नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' के 72वें संस्करण को संबोधित किया| इस दौरान पीएम ने कहा कि उन्हें इस बात का मलाल है कि उन्होंने विश्व की सबसे प्राचीनतम भाषा तमिल नहीं सीखी| उन्होंने कहा,''मेरी एक कमी ये रही कि मैं दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा – तमिल सीखने के लिए बहुत प्रयास नहीं कर पाया, मैं तमिल नहीं सीख पाया|
पीएम ने कहा कि,''कुछ दिन पहले हैदराबाद की अपर्णा रेड्डी जी ने मुझसे ऐसा ही एक सवाल पूछा | उन्होंने कहा कि – आप इतने साल से पी.एम. हैं, इतने साल सी.एम. रहे, क्या आपको कभी लगता है कि कुछ कमी रह गई | अपर्णा जी का सवाल बहुत सहज है लेकिन उतना ही मुश्किल भी|
पीएम ने कहा कि,''मैंने इस सवाल पर विचार किया और खुद से कहा मेरी एक कमी ये रही कि मैं दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा – तमिल सीखने के लिए बहुत प्रयास नहीं कर पाया, मैं तमिल नहीं सीख पाया| यह एक ऐसी सुंदर भाषा है, जो दुनिया भर में लोकप्रिय है | बहुत से लोगों ने मुझे तमिल literature की quality और इसमें लिखी गई कविताओं की गहराई के बारे में बहुत कुछ बताया है : PM
उन्होंने कहा,''कभी-कभी बहुत छोटा और साधारण सा सवाल भी मन को झकझोर जाता है | ये सवाल लंबे नहीं होते हैं, बहुत simple होते हैं, फिर भी वे हमें सोचने पर मजबूर कर देते हैं|
मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि,साथियो, पानी को लेकर हमें इसी तरह अपनी सामूहिक जिम्मेदारियों को समझना होगा। इसी सोच के साथ अब से कुछ दिन बाद जल शक्ति मंत्रालय द्वारा भी जल शक्ति अभियान– ‘Catch the Rain’ भी शुरू किया जा रहा है|आज National Science Day भी है।आज का दिन भारत के महान वैज्ञानिक, डॉक्टर सी.वी. रमन जी द्वारा की गई ‘Raman Effect’ खोज को समर्पित है। मैं जरुर चाहूँगा कि हमारे युवा, भारत के वैज्ञानिक - इतिहास को, हमारे वैज्ञानिकों को जाने, समझें और खूब पढ़ें|
उन्होंने कहा,''आत्मनिर्भर भारत अभियान’ में साइंस की शक्ति का बहुत बड़ा योगदान है। हमें साइंस को Lab to Land के मंत्र के साथ आगे बढ़ाना होगा| |जब देश का हर नागरिक अपने जीवन में विज्ञान का विस्तार करेगा, हर क्षेत्र में करेगा, तो प्रगति के रास्ते भी खुलेंगे और देश आत्मनिर्भर भी बनेगा और मुझे विश्वास है, ये देश का हर नागरिक कर सकता है|
उन्होंने कहा,''जब दर्जनों देशों तक मेड इन इंडिया कोरोना वैक्सीन पहुँचते हुए देखते हैं, तो हमारा माथा और ऊंचा हो जाता है। जब प्रत्येक देशवासी गर्व करता है, प्रत्येक देशवासी जुड़ता है, तो आत्मनिर्भर भारत, सिर्फ एक आर्थिक अभियान न रहकर एक नेशनल स्पिरिट बन जाता है|उन्होंने कहा,'' आपको भी ये जानकार खुशी होगी कि इस बार जल-पक्षियों की संख्या, पिछले वर्ष की तुलना में करीब 175 प्रतिशत ज्यादा आई है। इस सेंन्सस के दौरान काजीरंगा नेशनल पार्क में पक्षियों की कुल 112 स्पीशीज को देखा गया है
प्रधानमंत्री ने हैदराबाद के चिंतला वेंकट रेड्डी जी का जिक्र किया , जिन्होंने, गेहूं , चावल की ऐसी प्रजातियों को विकसित की जो खासतौर पर ‘विटामिन-डी’ से युक्त हैं। इसी महीने उन्हें World Intellectual Property Organization, Geneva से पेटेंट भी मिली है।
प्रधानमंत्री ने MannKiBaat में कहा कि एग्रीकल्चर वेस्ट से वेल्थ क्रियेट करने के भी कई प्रयोग देशभर में सफलतापूर्वक चल रहे हैं- जैसे, मदुरै के मुरुगेसन जी ने केले के वेस्ट से रस्सी बनाने की एक मशीन बनाई है। इस इनोवेशन से पर्यावरण के समाधान के साथ अतिरिक्त आय होगा