नई दिल्ली: अडानी मामले में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पार्टी के 85वें पूर्ण सत्र राष्ट्रीय महाधिवेशन के कारण 5 दिनों के ब्रेक के बाद "HAHK 18 - हम अडानी के हैं कौन" श्रृंखला के तहत सवाल पूछने का सिलसिला फिर से शुरू हो गया है| कांग्रेस ने 5 दिनों के ब्रेक के बाद आज (मंगलवार यानी 28 फरवरी को ) लगातार दूसरे दिन अडानी मामले को लेकर प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछा|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर दिए गए बयान पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि ,“प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के ख़िलाफ़ जो अपमानजनक बातें कही हैं, उन्हें वह भले ही दोहराते रह सकते हैं, लेकिन अडानी महाघोटाले में अपनी भूमिका पर हमारे सवालों से नहीं बच सकते हैं। ये हैं "HAHK - हम अडानी के हैं कौन श्रृंखला" के 18वें दिन के 3 सवाल चुप्पी तोड़िए प्रधानमंत्री जी।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि ,“ जैसा कि आपसे वादा था, हम अडानी के हैं कौन (एचएएचके) श्रृंखला में आपके लिए आज का तीन प्रश्नों का अठारहवां सेट प्रस्तुत है।
'दिख रहा है विनोद' टाइटिल से सवालों की एक सब-सीरीज आरंभ करनी पड़ेगी
जयराम रमेश ने कहा कि ,“29 जनवरी, 2023 को गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों उत्तर में, अडानी समूह ने ये कहकर इन आरोपों से पल्ला झाड़ने की कोशिश की कि विनोद अडानी के पास अडानी की किसी भी सूचीबद्ध संस्था या उनकी सहायक कंपनियों में कोई भी प्रबंधकीय पद नहीं है और इन कंपनियों की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में उनकी कोई भूमिका नहीं है।" फिर भी, अडानी समूह में विनोद अडानी की केंद्रीय भूमिका के बारे में निरंतर खुलासे सामने आ रहे हैं, जिसके कारण लगता है कि हमें 'दिख रहा है विनोद' शीर्षक से प्रश्नों की एक उप-श्रृंखला आरंभ करनी पड़ेगी ।
(1) जैसा कि हमने 19 फरवरी को एचएएचके प्रश्न श्रृंखला में उल्लेख किया था कि अडानी समूह द्वारा स्टॉक एक्सचेंजों में दायर किए गए विभिन्न ज्ञापनों में कहा गया था कि "अडानी समूह का मतलब एस. बी. अडानी फैमिली ट्रस्ट, अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड, अडानी ट्रेडलाइन एलएलपी, गौतम अडानी, राजेश अडानी, विनोद एस. अडानी...” लेकिन अब हमें पता चला है दिनांक 18 मार्च 2020 को अहमदाबाद में कंपनी रजिस्ट्रार को भेजे अडानी समूह के पत्र में कहा गया है कि: “कंपनी के प्रमोटर, श्री विनोद एस. अडानी, ने महत्वपूर्ण लाभकारी हित में परिवर्तन (इस प्रकार से ) की सूचना दी है..." इस पत्र पर अडानी एंटरप्राइजेज के कंपनी सचिव और संयुक्त अध्यक्ष (विधि) जतिन जालूंधवाला ने हस्ताक्षर किए थे और इससे स्पष्ट होता है कि अडानी समूह के मामलों में विनोद अडानी एक केंद्रीय भूमिका में हैं।
क्या ये अकाट्य सबूत अंतत: भारत की सर्व शक्तिशाली एजेंसियों द्वारा विनोद अडानी की विदेशी शेल कंपनियों द्वारा समक्रमिक व्यापार ( राउंड ट्रिपिंग) और मनी - लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच का मार्ग प्रशस्त करेंगे? अथवा आप अपने करीबी दोस्त को संरक्षण देना जारी रखेंगे और अपने बचाव में उसके द्वारा प्रस्तुत हास्यास्पद थोथी दलील को स्वीकार कर लेंगे?
(2) विनोद अडानी के करीबी सहयोगी जयचंद जिंगरी से जुड़े पांच निवेश फंड बेलग्रेव इन्वेस्टमेंट फंड, कोयस ग्लोबल ऑपर्म्युनिटीज फंड, एविएटर ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फंड, रेजोनेंस अपॉर्चुनिटीज और आयुष्मात के पास 20,000 करोड़ रुपये के अडानी फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) में एंकर इन्वेस्टर के रूप में सब्सक्रिप्शन का 11.3% हिस्सा था- जो एफपीओ अंततः विफल रहा?? जिंगरी, विनोद अडानी की तरह, मॉरीशस स्थित अडानी ग्लोबल में एक पूर्व निदेशक हैं, जो अडानी एक्सपोर्ट्स की एक सहायक कंपनी है, जिसे 2006 में अडानी एंटरप्राइजेज का नाम दिया गया था। उनके भगोड़े स्टॉकब्रोकर केतन पारेख और धर्मेश दोशी के साथ संबंध होने की भी सूचना है।
कुछ चुनिंदा एफपीओ निवेशकों की तरह, क्या इन फंडों को भी अवैध रूप से पूर्व सूचना दे दी गई थी कि एफपीओ को बाद में रद्द कर दिया जाएगा और उनका निवेश केवल अडानी समूह की साख को बचाने के लिए किया जा रहा है? क्या संबंधित पक्षों द्वारा की गई ये हेराफेरी गंभीर जांच के योग्य नहीं है?
(3) मॉरीशस - आधारित एक छठा फंड, द ग्रेट इंटरनेशनल टस्कर फंड, जिसने एंकर निवेशक चरण में निवेश किया था, उसमें वही निदेशक हैं जो अन्य फर्मों में विनोद अडानी और सुबीर मित्रा के साथ के साथ सह-निदेशक हैं, जो अडानी परिवार कार्यालय के प्रमुख हैं। ऐसी खबरें हैं कि सेबी इनमें से कुछ फंडों की जांच कर रहा है, लेकिन हमें इस बात की चिंता है कि इन मामलों में भी जांच क्या उसी दिशा में आगे बढ़ेगी जैसे अडानी समूह की अन्य गलत गतिविधियों की जांच आज तक कहीं पहुंच नहीं पाई है। क्या आप भारतीय निवेशकों और नागरिकों को आश्वस्त कर सकते हैं कि सेबी इस बार आपके दोस्तों को बचाने के लिए सांकेतिक जांच करने की बजाय ठोस कदम उठाएगा ?
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोमवार यानी 27 फरवरी को कहा था कि ,“ कांग्रेस महाधिवेशन के कारण 5 दिनों के ब्रेक के बाद हम "HAHK - हम अडानी के हैं कौन" श्रृंखला के तहत सवाल पूछने का सिलसिला फिर से शुरू कर रहे हैं। ये हैं 17वें दिन के (सोमवार यानी 27 फरवरी को) तीन सवाल। चुप्पी तोड़िए प्रधानमंत्री जी।
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कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोमवार यानी 27 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी से कहा था कि ,“हम अडानी के हैं कौन (एचएएचके) श्रृंखला में आपके लिए आज का तीन प्रश्नों का सत्रहवां सेट प्रस्तुत है।
(1) अडानी समूह के शेयरों में निरंतर बिकवाली के कारण, 31 दिसंबर 2022 से समूह में एलआईसी के शेयरों के मूल्य में आश्चर्यजनक रूप से 52,000 करोड़ रुपये की गिरावट आई है। इनका मूल्य अब मात्र 32,000 करोड़ रुपये रह गया है और एलआईसी तथा इसके करोड़ों पॉलिसीधारकों द्वारा कमाया गया सारा लाभ, जो अब हम सभी जानते हैं कि स्टॉक मार्केट में हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग के कारण हुआ था, उस सारे लाभ का सफाया हो गया है और एलआईसी को एक बहुत बड़ा नुकसान हुआ है । किसने भारत की वित्तीय प्रणाली के इस स्तंभ को आपके पसंदीदा व्यवसायी के लिए इतने जोखिम भरे सौदे में शामिल होने के लिए मजबूर किया? भारत के नागरिकों की बचत के साथ खेले गए इस जुए के लिए आपको कब जवाबदेह ठहराया जाएगा?
(2) आज जबकि एमएससीआई, एसपी डाउ जोन्स और एफटीएसई रसेल जैसी प्रमुख मार्केट इंडेक्स प्रदाता कंपनियां अदानी समूह की फर्मों के भारांक (व्हेटेज) की समीक्षा कर रही हैं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) निवेशकों की सुरक्षा के लिए कोई गंभीर कार्रवाई करने में विफल रहा है। इसके विपरीत एनएसई ने 17 फरवरी 2023 को घोषणा की कि वर्तमान में शेयर बाजारों में डूब रही अदानी समूह की कंपनियों में से अतिरिक्त 5 को 14 सूचकांकों में शामिल किया जाएगा। इससे कई वित्तीय सलाहकारों ने अपने ग्राहकों को इन फंडों में निवेश न करने की सलाह दी है, जो उन सूचकांकों का बेंचमार्क के रूप में उपयोग करते हैं। लेकिन लाखों असहाय निवेशकों पर अभी भी उनकी गाढ़ी कमाई से इन डूब रही अडानी समूह की कंपनियों को उबारने के लिए मजबूर होने का खतरा मंडरा रहा है। क्या आप अपने करीबी दोस्त को इस संकट से उबारने के लिए एनएसई पर दबाव बना रहे हैं? सेबी को यह सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है कि लाखों निवेशकों का एक डूबते हुए व्यावसायिक समूह में निवेश कराके उनसे धोखाधड़ी न हो?
(3) मुंबई में धारावी एरिया के पुनर्विकास के लिए नवंबर 2018 में जारी निविदा में दुबई स्थित सिकलिंक टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन 7,200 करोड़ रुपये की बोली के साथ सर्वोच्च बोली दाता के रूप में सामने आया था। नवंबर 2020 में रेलवे की जमीन के हस्तांतरण में देरी के कारण उस टेंडर को रद्द कर दिया गया था। अक्टूबर 2022 में नई शर्तों के साथ एक नया टेंडर जारी किया गया, जिसे अडानी समूह ने 5,069 रुपये की बोली के साथ जीता, जो राशि मूल निविदा विजेता की बोली से 2,131 करोड़ रुपये कम थी। क्या आपने भाजपा समर्थित महाराष्ट्र सरकार को निविदा की शर्तों को बदलने के लिए मजबूर किया ताकि मूल निविदा विजेता को बाहर करके अडानी समूह को लाभ दिया जा सके?
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