नई दिल्ली: भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है। कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 85% (प्रति दिन 5 मिलियन बैरल) आयात करना पड़ता है। अधिकांश आयात पश्चिम एशिया (इराक 23%, सऊदी अरब 18%, संयुक्त अरब अमीरात 11%) से होते हैं| एक सूत्र ने यह बात कही है|
वहीँ,भारत की रिफाइनरी कंपनियों ने रूस से रियायती दर पर तेल खरीदने के प्रयास तेज कर दिए है। मिली जानकारी के मुताबिक, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड ने रूस से 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है। इससे पहले इंडियन आयल कारपोरेशन ने भी रूसी कच्चा तेल खरीदा था।
सूत्रों के मुताबिक, इंडियन आयल कारपोरेशन के बाद हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड ने रूसी क्रूड ऑयल खरीदने के लिए यूरोपीय व्यापारी विटोल को माध्यम बनाया है।
वहीं, मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड ने भी 10 लाख बैरल कच्चे तेल के लिए एक निविदा जारी की है। दरअसल, यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद कई पश्चिमी देशों ने रूस पर तमाम तरह के प्रतिबंध लगा दिए है। इन प्रतिबंधों के चलते कई देशों ने रूस से तेल आयात करने को लेकर दूरी बना ली है। इन सब कारणों के चलते रूस के कच्चे तेल बाजार में भारी छूट मिलने लगी है। इस छूट के कारण भारत की रिफाइनरी कंपनियां इस मौके का फायदा उठाने के मूड में है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस छूट का फायदा उठाने के लिए भारतीय रिफाइनरी कंपनियां रियायती दर पर तेल खरीद के लिए टेंडर जारी कर रही हैं। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, देश की शीर्ष ऑयल कंपनी इंडियन आयल कार्पोरेशन ने पिछले हफ्ते के आखिर में यूरोपीय व्यापारी विटोल के माध्यम से 30 लाख बैरल यूराल कच्चा तेल खरीदा था, जिसकी मई में डिलीवरी होनी है। इसके साथ ही हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड ने इस सप्ताह 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है। इसकी भी मई में डिलीवरी होनी है।