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24 अगस्त 2026

ड्रग्स की तस्करी और प्रसार किसी भी समाज के लिए बहुत घातक, पीढ़ियों को खोखला कर देता है: गृह मंत्री शाह

चंडीगढ़: केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज चंडीगढ़ में ‘नशीली दवाओं की तस्करी और राष्ट्रीय सुरक्षा' पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ड्रग्स की तस्कर…

ड्रग्स की तस्करी और प्रसार किसी भी समाज के लिए बहुत घातक, पीढ़ियों को खोखला कर देता है: गृह मंत्री शाह
ड्रग्स की तस्करी और प्रसार किसी भी समाज के लिए बहुत घातक, पीढ़ियों को खोखला कर देता है: गृह मंत्री शाह | फ़ोटो: TVL News

चंडीगढ़:  केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज चंडीगढ़ में ‘नशीली दवाओं की तस्करी और राष्ट्रीय सुरक्षा' पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ड्रग्स की तस्करी और प्रसार किसी भी समाज के लिए बहुत घातक होता है। ड्रग्स तस्करी के बाद जब उसका प्रसार समाज में होता है तो वो पीढ़ियों को खोखला कर देता है और दीमक की तरह देश और समाज की जड़ों को खोखला करने का काम करता है। कोई भी स्वस्थ, समृद्ध, सक्षम और सुरक्षित राष्ट्र ड्रग्स तस्करी के ख़िलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए बिना अपने उद्देश्य सिद्ध नहीं कर सकता है। 



उन्होंने कहा कि ड्रग्स के ख़िलाफ़ लड़ाई सामाजिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है। ये देश के अर्थतंत्र को खोखला बनाने का प्रयास कर रहे हैं, देश की सुरक्षा की दृष्टि से भी यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ड्रग्स के कारोबार से उत्पन्न डर्टी मनी देशविरोधी गतिविधियों में उपयोग में आती है। एक ओर ड्रग्स तस्करी और इसके प्रसार को रोककर हम आने वाली पीढ़ियों को बर्बादी से बचाना चाहते हैं, इसके साथ-साथ नशे के व्यापार से जो डर्टी मनी जेनरेट होती है, उसे देश के ख़िलाफ़ उपयोग किया जाता है, उसे रोकना भी हमारे देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।



अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2014 में जब श्री नरेन्द्र मोदी जी देश के प्रधानमंत्री बने, तब से भारत सरकार ने ड्रग्स के ख़िलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाया और धीरे-धीरे हम व्यवस्था में मौजूद छिद्रों को भरकर ड्रग्स के ख़िलाफ़ लड़ाई को अभेद्य और द्रुत गति से चलने वाली लड़ाई चलने वाली लड़ाई बनाया है। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद कभी भी इतनी स्पष्ट दिशा और गति से ड्रग्स के ख़िलाफ़ लड़ाई नहीं चली थी लेकिन आज एक स्पष्ट दिशा और तेज़ गति के साथ हम ड्रग्स के ख़िलाफ़ लड़ाई को आगे बढ़ाने में सफल हुए हैं। इसके परिणाम भी ए हैं। मादक पदार्थों का व्यक्ति, समाज, अर्थतंत्र और देश की सुरक्षा पर बुरा असर होता है इसीलिए इसे दृढ़ता के साथ मूल समेत उखाड़ना ज़रूरी है। 



 शाह ने कहा कि भारत सरकार का गृह मंत्रालय, सामाजिक कल्याण मंत्रालय, रेवेन्यू विभाग, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के साथ मिलकर इस लड़ाई को बहुत अच्छे डिज़ाइन के साथ एनसीबी के माध्यम से लड़ना शुरू किया है। ये लड़ाई गृह मंत्रालय अकेला नहीं लड़ सकता। जो बच्चे नशे में डूब चुके हैं, हमें उन्हें भी बाहर निकालना है और इसके लिए सामाजिक न्याय मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय की भी ज़रूरत है। आगे और युवाओं को ड्रग्स की लत न लगे, इसके लिए शिक्षा मंत्रालय, सामाजिक न्याय मंत्रालय और गृह मंत्रालय को साथ मिलकर काम करना होगा। इससे पैदा होने वाली डर्टी मनी से देश की सुरक्षा में सेंध न लगे और ऐसा विचार रखने वालों को रोकने के लिए भी गृह मंत्रालय बहुत कठोरता के साथ काम कर रहा है।



केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ड्रग्स के ख़िलाफ़ लड़ाई में गृह मंत्रालय बहुआयामी अप्रोच के साथ आगे बढ़ा है। इसके लिए कई एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स किए गए हैं, नई पद्धतियां भी विकसित की हैं और राज्यों को इसके साथ जोड़ने के लिए प्रो-एक्टिव अप्रोच लिया है। एक ओर, फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में अत्याधुनिक लैब उपलब्ध हो, इसके लिए नेश्नल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी कैंपस में एक सेंटर स्थापित किया है। दूसरी ओर, कानून को कठोर बनाने के लिए सबके साथ चर्चाएं भी चल रही हैं। तीसरी ओर, एन्कोर्ड के माध्यम से ज़िले तक किसी भी प्रकार की कहीं भी लूपहोल ना रहे, ऐसा एक समन्वय तंत्र बनाने का काम भी गृह मंत्रालय ने 2019 से किया है। इन सब समन्वित प्रयासों के जो परिणाम मिले हैं, वो हौंसला बढ़ाने वाले हैं। ये परिणाम दर्शाते हैं कि ये ऐसी समस्या नहीं है जिसका निदान नहीं है और जिसे मूल समेत समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर एन्कोर्ड ज़िला और तहसील तक पहुंच गया और सभी विभागों ने साथ मिलकर काम कर लिया, तो कुछ ही सालों में मोदी जी के नशामुक्त भारत का स्वप्न चरितार्थ होता हुआ दिखेगा।



मंत्री ने कहा कि,'' 2006 से 2013 के बीच 1.52 लाख किलोग्राम मादकपदार्थ ज़ब्त हुए थे जबकि 2014 से 2022 के बीच 3.3 लाख किलोग्राम ड्रग्स पकड़ी गई है। ज़्यादा नुक़सान पहुंचाने वाले और शरीर और समाज को खोखला करने वाले मादक पदार्थों पर हमने ज़्यादा कॉन्सेन्ट्रेट किया है। 2006 से 2013 तक 768 करोड़ रुपये का ड्रग्स पकड़ी गईं जबकि 2014 से 2021 के बीच 20 हज़ार करोड़ रुपये के ड्रग्स पकड़ कर उसे नष्ट करने का अभियान भारत सरकार चला रही है|



पंजाब में ड्रग्स की समस्या ज्यादा है

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि पंजाब में यह समस्या ज्यादा है क्योंकि यह एक बॉर्डर का स्टेट है इसलिए यहां प्रयास भी ज्यादा करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अमृतसर में भी एक फॉरेंसिक लैब बनाएंगे और साथ ही एनसीबी का एक छोटा सेंटर भी खोलेंगे जो ट्रेनिंग उपलब्ध करवाएगा। श्री शाह ने कहा कि भारत सरकार ड्रग्स के खिलाफ  लड़ाई में पंजाब के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। हम जानते हैं कि पंजाब के युवाओं को नशे से बाहर निकालना है और इसके लिए पंजाब जो भी प्रयास करता है हम उसके साथ हैं। 



 अमित शाह ने कहा कि वे आश्वासन देते हैं कि पंजाब की नशे के खिलाफ जो लड़ाई है उसको भारत सरकार मोदी जी के नेतृत्व में मजबूत सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि अवैध ड्रग्स की खेती के लिए भी राज्य में ड्रोन उपयोग और टेक्नोलॉजी का उपयोग बढ़ाकर बहुत जल्दी इसे रोकना पड़ेगा। एनसीबी भास्कराचार्य सेंटर के साथ मिलकर एक संयुक्त प्रयास कर रही है, सेटेलाइट के माध्यम से एरिया आईडेंटिफाई किया जा रहा है और एक विशिष्ट प्रकार की सेटेलाइट इमेज की पहचान सिस्टम भी डेवलप की जा रही है। इससे सचिवालय के अंदर ही सर्वे नंबर के साथ आपको उस एरिया की जानकारी मिल जाएगा जहां ड्रग्स की खेती होती है, अगर यह हो जाता है तो फिर ड्रग्स नष्ट करने में देरी नहीं लगेगी। उन्होने सभी राज्यों से अनुरोध किया कि वे भी भास्कराचार्य इंस्टिट्यूट से संपर्क कर सकते हैं और वह  उनकी मदद करने के लिए तैयार हैं।



अमित शाह ने कहा कि दोहरे उपयोग वाली दवाइयों के  दुरुपयोग को रोकना पड़ेगा, इसके लिए गृह मंत्रालय के इनिशिएटिव से स्वास्थ्य और समाज परिवार कल्याण मंत्रालय और रसायन मंत्रालय के साथ स्थाई अंतर मंत्रालाय ( inter-ministerial ) समिति का गठन किया है। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्ग से तस्करी रोकना भी बहुत महत्वपूर्ण है भारत सरकार की एजेंसियों ने कोस्टगार्ड के साथ और समुद्री तट पर बसे राज्यों के साथ मिलकर बहुत बड़ी मात्रा में पिछले एक साल में कीमत की दृष्टि से जितना भी ड्रग्स पकड़ा उसका अधिकतम ड्रग्स समुद्री मार्ग से पकड़ा गया। 



उन्होंने कहा कि भारत प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग के चौराहे पर है, हमारी समुद्री सीमा से ड्रग्स को न श्रीलंका जाने देना है, न पूर्व के देशों में और न भारत में आने देना है। भारत की सरजमीं न ड्रग्स बनाने देगी, न आने देगी और न ड्रग्स को यहां से बाहर जाने देगी। मोदी जी के नेतृत्व में भारत का ड्रग्स के खिलाफ जीरो टोलरेंस का संकल्प है। यह दुनिया की लड़ाई है जो भारत ने लड़ी है और हम इस स्प्रीट के साथ इस समस्या का समाधान कर सकते हैं। उन्होने कहा कि कई हवाई अड्डों पर हमने अलग प्रकार की पद्धतियां विकसित की है। कस्टम और डीआरआई ने भी कई प्रकार के सॉफ्टवेयर बनाए हैं और गृह मंत्रालय फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन के लिए भी एफआईयू और ईडी दोनों के साथ बहुत गहन विचार-विमर्श करता है। वित्तीय जांच जो की जा रही है, उनकी संपत्तियाँ भी जब्त कर रहे हैं और उनके मूल तक पहुँचने का काम कर रहे हैं।



सरकार ने 272 जिले और लगभग 80 हजार से ज्यादा गांव इंगित किए हैं , जहां यह लड़ाई लड़नी है 

अमित शाह ने कहा कि हमने 272 जिले और लगभग 80 हजार से ज्यादा गांव इंगित किए हैं अब हमारा एरिया तय है कि हमें यह लड़ाई कहाँ लड़नी है। अब हमारा काम है कि संकल्प के साथ हर व्यक्ति, हर एजेंसी अपने अपने कार्य क्षेत्र में इस लड़ाई को मजबूत से ले जाए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने 44 देशों के साथ नारकोटिक्स के लिए अलग-अलग समझौता ज्ञापन किए हैं और सूचनाओं का आदान प्रदान हो गया है। श्री शाह ने कहा कि उनकी राज्यों से बहुत अपेक्षाएं हैं, यह लड़ाई अकेले केंद्र सरकार नहीं लड़ सकती हैं, राज्य की लड़ाई लड़ने की गति केंद्र से दोगुना से ज्यादा होती हैं तभी जाकर परिणाम आता है और राज्य भी अकेला नहीं लड़ सकता है हम सबको मिलकर इस लड़ाई को आगे ले जाना होगा। डिस्ट्रिक्ट, तहसील और गांव तक एन्कोर्ड पोर्टल प्लेटफार्म का जितना उपयोग होगा हम उतना ज्यादा समस्याओं का समाधान कर पाएंगे। हमें एन्कोर्ड तंत्र और जॉइंट कोऑर्डिनेशन समिति का सदुपयोग करने की आदत डालनी पड़ेगी। उसके निर्देशों को  इंप्लीमेंट भी करना पड़ेगा। 



गृह मंत्री ने कहा कि ड्रग्स की बड़ी जब्ती के मामले में भी उनका राज्यों से अनुरोध है कि इसको केंद्र- राज्य का मामला न बनाएं। जहां पर भी आपको लगता है कि यह मामला हमारे राज्य की सीमा के बाहर जाता है आप एनसीबी और एनआईए का सहयोग करें। अगर मामला राज्य की सीमा के बाहर है तो एनसीबी को दे दीजिए और अगर देश की सीमा से बाहर का मामला है तो एनआईए को दे दीजिए। देश की संसद ने एनआईए को विदेश के अंदर जांच करने के लिए सक्षम बनाया है। श्री शाह ने कहा कि हम समस्या का समाधान जानते हैं और वे भरोसा दिलाना चाहते हैं कि केंद्र की ये दोनों एजेंसियां राज्य को साथ में लेकर ही जांच करेंगी।



गृह मंत्री ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए भी सुप्रीम कोर्ट के साथ बातचीत चल रही है। फास्ट ट्रैक कोर्ट और एक्सक्लूसिव कोर्ट के लिए भी बात हो रही है। उन्होंने कहा कि आज जिन पांच राज्यों का सम्मेलन यहां बुलाया गया है ये राज्य और पूरा नॉर्थईस्ट, ड्रग्स की समस्या का प्रवेश द्वार भी है और यहां के युवा सबसे ज्यादा ड्रग्स की समस्या से ग्रसित हैं। इसलिए इन पांच राज्यों को भी अपने राज्य के बीच कोऑर्डिनेशन की एक व्यवस्था करनी पड़ेगी। अगर पंजाब से ड्रग्स हरियाणा जाता है तो हरियाणा को तुरंत सूचना मिल जाए और हरियाणा उसको दिल्ली की ओर नहीं जाने देगा। उन्होने कहा कि ड्रोन आज ड्रग्स और  हथियारों की तस्करी और जाली नोटों के लिए एक बड़ी समस्या बनी हुई है, मगर उस पर भी हम युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं।



 अमित शाह ने कहा कि आज वे इतना ही कहना चाहते हैं कि आजादी के अमृत महोत्सव के वर्ष में मोदी जी ने कहा है कि अमृत महोत्सव से शताब्दी के इस अमृतकाल में हम सभी संकल्प लें। इस सम्मेलन में सभी से अपील है कि हम सब भी संकल्प लें कि ड्रग्स से भारत की युवा पीढ़ी को पूर्णतया मुक्त कराएंगे और एक समृद्ध और नए भारत की रचना में अपना योगदान देंगे। उन्होने भरोसा जताया कि हर राज्य का इसमें सहयोग मिलेगा और प्रत्येक राज्य सक्रिय भूमिका निभाते हुए आगे बढ़कर अपने-अपने क्षेत्र में ड्रग्स की समस्या को समाप्त करेगा।



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TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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यह रिपोर्ट 30 जुलाई 2022 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 24 अगस्त 2026 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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