नई दिल्ली: गौतम अडानी पर लगे 'कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े घोटाले' के आरोपों पर कांग्रेस ने "HAHK - हम अडानी के हैं कौन" श्रृंखला के तहत पीएम मोदी से सवाल करना जारी रखा है| "HAHK-हम अडानी के हैं कौन" श्रृंखला का आज नौवां दिन है। जयराम रमेश ने कहा कि ,“प्रधानमंत्री से जुड़े अदानी महाघोटाले को लेकर ये हैं PM से हमारे आज के 3 सवाल।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि ,“ जैसा कि आपसे वादा था, आपके लिए आज का तीन प्रश्नों का सेट प्रस्तुत है, HAHK (हम अडानी के हैं कौन) श्रृंखला में नौवां ।
प्रश्नों का यह सेट अपने पूंजीपति मित्रों को और अमीर बनाने के लिए आपके द्वारा विदेश नीति के दुरुपयोग को लेकर है, यहां मामला हमारे पड़ोसी बांग्लादेश के साथ संबंधों का है।
1. अपने पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से यूपीए सरकार ने वर्ष 2010 में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी द्वारा बगेरहाट, बांग्लादेश में 1,320 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट लगाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। सत्ता में आने के बाद, आपने इसके विपरीत, अपने 'डबल ए' मित्रों की मदद करने का निर्णय लिया और 6 जून 2015 को आपकी ढाका यात्रा के दौरान, यह घोषणा की गई कि अडानी पावर और रिलायंस पावर बांग्लादेश को बिजली आपूर्ति करने के लिए थर्मल पावर प्लांट का निर्माण करेंगे।
क्या यह सच है कि आपने अपनी समकक्ष प्रधानमंत्री शेख हसीना पर उन शर्तों को स्वीकार करने के लिए दबाव डाला, जो अडानी पावर के लिए अत्यंत अनुकूल और बांग्लादेश के लिए प्रतिकूल थीं और अडानी के गोड्डा (झारखंड) बिजली संयंत्र से बांग्लादेश को आपूर्ति की जाने वाली बिजली की लागत उसके अपने संयंत्रों में बिजली की लागत से कहीं अधिक थी? क्या पड़ोसी देशों की कीमत पर अपने मित्रों को और अमीर बनाना भारत की विदेश नीति के हितों को आगे बढ़ाता है?
2. झारखंड को मूल रूप से एक बिजली संयंत्र द्वारा उत्पादित बिजली के 25% हिस्से की रियायती दरों पर ज़रूरत थी। यह अडानी पावर के साथ इसके फरवरी 2016 के शुरुआती समझौते में उल्लेखित किया गया था। हालांकि, अक्टूबर 2016 में, अडानी को लाभ पहुंचाने के लिए इस नीति में अचानक संशोधन कर दिया गया।
क्या यह सही है कि सरकारी ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार परियोजना के 25 साल के जीवनकाल में इन संशोधित शर्तों के कारण झारखंड राज्य को 7,410 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ेगा ? क्या राज्य के महालेखाकार के कार्यालय द्वारा 12 मई 2017 को लिखित रूप में ये कहा गया कि अडानी के साथ यह समझौता "पक्षपातपूर्ण व्यवहार" की परिधि में आता है और इससे अडानी की कंपनी को "अनुचित लाभ मिलेगा? राज्य सरकार की इस लंबे समय से चली आ रही नीति को बदलने के लिए झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास को राज़ी करने में आपकी क्या भूमिका थी?
3. फ़रवरी 2018 में अडानी पावर ने कर में छूट का लाभ उठाने के लिए गोड्डा पावर प्लांट को एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईज़ेड) के अंतर्गत स्थापित करने के लिए आवेदन किया था। तथापि वाणिज्य मंत्रालय द्वारा इस आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया क्योंकि यह उन दिशानिर्देशों का उल्लंघन करता था, जो एक विशेष आर्थिक क्षेत्र के भीतर एक विशिष्ट अकेले बिजली संयंत्र की स्थापना को प्रतिबंधित करते थे।
फिर भी 9 जनवरी, 2019 को वाणिज्य मंत्रालय ने अपना दृष्टिकोण बदला और उन दिशानिर्देशों में संशोधन कर दिया। इसके तुरंत बाद, 25 फ़रवरी 2019 को, विशेष आर्थिक क्षेत्रों के प्रभारी अनुमोदन बोर्ड ने अडानी पावर के आवेदन को अपनी मंज़ूरी दे दी। इस नीतिगत बदलाव में प्रधानमंत्री कार्यालय की क्या भूमिका थी, जिससे अडानी पावर को कोयले के आयात शुल्क के उन्मूलन से प्रति वर्ष 300 करोड़ रुपए का लाभ प्राप्त हुआ?
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