्सीन के निर्यात की अनुमति क्यों दी गई? यदि प्रति खुराक ₹1000 का ‘ऑफ द शेल्फ’ मूल्य तय करने की अनुमति दे दी जाएगी तो हर नागरिक को कोरोना वैक्सीन के लिए ₹1600 ज्यादा देने होंगे | यदि 100 करोड़ लोग वैक्सीन के लिए ₹1600 अतिरिक्त देंगे, तो दवा कंपनियों को ₹1,60,000 करोड़ का मुनाफा होगा। क्या मोदी सरकार ने जन पटल पर उठाए गए अन्य सवालों के साथ इस बात पर विचार किया है...? समय आ गया है, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को आगे आकर इन सवालों के जवाब देने होंगे|