नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के कहर से हाहाकार मचा है। कोरोना मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी से देश की स्वास्थ्य प्रणाली चरमरा गई। देश में जहां पिछले तीन दिन से हर रोज 4 लाख से अधिक नए कोरोना मरीज मिल रहे हैं। वहीं देश में पहली बार 24 घंटे में रिकॉर्ड 4,187 लोगों की कोरोना से मौत हो गई जोकि एक दिन में दर्ज की गई मौतों की अब तक की सबसे अधिक संख्या है। इस बीच शिवसेना ने मोदी सरकार पर करारा हमला बोला| शिवसेना ने शनिवार को कहा कि,''गरीब देश हमें अपनी हैसियत के हिसाब से छोटी-मोटी सहायता कर रहे हैं, तो भी हमारे प्रधानमंत्री महोदय 20 हजार करोड़ के महत्वाकांक्षी ‘सेंट्रल विस्टा’ परियोजना को रोकने के लिए तैयार नहीं हैं। दिल्ली में नया संसद भवन, उसमें प्रधानमंत्री का नया-नवेला महल, इन योजनाओं पर हजारों करोड़ रुपए बर्बाद करना और फिर बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका जैसे देशों से कोरोना निवारण के लिए मदद स्वीकारना, इसका दुख किसी को नहीं, इस पर आश्चर्य होता है।
शिवसेना ने यह भी कहा कि,'' हिंदुस्थान नेहरू-गांधी द्वारा निर्माण की गई व्यवस्था पर ही टिका हुआ है। नहीं तो कोरोना की लहर में सवा सौ करोड़ लोग कब का खत्म हो गए होते। हिंदुस्थान में जल रही चिताओं का धुंआ अगल-बगल के देशों का दम घोंट रहा है। इस धुएं से कोरोना अपने देश में फैले नहीं, इसके लिए कई गरीब देश भी हिंदुस्थान की दयाभावना से मदद कर रहे हैं। यदा-कदा ऐसा समय पाकिस्तान, रवांडा, कोंगो जैसे देशों पर आता था। आज राजनेताओं की गलत नीतियों के कारण यह समय खुद को आत्मनिर्भर कहलानेवाले हिंदुस्थान पर आया है।
शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना' में कहा,''हिंदुस्थान से विश्व को खतरा होने की चिंता अब ‘यूनिसेफ’ ने भी व्यक्त की है। कोरोना जिस तेजी से हिंदुस्थान में पैâल रहा है, उससे पूरा विश्व संकट में आएगा इसलिए हिंदुस्थान को कोरोना के खिलाफ लड़ने के लिए अन्य देश ज्यादा-से-ज्यादा मदद करें, ऐसा यूनिसेफ की ओर से कहा गया है। बांग्लादेश ने हिंदुस्थान को १० हजार रेमडेसिवीर वायल दानस्वरूप भेजा है। भूटान जैसे देश ने ऑक्सीजन भेजा है। नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका जैसे देशों ने भी आत्मनिर्भर हिंदुस्थान को मदद का हाथ बढ़ाया है।
शिवसेना ने कहा कि''स्पष्ट कहें तो आज भी हिंदुस्थान नेहरू-गांधी द्वारा निर्माण की गई व्यवस्था पर ही टिका हुआ है। नहीं तो कोरोना की लहर में सवा सौ करोड़ लोग कब का खत्म हो गए होते। हिंदुस्थान में जल रही चिताओं का धुंआ अगल-बगल के देशों का दम घोंट रहा है। इस धुएं से कोरोना अपने देश में फैले नहीं, इसके लिए कई गरीब देश भी हिंदुस्थान की दयाभावना से मदद कर रहे हैं। यदा-कदा ऐसा समय पाकिस्तान, रवांडा, कोंगो जैसे देशों पर आता था।
आज राजनेताओं की गलत नीतियों के कारण यह समय खुद को आत्मनिर्भर कहलानेवाले हिंदुस्थान पर आया है। गोर-गरीब देश हमें अपनी हैसियत के हिसाब से छोटी-मोटी सहायता कर रहे हैं, तो भी हमारे सम्माननीय प्रधानमंत्री महोदय २० हजार करोड़ के महत्वाकांक्षी ‘सेंट्रल विस्टा’ परियोजना को रोकने के लिए तैयार नहीं हैं। दिल्ली में नया संसद भवन, उसमें प्रधानमंत्री का नया-नवेला महल, इन योजनाओं पर हजारों करोड़ रुपए बर्बाद करना और फिर बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका जैसे देशों से कोरोना निवारण के लिए मदद स्वीकारना, इसका दुख किसी को नहीं, इस पर आश्चर्य होता है।
गुरुवार को राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष, किसान नेता अजीत सिंह कोरोना की बलि चढ़ गए। पत्रकार शेष नारायण सिंह कोरोना से नहीं बचे। इन दोनों को भी प्रधानमंत्री मोदी ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। देश की अवस्था भयावह बनी हुई है। इस भय का सदमा हमारे दिल्लीश्वर ने कितना लिया, ये कहा नहीं जा सकता लेकिन विश्व ने हिंदुस्थान की इस परिस्थिति का बड़ा ही सदमा लिया है। कोरोना की दूसरी लहर के बीच तीसरी लहर का झटका इससे ज्यादा जोरों में लगेगा, ऐसा विशेषज्ञों का कहना है, लेकिन भाजपा के लोग आज भी प. बंगाल में ममता बनर्जी की राजनीतिक घेराबंदी करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
सर्वोच्च न्यायालय कोरोना को लेकर रोज केंद्र सरकार पर हंटर बरसा रहा है। कोई संवेदनशील या राष्ट्रभक्त सरकार होती तो राजनीतिक हानि-लाभ का विचार किए बिना सभी पार्टियों के प्रमुखों की एक राष्ट्रीय टीम बनाती और इस संकट से कैसे लड़ा जाए, इस पर सलाह-मशविरा करती, लेकिन प. बंगाल में एक राज्यमंत्री की गाड़ी पर पत्थर पड़ने का बहाना बनाकर केंद्र सरकार मौन हो गई है। कोरोना का संकट इतना गहरा है और सर्वोच्च न्यायालय का हंटर इतनी जोर से पड़ रहा है कि उससे सरकार का पूरा वस्त्रहरण हो गया है। इस वजह से कोरोना के मामले में सरकार एक भी शब्द न बोले, ऐसी परिस्थिति हो गई है।
उत्तर प्रदेश में श्रीराम मंदिर निर्माण का भूमिपूजन उत्सव कोरोना काल में ही किया। उसी उत्तर प्रदेश में भाजपा के विधायक कोरोना से मरते हुए दिखाई दे रहे हैं। सभी ओर भय और अफरा-तफरी का माहौल है। सरकार का दिमाग चलना या तो बंद हो गया है या फिर सरकार ने संकट के समय हथियार डाल दिए हैं।
डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने स्वास्थ्य मंत्रालय की बागडोर नितीन गडकरी जैसे सक्षम मंत्री के पास देने का सुझाव दिया है। उसके पीछे की छटपटाहट को समझें। देश का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से असफल साबित होने का ही यह प्रमाण है। हिंदुस्थान में पिछले 10 दिनों में सबसे अधिक कोरोना से हुई मौतों का वैश्विक रिकॉर्ड है। देश में हर घंटे में 150 लोगों की कोरोना से मौत हो रही है। पिछले 10 दिनों में हिंदुस्थान में
36,110 लोगों की कोरोना से मौत हो गई है। यह आंकड़ा धड़कनें बढ़ानेवाला है। अमेरिका, ब्राजील को हमने पीछे छोड़ दिया है। यह दृश्य अच्छा नहीं है।
विश्व को अब हिंदुस्थान का भय लगने लगा है। हिंदुस्थान में जाने से लेकर व्यापार-उद्योग करने तक उन देशों ने अपने लोगों को रोक दिया है। हिंदुस्थान में हवाई यात्रा करने पर प्रतिबंध लगाया है। इसका आर्थिक नुकसान हिंदुस्थान को हो रहा है। फिर भी देश टिका हुआ है तो 70 वर्षों से पंडित नेहरू, शास्त्री, इंदिरा जी, राजीव गांधी, नरसिंहराव, मनमोहन सिंह द्वारा बनाई गई योजना, परियोजना व आत्मविश्वास पर ही। यह बड़ा पुण्य है। प्रधानमंत्री मोदी को देश संवारने के लिए कठोर परिश्रम और राजनीति रहित राष्ट्रवाद का विचार करना होगा। वैश्विक स्तर पर हिंदुस्थान की स्थिति विकट होना ठीक नहीं!