सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कांवड़ यात्रा को अनुमति देने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से सोमवार को अपने फैसले से कोर्ट को अवगत कराने को कहा, नहीं तो कोर्ट आदेश जारी कर देगा।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि टैंकर चिन्हित/निर्धारित स्थानों पर उपलब्ध हों ताकि आस-पास के भक्त 'गंगा जल' को इकट्ठा कर सकें और अपने नजदीकी शिव मंदिरों में 'अभिषेक' कर सकें। इस दौरान राज्य सरकारों को सुनिश्चित करना चाहिए कि कोरोना नियमों का पालन किया जाए।
केंद्र ने SC में हलफनामा दायर किया कि COVID19 के मद्देनज़र राज्य सरकारों को हरिद्वार से 'गंगा जल' लाने के लिए कांवड़ियों की आवाजाही की अनुमति नहीं देनी चाहिए। हालांकि धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों को टैंकरों के माध्यम से 'गंगा जल' उपलब्ध कराने चाहिए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने SC को बताया कि उसने उपयुक्त COVID-19 प्रतिबंधों के साथ "प्रतीकात्मक" कांवर यात्रा आयोजित करने का निर्णय लिया है| हालांकि सुप्रीम कोर्ट इससे सहमत नहीं दिखा। सुप्रीम कोर्ट ने कोविड के कारण राज्य में 'प्रतीकात्मक' कांवर यात्रा भी नहीं आयोजित करने पर उत्तर प्रदेश सरकार से 19 जुलाई तक जवाब मांगा|SC का कहना है कि जीवन का अधिकार सर्वोपरि है और सभी तरह की भावनाएं संविधान के अनुच्छेद 21 के अधीन हैं|
जस्टिस रोहिंगटन एफ नारिमन की पीठ ने कहा कि महामारी देश के सभी नागरिकों को प्रभावित करती है, शारीरिक यात्रा की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रथम दृष्टया हमारा विचार है कि यह प्रत्येक नागरिक से संबंधित मामला है और धार्मिक सहित अन्य सभी भावनाएं नागरिकों के जीवन के अधिकार के अधीन हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को सोमवार तक अपना विचार रखने का समय दिया है।