नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को यहां नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन को लॉन्च कर दिया। यह मोनेटाइजेशन प्लान छह लाख करोड़ रुपये का है। सरकार ने रेल से लेकर रोड और बिजली सेक्टर के एसेट्स की बिक्री के लिए यह पहल की है। मोदी सरकार ने सोमवार को अपनी उस योजना को लोगों के सामने रखा, जिसके जरिये उसने अगले 4 साल में 6 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इस योजना का नाम नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन है।
दिल्ली में नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन के लॉन्च पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि,'' निजी भागीदारी के जरिए हम एसेट्स को बेहतर तरीके से मोनेटाइज कर पाएंगे। इस बिक्री के जरिए प्राप्त धन का इस्तेमाल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए किया जाएगा।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि,'नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन में ब्राउनफील्ड एसेट्स को शामिल किया गया है। ये ऐसे एसेट्स में हैं, जिनमें निवेश पहले ही हो चुका है और इनमें या तो एसेट्स कम मोनेटाइजेशन पूरी तरह से नहीं सका है या फिर क्षमता से कम हुआ है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि,'''यह महत्वपूर्ण है कि भारत यह समझे कि हमारी संपत्ति का अधिकतम लाभ उठाने का समय आ गया है|
केंद्रीय वित्त मंत्री ने पाइपलाइन का शुभारंभ करते हुए कहा, ‘परिसंपत्ति मुद्रीकरण कार्यक्रम हमारे माननीय प्रधानमंत्री के विजन से ही सटीक स्वरूप ले पाया है, जो सदैव भारत के समस्त आम नागरिकों के लिए बेहतरीन और किफायती बुनियादी ढांचागत सुविधाओं तक पहुंच में विश्वास करते हैं। मुद्रीकरण के माध्यम से सृजन के दर्शन पर आधारित परिसंपत्ति मुद्रीकरण का उद्देश्य नई बुनियादी ढांचागत सुविधाओं या अवसंरचना के निर्माण के लिए निजी क्षेत्र के निवेश का उपयोग करना है।
यह रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है जिससे आर्थिक विकास की गति को तेज करने के साथ-साथ समग्र जन कल्याण के लिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को निर्बाध रूप से एकीकृत करना भी संभव हो सकेगा।’ वित्त मंत्री ने कहा कि इस योजना से सरकार धन जुटाएगी और पैसे के रास्ते भी खोलेगी।
सीतारमण ने वर्तमान सरकार द्वारा बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के त्वरित विकास और निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए लागू किए गए समस्त सुधारों और पहलों के बारे में भी बताया। इसमें हाल ही में शुरू की गई ‘पूंजीगत व्यय के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता की योजना’ शामिल है, जिसके तहत राज्य सरकारों को नई या पहले से अविकसित (ग्रीनफील्ड) अवसंरचना के विकास में तेजी लाने के लिए राज्य सरकारों के स्वामित्व वाली परिसंपत्तियों का दोबारा उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि अगले चार सालों में रेल, रोड और पावर सेक्टर के अलावा कुछ प्रोजेक्ट्स का मुद्रीकरण किया जाएगा।नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन के बारे में विस्तार से बताते हुए अमिताभ कांत ने कहा कि रोड से सरकार 1.6 लाख करोड़ रुपये, रेलवे से 1.5 लाख करोड़ रुपये और पावर सेक्टर से 79 हज़ार करोड़ रुपये की संपत्तियों का मुद्रीकरण करेगी।
इसके अलावा एयरपोर्ट्स से 20,800 करोड़, बंदरगाहों से 13 हज़ार करोड़, टेलीकॉम से 35 हज़ार करोड़ रुपये, स्टेडियम से 11,500 करोड़ और पावर ट्रांसमिशन सेक्टर की 45,200 करोड़ रुपये की संपत्तियों का मुद्रीकरण करेगी। मुद्रीकरण इन्फ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट मॉडल के जरिये या पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिये किया जाएगा।
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि सड़क, परिवहन और राजमार्ग, रेलवे, बिजली, पाइपलाइन और प्राकृतिक गैस, नागरिक उड्डयन, शिपिंग बंदरगाह और जलमार्ग, दूरसंचार, खाद्य और सार्वजनिक वितरण, खनन, कोयला, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन का हिस्सा होंगे। ब्राउनफ़ील्ड संपत्तियों का मुद्रीकरण इनमें निजी भागीदारी के जरिये किया जाएगा। निजी भागीदारी के तहत जो कंपनियां शामिल होंगी उन्हें एक निश्चित वक़्त के बाद इन्हें सरकार को सौंपना होगा। मुद्रीकरण से जो पैसा सरकार को मिलेगा, उसे बुनियादी ढांचे के निर्माण में काम लाया जाएगा।