नई दिल्ली: कांग्रेस ने गुरुवार 19 जनवरी 2023 को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों के मसौदे में नए संशोधन को “अभिव्यक्ति की आजादी पर चोरी- छिपे हमला” करार दिया और इसे वापस लेने की मांग की। इसमें सोशल मीडिया कंपनियों को उन समाचार लेखों को हटाने के लिए कहा गया है, जिन्हें पत्र सूचना कार्यालय द्वारा “फर्जी” माना गया है। कांग्रेस ने कहा कि संसद के आगामी सत्र में नियमों पर चर्चा की जाएगी।
दरअसल, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मंगलवार 17 जनवरी 2023 को मसौदा सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में एक संशोधन जारी किया, जिसे उसने पहले सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया था। नए संसोधन के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे समाचार और लेखों को हटाने के लिए कहा गया है, जिन्हें पत्र सूचना कार्यालय(PIB) द्वारा फर्जी माना गया है।
मोदी सरकार पर हमला करते हुए कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार के लिये आईटी नियम का मतलब “इमेज टेलरिंग” (छवि गढ़ने) के नियम हैं। उन्होंने कहा,“मोदी सरकार ऑनलाइन खबरों का 'फैक्ट चेक' करेगी तो केंद्र सरकार को 'फैक्ट चेक' कौन करेगा? उन्होंने आरोप लगाया, “इंटरनेट का गला घोंटना और पीआईबी के माध्यम से सेंसर करना मोदी सरकार की 'फैक्ट चेकिंग' की नई परिभाषा है.”
AICC संचार विभाग के मीडिया एवं प्रचार के चेयमैन पवन खेड़ा ने कहा,“सत्ता के अहंकार में चूर मोदी सरकार अब सोशल मीडिया पर लगाम लगाने के लिए ता नाशाही रवैया अपना रही है ! मोदी सरकार ने ऑनलाइन सामग्री विनियमन में 'न्यायाधीश, जूरी और निष्पादक' की भूमिका में खुद का अभिषेक किया है। ये एक अभूतपूर्व कदम है, जिसमें ऑरवेलियन 'बिग ब्रदर सिंड्रोम' की बू आती है!
अईटी (मध्य स्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया अवार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन के मसौदे के लिए परामर्श अवधि को 25 जनवरी 2023 तक बढ़ाते हुए, मोदी सरकार ने चालाकी से एक प्रावधान जोड़ा है। इसमें कहा गया है कि कोई भी समाचार रिपोर्ट जिसे पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के 'फैक्ट चेकिंग यूनिट' द्वारा 'झूठा', 'बेबुनियाद' या 'नकली' माना जाएगा, उसे सरकार द्वारा सोशल मीडिया/ ऑनलाइन वेबसाइटों/ ओटीटी प्लेटफार्मों से हटाया जा सकता है।
सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के संशोधित संस्करण के नियम 3 (1) (बी) (v) में कहा गया है कि platforms "shall make reasonable efforts to cause the user of its computer resource not to post content" that has been "identified as fake or false by the fact check unit at "Press Information Bureau of the Ministry of Information and Broadcasting or other agency authorised by the Central Government for fact checking or, in respect of any business of the Central Governmen (अनुलग्नक Annexure A 1) सरला भाषा में कहे तो सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रेस सूचना ब्यूरो को अगर कोई भी ऑनलाइन सामग्री ग़लत लगेगी, उसे अधिकृत ढंग से हटा सकती है।
पवन खेड़ा ने कहा,“इसका सीधा मतलब है कि PIB की फैक्ट चेकिंग यूनिट ऐसी सामग्री को हटाने में जज बन गई है जो शायद मोदी सरकार की छवि के अनुकूल नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि PIB की फैक्ट चेकिंग यूनिट ऐसी सामग्री को हटाने में जज बन गई है जो शायद मोदी सरकार की छवि के अनुकूल नहीं है। यहां तक कि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी कल एक बयान जारी कर नियमों में इस कपटपूर्ण प्रविष्टि के बारे में "गहरी चिंता" व्यक्त की । 'केंद्र सरकार के किसी भी व्यवसाय के संबंध में - इन शब्दों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि "इससे सरकार की वैध आलोचनापर पाबंदी लगेगी और सरकार को प्रेस के प्र ति जवाबदेह ठहराने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा "।
पवन खेड़ा ने कहा,“मोदी सरकार के लिए प्रेस पर बुलडोजर चलाना कोई नई बात नहीं है। 'गोदी मीडिया' शब्द अब अधिकांश भारतीयों के मन में घर कर चुका है और अब यह सरकार इसे 'गोदी सोशल मीडिया' बनाना चाहती है !
उन्होंने कहा,“ कांग्रेस पार्टी ने पहले भी आईटी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 202 के बारे में कई सवाल उठाए हैं, जिसमें हमने कहा है कि ये नियम ऐतिहासिक श्रेया सिंघल मामले द्वारा सोशल मीडिया को दिए गए सभी सुरक्षा उपायों और सुरक्षा के खिलाफ हैं। ये नियम सरकार की बेईमानी, बेरहमी और बेदर्दी को बड़ा स्पष्ट दर्शाते हैं। विचारों की अभिव्यक्ति और निजता, Freedom of speech & expression and privacy - अगर ये दो मील पत्थर, जो एक नींव है किसी भी गणतंत्र के, उनके प्रति इस सरकार का रवैया कितना निर्दयी है, निष्ठुर है और निर्मम है, वो ये कानून या ये नियम दर्शाते हैं।
पीआईबी की फैक्ट चेकिंग यूनिट (एफसीयू) मोदी सरकार की छवि को बचाने के लिए 'सच' को 'फर्जी' में बदलने की आदतन अपराधी रही है। कुछ बड़े उदाहरण हैं :-
1) 13 नवंबर, 2022 को पीआईबी ने एक झूठा ट्वीट पोस्ट किया, जिसमें श्री राहुल गांधी के वीडियो - 'रेलवे का निजीकरण किया जा रहा है, उसको 'नकली' कहकर चिह्नित किया गया है।
भारत जोड़ो यात्रा के संलग्न वीडियो में, श्री राहुल गांधी को 'दक्षिण मध्य रेलवे कर्मचारी संघ के सदस्य श्री भरणी भानु प्रसाद द्वारा बताया जा रहा था कि "रेलवे स्टेशनों, कार्यशालाओं, चिकित्सा केंद्रों और प्रतिष्ठानों का निजीकरण किया जाएगा। " । यह श्री गांधी की "भारतीय रेलवे के किस हिस्से का निजीकरण किया जा रहा है?" द्वारा प्रश्न का जवाब था। पीआईबी ने आम लोगों और रेलवे कर्मचारियों से संबंधित एक महत्वपूर्ण मुद्दे के बारे में एक स्वतंत्र चर्चा को "फेक न्यूज" के रूप में बदल दिया। कल अगर इन आईटी नियमों को लागू किया जाता है, तो प्रमुख विपक्षी दल के एक नेता के इस ट्वीट को हटा दिया जाएगा, जो लोकतंत्र के लिए बेहद हानिकारक है।
2) पीआईबी ने उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स के बारे में अपने कर्मियों और उनके परिवार के सदस्यों को सुरक्षा कारणों से अपने मोबाइल से 52 चीनी ऐप हटाने के निर्देश देने वाली खबर को "फर्जी खबर" करार दिया। पर सच ये निकला की ये खबर सही थी और एसटीएफ के आईजी श्री अमिताभ यश ने इसकी पुष्टि की थी। केंद्र सरकार ने 10 दिनों के भीतर ऐसे ही कारणों से 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया।
3) इसी तरह, 2 जून, 2020 को पीआईबी के एफसीयू ने एलएसी सीमा के भारतीय पक्ष में चीनी सैनिकों की मौजूदगी के बारे में उसे 'झुठलाते हुए कहा कि ऐसा नहीं हुआ था। दो महीने बाद, रक्षा मंत्रालय के एक दस्तावेज़ में कहा गया कि चीनी पक्ष ने मई 2020 में भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की थी। तब से, चीन ने पूर्वी लद्दाख में अवैध रूप से कब्जा करना जारी रखा है, और हमने कई मौकों पर इसे उजागर किया है।
पवन खेड़ा ने कहा,“फ्री स्पीच से निपटने के लिए मोदी सरकार का 'उत्तर कोरियाई' दृष्टिकोण सर्वविदित है।
> वास्तविक फैक्ट चेकर्स को दुर्भावनापूर्ण मनगढ़ंत आरोपों में गिरफ्तार किया गया है, जब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उसे रिहा किया गया, तब देश को सच्चाई का ज्ञात हुआ।
> हम सभी को याद है कि किसान आंदोलन के दौरान कितने ट्विटर यूजर्स को निशाना बनाया गया था।
> राष्ट्र यह नहीं भूला है कि एक समाचार पत्रिका 'कारवां इंडिया' पर किस तरह से हमला किया गया था।
> कोई भी नहीं भूला है कि उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन के साथ रोगियों की मदद करने वाले युवाओं के खिलाफ देशद्रोह के आरोप सहित कानूनी कार्रवाई शुरू की गई थी, जब COVID-19 लहर अपने चरम पर थी।
> 2021 में, दिल्ली पुलिस ने 17 प्राथमिकी दर्ज की और पीएम मोदी की आलोचना करने वाले पोस्टर के लिए 15 लोगों को गिरफ्तार किया।
> ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले 50 से अधिक पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया था या उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की गई थी या उनकी कोविड-19 रिपोर्ट के लिए उन पर शारीरिक तौर से हमला किया गया था।
पवन खेड़ा ने कहा,“भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस - अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सेंसरशिप पर इस हमले की कड़ी निंदा करती है। हम मांग करते हैं कि ड्राफ्ट आईटी नियमों में नए संशोधन को तुरंत वापस लिया जाए और संसद के आगामी सत्र में इन नियमों पर विस्तार से चर्चा की जाए।